23/05/2020
चंद्रभूषण सिंह यादव (प्रधान संपादक-"यादव शक्ति") लिखतें है-
अलका लांबा जी!
आप बहुजन नेत्री सुश्री मायावती जी को कितना जानती हैं?......
माननीया अलका लांबा जी!आप मायावती जी को कितना जानती हैं यह तो मुझे नही पता लेकिन इस देश का बहुसँख्यक बहुजन समाज मायावती जी को कितना जानता व मानता है यह आप शायद महसूस नही कर सकेंगी क्योकि आपके पास वह थर्मामीटर नही है जो महसूस करने का पैमाना बताता है।आप जैसे हाई सोसायटी के लोग रुमाल लेकर नही चलते हैं उन्हें टिशू पेपर चाहिए जिससे तुरंत पोछा व तुरंत डस्टबिन में डाल दिया जाता है।महसूस उन्हें होता है जो रुमाल रखते हैं,जो कुछ भी लगने के बाद रुमाल से पोछ उसे जेब में रख लेते हैं।यूज ऐंड थ्रो वाले क्या जाने की मायावती जी का मतलब क्या होता है?
अलका लांबा जी! आप सावित्री बाई फुले जी को सुनी हैं या नही,यह मुझे नही पता लेकिन इतना तो जान ही लीजिए कि यदि सावित्री बाई फुले जी व उनकी सहयोगी शेख फातिमा जी न होतीं तो अलका लांबा जी! आपकी जुबान नही चल पाती।आप कहीं दासी बन सदियों से स्त्री होने का दंश झेलते हुये काल-कवलित हुई अन्य स्त्रियों की तरह दासत्व की पीड़ा भोग रही होती।आज आप की औकात मायावती जी पर तंज कसने की जो हुई है न,वह मायावती जी की पुरखा सावित्री बाई फुले जी व शेख फातिमा जी की बदौलत हुई है जिन्हें यूपी व उत्तर भारत मे सुश्री मायावती जी ने यथोचित सम्मान दे बहुजन समाज को जताया व बताया है कि देखो यह तुम्हारी विभूतियां हैं।
अलका लांबा जी! अतीत को यदि छोड़ दें तो वर्तमान में मायावती जी जैसी स्ट्रांग कार्यक्षमता व चरित्र की कोई दीगर महिला भारतीय राजनीति में नही नजर आती है।मायावती जी ने सत्ता में आने के बाद यूनिवर्सिटी,मेडिकल कालेज,संग्रहालय खोले हैं।दर्जनों जिलों का निर्माण इस देश के बहुजन सन्तो,गुरुओं,महापुरुषों के नाम पर किया है।मायावती जी ने इस देश के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े समाज को सम्मान दिलाया है।उन्होंने अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन कर इस देश को बताया है कि यदि सत्ता के शिखर पर बहुजन समाज का कोई व्यक्ति बैठता है तो वह सत्ता को अपनी बपौती समझने वालों की तुलना में उनसे बेहतर नही वरन बेहतरीन कार्य करके दिखाता है।
अलका लांबा जी!मायावती जी बरसाती मेंढकी नही बल्कि बहुजन शेरनी हैं जो केवल बरसात में नही अपितु सामाजिक समता के लिए सदैव प्रयत्नशील रहती हैं।अलका लांबा जी!मायावती जी की राजनीति बहुजन हितार्थ रहा है और है।हां इधर कुछ थोड़ी-बहुत शिथिलन आयी है जिस नाते आज आप जैसे मामूली प्यादे भी उंगली उठाने लगे हैं लेकिन यह समस्या आपकी नही,देश के बहुजनो की है,हमारी है।बहुजन समाज समझता है कि उसका नायक कौन है?उसे अपने नायकों की समस्या व मजबूरी पता है।वह चाहता है कि उसका नायक सुरक्षित रहे जिससे उसे उसका नेतृत्व लंबे समय तक मिलता रहे।
अलका लांबा जी!आप कांग्रेस में रहो या आप मे या भाजपा में,मानसिकता आपकी अभिजात्यवर्गीय ही होगी क्योकि ये दल अभिजात्यवर्गीय सोच के जो हैं।आप को अखिलेश यादव जी व मायावती जी का गठबन्धन सांप-छछुंदर का गठबन्धन नजर आएगा।आपको मायावती जी मेंढकी तो अखिलेश यादव जी चरवाहा नजर आएंगे।अलका लांबा जी!यह आपका दोष नही है बल्कि आपके पीढ़ीगत मानसिकता व चरित्र का दोष है जिसमे इस देश का श्रमशील समाज आपको हेय नजर आता है।अलका लांबा जी!गुलामी करिए कांग्रेस की पर मायावती जी किसी की गुलाम नही खुदमुख्तार राष्ट्रीय अध्यक्ष है जहां आप जैसे-जैसे लोग आत-जाते रहते हैं और मायावती जी जैसे बहुजन नेताओ का चरण रज,पद पाने हेतु माथे पर लगाते रहते हैं।बस इतना जानिए अलका लांबा जी की मायावती जी बहुजनो की शेरनी हैं शेरनी,मेंढकी होती होंगी आप जैसी जो अपने मालिक को खुश करने हेतु उनके समक्ष श्रद्धावनत हो ऐसे ही चिल्लाती रहती हैं।