आदर्श गांव कनबा Adarsh Village Kanba

आदर्श गांव  कनबा Adarsh Village Kanba भारत गाँवों के देश है ।

23/10/2024
माता दुर्गा के तीसरे स्वरूप को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा की उपासना नवरात्रि के तीसरे दिन की जा...
05/10/2024

माता दुर्गा के तीसरे स्वरूप को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा की उपासना नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान होता है, जिससे उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। यह स्वरूप अत्यंत शांति, सौम्यता और शक्ति का प्रतीक है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस, निर्भीकता और सौम्यता प्रदान करती हैं।

मां चंद्रघंटा की स्तुति:
ध्यान: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहारूढाम् चंद्रघंटा यशस्विनीम्॥

मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। खंग, गदा, त्रिशूल, चापशर, पदम, कमण्डलु, माला, वराभीतकराम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्तकपोलां तुगम् कुचाम्। कमनीयां लावण्यां चारु त्रिवली नितम्बनीम्॥

मां चंद्रघंटा का आशीर्वाद:
मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं कि उनका जीवन शांति, सुख और समृद्धि से परिपूर्ण हो। जो भी भक्त निष्ठापूर्वक उनकी पूजा करते हैं, उन्हें हर प्रकार के भय, बाधा और संकट से मुक्ति मिलती है। मां की कृपा से साधक के चेहरे पर अद्भुत तेज और शरीर में अद्वितीय शक्ति का संचार होता है। उनके आशीर्वाद से भक्त को आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

मां चंद्रघंटा की आराधना से व्यक्ति के जीवन में सफलता, सौम्यता और समृद्धि का संचार होता है।

रत्नमंजरी एक अद्वितीय नर्तकी !!!कथा की शुरुआत होती है राजा भोज से, जो एक प्रसिद्ध और न्यायप्रिय राजा थे। उनकी बुद्धिमत्त...
03/08/2024

रत्नमंजरी एक अद्वितीय नर्तकी !!!

कथा की शुरुआत होती है राजा भोज से, जो एक प्रसिद्ध और न्यायप्रिय राजा थे। उनकी बुद्धिमत्ता और वीरता के कारण वे अपने राज्य में बहुत ही लोकप्रिय थे। एक दिन, राजा भोज अपने दरबार में बैठे थे, तभी एक सुंदर और आकर्षक युवती उनके दरबार में आई। उस युवती का नाम था रत्नमंजरी।

रत्नमंजरी एक अद्वितीय नर्तकी थी और अपनी नृत्य कला के लिए प्रसिद्ध थी। उसने राजा भोज के सामने अपने नृत्य का प्रदर्शन किया। राजा भोज उसकी कला और सौंदर्य से अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने रत्नमंजरी से पूछा कि वह किस उद्देश्य से उनके दरबार में आई है।

रत्नमंजरी ने बताया कि वह एक सामान्य परिवार से है और उसकी नृत्य कला को पहचान दिलाने के लिए वह राजा भोज के दरबार में आई है। राजा भोज ने उसकी प्रतिभा को सराहा और उसे अपने दरबार में नृत्यांगना के रूप में नियुक्त किया।

समय के साथ, रत्नमंजरी और राजा भोज के बीच गहरी मित्रता हो गई। रत्नमंजरी ने राजा भोज को अपनी बुद्धिमत्ता और चतुराई से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सलाह दी। उसकी सलाह के कारण राजा भोज ने कई युद्धों में जीत हासिल की और अपने राज्य को समृद्ध बनाया।

हालांकि, राजा भोज के दरबार में कुछ ईर्ष्यालु मंत्री थे जो रत्नमंजरी की बढ़ती हुई प्रतिष्ठा से असंतुष्ट थे। उन्होंने रत्नमंजरी को बदनाम करने की साजिश रची और राजा भोज के सामने उसे गलत साबित करने का प्रयास किया।

एक दिन, मंत्रियों ने राजा भोज को बताया कि रत्नमंजरी ने उनकी पीठ पीछे उनके खिलाफ साजिश की है। राजा भोज को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने रत्नमंजरी को एक मौका देने का निर्णय लिया ताकि वह खुद को निर्दोष साबित कर सके।

रत्नमंजरी ने अपनी चतुराई से मंत्रियों की साजिश को उजागर किया और अपने निर्दोषता को साबित किया। राजा भोज ने उन मंत्रियों को कड़ी सजा दी और रत्नमंजरी को अपनी सच्ची मित्र और विश्वासपात्र घोषित किया।

इस प्रकार, रत्नमंजरी की बुद्धिमत्ता और चतुराई ने उसे राजा भोज के दरबार में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया और उसकी कहानी आज भी भारतीय लोककथाओं में एक प्रेरणास्रोत के रूप में जीवित है।

राजा भोज का परिचय:

परमार वंशीय राजाओं ने मालवा के एक नगर धार को अपनी राजधानी बनाकर 8वीं शताब्दी से लेकर 14वीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक राज्य किया था। इस वंश के सबसे महान अधिपति महाराजा भोज थे, जिन्होंने धार में 1000 ईस्वी से 1055 ईस्वी तक शासन किया।

महाराजा भोज से संबंधित 1010 से 1055 ईस्वी तक के कई ताम्रपत्र, शिलालेख और मूर्तिलेख प्राप्त होते हैं, जो उनके शासनकाल के विभिन्न पहलुओं का विवरण देते हैं। भोज के साम्राज्य के अंतर्गत मालवा, कोंकण, खानदेश, भिलसा, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़, और गोदावरी घाटी का कुछ भाग शामिल था। उन्होंने उज्जैन की जगह अपनी नई राजधानी धार को बनाया।

राजा भोज को उनके कार्यों के कारण 'नवसाहसाक' अर्थात् 'नव विक्रमादित्य' भी कहा जाता था। महाराजा भोज इतिहास प्रसिद्ध मुंजराज के भतीजे और सिंधुराज के पुत्र थे। उनकी पत्नी का नाम लीलावती था। राजा भोज न केवल एक महान योद्धा थे, बल्कि वे एक विद्वान, लेखक, और संरक्षक भी थे। उनके कार्यक्षेत्र में साहित्य, विज्ञान, कला और स्थापत्य कला शामिल थे।

गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुर...
21/07/2024

गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दिव्य रहस्य: इतिहास, पौराणिक कथाएँ, और कलयुग में महत्त्वसोमनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहाससोमनाथ ज्योत...
18/07/2024

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दिव्य रहस्य: इतिहास, पौराणिक कथाएँ, और कलयुग में महत्त्व

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहास
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है और भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परम्पराओं में इसकी विशेष महत्ता है। यह गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। कहा जाता है कि यह मंदिर प्राचीन काल में चन्द्र देवता द्वारा निर्मित हुआ था। पौराणिक कथाओं और हिन्दू सनातन ग्रन्थों में इस मंदिर का विशेष उल्लेख मिलता है।

पौराणिक कथाएँ
चन्द्र देवता और सोमनाथ मंदिर
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चन्द्र देवता (सोम) को राजा दक्ष प्रजापति की पुत्रियों से विवाह करने का आशीर्वाद प्राप्त था। चन्द्र देवता ने दक्ष की 27 पुत्रियों से विवाह किया, लेकिन उनकी विशेष कृपा रोहिणी पर थी। इससे अन्य पत्नियाँ रुष्ट हो गईं और अपने पिता दक्ष से शिकायत की। दक्ष ने चन्द्र देवता को शाप दिया कि उनका तेज क्षीण हो जाएगा।

चन्द्र देवता ने शाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की। भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें शापमुक्त किया और उस स्थान पर एक ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। यही स्थान सोमनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

सौराष्ट्रे सोमनाथं
"सौराष्ट्रे सोमनाथं" का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है। इस पुराण में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की महत्ता का वर्णन किया गया है। कहा जाता है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा करने से भक्तों के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शाप मुक्ति की कथा
सोमनाथ मंदिर में चन्द्र देवता द्वारा भगवान शिव की आराधना का उल्लेख हमें यह सिखाता है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति से किसी भी प्रकार के शाप या कष्ट से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। यह कथा हमें यह भी बताती है कि भगवान शिव कितने कृपालु और दयालु हैं, जो अपने भक्तों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए सदा तत्पर रहते हैं।

कलयुग में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्त्व
कलयुग में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्त्व है। यह स्थल न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह भक्तों को मानसिक और भावनात्मक शांति भी प्रदान करता है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा से भक्तों को आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

आध्यात्मिक उन्नति: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा और दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। यह स्थल उन्हें जीवन के असली उद्देश्य को समझने और आत्मज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है।

मानसिक और भावनात्मक शांति: सोमनाथ मंदिर का दिव्य वातावरण भक्तों को मानसिक और भावनात्मक शांति प्रदान करता है। यहाँ की पवित्रता और शांति भक्तों के मन को शुद्ध और शांत करती है।

पापों का नाश: पुराणों के अनुसार, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह स्थल भक्तों को उनके अतीत के पापों से मुक्ति दिलाने में सक्षम है।

आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा से भक्तों को आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह उन्हें जीवन के कठिनाइयों का सामना करने और उन्हें दूर करने की शक्ति प्रदान करता है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहास, पौराणिक कथाएँ, और इसका महत्त्व हमें यह सिखाते हैं कि भगवान शिव की भक्ति और श्रद्धा से किसी भी प्रकार की कठिनाईयों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। यह स्थल हमें जीवन के असली उद्देश्य को समझने और आत्मज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है। कलयुग में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्त्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह स्थल हमें आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक और भावनात्मक शांति, पापों के नाश, और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है।

स्कूल चले  बाल गणेशा !
12/07/2024

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भगवान जगन्नाथ की पूजा पुरी शहर के प्रसिद्ध जगन्नाथ मन्दिर में की जाती है। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का ही एक रूप मान...
07/07/2024

भगवान जगन्नाथ की पूजा पुरी शहर के प्रसिद्ध जगन्नाथ मन्दिर में की जाती है। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है तथा इन्हें वैष्णव धर्म के अनुयायियों द्वारा भी पूजा जाता है
। जगन्नाथ का शाब्दिक अर्थ है "जग के नाथ", अर्थात ब्रह्माण्ड के स्वामी। जगन्नाथ मन्दिर पवित्र चार धामों में से एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।
चार धाम की यात्रा हिन्दु धर्म में अत्यन्त महत्वपूर्ण मानी जाती है, यही कारण है कि, प्रत्येक हिन्दु अपने जीवनकाल में चार धाम की यात्रा करना चाहता है।

भगवान जगन्नाथ की पूजा उनके भाई बलभद्र तथा उनकी बहन देवी सुभद्रा के साथ की जाती है।

World Environment Day 2024
05/06/2024

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कलाकार का पेंसिल आर्टसही कहा है किसी ने हुनर किसी की मोहताज़ नहीं होती !
31/05/2024

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सही कहा है किसी ने हुनर किसी की मोहताज़ नहीं होती !

ये किस का फूल है ! सही जवाब  कमेंट करिए !
31/05/2024

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सकारात्मक मानसिकता कैसे  विकसित करें:?सकारात्मक सोच की शक्ति पर विश्वास रखें। आपके विचार आपके कार्यों को प्रभावित करते ह...
26/05/2024

सकारात्मक मानसिकता कैसे विकसित करें:?

सकारात्मक सोच की शक्ति पर विश्वास रखें। आपके विचार आपके कार्यों को प्रभावित करते हैं और आपके कार्य आपकी वास्तविकता को आकार देते हैं। प्रत्येक दिन की शुरुआत कृतज्ञता और पुष्टि के साथ करें, अपने जीवन की अच्छाइयों और आगे की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करें। यह सकारात्मक ऊर्जा आपके जीवन में अधिक सकारात्मकता और भाग्य को आकर्षित करती है।

उदाहरण: अपने दिन की शुरुआत उन तीन चीजों की सूची बनाकर करें जिनके लिए आप आभारी हैं और उस दिन के लिए एक इरादा निर्धारित करें जो आप जिसे आकर्षित करना चाहते हैं उसके अनुरूप हो।

नए अवसरों को अपनाएं:
सौभाग्य अक्सर उन्हीं को मिलता है जो नए अनुभवों और चुनौतियों के प्रति खुले रहते हैं। अपने आराम क्षेत्र से बाहर निकलें और अपने रास्ते में आने वाले अवसरों का लाभ उठाएं। जितना अधिक आप अपने आप को विभिन्न परिस्थितियों में उजागर करेंगे, उतनी ही अधिक संभावनाएँ पैदा होंगी कि भाग्य आपका साथ देगा।

उदाहरण: कोई नया शौक अपनाएं, नेटवर्किंग कार्यक्रमों में भाग लें, या किसी ऐसे उद्देश्य के लिए स्वयंसेवक बनें जिसकी आपको परवाह है। ये क्रियाएं अप्रत्याशित अवसरों के द्वार खोल सकती हैं।

दयालुता और उदारता का अभ्यास करें:
दयालुता और उदारता के कार्य सकारात्मकता की लहर पैदा करते हैं, जो अक्सर अप्रत्याशित तरीकों से आपके पास लौटती है। दूसरों की मदद करने से न केवल उनके जीवन में सुधार होता है बल्कि आपके स्वयं के उद्देश्य और पूर्ति की भावना भी बढ़ती है, जो सौभाग्य को आकर्षित कर सकती है।

उदाहरण: दयालुता के यादृच्छिक कार्य करें, जैसे किसी की कॉफी के लिए भुगतान करना, किसी पड़ोसी की मदद करना, या बस किसी की सच्ची तारीफ करना। ये छोटे-छोटे कार्य आपके आस-पास सकारात्मक माहौल बनाने में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

, आप सौभाग्य को आकर्षित करने और अधिक सकारात्मक और पूर्ण जीवन बनाने की अपनी संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं।

इतनी गर्मी 45 डिग्री , कोई सिगनल नहीं तोड़ेगा ! जरा कुल्फी का मजा लिया जाय !बे हताशा " गर्मी " में पुलिस कर्मी ड्यूटी के ...
25/05/2024

इतनी गर्मी 45 डिग्री , कोई सिगनल नहीं तोड़ेगा ! जरा कुल्फी का मजा लिया जाय !
बे हताशा " गर्मी " में पुलिस कर्मी ड्यूटी के दौरान कुल्फी का मजा लेते हुए !

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