Krishna Agribusiness Development Pvt Ltd

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17/07/2018

नारायणअस्त्र" आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है.दोस्तों नमस्कार,1) नारायणअस्त्र की डिमांड कई सालों से आ रही थी, इसका अ...
09/07/2018

नारायणअस्त्र"
आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है.

दोस्तों नमस्कार,
1) नारायणअस्त्र की डिमांड कई सालों से आ रही थी, इसका अनुसंधान वर्ष 2001 से चल रहा था, 2017 में जैसे ही अच्छे परिणाम मिलने लगे, हमने अलग-अलग फसलों पर इसके रिझल्ट लेना सुरु किया, फिल्ड में भी आप लोगों के पास भेजा, कंपनी को सभी रिझल्ट पॉझिटिव मिले, आपकी तरफ से भी पॉझिटिव रिझल्ट मिले.
2) प्रॉडक्ट नया है, परन्तु आप में से बहोत से प्रतिनिधियों ने रिझल्ट देखा है, इसलिए लांचिग की आर्डर ज्यादा रहेगी, इसका ध्यान रखते हुए हमने स्टॉक तैयार रखा था, सोमवार को जब आर्डर आना प्रारम्भ हुआ, इतिहास के सभी रेकार्ड ध्वस्त हो गए, सिर्फ दो दिन में इतनी आर्डर आई की, हमें डिस्पेच के लिए समय मांगना पड़ा.
3) कंपनी का नियम है, आज की आर्डर का माल कल डिस्पेच होना ही चाहिए, आज तक ऐसा ही चलता रहा, हम सभी प्रॉडक्ट का 2 महीने का स्टॉक रखते हैं, कभी समस्या नहीं आई.
4) मल्टीप्लायर की निर्माण इकाई सुबह 08 बजे से रात 10 बजे तक कार्यरत रहती है, नारायणअस्त्र की निर्माण इकाई सुबह 08 बजे से शाम 06 बजे तक कार्यरत थी, जैसे ही नारायणअस्त्र के आर्डर की बाढ़ आई, निर्माण इकाई का समय रात 10 बजे तक बढ़ाया.
5) प्राप्त आर्डर के सामने उत्पादन की स्तिथि कुछ इस तरह बयां की जा सकती है, जैसे "ऊंट के मुंह में जीरा", तुरंत डायरेक्टर बोर्ड की मीटिंग में फैसला लिया गया की, मशीनों की संख्या बढ़ाई जाय और निर्माण इकाई का कार्य 03 शिफ्ट में सुरु किया जाय, मतलब 24 घंटे.
6) दोस्तों कंपनी की पॉलिसी के अनुसार क्वालिटी कंट्रोल के लिए, निर्माण इकाई में स्वयं डायरेक्टर पुरे समय रहते हैं, इसलिए तुरंत 03 डायरेक्टर सुजीत सर,शेखर सर और संदीप सर को नारायणअस्त्र की निर्माण इकाई की जवाबदारी सौंपी गई, इस प्रकार 24 घंटे उत्पादन सुरु किया.
7) मशीन बनाने में महीनों का समय लगना था, मशीन बनानेवाली कंपनी को भी ज्यादा स्टॉफ के साथ 24 घंटे कार्य करने के लिए तैयार किया, आज शाम 04 बजे सभी मशीन कंपनी में पहुँच जाएंगी, और फिर आज से तेज गति का कार्य प्रारम्भ होगा.
8) हम नारायणअस्त्र की किसान भाई की आवश्यकता और किसान भाइयों तक उत्पादन पहुंचाने की आपकी क्षमता को पहचान गए हैं, हमने स्वयं को तैयार कर लिया है, आगे से ऐसी गलती नहीं होगी, अब हमने उत्पादन की क्षमता में कई गुना वृद्धि कर ली है, देखते हैं आगे-आगे होता है क्या.......
9) साथ में नारायणअस्त्र की उत्पादन इकाई की जवाबदारी जिन मजबूत कन्धों पर डाली गई है, उन सभी से आपका परिचय करा देना भी जरुरी है, इसलिए फोटो पोस्ट किया है, इस फोटो में आप देख सकते हैं, सबसे आगेवाली लाईन में राइट से कंपनी डायरेक्टर सुजीत सर,शेखर सर और संदीप सर तथा उनके पीछे की दो लाईन में मिलिंद पाटील सर, रवि पाटील सर, समाधान पाटील सर, भटू पाटील सर, कल्पेश जाधव सर, प्रसाद बागुल सर, सागर पाटील सर, हरिओम पाठक सर तथा शिवाजी पाटील सर.

NARAYANASTRA - Keednashak Ka Bahubali
06/07/2018

NARAYANASTRA - Keednashak Ka Bahubali

Happy New Year 2018
31/12/2017

Happy New Year 2018

03/10/2017

Because of you...............,
हाँ सिर्फ़ आपकी वजह से,
मतलब आप सब,
भारत भर में कार्यरत,
कम्पनी प्रतिनिधि,
आज के आनंदोत्सव के हक़दार हैं,
सभी को सादर नमन.

1. आपके कठिन परिश्रम ने,
जो सबसे कठिन कार्य था उसे आसान बना दिया, आर्गनिक खेती के नाम से किसान भाई दूर भागता था, क्योंकि जिसने भी आर्गनिक खेती की, घर बेचकर तीर्थ करने जैसा अनुभव मिला, उत्पादन इतना घट गया की ख़र्चा भी निकलना मुश्किल हो गया.
2. आप सभी ने किसान भाई को विश्वास दिलाया उसने मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया, आज परिणाम सभी के सामने है, जिन्होंने इस्तेमाल किया, बढ़ा हुआ उत्पादन मिला, रासायनिक खेती के मुक़ाबले ख़र्च में कमी आई, रासायनिक दवाओं पर होनेवाले ख़र्च में कमी आई.
3. जिन्होंने मल्टीप्लायर का इस्तेमाल किया, उनमें से जो क़र्ज़बाज़ारी थे, क़र्ज़ मुक्त हुए, किसी ने नया घर बनाया, किसी ने नई गाड़ी ख़रीदी.
4. आपने नया समीकरण बनाया "आर्गनिक खेती मतलब मल्टीप्लायर खेती" जिस आर्गनिक के नाम से किसान भाई दूर भागता था, आज उसे अपनाने को आतुर है.
5. आपकी मेहनत और किसान भाई को मिल रहे तुरंत फ़ायदे के कारण आज अल्प समय में कम्पनी का कार्य २२ राज्यों तक फैल चुका है.
6. भारत में कुल ६५० ज़िले हैं, उनमें से ३७० से ज़्यादा जिलों के किसान भाई मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करके, खेती को फ़ायदे की खेती बना रहे हैं.
7. अल्प समय में ८०,००० से ज़्यादा किसान भाइयों ने मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करके खेती को आर्गनिक बनाने की दिशा में क़दम बढ़ा दिया है, काम बहोत बड़ा है , ६० करोड़ किसान भाइयों तक पहुँचना है, सुरूवात की स्पीड बता रही है की, आगे का मार्ग आसान है, अब गाँव-गाँव में चर्चा हो रही है मल्टीप्लायर की, कब आपके किसान भाइयों की संख्या ६० करोड़ पहुँच जाएगी, पता भी नहीं चलेगा.
8. कम्पनी ने मल्टीप्लायर लोगों तक पहुँचाने की सुव्यवस्थित और अत्यंत कार्यक्षम व्यवस्था बनाई है, अभी तक ३००० लोकेशन पर डिलीवरी दी जा चुकी है.
9. भारत भर में ४७ सेल पाईंट कार्यरत हैं, जहाँ आवश्यकतानुसार मल्टीप्लायर का स्टॉक रखा जाता है, इनकी संख्या आनेवाले वर्ष में २१०० करने का निश्चय किया गया है.
10. तक़रीबन सभी राज्यों में कम्पनी के ब्रांच आफ़िस है, अभी इनकी संख्या २६ है.
11. कम्पनी के प्रतिनिधियों को मल्टीप्लायर के साथ आर्गनिक खेती का सम्पूर्ण ज्ञान अवगत कराने के लिए, फ़ास्ट ट्रेक ट्रेनिंग का प्रावधान किया गया है, अभी तक कम्पनी मुख्यालय में ९०० से ज़्यादा ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा चुके हैं.
12. कम्पनी सोशल मल्टीमीडिया का समुचित इस्तेमाल कर रही है, उत्पादन की जानकारी, इस्तेमाल का तरीक़ा तथा इस्तेमाल के परिणाम सोशल मीडिया पर डाले जाते हैं, कम से कम १०० लोग हर दिन आकर्षित होते हैं, यह सब जानकारी कम्पनी के प्रतिनिधियों द्वारा शेअर की जाती है, किसान भाइयों से सम्बंधित प्रत्येक ग्रुप में मल्टीप्लायर की जानकारी पढ़ने, सुनने तथा देखने को मिल रही है.
13. कम्पनी के कॉल सेंटर के माध्यम से हर दिन ३५० से ज़्यादा लोगों से सम्पर्क किया जा रहा है, यह संख्या बहोत कम है, इसे अगले दो सालों में ५००० तक बढ़ाना है, इसके लिए अत्याधुनिक कॉल सेंटर भवन का काम प्रस्तावित है.
14. आपकी कम्पनी १०० प्रतिसत कस्टमर सेटिसफ़ेक्शन प्रणाली के अंतर्गत काम करती है, किसी भी शिकायत को रजिस्टर में लिखा जाता है, उस शिकायत का ४८ घंटे में निदान किया जाता है, कुछ शिकायतें सिस्टम से सम्बंधित होती हैं, उनके संदर्भ में सिस्टम में बदलाव किया जाता है, परिणामस्वरूप उस प्रकार की शिकायत रिपीट नहीं होती, कुछ शिकायतें तो शिकायत के साथ ही समाप्त की जाती हैं, मतलब ज़्यादा से ज़्यादा १० मिनिट में, पिछले ३ वर्षों में ५०० से ज़्यादा शिकायतों का निपटान किया जा चुका है, निपटान के लिए पेंडिंग शिकायतों की संख्या शून्य है.
15. कम्पनी का स्टाफ़ आवश्यकता से अधिक तेज़ी से कार्य करता है, प्रत्येक व्यक्ति के साथ पेश आने का तरीक़ा व सलीक़ा क़ाबिले तारीफ़ है, कम्पनी का स्टाफ़ हमेशा ज़माने से दो क़दम आगे रहता है, कम्पनी स्टाफ़ की प्रत्येक १५ दिन में ट्रेनिंग होती है, दुनिया में आए नए बदलाव से उन्हें अवगत कराया जाता है, नए बदल को आत्मसात करने योग्य बनाया जाता है, पिछले ३ वर्षों में कम्पनी के स्टाफ़ की संख्या में ६०० प्रतिसत बढ़त हुई है,
16. दोस्तों, यह सब आपके कारण, आपके द्वारा किए गए कठोर परिश्रम के कारण सम्भव हो सका है, कम्पनी आज चौथे वर्ष में प्रवेश की शुभ घड़ी पर आपको आश्वस्त करती है की, आप जब भी हमें याद करेंगे, सामने पाएँगे.

दोस्तों,आपकी उपस्तिथि में "कृष्णा स्प्रे प्लस" का दिनांक १९ अगस्त को लांचिंग कार्यक्रम संपन्न हुआ, उस क्षण के फोटो आपके ...
02/09/2017

दोस्तों,
आपकी उपस्तिथि में "कृष्णा स्प्रे प्लस" का दिनांक १९ अगस्त को लांचिंग कार्यक्रम संपन्न हुआ, उस क्षण के फोटो आपके लिए............

सभी प्रकार के किड और रोग फसल के पत्तों के पीछे होते हैं, और दवाइयों का छिड़काव पत्तों के ऊपर के भाग पर होता है, इसलिए थोड़े से किड मरते हैं बाकी जिन्दा रह जाते हैं, आपको बार-बार छिड़काव करना पड़ता है, समय और पैसा दोनों का नुकसान होता है.

किसान भाई "कृष्णा स्प्रे प्लस" की मदत से, आसानी से किड और रोगों पर कंट्रोल पा सकेंगे, क्योंकि जब भी छिड़काव में "कृष्णा स्प्रे प्लस" मिलाया जायेगा दवाई का असर पत्तों में अंदर तक हो जायेगा, पत्ते छिड़काव के बाद पीछे से गीले दिखने लगेंगे, जैसे ही कीड़े फसल के पत्तों से रस पीने की कोशिश करेंगे मर जायेंगे, परिणामस्वरूप कम छिड़काव में पूरा कंट्रोल मिलेगा.

यह उत्पादन इतना ज्यादा कॉन्सेंट्रेट है की १० मिली की मदत से २०० लीटर पानी बनेगा.

"कृष्णा स्प्रे प्लस" के इस्तेमाल से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी इसके पूर्व फेसबुक तथा टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट हो चुकी है.

दोस्तों,आपकी उपस्तिथि में "कृष्णा ऑल क्लियर" का दिनांक १९ अगस्त को लांचिंग कार्यक्रम संपन्न हुआ, उस क्षण के फोटो आपके लि...
02/09/2017

दोस्तों,
आपकी उपस्तिथि में "कृष्णा ऑल क्लियर" का दिनांक १९ अगस्त को लांचिंग कार्यक्रम संपन्न हुआ, उस क्षण के फोटो आपके लिए............

भयानक किड और रोगों से परेशान किसान भाइयों को इस समस्या से लड़ने की ताकत देने के लिए, तथा गन्ने की और चावल की फसल में, बढ़ा हुआ उत्पादन लेने के लिए, बहोत जरुरी हो जाने के कारण, इस उत्पादन को आप तक पहुंचाने का कारण निर्माण हुआ है.

किसान भाई "कृष्णा ऑल क्लियर" की मदत से, आसानी से किड और रोगों पर कंट्रोल पा सकेंगे, परिणामस्वरूप बढ़ा हुआ उत्पादन ले सकेंगे.

यह उत्पादन इतना ज्यादा कॉन्सेंट्रेट है की शायद ही कोई दूसरा उत्पाद इसका मुकाबला कर सके.

कॉन्सेंट्रेट होने से कम लगता है, कम इतना की आप यकीन नहीं कर पाएंगे, मतलब पैसों की बचत ही बचत.

"कृष्णा ऑल क्लियर" के इस्तेमाल से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी इसके पूर्व फेसबुक तथा टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट हो चुकी है.

दोस्तों,सत्कार उनका जो कभी प्रकाश में नहीं आते। मल्टीप्लायर कंपनी के प्रारम्भ से लेकर आज तक, लाखों लाख किसान भाइयों ने म...
24/08/2017

दोस्तों,
सत्कार उनका
जो कभी प्रकाश में नहीं आते।

मल्टीप्लायर कंपनी के प्रारम्भ से लेकर आज तक, लाखों लाख किसान भाइयों ने मल्टीप्लायर को पसंद किया है, आपको धन्यवाद दिया है, मल्टीप्लायर एकमेव ऐसा बिजनेस है, जिसमें ग्राहक सिर्फ पैसा नही, धन्यवाद भी देता है.

मल्टीप्लायर जिन लोगों के अथक परिश्रम से आप तक पहुँचता है, उनका कार्य सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, उनका श्रम अनमोल है, परन्तु वो कभी प्रकश में नहीं आते.

उनके कार्यं के विषय में कहा जाय तो, मल्टीप्लायर अगर शरीर है तो ये शरीर में उपलब्ध खून हैं, जिस प्रकार खून का संचार रुकते ही जीवित व्यक्ति मृत हो जाता है, उसी प्रकार इनके कार्य में शिथिलता, मतलब आप तक मल्टीप्लायर समय पर पहुँचने में अनंत अडचणी.

इसलिए कंपनी ने नए उत्पादन की लांचिंग के साथ कंपनी के सभी अधिकारी तथा कर्मचारी जिनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, सबका सत्कार किया था, वास्तव में यह कल्पना हमारे दिमाग की उपज नही है, आप लोगों के सुझाव को हमने सिर्फ अमली जमा पहनाया है.

दोस्तों,देरी से पोस्टिंग के लिए माफ़ी चाहता हूँ। आप सभी को इंतज़ार था, उन लमहों को अपनी नयन मनोहर आखों से निहारने का। जो...
24/08/2017

दोस्तों,
देरी से पोस्टिंग के लिए माफ़ी चाहता हूँ।
आप सभी को इंतज़ार था, उन लमहों को अपनी नयन मनोहर आखों से निहारने का।
जो घटना कल इतिहास बनानेवाली है, उसके दूरम्य पलों को अपनी आखों में संजोने का।
तो हाज़िर हैं आपकी सेवा में..........

08/04/2017

भाग --६

दोस्तों नमस्कार,
अगर धुंवा दिखता है, तब आप निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि, कहीं तो आग लगी है, परन्तु मल्टीप्लायर के विषय में जिन्होंने उलूल-जुलूल बातें कहीं थी, वो सुपारी बहाद्दर बिना आग लगे धुंवा दिखाने की कोशिश करते हैं, इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, उनका काम बिल्ली के जैसा है, बिल्ली जब किसी घर के किचन में घुसकर दूध पीती है, अपनी आखें बंद कर लेती है, उसे कुछ नहीं दिखता, तब उसका समज बन जाता है कि, मुझे दूध पीते हुए कोई नहीं देख रहा, जबकि हकीकत कुछ और होती है, इन्होने ऐसा प्रचारित किया कि, मल्टीप्लायर में केमिकल है, और यह भी कहा कि, अगर कोई किसान भाई ज्यादा पूछता है, तब मल्टीप्लायर वाले गलियां बकने लगते हैं, जानिये सच्चाई क्या है.

दोस्तों, मल्टीप्लायर किसी गली में नहीं बिकता, किसी एक शहर या एक राज्य में नहीं बिकता, मल्टीप्लायर भारत के २२ राज्यों में बिकता है, अनेक राज्यों में कंपनी ने आवश्यक लायसेंस लिए हैं, सरकार के साथ सभी प्रकार की जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त किये हैं.

मल्टीप्लायर में केमिकल है, इस आरोप में दम नहीं है, यह सिद्ध होता है, मल्टीप्लायर को मिले जागतिक सर्टिफिकेशन से, मल्टीप्लायर सर्टिफाइड आर्गनिक इनपुट है, इसका सर्टिफिकेशन किया है, बायोसर्ट इंटरनेशनल ने, भारत में इस अकेली संस्था को आर्गनिक सर्टिफिकेशन देने के लिए प्राधिकृत किया है, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ आर्गेनिक एग्रीकल्चर मूवमेंट ( ifoam )मुख्यालय जर्मनी ने.

ifoam १९७२ से आर्गनिक पर काम कर रही है, दुनिया के १०० देश इसके मेंबर हैं, इनके सहयोगियों कि संख्या ८०० है, भारत सरकार का कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग इस संस्था का मेंबर है, ifoam प्रत्येक ३ साल में आर्गनिक वर्ल्ड कांग्रेस का आयोजन करती है, इस बार भारत सरकार इसकी प्रायोजक है, दिनांक ९ नोव्हेम्बर से ११ नोव्हेम्बर २०१७ तक दिल्ली में ifoam का १९ वा आर्गनिक वर्ल्ड कांग्रेस होनेवाला है.

ऐसी जागतिक कीर्ति की संस्था द्वारा, प्राधिकृत की गई संस्था ने, कंपनी का इंस्पेक्शन और आडिट करने के बाद, तथा सब कुछ ifoam के बनाये नियमों के मुताबिक है, इसकी जाँच-पड़ताल करने के बाद, मल्टीप्लायर को सर्टिफाइड किया है.

और एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, एक बार आपको सर्टिफाइड कर दिया कि आप हमेशा के लिए सर्टिफाइड हो गए ऐसा नहीं है, आपका हर साल इंस्पेक्शन और आडिट होता है, पूरी जाँच पड़ताल के बाद ही आपको सर्टिफाइड किया जाता है.

और दूसरी बात जिसमें कहा गया है कि, किसी ने ज्यादा जानकारी मांगी तो उसके साथ गाली गलोच करते हैं, इसके विषय में में आपको कुछ बातें बताना चाहूंगा.

हमारी कंपनी बहोत सालों से बिजनेस में है ऐसा नहीं है, परन्तु कंपनी एक सिस्टिम के तहत काम करती है, ISA और UNSCC ने मिलकर १९४६ में ISO का गठन किया था, गठन के समय २५ देश इसके सदस्य थे, आज १६२ देश इसके सदस्य हैं, इस संस्था के एक सीनियर आडिटर हमारी कंपनी को सिस्टम के लिए मार्गदर्शन करते हैं.

हमारी कंपनी का पूरा कामकाज ऑनलाइन है, कंपनी के सभी अधिकारी उन्हें सोंपी गई जवाबदारी को सिस्टम में दिए गए क्रम से आगे बढ़ाते हैं, प्रत्येक कार्य के लिए एक प्रक्रिया चिन्हित की गई है, उसके अनुसार ही पूरा काम होता है.

प्रत्येक दूसरे और चौथे शनिवार को शाम ३ बजे से स्टॉफ के सभी सदस्यों के साथ चर्चा होती है, पिछले १५ दिन के कार्यकाल में घटित सभी घटनाओं पर चिंतन किया जाता है, प्रोसीजर बुक में नए नियमों का समावेश किया जाता है, लास्ट में आवश्यक विषयों का ट्रेनिंग सेशन होता है.

कंपनी में सभी काम समय सीमा में पूर्ण किये जाते हैं, कंपनी का स्टॉफ आता भी राइट टाइम है, और कार्य समाप्ति का समय भी राइट टाइम है, आनेवाले हर फोन कॉल को एक तय प्रोसीजर के तहत अटेंड किया जाता है, कंपनी समय-समय पर उसकी ट्रेनिंग देती है,

शिकायतों को रजिस्टर्ड करके २४ घंटे में उसका निराकरण किया जाता है, प्रत्येक सप्ताह शिकायतों का आडिट होता है, ढूंढने की कोशिश की जाती है कि, किसी कि शिकायत अनसुलझी तो नहीं रह गई.

और जहाँ तक जानकारी देने का सवाल है, ज्यादातर फोन लेडीज अफसर द्वारा अटेंड किये जाते हैं.

कंपनी सिर्फ आर्गनिक के लिए कार्य करती है, इसलिए पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा गया है, कंपनी का मुख्यालय शहर से लगकर २६ एकड़ के क्षेत्र में बनाया गया है, कंपनी जितनी बिजली इस्तेमाल करती है, उसका निर्माण भी कंपनी में ही होगा.

दोस्तों, कुछ और बातें है जिनकी चर्चा होना बाकी है................
अगर समय मिला तो कल, नहीं तो १५ तारीख तक में बिझी हूँ..........

06/04/2017

भाग ---५

दोस्तों नमस्कार,
मल्टीप्लायर के विषय में उलूल-जुलूल बातें फैलानेवाले सुपारी बहाद्दर कहते हैं, खेती में बाहर से कुछ भी खरीदकर नहीं डालना है, और विरोध करते हैं सिर्फ मल्टीप्लायर का, कैसा विरोधाभास है, बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ दिन रात किसान भाई को लाखों करोड़ रुपये कीमत का उत्पादन बेचकर मालामाल हो रही हैं, उनके किसी भी उत्पादन का विरोध नहीं, हमारे पूर्वज जिस प्राकृतिक मिटटी पर खेती करते थे क्या वैसी मिटटी हमारे खेतों में आज है, अगर नहीं है तब क्या पूर्वजों की खेती प्रणाली हमारे लिए फायदे की सिद्ध होगी, जानने के लिए पढ़ें.

जबसे रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिटटी ख़राब होनेवाली बात का पता चला है, तब से खेती करने की अलग-अलग प्रणालियां सामने आ रही है, बहोत बड़ी संख्या में किसान भाई आर्गनिक की तरफ आकर्षित हुए, आर्गनिक खेती की, परन्तु, ना तो उत्पादन को साइज मिला, ना टनेज मिला, साल भर घर चलाना मुश्किल हो गया, कुछ लोगों ने इतनी ज्यादा प्रोसेस बताई की उसे करने में मानवीय श्रम का खर्च ज्यादा हो गया, खेती का सारा बजेट बिघड गया, जितने सलाहकार उतने मत सामने आने से किसान भाई दुविधा में फंस गया क्या करें क्या नहीं |

कुछ लोगों का कहना है की, खेती में बाहर से कुछ भी नहीं डालना है, क्योंकि हमारे पूर्वज कुछ भी नहीं डालते थे, ये भी बात सही दिखती है, जब हमारे पूर्वज बाहर से कुछ नहीं डालते थे तो हम भी नहीं डालेंगे, यहाँ एक फरक आपको समझना पड़ेगा की, आपके पूर्वजों की मिटटी पूरी तरह से प्राकृतिक थी, फसलों को भोजन प्रदान करनेवाली प्रणाली वहां कार्यरत थी, एक ग्राम मिटटी में कम से कम १० करोड़ सूक्ष्म जीवाणु कार्यरत थे, एक एकर क्षेत्र में कम से कम ४०,००० केंचुए ( गांडूल,अड़सिया ) कार्यरत थे, ४०० किलो केंचुए का खाद एक एकर खेत में रोज तैयार होता था |

आज हमारी एक ग्राम मिटटी में जीवाणु संख्या १ करोड़ से कम रह गयी है, एक भी केंचुआ देखने को नहीं मिलता, केंचुए मिटटी में २ से ३ मीटर नीचे जाकर समाधी ले चुके है, हमारी मिटटी हार्ड हो गयी है, मिटटी में आक्सीजन का प्रमाण बहोत कम हो गया है, जीवाणुओं की संख्या में भयानक कमी आ जाने के कारण मिटटी में उपलब्ध, अल्प प्रमाण में लगनेवाले घटक उपलब्ध फाम में बदलनेवाले जीवाणुओं की कमतरता के कारण मिटटी से घटक नहीं मिल पा रहे है, ऐसी विषम परिस्तिथि में भी क्या आप पूर्वजों का ही अनुकरण करेंगे |

जिनका कहना है की, हाँ हम पूर्वजों का ही अनुकरण करेंगे, में उनसे पूछना चाहता हूँ की आपके पूर्वज बैलगाड़ी में सफर करते थे ५०० किलो मीटर दूर जाने के लिए उनको १० दिन लगते थे, तो क्या आप भी बैलगाड़ी में ही सफर करेंगे, विज्ञान ने प्रगति की कार, बस, रेलगाड़ी और हवाई जहाज बनाये क्या आप उस सुविधा का इस्तेमाल नहीं करते ? करते हो, आप में से जैन मुनि छोड़कर सभी लोग अत्याधुनिक विज्ञान की सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे है, खुद के लिए आधुनिक विज्ञान के फायदे इस्तेमाल करने में रस्सी खेंच चला रखी है, और खेती की बात आएगी तो कहते है की, हमारे पूर्वज कुछ नहीं डालते थे इसलिए में भी कुछ नहीं डालूँगा |

आपके पूर्वज एक दूसरे का समाचार जानने के लिए पत्र भेजते थे, आठ से दस दिन में पत्र इच्छित व्यक्ति को मिलता था, फिर वो जब उत्तर भेजता था तब आठ से दस दिन बाद आपको मिलता था, मतलब किसी परिचित के विषय में वो कैसे है, ये जानने के लिए हमें १५ से २० दिन लगते थे, अगर आपको पूर्वजों की कार्यशैली से इतना प्रेम है, तो जेब में मोबाईल लेकर क्यों घूम रहे हो, नहीं आप मोबाईल का इस्तेमाल बंद नहीं कर सकते यहाँ आपको आधुनिक विज्ञानं का सहारा चाहिए, परन्तु बात खेती की आएगी तो कहेंगे की, हम बाहर से कुछ नहीं डालते, क्योंकि हमारे पूर्वज बाहर से कुछ नहीं डालते थे, क्या पूर्वज कह कर गए थे की, आधुनिक विज्ञानं के सब फायदे लेना पर खेती में कुछ नहीं डालना |

हमारे पूर्वज जब खेती करते थे तब जनसँख्या बहोत कम थी, इसलिए खेती का क्षेत्र भी कम था, हर गाव में शेकडो एकर जमीन जंगल थी, प्रत्येक किसान भाई के पास कम से कम २०० तक गाय बैल होते थे, घर के छोटे बच्चे चराकर लाते थे, २०० जानवर का गोबर खाद खेतों में हमारे पूर्वज डाला करते थे, क्या आपके पास गोबर का खाद है, क्या आप २०० जानवर रख सकते है, उनको चराने के लिए जंगल आपके पास है, अब सोचो क्या आपके पूर्वज जैसी खेती करते थे वैसी आप कर रहे हो, पूर्वजों का अनुकरण करना है तो पूरा करों, आधा अधूरा सब कुछ नुकसान दायक होता है |

हमारा भी यही कहना है की, खेती के लिए किसी खाद या जहरीली दवा की जरुरत नहीं है, परन्तु प्राकृतिक मिटटी में ये संभव है, मिटटी को प्राकृतिक बनाने के लिए अगर हम आधुनिक विज्ञानं का सहारा लें तो इसमें बुराई क्या है, आधुनिक विज्ञानं की मदत से हमारी मिटटी ५ से ७ साल में पूरी तरह प्राकृतिक बन जाती है, हमारी १ ग्राम मिटटी में कम से कम १० लाख सूक्ष्म जीवाणु कार्यरत हो जाते है, एक एकर क्षेत्र में कम से कम ४०,००० हजार केंचुए कार्यरत हो जाते है, हर दिन ४०० किलो केंचुआ खाद मिलने लगता है, तब हमें बाहर से कुछ भी डालने की आवश्यकता नहीं रहती |

रासायनिक खादों से ख़राब हुई मिटटी को फिर से कार्यरत करनेवाला आधुनिक अनुसन्धान है "मल्टीप्लायर" इस मल्टीप्लायर की मदत से पहले दिन से रासायनिक खाद डालना बंद करने के बावजूद आपका उत्पादन ५० प्रतिसत तक या उससे ज्यादा बढ़कर आता है, ५ से ७ साल में आपकी १ ग्राम मिटटी में १० करोड़ से ज्यादा जीवाणु कार्यरत हो जाते है, १ एकर खेत में कम से कम ४०,००० केंचुए काम करने लगते है, हर दिन ४०० किलो से ज्यादा केंचुए का खाद मिलने लगता है, तब आपकी मिटटी पूरी तरह से प्राकृतिक बन जाती है, हमारे पूर्वज जिस मिटटी पर खेती करते थे वैसी बन जाती है, आपका उत्पादन किटक रोग मुक्त तथा बढ़कर मिलता है | मिटटी प्राकृतिक होने के बाद आपको मल्टीप्लायर भी डालने की कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए में इतना ही कहूँगा की आपको जो भी सिखाया जा रहा है क्या वह बरोबर है, इसका निर्णय आपको ही लेना है |

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