Prabhakar Bhartiya Vaidik Kalp Chikitsa Sansthan Paraiya Gaya.

  • Home
  • India
  • Gaya
  • Prabhakar Bhartiya Vaidik Kalp Chikitsa Sansthan Paraiya Gaya.

Prabhakar Bhartiya Vaidik Kalp Chikitsa Sansthan Paraiya   Gaya. Vaid S P Singh

लम्बी एवम स्वस्थ जीवन जीना है तो एक दिन का उपवास जरूरी है।पेट को कचरे का गोदाम मत बनाएं,खाली रखें।पेट हल्का तो सब रोग हल...
25/01/2026

लम्बी एवम स्वस्थ जीवन जीना है तो एक दिन का उपवास जरूरी है।पेट को कचरे का गोदाम मत बनाएं,खाली रखें।पेट हल्का तो सब रोग हल्का।

07/07/2024
07/07/2024

*सौंफ – त्रिदोषनाशक है. इसकी तासीर ठंडी है, लेकिन यह जठराग्नि को मंद नहीं करती.*

- सौंफ का सेवन करके आंखों की रोशनी बढ़ाई जा सकती है। सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लेने से आंखों की रोशनी बढती है।

- सौंफ खाने से पेट फूलने और कब्ज की शिकायत नहीं होती। सौंफ को मिश्री के साथ पीसकर चूर्ण बना लीजिए, रात को सोते समय लगभग 5 ग्राम चूर्ण को हल्के गुनगने पानी के साथ सेवन करने से पेट फूलने की समस्या नहीं होगी व गैस व कब्ज दूर होगा।

- डायरिया होने पर सौंफ खाना चाहिए। सौंफ को बेल के गूदे के साथ सुबह-शाम चबाने से अजीर्ण समाप्त होता है और अतिसार में भी लाभ होता है।

- खाने के बाद सौंफ का सेवन करने से खाना ठीक से पचता है। सौंफ, जीरा एवं काला नमक मिलाकर चूर्ण बना लीजिए। खाने के बाद हल्के गुनगुने पानी से इस चूर्ण को लीजिए, यह उत्तम पाचक चूर्ण है।

- अगर आप चाहते हैं कि आपका कोलेस्ट्रॉल न बढ़े तो खाने के लगभग 30 मिनट बाद एक चम्मच सौंफ खा लें।

- 50gm कच्ची सौंफ का चूर्ण और 50gm भुनी सौंफ के चूर्ण में हींग और काला नमक मिलाकर 2 से 6 ग्राम मात्रा में दिन में तीन-चार बार प्रयोग करें इससे गैस और अपच दूर हो जाती है।

- भूनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर 2 घंटे बाद ठंडे पानी के साथ फँकी लेने से मरोड़दार दस्त, आँव और पेचिश में लाभ होता है। यह कब्ज को दूर करती है। स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

- बादाम, सौंफ और मिश्री तीनों बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण कर लें और रोज दोनों टाइम भोजन के बाद 1 छोटी चम्मच लें। इससे स्मरणशक्ति बढ़ती है।

- दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से कफ की समस्या समाप्त होती है। अस्थमा और खांसी में सौंफ सहायक है। कफ और खांसी के इलाज के लिए सौंफ खाना फायदेमंद है।

- गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होता है।

- सौंफ को अंजीर के साथ खाएँ और खाँसी व ब्रोन्काइटिस को दूर भगाएँ।

- गर्मियों में सौंफ को गला कर सेवन करने से ठंडक मिलती है। सौंफ के पावडर को शक्कर के साथ बराबर मिलाकर लेने से हाथों और पैरों की जलन दूर होती है।

- यह शिशुओं के पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।एक चम्मच सौंफ को एक कप पानी में उबलने दें और 20 मिनट तक इसे ठंडा होने दें। इससे शिशु के कॉलिक का उपचार होने में मदद मिलती है। शिशु को एक या दो चम्मच से ज्यादा यह घोल नहीं देना चाहिए।

- जो लोग कब्ज से परेशान हैं, उनको आधा ग्राम गुलकन्द और सौंफ मिलाकर दूध के साथ रात में सोते समय लेना चाहिए। कब्ज दूर हो जाएगा।

- इसे खाने से लीवर ठीक रहता है। इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है।

- रोजाना सुबह-शाम खाली सौंफ खाने से खून साफ होता है जो कि त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे त्वचा में चमक आती है।

- रोजाना दाल और सब्जी के तडके में सौंफ भी डाले.

- यदि बार-बार मुंह में छाले हों तो एक गिलास पानी में 40 ग्राम सौंफ पानी आधा रहने तक उबालें। इसमें जरा सी भुनी फिटकरी मिलाकर दिन में दो तीन बार गरारा करें।

VAIDYA RAMRATAN PRABHAKAR

*भोजन क्यों ?*भोजन जीवन के लिए अनिवार्य है । परंतु जो भोजन को शक्तिदाता मानकर खाता है उसका परिणाम बुरा होता है। पहलवान ह...
02/06/2024

*भोजन क्यों ?*

भोजन जीवन के लिए अनिवार्य है । परंतु जो भोजन को शक्तिदाता मानकर खाता है उसका परिणाम बुरा होता है। पहलवान हमेशा बिना खाये कुश्ती लड़ता है। लड़ने के बाद वह टूटफूट के अनुपात में आवश्यक भोजन करके गहरी नींद में शक्ति प्राप्त करता है। भोजन से कोशों की मरम्मत होती है एवं पुट्ठे बनते हैं

यदि यह मान भी लिया जाये कि भोजन से शक्ति प्राप्त होती है तब विचारणीय है कि यह शक्ति क्या भोजन के पेट में पहुँचते ही आ जाएगी अथवा उसके पचने के बाद? यदि पचने के बाद तो पचने में कई घण्टों का समय लगता है
फिर भोजन खाते ही शक्ति की प्रतीति क्यों होती है? भोजन के तीन-चार घंटे बाद जब शक्ति आनी चाहिये थी तो पुनः शरीर शिथिल क्यों पड़ जाता है? भोजन की आवश्यकता पुनः क्यों महसूस होने लगती है ?

भोजन करते ही मल का उभार रुक जाने से हमको भ्रमवश 'शक्ति की प्रतीति' होती है। भोजन के अभाव में जो शक्तिहीनता लगती है, उसका कारण भोजन का अभाव नहीं, शरीर में संचित 'मल का उभार' है। भोजन के तीन-चार घंटे बाद 'भोजन का दबाव खत्म हो जाने के कारण पुनः ‘मल का उभार' शुरू हो जाता है ।

आयुर्वेद शास्त्र में ऋषियों ने सैकड़ों वर्ष पूर्व लिखा था

आहारं पचति शिखि दोषान् आहार वर्जितः

अर्थात् जठराग्नि आहार को पचाती है और 'आहार के अभाव' में शरीर के दोषों को नष्ट करती है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि यह जठराग्नि भोजन पचाने को प्राथमिकता देती है। भोजन के पेट में जाते ही सफाई का काम रुक जाता
है तथा उस समय जो परेशानी महसूस हो रही थी वह बन्द हो जाती है परंतु यह रुका हुआ मल कुछ समय बाद रोग का रूप धारण कर लेता है। जब तक हमारी यह धारणा बनी है कि भोजन शक्तिदाता है, हमारा शरीर स्थायी रूप से निरोग नहीं होगा, क्योंकि हम प्रकृति को सफाई का काम कभी पूरा नहीं करने देंगे।

16/05/2024

एक मारवाड़ी सेठ था. उसको एक महारोग लग गया पेट की बीमारी का.

बहुत इलाज कराया पर कोई फायदा नहीं हुआ. सारे वैद्यों ने हाथ खड़े कर दिए. एक सयाने नें सुझाव दिया कि दूसरे गाँव में एक प्रकांड वैद्य रहता है, परन्तु वह है बहुत लालची.
मरता क्या ना करता, सेठ गया उसके पास. और जैसा कि अपेक्षित था, वैद नें उसे लम्बा चौड़ा खर्च बता दिया. हार कर सेठ वापस आ गया.

थोड़े दिन बाद उसी वैद्य के पास एक गरीब भिखारी वही महारोग लेकर पहुंचा. वैद्य नें उसे झिड़क दिया. पर गरीब उसके हाथ-पैर जोड़ कर पीछे लग गया.
झल्लाकर वैद्य ने उसे कहा-जा एक महीने तक मूली का रस पी ले, ठीक हो जायेगा.
गरीब उसे धन्यवाद् दे कर लौट गया.

कुछ दिन बाद वही सेठ फिर उस वैद्य के पास गया और उसे उपहार भेंट में देते हुए अपना रोग दूर करने के लिए धन्यवाद दिया.

"लेकिन मैंने तो तुम्हारा इलाज किया ही नहीं".....वैद्य नें कहा.
तब उस सेठ नें कहा कि मैंने आपके कहे अनुसार एक महीने तक मूली का रस पिया और ठीक हो गया.
वैद्य समझ गया कि वह गरीब कौन था.
और आप भी समझ गए
ना.......... मूली के फायदे?

लेकिन कुछ लोग मूली इसलिए नहीं खाते, कि उससे बदबूदार गैस बनती है. तो इसे आप यूं समझिये, कि मूली पेट में एसिड की तरह काम करती है.
जबतक वह पेट को अन्दर तक साफ़ करेगी, आँतों में चिपका हुआ पुराना मल गलाकर बाहर निकालेगी, तभी तक गैस बनेगी.

और कुछ दिनों में जब अन्दर का मल बाहर निकल कर पेट साफ़ हो जाएगा, उसके बाद गैस भी बंद हो जायेगी.

एक बात और, खाने के बाद मूली के साथ गुड़ लेने से मूली का असर काफी बढ़ जाता है और गैस भी कम बनती है. लेकिन डिनर में मूली नहीं खानी चाहिए.

*अब चूंकि ९०% बीमारी पेट की समस्या से ही उत्पन्न होती हैऔर मूली इसका अचूक इलाज है.इसे कहते हैं "एक अनार, सौ बीमार" तो आप कब से शुरू कर रहे हैं मूली खाना!!!!!*

24/04/2024

जिंदगी भर दूध केवल इंसान पीता है डॉक्टर के मना करने के बाद भी चाहे पतला करके पीना पड़े जबकि अन्य जीव जैसे हाथी घोड़ा भैंसा जो इतने ताकतवर है वह भी पहले कुछ दिन पीते हैं मतलब यह है डॉक्टर के बंद करने के बाद आपको दूध बंद कर देना चाहिए जो चीज आपको नुकसान कर रही है उसको आप कैसे भी ले ले नुकसान करेगी.

शुक्राणु हीनता अब अभिशाप नहीं एक बार इस्तेमाल करें परिणाम आप खुद देख लें।कॉन्टैक्ट करें 099341 54740
23/04/2024

शुक्राणु हीनता अब अभिशाप नहीं एक बार इस्तेमाल करें परिणाम आप खुद देख लें।
कॉन्टैक्ट करें
099341 54740

Address

Vaidraj Surendra Prasad Singh
Gaya
0631

Opening Hours

9am - 5pm

Telephone

+919934154740

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Prabhakar Bhartiya Vaidik Kalp Chikitsa Sansthan Paraiya Gaya. posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Prabhakar Bhartiya Vaidik Kalp Chikitsa Sansthan Paraiya Gaya.:

Share