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बदल जाएगा दुनिया का न्यूक्लियर गेम प्लान, मोदी-अल्बानीज के बीच हुई ऐसी डीलमोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बानीज क...
09/07/2026

बदल जाएगा दुनिया का न्यूक्लियर गेम प्लान, मोदी-अल्बानीज के बीच हुई ऐसी डील

मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बानीज के बीच सिविल न्यूक्लियर समझौता हुआ, जो ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम सप्लाई का रास्ता खोलेगा. यह डील भारत की क्लीन एनर्जी, डिफेंस और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा को मजबूत करेगी, जिससे वैश्विक न्यूक्लियर बैलेंस प्रभावित होगा.भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के बीच हुई हालिया मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दी है. इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे मोदी की यह यात्रा व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने के मकसद से थी. दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर दस्तखत किए, जिनमें सबसे चर्चित सिविल न्यूक्लियर एनर्जी समझौता है.यह डील सिर्फ दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर न्यूक्लियर गेम प्लान को बदलने वाली साबित हो सकती है. ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है. अब भारत को वहां से व्यावसायिक रूप से यूरेनियम मिल सकेगा, जो भारत के न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स को नई गति देगा. मोदी ने कहा कि यह समझौता क्लीन एनर्जी के लक्ष्यों को नई दिशा देगा.सिविल न्यूक्लियर डील: क्लीन एनर्जी का नया अध्याय

सिविल न्यूक्लियर समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा. भारत लंबे समय से अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूक्लियर पावर पर जोर दे रहा है. कोयला और दूसरे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए न्यूक्लियर एनर्जी एक साफ और स्थिर विकल्प है.यह डील NSG (Nuclear Suppliers Group) की सदस्यता न होने के बावजूद भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है. ऑस्ट्रेलिया पहले से भारत के साथ न्यूक्लियर सहयोग पर चर्चा कर रहा था, लेकिन अब इसे व्यावसायिक स्तर पर लागू किया जाएगा. इससे भारत के न्यूक्लियर प्लांट्स को ईंधन मिलेगा, बिजली उत्पादन बढ़ेगा और कार्बन उत्सर्जन कम होगा.विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता वैश्विक न्यूक्लियर सप्लाई चेन को बदल सकता है. चीन और रूस जैसे देशों पर निर्भरता कम होगी. भारत अब ऑस्ट्रेलिया जैसे विश्वसनीय लोकतांत्रिक साझेदार से सामग्री हासिल कर सकेगा. इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन भी प्रभावित होगा.
रक्षा और समुद्री सुरक्षा में नया सहयोग मोदी-अल्बनीज बैठक में सिर्फ न्यूक्लियर ही नहीं, रक्षा और सुरक्षा पर भी बड़ा जोर रहा. दोनों देशों ने इंडिया-ऑस्ट्रेलिया जॉइंट डिक्लेरेशन ऑन डिफेंस एंड सिक्योरिटी जारी किया. इसमें डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर बनाने का फैसला हुआ, जिससे दोनों देशों के स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रीज जुड़ सकें.

09/07/2026

बदल जाएगा दुनिया का न्यूक्लियर गेम प्लान, मोदी-अल्बानीज के बीच हुई ऐसी डील ‼️

09/07/2026

बदल जाएगा दुनिया का न्यूक्लियर गेम प्लान, मोदी-अल्बानीज के बीच हुई ऐसी डील

ट्रंप की ये लड़ाई कैसे न्यूक्लियर से होर्मुज पर पूरी तरह शिफ्ट हो गई, 28 फरवरी से अबतक की टाइमलाइन28 फरवरी 2026 को ट्रंप...
09/07/2026

ट्रंप की ये लड़ाई कैसे न्यूक्लियर से होर्मुज पर पूरी तरह शिफ्ट हो गई, 28 फरवरी से अबतक की टाइमलाइन

28 फरवरी 2026 को ट्रंप-इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए, जो न्यूक्लियर साइट्स पर किए थे. ईरान ने जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया. जंग पूरी तरह से ऑयल रूट पर शिफ्ट हो गया.अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान से लड़ाई 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर बड़े हमले किए. इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर प्रोजेक्टस, मिसाइल साइट्स, कमांड सेंटर्स और सैन्य ठिकाने थे. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इन हमलों में हुई, जो ईरानी शासन के लिए बड़ा झटका था. ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बना रहा है, जिसे रोकना जरूरी है.इस हमले से पहले 2025 से बातचीत चल रही थी लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका. ईरान ने इन हमलों का जवाब मिसाइलों और ड्रोन्स से दिया. इजरायल, अमेरिकी बेस और गल्फ देशों पर हमले हुए. सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया.दुनिया के 20% तेल का आना-जाना इसी सकंरे समुद्री मार्ग से होता है. ईरान ने जहाजों पर हमले शुरू कर दिए, जिससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा. इस तरह ट्रंप की लड़ाई, जो शुरू में न्यूक्लियर डील और हथियार रोकने पर थी, तेजी से होर्मुज और तेल मार्ग की लड़ाई में बदल गई.मार्च 2026 में ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह 'बंद' घोषित कर दिया. कई जहाजों पर हमले हुए, जिससे शिपिंग लगभग रुक गई. अमेरिका ने ईरानी नौसेना के कई जहाज नष्ट किए लेकिन ईरान ने माइन्स और फास्ट अटैक बोट्स से जवाब दिया. तेल की कमी एशिया में महसूस होने लगीअप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता से 7-8 अप्रैल को दो हफ्ते का सीजफायर हुआ. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की. लेकिन होर्मुज का मुद्दा अनसुलझा रहा. ईरान ने होर्मुज पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ा. 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत हुई -1979 के बाद सबसे ऊंचे स्तर की. कोई समझौता नहीं हुआ.

ट्रंप ने इसके बाद अमेरिकी नौसेना को होर्मुज पर ब्लॉकेड लगाने का आदेश दिया. ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका गया. यह 'ड्यूल ब्लॉकेड' की स्थिति बन गई. ईरान की अर्थव्यवस्थ भारी असर पड़ा क्योंकि उसकी तेल निर्यात बंद ह गया. लेबनान में हिजबुल्लाह-इजरायल लड़ाई भी दोबारा शुरू हो गई. युद्ध न्यूक्लियर से ज्यादा आर्थिक और नौसैनिक नियंत्रण की लड़ाई बन चुका था.‼️🚨

09/07/2026

ट्रंप की ये लड़ाई कैसे न्यूक्लियर से होर्मुज पर पूरी तरह शिफ्ट हो गई, 28 फरवरी से अबतक की टाइमलाइन ‼️🚨

09/07/2026

ट्रंप की ये लड़ाई कैसे न्यूक्लियर से होर्मुज पर पूरी तरह शिफ्ट हो गई, 28 फरवरी से अबतक की टाइमलाइन

रेलवे ब्रिज उड़ाया, चाबहार में बिजली आपूर्ति ठप... अमेरिकी हमलों से दहला ईरानअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह ऐलान...
09/07/2026

रेलवे ब्रिज उड़ाया, चाबहार में बिजली आपूर्ति ठप... अमेरिकी हमलों से दहला ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह ऐलान कर दिया था कि ईरान के साथ शांति समझौता अब समाप्त हो गया है. इस ऐलान के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरान पर हमले फिर से शुरू कर दिए हैं.अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर विध्वंसक हमले की धमकी दी थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि बुधवार की रात ईरान पर अब तक का सबसे विध्वंसक हमला किया जा सकता है. अब अमेरिकी सेना ने इरान पर हमला बोल दिया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास और सीरिक समेत कई इलाकों में हमले किए हैं.इन दोनों इलाकों में तेज धमाकों की आवाज सुनी जा रही है. ईरानी समाचार एजेंसी मिजान के मुताबिक बंदर अब्बास के साथ ही सीरिक में भी तेज धमाकों की आवाज सुनी गई है. ईरानी समाचार एजेंसी मेहर ने भी बंदर अब्बास में धमाकों की पुष्टि की है. मेहर की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को ईरान पर अमेरिकी हमले में दो मछुआरों की मौत हो गई है.

ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक चाबहार, कोनारक के करीब भी तेज धमाकों की आवाज सुनी गई है. ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम भी एक्टिव हो गया है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक ताजा हमलों के बाद चाबहार के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है. वहीं, ईरान के अक्काला में अमेरिका ने रेलवे ब्रिज उड़ा दिया है.ईरान की सरकारी प्रेस टीवी के मुताबिक अबू मूसा द्वीप पर कुल 10 धमाके हुए हैं. चाबहार और कोनारक में भी 10 धमाकों की आवाज सुनी गई है. चाबहार में एक अस्पताल पर दागे गए हथियार का मलबा गिरा है और अमेरिकी हमले से शहीद बेहेश्ती पोर्ट, कलंतरी पोर्ट और समुद्री यातायात नियंत्रण टावर को भी नुकसान पहुंचा है. बंदर अब्बास में आठ और सीरिक में तीन धमाके हुए हैं.🔥🚨

09/07/2026

रेलवे ब्रिज उड़ाया, चाबहार में बिजली आपूर्ति ठप अमेरिकी हमलों से दहला ईरान🚨🔥

09/07/2026

रेलवे ब्रिज उड़ाया, चाबहार में बिजली आपूर्ति ठप... अमेरिकी हमलों से दहला ईरान

राम मंदिर में बड़ा बदलाव, बैंक खाते से लेकर दान पेटी तक के बदल गए सारे नियमराम मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावा व्यवस्था में बड़े ...
08/07/2026

राम मंदिर में बड़ा बदलाव, बैंक खाते से लेकर दान पेटी तक के बदल गए सारे नियम

राम मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं. अब बैंक खातों का संचालन कृष्ण मोहन, जगदीश और चंदन राय के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा. दान गणना स्थल पर सुरक्षा बढ़ाई गई है और 13 नए सीसीटीवी लगाए गए हैं. वहीं दूसरी ओर आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट नियमों के तहत कार्रवाई की संभावना के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया.राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान व्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं. अब मंदिर के बैंक खातों का संचालन एक व्यक्ति के बजाय तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के माध्यम से होगा. इसके साथ ही दान पेटियों से मिले पैसे की गिनती तक की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है और पुलिस की तैनाती भी मजबूत की गई है.राम मंदिर ट्रस्ट ने बैंक खातों के संचालन की व्यवस्था में बदलाव किया है. अब कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन के साथ उनके दो सहयोगियों जगदीश और चंदन राय को भी अधिकृत किया गया है. नई व्यवस्था के तहत मंदिर के बैंक खातों से जुड़े किसी भी वित्तीय लेनदेन के लिए इन तीनों के संयुक्त हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे. यानी अब किसी एक व्यक्ति के हस्ताक्षर से बैंकिंग संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं होगी. अब तक बैंकिंग व्यवस्था की जिम्मेदारी ट्रस्टी अनिल मिश्रा के पास थी और बैंक में उनके हस्ताक्षर ही मान्य थे. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी के केवल डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाता था. नई व्यवस्था को वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.🔱🛕

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