19/12/2021
आज हम बात करेंगे एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक विद्यार्थी की।
एक छोटे से गांव में एक बहुत ही गरीब परिवार के आंगन में जन्मा एक लड़का जिसके पिता दिनभर खेतों में मजदूरी किया करते थे और अपने परिवार का भरण पोषण करते थे।
धीरे-धीरे समय बीतता गया और अब उस लड़के कि उम्र करीब 5 साल पुरी हो चुकी थी।
अब उस लड़के कि भविष्य की चिंता उसके परिवार को होने लगी फिर उसके परिवार वालों ने उसका नामांकन अपने ही गांव के एक विद्यालय में करा दी।
अब वो लड़का अपने विद्यालय अपने नियत समय से जाता और विद्यालय में अच्छी तरह से पढ़ाई करता और वापस अपने घर आ जाता और इसी तरह समय बीतता गया और वो अपनी 5वीं कक्षा तक की पढ़ाई उसी विद्यालय में पूरा किया जहां उसके माता-पिता ने दाखिल कराया था और 5वीं कक्षा के बाद उसने फिर से अपना नामांकन अपने ही गांव के एक सरकारी विद्यालय में कराया।
जहां से उसने अपनी आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई अपने ही गांव में पूरा किया।
और इसके बाद वह अपनी आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांव के उच्च विद्यालय में अपना नामांकन करवाता है और वहां से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करता है।
और आगे की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पिता के साथ खेतों में काम करना शुरू कर देता है, लेकिन इस काम से उसके पिता खुश नहीं थे।
आखीर कहीं न कहीं उसके पिता ने यह उम्मीद लगा ली थी कि मेरा बेटा पढ़ लिख कर मुझसे बेहतर या एक बड़ा आदमी जरूर बनेगा।
अब वो निराश रहने लगे थे और वो हमेशा यही सोचते रहते थे कि आखीर अब मैं क्या करूं क्यों की वे कहीं न कहीं जानते थे, कि इसके आगे की पढ़ाई करा पाना मुझसे संभव नहीं है।
लेकिन फिर उन्होंने अपने अंदर एक हिम्मत जुटाई और उन्होंने सोचा कि चाहे जो हो मैं अपने बेटे को अपने जैसा नहीं बनने दुंगा और उन्होंने यह निर्णय लिया कि मैं अपने पुरे जीवन की कमाई इसके पढ़ाई में लगा दुंगा।
और उन्होंने अगले दिन ही अपने बेटे से कहा कि तु पढ़ाई करेगा खेतों में काम मैं करुंगा यह बात सुनकर उनका पुत्र सोचने लगा तभी उसके पिता ने कहा कि तुम ज्यादा मत सोचो तुम बस अपनी आगे की पढ़ाई के बारे में सोचो बेटे का मन यह बात मानने को तैयार नहीं था लेकिन फिर भी वो जैसे-तैसे अपने मन को शांत कर अपने पिता की बातों को मान कर आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए तैयार हुआ।
और वो अगले ही दिन अपने गांव से करीब 25-30KM दुर एक छोटे से शहर में पढ़ाई करने का निर्णय लिया और वो अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए रोज शुबह अपने पिता के दहेज में मिली साइकिल से पढ़ने जाने लगा।
कुछ समय बीता उसने कुछ परीक्षाएं दी लेकिन उसके हाथ सिर्फ असफलता ही लगी बार-बार असफल होने के कारण उस लड़के और उसके पिता दोनों दोनों ही बड़े निराश रहने लगे थे।
उसके गांव बालों ने भी उस लड़के और उसके पिता को ताने मारना शुरू कर दिया था अब उस लड़के के पिता की भी तबीयत बिगड़ने लगी इस कारण से उसके पिता खेतों में भी कम नहीं करने जाने लगे थे इस कारण से उसके घर की भी
स्थिति बिगड़ने लगी थी अब वो लड़का उस रास्ते पर खड़ा था जहां से उसकी सिर्फ एक गलती उसके या उसके परिवार की जीवन बर्बाद कर सकती थी।
अब वह सोचने लगा कि आखीर करें तो क्या बहुत सोचने के बाद भी उसे कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था।
अचानक उसके पिता के कुछ कागजी काम आ गया जो कि ब्लॉक का था वो अपने पिता के काम से ब्लॉक जाता है लेकिन पिता के काम में कुछ समय लगने के कारण वो एक जगह पर बैठ जाता है और फिर वो अपनी घर की ही बातें सोचने लगता है।
तभी उसकी नज़र एक पोलीयो की दबाई पिलाने वाली पर पड़ी उसके दिमाग में भी एक बात आई कि अगर मुझे भी एक काम मिल जाए तो सायद मैं भी अपने परिवार की कुछ मदद कर सकूंगा।
अब उसने इस नौकरी के बारे में सोचने लगा और वो चाहता था, की ए नौकरी मुझे मिले अब वो यह नौकरी पाने की चाहत में लग गया।
बहुत लोगों से उसने सिफारिश कराई और अंत में उसे यह नौकरी मिल गई।
अब वो दिन भर कई गांवों में घूम कर पोलियो की दवाईयां देना शुरू कर दिया अब उसने थोड़े से पैसा कमाना शुरू कर दिया था और अपने परिवार की देखभाल भी करना शुरू कर दिया था।
अब कहीं न कहीं उसके परिवार की छोटी मोटी जरूरतें पूरी होने लगी थी, लेकिन फिर भी वो लड़का खुश नहीं था वो बस यही सोचता था कि क्या मेरी सालों की मेहनत का कोई मोल नहीं उसके मन में हमेशा यह बात चलती रहती थी।
फिर उसने सोचा कि क्यों न फिर से पढ़ाई भी सुरू करा जाए लेकिन फिर उसने सोचा कि क्या मैं अब अपनी पढ़ाई और नौकरी दोनों कर पाऊंगा अब फिर से वो गहरी सोच में पड़ गया कि अगर मैं फिर से पढ़ाई शुरू कर काम छोड़ता हूं तो सायद फिर से मेरे परिवार कि हालत बिगड़ जाएगी।
अंत में उसने यह निर्णय लिया कि मैं नौकरी नहीं छोड़ सकता लेकिन क्या मैं अपने सपने को छोड़ दु फिर उसने सोचा कि नहीं ना हीं मैं यह नौकरी छोडुंगा और ना हीं अपने सपने को टुटने दुंगा अब वो दिन भर काम करता और रातों में थोड़ी सी नींद लेने के बाद वो पढ़ाई करता रहा यह सील-सीला कई दिनों तक लगातार चलता रहा।
फिर उसने एक दिन अखबार में दरोगा भर्ती का विज्ञापन देखा और उसने उसका फार्म भर दिया और वो कड़ी मेहनत में लग गया और फिर उसने उसकी परीक्षा दी और वो सफल भी हुआ इस सफलता की खबर किसी को भी नहीं लगने दी उसने बड़े ही आराम से अपनी आगे की तौयारी बरकरार रखी।
फिर उसने अपनी शारीरिक दक्षता भी दी और वो सफल हुआ तब तक इसकी खबर उसने किसी को नहीं लगने दी और वो अपने काम में लगा रहा तभी उसकी किस्मत ने करवट बदली और वो पल आया जीसका उसे सालों इंतजार था।
अचानक उसके पिता खेतों से लौट रहे थे तभी डाकीया उनके पास आकर रुका और कहा कि भाया मुंह मिठा कराओ ये बात सुनकर लड़के के पिता सोच में पड़ गये और उन्होंने ने उससे पूछा कि किस बात की मिठाई मांग रहे हो तभी डाकीया ने कहा कि तुम तो ऐसे बात कर रहे हो जैसे तुम्हें कुछ मालूम हीं ना हो यह बात कह कर डाकिया ने वो पत्र उसके हाथों में देकर चल दिया अब उसके पिता जब तक उनका बेटा घर नहीं आता तब तक बो चिंतित थे।
अब उसके पिता कि चिंता बस कुछ ही समय में ख़त्म होने वाली थी क्योंकि अब समय हो चुका था उनके बेटे के आने का उनका बेटा घर वापस आया तभी उसके पिता तुरंत अपने लड़के के पास गए और वो पत्र उसे देकर उन्होंने ने कहा कि यह पत्र सुबह डाकिया दे गया है।
जरा इसे पढ़कर बताओ कि इसमें क्या लिखा है, लड़का वो पत्र लेता है और वो उसे खोल कर पढ़ता है तो उसकी आंखें खुली की खुली रह जाती है, उसके पिता उसे उस हालत में देख चिंतित हो जाते हैं और वो उससे उस पत्र के बारे में जानने की कोशिश करने लगा जाते हैं।
उसके पिता के कई बार पूछने पर लड़का जवाब देता है कि पिता जी मैं दरोगा बन गया उसके पिता यह बात सुनकर मानो फुले ने समा रहे थे उनकी खुशीयों का कोई ठिकाना नहीं था उन्होंने अपने बेटे को गले से लगा लिया और रोने लगे।
तभी उनका बेटा उनको चुप करते हुए उन्हें कह की बस पिता जी आपकी मां की हमारे परिवार कि दुःख बस यही तक था आज उनका परिवार एक सुखी और समृद्ध परिवार है।
तो बस दोस्तों आज के इस लेख में बस इतना ही उम्मीद करता हूं कि आपको यह पसंद आई होगी अगर मेरा यह लेख आपको पसंद आई हो तो इसे Like👍 करें और इस लेख में आपको कोई त्रुटी दिखी हो तो बतायें मैं उसे अपने अगले लेख में सुधारने की कोशिश करूंगा।
जय हिन्द, वन्दे मतरम🙏🙏🙏🙏
✍️✍️✍️ Saurav Kumar