Satish Kumar Mishra

Satish Kumar Mishra I am PHP WordPress developer in Ecrulogic Technologies
Pvt Ltd.

18/09/2022

Hey guys my facebook id is hacked by someone.

13/09/2021
Jai Jadatjanani Maa Vindhyavashni... Maa ki sabhi bhakto pe kripa sadev bani rhe...
19/11/2019

Jai Jadatjanani Maa Vindhyavashni... Maa ki sabhi bhakto pe kripa sadev bani rhe...

07/02/2019

Hello guyzz welcome to my channel.... This time I'll try to show some sakting tricks.. Hope u loved it ..... Do like and subscribe to my channel....and Keep ...

24/12/2018

Truth can be started in a thousand different ways, yet each one can be truth...

13/09/2018

*नए अछूत*

हमको देखो हम सवर्ण हैं
भारत माँ के पूत हैं,
लेकिन दुःख है अब भारत में,
हम सब 'नए अछूत' हैं;

सारे नियम सभी कानूनों ने,
हमको ही मारा है;
भारत का निर्माता देखो,
अपने घर में हारा है;
नहीं हमारे लिए नौकरी,
नहीं सीट विद्यालय में;
ना अपनी कोई सुनवाई,
संसद में, न्यायालय में;
हम भविष्य थे भारत माँ के,
आज बने हम भूत हैं;
बेहद दुःख है अब भारत में;
हम सब 'नए अछूत' हैं;

'दलित' महज़ आरोप लगा दे,
हमें जेल में जाना है;
हम-निर्दोष, नहीं हैं दोषी,
ये सबूत भी लाना है;
हम जिनको सत्ता में लाये,
छुरा उन्हींने भोंका है,
काले कानूनों की भट्ठी,
में हम सब को झोंका है;
किसको चुनें, किन्हें हम मत दें?
सारे ही यमदूत हैं;
बेहद दुःख है अब भारत में;
हम सब 'नए अछूत' हैं;

प्राण त्यागते हैं सीमा पर,
लड़ कर मरते हम ही हैं;
अपनी मेधा से भारत की,
सेवा करते हम ही हैं;
हर सवर्ण इस भारत माँ का,
एक अनमोल नगीना है;
अपने तो बच्चे बच्चे का,
छप्पन इंची सीना है;
भस्म हमारी महाकाल से,
लिपटी हुई भभूत है;
लेकिन दुःख है अब भारत में,
हम सब 'नए अछूत' हैं..

देकर खून पसीना अपना,
इस गुलशन को सींचा है;
डूबा देश रसातल में जब,
हमने बाहर खींचा है;
हमने ही भारत भूमि में,
धर्म-ध्वजा लहराई है;
सोच हमारी नभ को चूमे
बातों में गहराई है;
हम हैं त्यागी,हम बैरागी,
हम ही तो अवधूत हैं;
बेहद दुःख है अब भारत में,
हम सब 'नए अछूत' हैं
=================

16/08/2018

So sad to say our greatest PM Shri Atal Bihari Vajapeyee is passed away. Today we lost our bharat ratna. Amar rahe... Jai Hind. Jai Bharat. Jai Atal ji...
क्या खोया, क्या पाया जग में ?
मिलते और बिछड़ते पग में ?
मुझे किसी से नहीं शिकायत
यद्दपि छला गया पग पग में
एक दृष्टि बीती पर डालें
यादों की पोटली टटोलें
अपने ही मन से कुछ बोलें
अपने ही मन से कुछ बोलें
पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी
जीवन एक अनंत कहानी
पर तन की अपनी सीमाएं
यद्दपि सौ शरदों की वाणी
इतना काफी है, अंतिम दस्तक पर
खुद दरवाज़ा खोलें
अपने ही मन से कुछ बोलें
अपने ही मन से कुछ बोलें
जन्म मरण का अभिवत फेरा
जीवन बंजारो का डेरा
अब यहां, कल कहां कुछ है ?
कौन जानता किधर सवेरा ?
अँधियारा आकाश असीमित
प्राणों के पंखो को तौलें
अपने ही मन से कुछ बोलें...

29/04/2017
Exactly true..
29/04/2017

Exactly true..

Happy Independence Day.....
14/08/2016

Happy Independence Day.....

Address

Ghaziabad
201012

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Satish Kumar Mishra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Satish Kumar Mishra:

Share

Category