19/12/2025
हरियाणा की राजनीति में नशे की समस्या और खेल नीति एक बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का यह बयान सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य और राज्य की खेल संस्कृति से जुड़ा है।
हुड्डा अक्सर अपने भाषणों में "पदक लाओ, पद पाओ" (Medal Lao, Pad Pao) नीति का जिक्र करते हैं, जिसे उनकी सरकार के दौरान शुरू किया गया था। उनके इस हालिया बयान के कुछ मुख्य बिंदु और निहितार्थ इस प्रकार हो सकते हैं:
हुड्डा के आरोपों के मुख्य पहलू:
खेल नीति बनाम नशा: हुड्डा का तर्क है कि जब युवाओं को खेल में भविष्य नहीं दिखता, तो वे हताशा में नशे की ओर रुख करते हैं। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार खिलाड़ियों को वह प्रोत्साहन और सुरक्षा नहीं दे पा रही है जो पहले मिलती थी।
नौकरियों में कमी: पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप है कि भाजपा राज में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मिलने वाली सीधी भर्तियों (जैसे DSP या अन्य पद) में कमी आई है, जिससे युवाओं का खेलों के प्रति आकर्षण घटा है।
नशे का बढ़ता जाल: हरियाणा के सीमावर्ती जिलों (जैसे सिरसा, फतेहाबाद, अंबाला) में बढ़ते नशे के मामलों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है। हुड्डा इसे "विफल खेल नीति" का परिणाम बता रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब हरियाणा में बेरोजगारी और नशे के खिलाफ सामाजिक संगठन आवाज उठा रहे हैं। हुड्डा यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार के समय हरियाणा "खेलों का हब" था, जो अब अपनी पहचान खो रहा है।
सरकार का पक्ष (संभावित जवाबी तर्क)
वहीं, भाजपा सरकार आमतौर पर इन आरोपों का जवाब यह कहकर देती है कि:
उन्होंने पुरस्कार राशि (Prize Money) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है।
खेलों के लिए बुनियादी ढांचा (Stadiums/Academies) गांव-गांव तक पहुंचाया है।
भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है।