28/01/2026
एक #एसिड_अटैक
🙏दुनियां में हजारों लोग बेइंतहा दर्द में रह कर भी अपना जीवन जीते हैं,मगर हमें हमेशा खुद का दर्द ही सबसे बड़ा लगता है। अक्सर दर्द के साथ वही लोग जी पाते हैं जो मौन और धैर्य को अपना साथी बनाकर अपने हालात को सकारात्मक रूप दे देने की हिम्मत जीवनपर्यंत करते रहते हैं।
12 साल की उम्र में #एसिड अटैक, 6 साल अस्पताल, 36 सर्जरी लेकिन फिर भी हार नहीं मानी।
#वाराणसी की डॉ. मंगला कपूर की ज़िंदगी संघर्ष की मिसाल है। कम उम्र में हुए एसिड अटैक ने शरीर को गहरी चोट दी, समाज के ताने और आर्थिक तंगी ने रास्ता और मुश्किल बनाया। इलाज के लंबे दौर में वे कई बार टूट भी गईं, लेकिन शिक्षा और संगीत ने उन्हें फिर खड़ा किया।
मंगला कपूर ने BHU से ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और PhD पूरी की।
विश्वविद्यालय तक पैदल जाना पड़ा, अच्छे कपड़े तक नहीं थे लेकिन सपने बड़े थे।
बाद में वही छात्रा BHU में संगीत की प्रोफेसर बनीं और 30 साल तक सेवा दी (2019 में सेवानिवृत्ति)। ग्वालियर संगीत घराने से जुड़ी मंगला कपूर को संगीत और शिक्षा के क्षेत्र में कई सम्मान मिले।
🙏आज भी वे बिना फीस बच्चों को संगीत सिखाती हैं, #दिव्यांगों के साथ काम करती हैं और #समाज को लौटाने में विश्वास रखती हैं।
#संघर्ष, साधना और सेवा इसी यात्रा के लिए डॉ. मंगला कपूर को पद्म श्री 2026 के लिए चुना गया। यह कहानी हौसले की है, उम्मीद की है—और कभी न रुकने की सीख देती है।।
किसी के बारे में लिखना, पढ़ना और बोलना बहुत आसान है, मगर वो जिंदगी जीना बेहद मुश्किल रहा होता है।।