16/05/2024
एक मारवाड़ी सेठ था. उसको एक महारोग लग गया पेट की बीमारी का.
बहुत इलाज कराया पर कोई फायदा नहीं हुआ. सारे वैद्यों ने हाथ खड़े कर दिए. एक सयाने नें सुझाव दिया कि दूसरे गाँव में एक प्रकांड वैद्य रहता है, परन्तु वह है बहुत लालची.
मरता क्या ना करता, सेठ गया उसके पास. और जैसा कि अपेक्षित था, वैद नें उसे लम्बा चौड़ा खर्च बता दिया. हार कर सेठ वापस आ गया.
थोड़े दिन बाद उसी वैद्य के पास एक गरीब भिखारी वही महारोग लेकर पहुंचा. वैद्य नें उसे झिड़क दिया. पर गरीब उसके हाथ-पैर जोड़ कर पीछे लग गया.
झल्लाकर वैद्य ने उसे कहा-जा एक महीने तक मूली का रस पी ले, ठीक हो जायेगा.
गरीब उसे धन्यवाद् दे कर लौट गया.
कुछ दिन बाद वही सेठ फिर उस वैद्य के पास गया और उसे उपहार भेंट में देते हुए अपना रोग दूर करने के लिए धन्यवाद दिया.
"लेकिन मैंने तो तुम्हारा इलाज किया ही नहीं".....वैद्य नें कहा.
तब उस सेठ नें कहा कि मैंने आपके कहे अनुसार एक महीने तक मूली का रस पिया और ठीक हो गया.
वैद्य समझ गया कि वह गरीब कौन था.
और आप भी समझ गए
ना.......... मूली के फायदे?
लेकिन कुछ लोग मूली इसलिए नहीं खाते, कि उससे बदबूदार गैस बनती है. तो इसे आप यूं समझिये, कि मूली पेट में एसिड की तरह काम करती है.
जबतक वह पेट को अन्दर तक साफ़ करेगी, आँतों में चिपका हुआ पुराना मल गलाकर बाहर निकालेगी, तभी तक गैस बनेगी.
और कुछ दिनों में जब अन्दर का मल बाहर निकल कर पेट साफ़ हो जाएगा, उसके बाद गैस भी बंद हो जायेगी.
एक बात और, खाने के बाद मूली के साथ गुड़ लेने से मूली का असर काफी बढ़ जाता है और गैस भी कम बनती है. लेकिन डिनर में मूली नहीं खानी चाहिए.
*अब चूंकि ९०% बीमारी पेट की समस्या से ही उत्पन्न होती हैऔर मूली इसका अचूक इलाज है.इसे कहते हैं "एक अनार, सौ बीमार" तो आप कब से शुरू कर रहे हैं मूली खाना!!!!!*