24/12/2025
पेसा कानून क्या है? इससे आदिवासियों को क्या फायदा।
पेसा कानून का पूरा नाम है
Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996
(पंचायतों का अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम, 1996)
यह कानून आदिवासी बहुल अनुसूचित क्षेत्रों के लिए बनाया गया है, ताकि वहाँ के लोगों को स्वशासन (Self-Governance) का अधिकार मिल सके।
पेसा कानून की जरूरत क्यों पड़ी?
संविधान की 73वीं संशोधन के बाद पंचायत व्यवस्था बनी, लेकिन
आदिवासी क्षेत्रों की परंपरागत ग्राम सभा व्यवस्था अलग थी
उनकी जमीन, जंगल और संस्कृति की रक्षा जरूरी थी
इसलिए पेसा कानून लाकर आदिवासी समाज को निर्णय लेने की ताकत दी गई।
झारखंड में पेसा कानून क्यों महत्वपूर्ण है?
झारखंड का बड़ा हिस्सा अनुसूचित क्षेत्र है
यहाँ आदिवासी समाज की आबादी अधिक है
जमीन, जंगल, खनन, ग्राम संसाधन से जुड़े विवाद आम हैं
पेसा कानून इन सभी मुद्दों पर ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार देता है।
पेसा कानून के मुख्य प्रावधान
1️⃣ ग्राम सभा सर्वोच्च संस्था
गाँव से जुड़े फैसले ग्राम सभा करेगी
पंचायत से भी ऊपर ग्राम सभा का अधिकार
2️⃣ जमीन की सुरक्षा
आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री पर नियंत्रण
गैर-आदिवासी को जमीन देने से पहले ग्राम सभा की अनुमति जरूरी
3️⃣ जल, जंगल, जमीन पर अधिकार
जंगल से मिलने वाले छोटे उत्पाद (लाख, तेंदू पत्ता, महुआ आदि) पर ग्राम सभा का हक
जल स्रोतों का प्रबंधन ग्राम सभा करेगी
4️⃣ खनन और परियोजनाएँ
खनन, फैक्ट्री या बड़ी परियोजना से पहले
ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य
5️⃣ शराब पर नियंत्रण
गाँव में शराब की बिक्री, निर्माण और रोक पर ग्राम सभा निर्णय ले सकती है
6️⃣ परंपरागत कानून मान्य
आदिवासी समाज की परंपराएँ और रीति-रिवाज मान्य होंगे
झारखंड में लागू होने का मतलब क्या है?
जब कहा जाता है कि “झारखंड में पेसा कानून लागू हो गया”, तो इसका अर्थ होता है:
राज्य सरकार ने इसके नियम (Rules) बना दिए हैं
अब ग्राम सभा को कानूनी ताकत मिल गई है
प्रशासन को ग्राम सभा के फैसलों का सम्मान करना होगा
पेसा कानून से आदिवासियों को क्या लाभ?
✔ जमीन हड़पने से सुरक्षा
✔ बाहरी कंपनियों पर नियंत्रण
✔ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
✔ संस्कृति और पहचान की रक्षा
✔ लोकतंत्र नीचे से मजबूत
निष्कर्ष
पेसा कानून आदिवासी स्वशासन का मजबूत आधार है।
अगर इसे ईमानदारी से लागू किया गया, तो