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सभी प्रदेशवासियो को नंदा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई, माँ नंदा देवी आप सभी पर अपनी दया दृष्टि बनाये रखे।नीति म...
19/09/2026

सभी प्रदेशवासियो को नंदा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई, माँ नंदा देवी आप सभी पर अपनी दया दृष्टि बनाये रखे।

नीति माणा घाटियों के कैलाशपुर, लाता और नीति गांवों में नंदा अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार नंदा देवी की अपनी मां के घर की यात्रा का जश्न मनाता है और नंदा अष्टमी पर उनकी मां के घर से औपचारिक विदाई के साथ समाप्त होता है। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत में नंदा देवी महोत्सव अत्यंत महत्वपूर्ण है।

माँ नंदा देवी के पीछे की कहानी:

पहाड़ियों की बेटी और भगवान शिव की पत्नी पार्वती को नंदा देवी के नाम से जाना जाता है। नंदा देवी उत्तराखंड की पहाड़ियों में सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक है। सभी प्रमुख स्थानों पर कई नंदा मंदिर स्थित हैं जिनमें नीति मन घाटियों में लाता, नीति और बद्रीनाथ शामिल हैं।

ऐसा माना जाता है कि नंदा देवी योग माया है, जो कि जेल में कृष्ण की जगह लेने वाली बच्ची थी और कंस के हाथों से बच गई थी और उसे चेतावनी दी थी कि देवकी के पुत्र कृष्ण पहले ही पैदा हो चुके हैं और वह कंस के आतंक को खत्म कर देंगे।

भाद्र मास की शुक्ल अष्टमी के अवसर पर नंदा देवी मेला तीन दिनों तक बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मेले की शुरूआत पंचमी तिथि से होती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मंदिर में दर्शन और मेला देखने के लिए आते रहते हैं।

नंदा देवी मेले का आयोजन कैसे होता है?

❀ नंदा देवी महोत्सव का आयोजन एक सप्ताह तक किया जाता है। पहले दिन मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति बनाने के लिए चुने गए कदली वृक्षों को लाने के लिए जुलूस निकाला जाता है।
❀ दूसरे दिन विधि-विधान से मूर्तियां बनाई जाती हैं और अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में देवी की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है और शाम को देवी की पूजा करने के साथ ही आरती की जाती है और रात में देवी को प्रसाद चढ़ाया जाता है।
❀ इसके बाद अष्टमी के दिन डोला को उठाया जाता है, सजाया जाता है और पूरे नैनीताल में भ्रमण कराया जाता है, जिसमें हजारों भक्त देवी मां के जयकारे लगाते हैं।
❀ अंत में, देवी की मूर्तियों को पाषाण देवी मंदिर के पास विसर्जित किया जाता है। (स्त्रोत - bhaktibharat.com)

कुमाऊँनी लोकपर्व खतड़वा की सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई ❄️🪾खतड़वा त्योहार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्...
17/09/2026

कुमाऊँनी लोकपर्व खतड़वा की सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई ❄️🪾

खतड़वा त्योहार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाने वाला प्रमुख लोकपर्व है जो पशुओं के उत्तम स्वास्थ्य और ऋतु परिवर्तन को समर्पित है। इसे वर्षाकाल की समाप्ति और शरद ऋतु की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन पशुओं के कमरे (गोठ) की साफ-सफाई की जाती है, उन्हें नहलाया जाता है और उन्हें पौष्टिक हरी घास खिलाई जाती है, साथ ही गोठ के लिए एक अग्नि की मसाल तैयार कर इसे पूरे कमरे (गोठ) में घुमाया जाता है। ऐसा करने से पशु को होने वाले रोगों का नाश होता है।

शाम या रात को दिन में बनाए गए पुतलों को गोबर के ढेर से निकालकर घुमाकर छत में फेंक दिया जाता है और लड़कियों की सहायता से खतड़वा जला दिया जाता है और कई प्रकार के नए अनाज उसमें डालकर उसकी परिक्रमा की जाती है। उसकी राख से सबके सिर पर तिलक लगाया जाता है, ऐसा माना जाता है कि खतड़वा और बूढ़ी के एक साथ जलने से पशुओं के सारे रोग भस्म हो जाते हैं।

विश्वकर्मा पूजा या विश्वकर्मा जयंती की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।श्री विश्वकर्मा पूजा हिंदू पञ्चाङ्ग की 'कन्...
17/09/2026

विश्वकर्मा पूजा या विश्वकर्मा जयंती की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।

श्री विश्वकर्मा पूजा हिंदू पञ्चाङ्ग की 'कन्या संक्रांति पर पड़ता है। भारत के अलावा नेपाल में भी एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है। भारत के कर्नाटक, असम, पश्चिमी बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, त्रिपुरा ओर उतर प्रदेश, आदि प्रदेशों में यह आम तौर पर हर साल 17- 18 सितंबर की ग्रेगोरियन तिथि को मनायी जाती है।

यह उत्सव प्रायः मुख्य तौर पर विश्वकर्मा के पांच पुत्रों मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ की संतानों द्वारा मनाई जाती है। यह कारखानों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में (प्रायः शॉप फ्लोर पर) पर विशेष रूप से मनाया जाता है। विश्वकर्मा को विश्व का निर्माता तथा देवताओं का वास्तुकार माना गया है।

#विश्वकर्मा_पूजा

💐💐गणपति बप्पा मौर्या, मंगल मूर्ति मौर्या🌺🌺सभी देशवासियो को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई, गजानन आप सभी की ...
14/09/2026

💐💐गणपति बप्पा मौर्या, मंगल मूर्ति मौर्या🌺🌺
सभी देशवासियो को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई, गजानन आप सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करे।

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है, यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र व कर्नाटका में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी, जिन्हे लंबोदर भी कहा जाता है, की पूजा की जाती है।

कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा का नौ दिनों तक पूजन किया जाता है।, बड़ी संख्या में आसपास के लोग दर्शन करने पहुँचते हैं। नौ दिन बाद गानों और बाजों के साथ गणेश प्रतिमा को किसी तालाब, महासागर इत्यादि जल में विसर्जित किया जाता है।

शिवपुराण में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश जी की अवतरण-तिथि बताया गया है जबकि गणेशपुराण के मत से यह गणेशावतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। गण + पति = गणपति। संस्कृतकोशानुसार ‘गण’ अर्थात पवित्रक। ‘पति’ अर्थात स्वामी, ‘गणपति’ अर्थात पवित्रकों के स्वामी। (स्त्रोत- wikipedia)

On this auspicious day, let's celebrate our teachers' dedication and passion toward their students. Happy Teachers' Day ...
05/09/2026

On this auspicious day, let's celebrate our teachers' dedication and passion toward their students. Happy Teachers' Day to all the teachers in the country.

Teachers' Day is a special day for the appreciation of teachers. It may include celebrations to honor them for their special contributions in a particular field or the community tone in education. The birth date of the second President of India, Sarvepalli Radhakrishnan, 5 September 1888, has been celebrated as Teacher's Day since 1962.

कृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।कृष्ण जन्माष्टमी, जिसे जन्माष्टमी व गोकुलाष्टमी के रूप में भी ...
04/09/2026

कृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।

कृष्ण जन्माष्टमी, जिसे जन्माष्टमी व गोकुलाष्टमी के रूप में भी जाना जाता है, एक वार्षिक हिंदू त्योहार है जो विष्णुजी के दशावतारों में से आठवें और चौबीस अवतारों में से बाईसवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्म के आनन्दोत्सव के लिये मनाया जाता है। यह हिंदू चंद्रमण वर्षपद के अनुसार, कृष्ण पक्ष (अंधेरे पखवाड़े) के आठवें दिन (अष्टमी) को भाद्रपद में मनाया जाता है।

यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है, विशेषकर हिन्दू धर्म की वैष्णव परम्परा में। भागवत पुराण (जैसे रास लीला वा कृष्ण लीला) के अनुसार कृष्ण के जीवन के नृत्य-नाटक की परम्परा, कृष्ण के जन्म के समय मध्यरात्रि में भक्ति गायन, उपवास (व्रत), रात्रि जागरण (रात्रि जागरण), और एक त्योहार (महोत्सव) अगले दिन जन्माष्टमी समारोह का एक भाग हैं।

कृष्ण देवकी और वासुदेव आनकदुंदुभी के पुत्र हैं और उनके जन्मदिन को हिंदुओं द्वारा जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है, विशेष रूप से गौड़ीय वैष्णववाद परम्परा के रूप में उन्हें भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व माना जाता है। जन्माष्टमी हिंदू परंपरा के अनुसार तब मनाई जाती है जब माना जाता है कि श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में भाद्रपद महीने के आठवें दिन की आधी रात को हुआ था।

श्री कृष्ण का जन्म अराजकता के क्षेत्र में हुआ था। यह एक ऐसा समय था जब उत्पीड़न बड़े पैमाने पर था, स्वतंत्रता से वंचित किया गया था, बुराई सब ओर थी, और जब उनके मामा राजा कंस द्वारा उनके जीवन के लिए संकट था।

#जन्माष्टमी #कृष्णजन्माष्टमी

सभी देशवासियो को रक्षाबंधन त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार श...
28/08/2026

सभी देशवासियो को रक्षाबंधन त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।

भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बन्धन बांधती है, जिसे राखी कहते हैं।

यह एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है।

रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए प्रार्थना करती है।

राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपने बहन को राखी के बदले कुछ उपहार देते है।

🌸 खुशियों, समृद्धि और एकता का पर्व — ओणम! 🌸ओणम केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, परिवार, परंपरा और सद्भावना का उत्सव है...
26/08/2026

🌸 खुशियों, समृद्धि और एकता का पर्व — ओणम! 🌸

ओणम केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, परिवार, परंपरा और सद्भावना का उत्सव है। केरल में मनाया जाने वाला यह प्रमुख पर्व राजा महाबली के स्वागत और उनकी समृद्धि व समानता से जुड़ी लोककथा की याद दिलाता है।
इस शुभ अवसर पर आपके जीवन में सुख, शांति और सफलता के रंग सदा खिले रहें।

आपको और आपके परिवार को ओणम की हार्दिक शुभकामनाएँ!

#ओणम

सभी उत्तराखंड वासियों को घी संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।उत्तराखंड राज्य अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए जाना...
17/08/2026

सभी उत्तराखंड वासियों को घी संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।

उत्तराखंड राज्य अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए जाना जाता है। ऐसे पारंपरिक त्योहारों में घी संक्रांति प्रसिद्ध है। घी संक्रांति को क्षेत्रीय भाषा में घी त्यार, घ्यू त्यार, घु संक्रांति और ओल्गिया भी कहा जाता है। घी संक्रांति के दिन घी खाने का विशेष महत्व है।

घी संक्रांति कब और कैसे मनाई जाती है:
◉ घी संक्रांति पर्व भादो मास की प्रथम तिथि को मनाया जाता है।
◉ लोग कटोरी में घी भरकर पहले भोग लगाते हैं, फिर उसके उपरांत विभिन्न प्रकार के ब्यंजन बनाकर भोग चढ़ाते हैं।
◉ घी संक्रांति का पर्व उत्तराखंड राज्य मैं धूम धाम से मनाया जाता है।

घी संक्रांति पर्व से जुड़ी लोक मान्यताएं
◉ इस दिन बेदू रोटी / बेड़वा रोटी (उरद की दाल से भरी हुई रोटी) को मक्खन या घी के साथ खाने का रिवाज है।
◉ इस पर्व पर कृषक वर्ग सबसे पहले ग्राम देवता को गेबे (अरबी पत्ते), मक्का, दही, घी, मक्खन आदि का ओलग अर्पित करते हैं।
◉ पंडितों, पुजारियों और रिश्तेदारों को भी ओलाग दिया जाता है।

#घीसंक्रांति #घी_संक्रांति

हरियाली तीज की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। भगवान शिव एवं माता पारवती आप सभी कर कृपा बरसाए।हरियाली तीज का उत्स...
15/08/2026

हरियाली तीज की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। भगवान शिव एवं माता पारवती आप सभी कर कृपा बरसाए।

हरियाली तीज का उत्सव श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है जो की महिलाओं का उत्सव है। सावन में जब सम्पूर्ण प्रकृति हरी ओढ़नी से आच्छादित होती है उस अवसर पर महिलाओं के मन मयूर नृत्य करने लगते हैं और वृक्ष की शाखाओं में झूले पड़ जाते हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत महत्व रखता है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों ओर हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। इस अवसर पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और आनन्द मनाती हैं।

इस दिन महिलायें अपने हाथों, कलाइयों और पैरों आदि पर विभिन्न कलात्मक रीति से मेंहदी रचाती हैं, इसलिए हम इसे मेहंदी पर्व भी कह सकते हैं। इस दिन सुहागिन महिलायों द्वारा मेहँदी रचाने के पश्चात् अपने कुल की वृद्ध महिलाओं से आशीर्वाद लेने की भी एक परम्परा है।

#हरियालीतीज

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