23/05/2026
चलिए! घर के भीतर से शुरू करते हैं। जब #झाड़ू लगाते हैं तो कूड़ा एक जगह इकट्ठा करते हैं, फिर समेट कर बाहर फेंक देते हैं। घुसपैठियों पर यह सिद्धान्त लागू हो रहा है।
#घुसपैठियों पर एक सवाल बार-बार पूछा जा रहा है, अभी तक कितने घुसपैठी वापस भेजे? बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश या महाराष्ट्र से भगा रहे हो? पर ये जा कहां रहे हैं? हैं तो भारत में ही ना?
जहां तक मेँ समझ पा रहा हूं, घुसपैठियों का मसला कई स्तर पर तैयारियों की मांग कर रहा है..
■ हालांकि दूसरे प्रश्न का उत्तर बहुत आसान है, #भाजपा शासित राज्यों से भाग रहे घुसपैठियों को फिलहाल #कांग्रेस_शासित राज्यों में पनाह मिल रही हैं। लेकिन यह #पनाहगाह स्थायी नहीं हो सकता।
■ थोड़ा गहराई से देख रहा हूं तो साफ दिखाई दे रहा है, घुसपैठियों का हर कहीं अपनी एक #बसाहट है.. #अर्थव्यवस्था में दखल है। भागने वालों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि अब #कांग्रेसी_राज्यों के लिए संभव नहीं, इनकी बसाहट और भोजन-पानी की व्यवस्था कर सके। ना कांग्रेसी राज्यों के #संवैधानिक_नागरिक इन घुसपैठियों को अपने घरों में स्वीकार करेंगे। चीनी क्रांति के नायक #माओ के शब्दों में कहूं तो, यह एक तरह से "गांवों से शहरों को घेरो" चल रहा है। थोड़ा समय और, शहर यानी कांग्रेसी हुकूमतें घिरी मिलेंगी।
■ बहुत जल्द #घुसपैठिए कांग्रेस शासित राज्यों के लिए #राजनीतिक_सिरदर्द होंगे। यह स्थिति निश्चित रूप से #भाजपा के पक्ष में जाएगी। यदि ऐसा है तो यकीन मानिए, सत्ता की सियासत में घुसपैठियों का बहुआयामी इस्तमाल हो रहा है।
■ घुसपैठियों की बसाहट को लेकर #मुस्लिम_अशराफ खामोश है। अशराफ कभी राजी नहीं होगा, घुसपैठियों को अपने घरों में पनाह दे। इनके लिए #पसमांदा_मुसलमान महज एक पैदल सेना है, जो पत्थर मारे! गाय काटे! फिर पुलिस की गोली से जान दे! जबकि इनके दम पर सत्ता की दलाली कर #अशराफ अपनी कोठियां भरे।
कांग्रेसी नेता रहे #मौलाना_आजाद का कहा याद आ रहा है, "...सैलाब का पानी जगह-जगह गड्ढों में रुका रह जाता है, तेज बारिश में यह #ठहरे_पानी बह जाते हैं।" आजाद ने यह बात, स्वतन्त्रता के बाद भारत में रह गए #मुसलमानों के बारे में कही थी।
आज यही घुसपैठिए #कांग्रेसी_हुकूमतों के गड्ढों में पनाह ले रही है, पर Narendra Modi की बारिश इतनी व्ययवस्थित है, अनुशासित है, ज्यादा वक्त बचा नहीं गड्ढों के पास।
-सुमंत भट्टाचार्य