14/12/2024
“गीता का अमर ज्ञान”
संग्राम के बीच खड़े अर्जुन,
भ्रमित मन, अश्रु से भरे नयन।
कृष्ण ने तब ज्ञान दिया,
जीवन का मर्म, सत्य सिखाया।
कर्म ही तेरा धर्म है प्यारा,
फल की चिंता मत कर जारा।
बांध न मन को मोह के धागे,
जीवन यथार्थ है, स्वप्न के आगे।
न आत्मा मरे, न आत्मा जन्मे,
यह सदा रहे, यह कभी न थमे।
शरीर बदलता, वस्त्र समान,
आत्मा तो है शाश्वत महान।
सुख दुख को जो समझे समान,
वही है जीवन का सच्चा प्रमाण।
जो मिला उसे सहज स्वीकारो,
हर पल को तुम ईश्वर पर वारो।
राग-द्वेष के बंधन तोड़ो,
मन में भक्ति का दीपक जोड़ो।
ज्ञान, कर्म, और भक्ति का मेल,
इनसे होगा भवसागर का खेल।
जब तक जीवन का है प्रवाह,
करो सदा अपने कर्म का निर्वाह।
छोड़ो डर, भ्रम, और अधूरी आस,
यही गीता का सच्चा उपदेश है खास।
कृष्ण का वचन अमर है आज,
जो दिखाए जीवन का सही राज।
समर्पण, कर्म और सच्चा ज्ञान,
गीता है जीवन का अमृत प्राण।
—सुशांत की कलम से ✍️✍️