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FB Page : https://www.facebook.com/SwayamsevakkiBaat
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WA Channel : https://whatsapp.com/channel/0029va5aebv9mrge87akmd25 स्वयंसेवक होने से बढ़कर गर्व और सम्मान की दूसरी बात हमारे लिए कोई नहीं है। जब हम कहते हैं कि मैं एक साधारण स्वयंसेवक हूँ, तब इस दायित्व का बोध हमें अपने हदय में रखन
ा चाहिए कि यह दायित्व बहुत बड़ा है। समाज भी हमारी ओर देख रहा है और समाज हमें एक स्वयंसेवक के रूप में देखता है। समाज की हमसे बड़ी-बड़ी अपेक्षाएँ रहें और उन अपेक्षाओं को पूर्ण करते हुए हम उनसे भी अधिक अच्छे प्रमाणित हों।
शाखा के विषय में नित्य करणीय बातें
संघ-शाखा के विषय में ध्यान रखें कि हमारी शाखा निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूर्ण करनेवाली हो
* शाखा नित्य लगनी चाहिए।
* वह निश्चित समय पर लगनी चाहिए।
* शाखा में भिन्न-भिन्न प्रकार के कार्यक्रम होने चाहिए।
* सब स्वयंसेवकों में परस्पर मेलजोल, स्नेह, प्रेम और शुद्धता का वातावरण हो।
* आपस में विचार-विनिमय, चर्चा आदि कर अपने अंत:करण में ध्येय साक्षात्कार नित्य अधिकाधिक सुस्पष्ट और बलवान करते रहने की हमारे अंदर प्रेरणा व इच्छा रहे।
* सामूहिक रूप से नित्य अपनी प्रार्थना का उच्चारण गंभीरता, श्रद्धा तथा उसका भाव समझकर करें।
* हमारे परम पवित्र प्रतीक के रूप में जो अपना भगवा ध्वज है, उसे मिलकर नम्रतापूर्वक प्रणाम करें।
* �‘शाखा विकिर’ के अनंतर बैठकर आपस में बातचीत करें। कौन आया, कौन नहीं आया, इसकी पूछताछ करें।
ऐसी अपनी दैनिक शाखा के विषय में नित्य करणीय बातें हैं।
शाखा में आनेवाले स्वयंसेवक बंधुओं में से कौन आए, कौन नहीं आए, इसकी जानकारी कर लें और जो नहीं आया हो, उसकी चिंता करें। वे क्यों नहीं आए इसका पता लगाने छोटी-छोटी टोलियों में सबके यहाँ जाएँ। कोई कठिनाई हो तो उसका निवारण करने का प्रयास करें। कठिनाई न हो, तो अकारण शाखा से अनुपस्थित रहना ठीक नहीं यह बात उसे भली-भाँति समझाएँ।
दूसरा यह कि नित्य अपने ध्येय का स्मरण करें। हिमालय से लेकर दक्षिणी महासागर के तट तक असंख्य पवित्र स्थान बिखरे हैं, उनका स्मरण करें। अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं, प्रत्येक स्थल से किसी महापराक्रमी पुरुष की कुछ न कुछ विशेषता जुड़ी हुई है, उसका स्मरण करें। उस महापुरुष की विशेषता में से जो गुण प्रकट होते हैं, उनका सब मिलकर स्मरण करें और उन्हें अपने में उतारने के प्रयास का निश्चय करें।
यह है हमारा नित्य का न्यूनतम कार्य। �‘साधारण स्वयंसेवक’ के रूप में इतना हमें करना ही चाहिए।