09/08/2026
बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न👇👇
केस में क्यों बरी हुए?: कोर्ट ने पूछा- घटना हुई तो दोबारा मिलने क्यों गईं? ऐसे दावे टिक नहीं सके....
जिन महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर संसद से सड़क तक हंगामा हुआ, उस केस में यूपी के बाहुबली भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह बरी कैसे हो गए? इसका जवाब जानने के लिए 'दैनिक भास्कर' ने बृजभूषण का केस लड़ने वाले वकीलों के पैनल से बात की। उन्होंने 5 बड़ी वजहें बताईं।
हमने वकीलों से जाना कि कोर्ट ने किन सबूतों को कमजोर माना और किन गवाहों पर भरोसा नहीं किया। पढ़िए किन सबूतों और गवाहों के आधार पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 अगस्त को फैसला दिया...
1- कोर्ट को गवाहों के बयानों में क्या गड़बड़ी मिली
अधिवक्ता कहते हैं- कोर्ट ने मुख्य पीड़ित गवाह के बयानों को भी जांचा। कोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों में घटनाओं की जगह, साल और तारीखों को लेकर बदलाव सामने आए।
एक घटना पहले 2015 में तुर्की में बताई गई, बाद में इसे 2016 में मंगोलिया की घटना बताया गया।
WFI (भारतीय कुश्ती संघ) ऑफिस की एक घटना पहले 15 अक्टूबर, 2017 की बताई गई। यह तारीख रविवार थी, जबकि ऑफिस बंद रहता था। इसके बाद तारीख बदलकर 16 और 17 अक्टूबर बताई गई।
जकार्ता एशियन गेम्स 2018 और कजाकिस्तान 2019 की कथित घटनाओं का जिक्र शुरुआती हलफनामे में नहीं था। कोर्ट ने बाद में इन आरोपों को जोड़े जाने को भी ध्यान में रखा।
2- यौन शोषण हुआ, तो पीड़िता बृजभूषण से मिलने क्यों गईं?
कोर्ट ने कथित घटनाओं के बाद पीड़िता और आरोपी के बीच होने वाली मुलाकातों को भी देखा। फैसले में कहा गया कि कुछ घटनाएं सार्वजनिक जगहों पर होने का दावा किया गया था, लेकिन उस समय किसी चश्मदीद या रिश्तेदार की ओर से विरोध की बात सामने नहीं आई।
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि दिसंबर, 2018 में शादी के बाद पीड़िता और उनके पति, बृजभूषण शरण सिंह के घर आशीर्वाद लेने गए थे। इसकी तस्वीरें भी कोर्ट में पेश की गई थीं।
3- दो महिला पहलवानों ने कोर्ट में आरोपों से इनकार किया
मामले में दो पीड़ित गवाहों ने कोर्ट में बृजभूषण पर गलत व्यवहार के आरोपों से इनकार कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन पर बृजभूषण के खिलाफ आरोप लगाने का दबाव बनाया गया था।
उनके मुताबिक, उन्हें कहा गया था कि जब तक बृजभूषण को WFI अध्यक्ष पद से नहीं हटाया जाएगा, तब तक हरियाणा के पहलवानों का भविष्य खराब हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अंग्रेजी में तैयार शिकायतें दी गई थीं, जिन्हें हिंदी में अनुवाद कर याद करने के लिए कहा गया था।
4- दूसरे आरोपों में भी कोर्ट को विरोधाभास मिला
कोर्ट ने दूसरे गवाहों के बयानों में भी विसंगतियों का जिक्र किया। एक गवाह ने किर्गिस्तान के बिश्केक में 28 फरवरी, 2018 को घटना होने का दावा किया था। लेकिन आधिकारिक मैच शेड्यूल के मुताबिक उनका मैच 1 मार्च को था।
वहीं, एक अन्य ने पुलिस के साथ कथित घटना वाली जगह का निरीक्षण कराने से लिखित में इनकार किया था। कोर्ट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष इसका संतोषजनक कारण नहीं बता पाया।
आखिर में कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
इन सभी बयानों, दस्तावेजों और दूसरे सबूतों को देखने के बाद ट्रायल कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यानी कोर्ट ने यह माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं कर पाया।
5- कोर्ट ने शिकायतों को लेकर क्या कहा?
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि धरने और विरोध-प्रदर्शन शुरू होने से पहले बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न की कोई लिखित शिकायत या आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं था।
फैसले में शिकायतों की भाषा और उनमें समानता को लेकर
कहानी में कई विरोधाभास हैं और वह आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा।
अब पूरा मामला समझ लीजिए।।
2023 में छह महिला पहलवानों की शिकायत के आधार पर दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। पुलिस ने उनके खिलाफ महिला की लज्जा भंग करने, यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी जैसी धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। WFI पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर पर आपराधिक धमकी की धारा में आरोप लगाए गए थे।
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