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तथ्यों और (RTI) से प्राप्त सूचनाओं से
सच को बेनक़ाब करने वाले सजग नागरिक. वीडियो में व्यक्त किए गए सभी विचार
वक्ता के निजी हैं
इनका हमारे पेज की राय या रुख़ से
कोई संबंध नहीं है।
तथ्यात्मक स्पष्टीकरण हेतु संपर्क करें:[email protected]

फतेहपुर में चेहरा बदला, ‘कुर्सी’ बदली... पर बदहाली का मंजर नही, खुले पड़े नाले दे रहे हादसों को दावत..डिप्टी ऑफिस से धान...
11/10/2026

फतेहपुर में चेहरा बदला, ‘कुर्सी’ बदली... पर बदहाली का मंजर नही, खुले पड़े नाले दे रहे हादसों को दावत..

डिप्टी ऑफिस से धानुका अस्पताल तक तहसीलदार निवास स्थान के पास, जेल कारागृह, मोहल्ला व्यापारियान के पास और cks अस्पताल के सामने सहित शहर में कई जगहों पर बिना फेरो कवर खुले पड़े नाले..

टीम खोल पोल ग्राउंड रिपोर्ट

फतेहपुर (सीकर)
​फतेहपुर। निकाय चुनाव का शोर थमा, सत्ता का बदलाव हुआ और नए हुक्मरानों ने मखमली कुर्सियों पर अपना कब्ज़ा भी जमा लिया। लेकिन फतेहपुर की अवाम की बदकिस्मती देखिए कि चेहरे बदल गए, पर हादसों के मुहाने और चौड़े होते जा रहे हैं।

चुनाव के वक्त विकास की गंगा बहाने के कसीदे पढ़ने वाले तंत्र की बदइंतजामी का आलम यह है कि पूरे शहर में जिंदगी हर कदम पर मौत से नज़दीकियां बढ़ा रही है। 'जयपुर गुलाबी टाइम्स' की पड़ताल में कैद तस्वीरें चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि हुकूमत बदलने के बाद भी आमजन की नियति में लिखा संताप और खौफ रत्ती भर कम नहीं हुआ है।

*वीआईपी दफ़्तरों की चौखट पर खुला पड़ा मौत का फरमान

​अत्यंत शर्मनाक पहलू यह है कि यह बदहाली किसी गुमनाम गली-कूचे की नहीं, बल्कि शहर के ताकतवर आलाधिकारियों की नाक के नीचे पसरी है। जहां से कानून और सुरक्षा की दुहाई दी जाती है, उसी डिप्टी ऑफिस के ठीक आगे नाला बिना फेरो कवर के खुला पड़ा हादसों को दावत दे रहा है। शहर की ज़मीन-जायदाद का हिसाब रखने वाले तहसीलदार साहब के निवास के पास खुला पड़ा नाला जेल कारागृह के पास खुला पड़ा नाला प्रशासनिक अकर्मण्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण पेश कर रहा है। मोहल्ला व्यापारियान के पास सर्विस रोड पर कारोबारी और राहगीर हर लम्हा अपनी जान हथेली पर रखकर गुजरने को मजबूर हैं, तो वहीं दूसरी ओर सीकेएस अस्पताल के ठीक सामने बने जानलेवा गड्ढे तंत्र की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा हैं— मंडावा रोड़ पर तीन कोठी के पास खुले पड़े नाले ने तो कई वाहनों को अपने अंदर समा भी लिया हैं। जहां इंसान जिंदगी की आस लेकर पहुंचता है, वहां ये गड्ढे उसे सीधे हादसों की आगोश में धकेलने को आमादा दिखते हैं।

​क्या नगर पालिका के नए चेहरे और जिम्मेदार अधिकारी किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार कर रहे हैं?
टैक्स चुकाने वाली जनता अब यह पूछने पर मजबूर है कि दफ़्तरों और आशियानों के बाहर पसरे इस मौत के जाल को ढकने के लिए आखिर किस बड़े हादसे की मुहर चाहिए?
यदि डिप्टी ऑफिस और अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों की यह दुर्दशा है, तो दूर-दराज की आम बस्तियों का आलम सहज ही आंका जा सकता है। फतेहपुर की जनता अब इस प्रशासनिक उदासीनता को मूकदर्शक बनकर बर्दाश्त नहीं करेगी; यदि इन खड्डों और खुले पड़े नालों को अविलंब दुरुस्त न किया गया, तो सत्ता के गलियारों तक जनता के तीखे जनाक्रोश की गूंज पहुंचना तय है।

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खबर का असर ऐसा हुआ कि रात की लाइटें दिन में ही जलने लगीं! 😂खबर प्रकाशित होते ही असर तो हुआ, लेकिन जरा उल्टा!हाईवे पर लगी...
11/10/2026

खबर का असर ऐसा हुआ कि रात की लाइटें दिन में ही जलने लगीं! 😂

खबर प्रकाशित होते ही असर तो हुआ, लेकिन जरा उल्टा!
हाईवे पर लगी लाइटें रात के अंधेरे में तो जलती नहीं थीं, लेकिन खबर सामने आने के बाद अब दिन में ही जगमगाने लगी हैं।

लगता है जिम्मेदारों ने समस्या तो सुनी, मगर समय का गणित ही उलट दिया!

जनता को रात में रोशनी चाहिए थी, साहब ने दिन में ही उजाला कर दिया।

वाह रे व्यवस्था! अब सवाल यह है कि रात का अंधेरा दूर होगा या दिन में बिजली फूंककर ही जिम्मेदारी निभाई जाएगी?

खबर का असर हुआ जरूर, लेकिन सुधार की जगह सिस्टम ने व्यंग्य का नया अध्याय खोल दिया!
अब दिन में ही जलने लगी हैं हाई वे की लाइटे

बिजली निगम का बड़ा खेल..
11/10/2026

बिजली निगम का बड़ा खेल..

नाबालिक बाइक सवार सावधान..
11/10/2026

नाबालिक बाइक सवार सावधान..

11/10/2026

दिल्ली..? Part 1

10/10/2026

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में सड़क किनारे कार खड़ी करने को लेकर महिला इंस्पेक्टर (RPS) अंजू यादव और अधिवक्ता बाबूलाल बागरिया के बीच बहस हो गई।
विवाद इतना बढ़ गया कि महिला अधिकारी ने वकील को थप्पड़ जड़ दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।



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गड़बड़झाला..? बिजली निगम में 'काल-यात्रा': 2022 की चोरी पर 2017 की आरटीआई रिपोर्ट का 'जादुई लेप', फाइल दबाने का अनूठा खे...
10/10/2026

गड़बड़झाला..? बिजली निगम में 'काल-यात्रा': 2022 की चोरी पर 2017 की आरटीआई रिपोर्ट का 'जादुई लेप', फाइल दबाने का अनूठा खेल!

टाइम मशीन या टाइम पास? फतेहपुर में 2022 का चोरी मामला, आरटीआई में 2017 की एफआईआर थमाकर दी जा रही 'अनोखी' सफाई!

तत्कालीन ए ई एन ने स्वीकार किया था चोरी हुई हैं। कानूनी कार्रवाई करेंगे आखिर आज तक क्यों नही हुई एफ आई आर दर्ज..?

गड़बड़झाला या लापरवाही..?

क्या सीएमडी और एमडी इस मामले में दूध का दूध पानी का पानी करेंगे?

बिजली निगम के इस बड़े खेल को समझना हैं तो इस रिपोर्ट को पढ़िए

टीम खोल पोल विशेष रिपोर्ट

​फतेहपुर।(सीकर) विद्युत निगम के फतेहपुर सिटी कार्यालय में इन दिनों 'विज्ञान और समय' को चुनौती देने वाला एक अद्भुत चमत्कार देखने को मिल रहा है। मामला भेड़ फार्म, बीहड़ क्षेत्र फतेहपुर और सालासर रोड पर कथित तौर पर भारी मात्रा में गायब हुई डेड लाइनों के भारी भरकम डॉग वायर तारों से जुड़ा है। मामला वर्ष 2022 का है, जब ऑन-कैमरा दिए गए बयानों में तत्कालीन सहायक अभियंता (एईएन) ने खुले दिल से स्वीकार किया था कि लाइनों से तार गायब हुए हैं और नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मगर आज तक आखिर कानूनी कार्रवाई क्यों नही हुई।।

​लेकिन, जब इस 'कानूनी कार्रवाई' की हकीकत जानने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) का सहारा लिया गया, तो जो जवाब सामने आया, उसने प्रशासनिक दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों को भी हैरत में डाल दिया है!

आरटीआई में 'टाइम मशीन' का कमाल!

​अमूमन सरकारी विभागों में आरटीआई आवेदनों को टालने के लिए कुछ मामलों में 'सूचना उपलब्ध नहीं है' का सीधा-साधा बहाना बनाया जाता है। लेकिन फतेहपुर सिटी शाखा के होनहार इंजीनियरों ने इनकार करने की जहमत ही नहीं उठाई। उन्होंने एक कदम और आगे बढ़कर 'टाइम मशीन' का अनोखा इंजीनियरिंग तरीका इस्तेमाल किया हैं!

​जब-जब वर्ष 2022 वाली तार चोरी की एफआईआर की प्रति मांगी गई, तब-तब निगम के जिम्मेदारों ने मुस्कुराते हुए वर्ष 2017 की एक पुरानी एफआईआर की कॉपी लिफाफे में बंद करके आवेदनकर्ता को भेज दी हैं! सूत्रों की माने तो जांच टीमों को भी यही पुरानी एफ आई आर सौंपकर मामले को गोलमाल कर दिया गया था।

यानी घटना 2022 की और जवाब 2017 का! इसे ही कहते हैं—'ना भी नहीं कहा और काम भी नहीं किया!' आमजन अब यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या 2017 की एफआईआर में इतना जादुई असर है कि वह 5 साल बाद होने वाली हर चोरी पर अपने आप लागू हो जाती है?

दो घंटे की निष्पक्ष जांच और 'अदृश्य शक्तियों' का खौफ!

​जब इस पूरे मामले वर्ष 2022 में *जयपुर गुलाबी टाइम्स के आबिद खान दाडून्दा* ने एक बड़े स्टिंग के तहत खबरो को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, तो तत्कालीन मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) गिरीश पारीक ने अपने एक कड़क आदेश से तुरंत जांच टीम का गठन कर जांच टीम को फतेहपुर सिटी शाखा भेजा गया था।

इस टीम में निगम के दो बेदाग और बेहद कड़क अधिकारी— पी. एस. ठाक्कन और मूलचंद वर्मा (तत्कालीन एक्सईएन) शामिल थे।
​सूत्रों की मानें तो निगम के गलियारों में इन दोनों ही अधिकारियों की साख 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने वाले निष्पक्ष अफसरों की रही है, जो किसी भी दबाव या पक्षपात के आगे नहीं झुकते हैं। लेकिन कहानी में असली और हैरतअंगेज मोड़ तब आया जब इन दोनों अधिकारियों ने आबिद खान से मजबूत सबूत लिए और फतेहपुर सिटी शाखा में पहुँचकर रिकॉर्ड खंगालना शुरू ही किया था कि कथित तौर पर 'अदृश्य शक्तियों' में हड़कंप मच गया!
​महज दो घंटे की जांच के बाद ही इन दोनों निष्पक्ष अधिकारियों को इस जांच से हटाने का फरमान भी जारी हो गया था। और आनन-फानन में निगम ने ही एक नई समिति का गठन कर दिया गया। गलियारों में अब यह चुटकी ली जा रही है कि क्या वह नई कमिटी सिर्फ कागजी खानापूर्ति और 'जातीय व प्रशासनिक संतुलन' बिठाने के लिए बनाई गई थी?
और प्रशासनिक हलकों में अब यह चर्चा बेहद गर्म है कि क्या ठाक्कन और वर्मा की बेदाग कार्यशैली ही उनके हटने की वजह बन गई? क्या नई कमिटी सिर्फ कागजी खानापूर्ति और पसंदीदा समीकरण बिठाने के लिए बनाई गई थी? सूत्रों की माने तो नए जांच अधिकारियों को भी पुरानी एफ आई आर की कॉपी सौंपकर मामले को दबा दिया गया था।

2017 बनाम 2022: एफ आई आर की असली गणित क्या है..?

​निगम की फाइलों में दर्ज सच यह है कि वर्ष 2017 में बीकानेर रोड (मयूर होटल के सामने) हुई तार चोरी के मामले में तत्कालीन जेईएन मुकेश कुमार टेलर ने बाकायदा एफआईआर दर्ज करवाई थी। वह मामला बिल्कुल अलग स्थान, अलग समय और अलग परिस्थितियों और अलग लोकेशन का था। ​
अब सवाल यह उठता है:
​क्या 2017 में दर्ज हुई एफआईआर का इस्तेमाल 2022 में हुई कथित चोरी पर पर्दा डालने के लिए एक 'सार्वभौमिक ढाल' की तरह किया जा रहा है?

​जब 2022 में तत्कालीन एईएन साहब ने खुद कैमरे के सामने यह माना था कि चोरी हुई है, तो फिर 2022 के मामले में असल एफआईआर दर्ज कराने से हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं? आखिर ऐसी क्या वजह हैं।

​RTI में 2022 के बदले 2017 का कागज थमाना महज एक 'प्रशासनिक चूक' है या फिर सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान को दबाने की सोची-समझी कागजी जादूगरी चाल?

​कैमरा सच बोलता है, मगर फाइलें मौन क्यों हैं?
​सार्वजनिक संपत्ति के गायब होने पर कार्रवाई करने के बजाय पुरानी फाइलों का 'लेप' लगाकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की यह कला वाकई काबिले-तारीफ है। लेकिन सवाल आज भी अपनी जगह कायम है—क्या 2022 में भेड़ फार्म बीहड़ क्षेत्र और सालासर रोड से गायब हुए तारों का हिसाब कभी सार्वजनिक होगा, या फिर हर सवाल के जवाब में 2017 का वही पुराना पन्ना थमा दिया जाएगा?

​यह मामला अब सिर्फ तारों की चोरी का नहीं, बल्कि निष्पक्ष अधिकारियों को जांच से हटाने, आरटीआई और जन-जवाबदेही के साथ हो रहे इस अनूठे 'कागजी खेल' पर लगे बड़े प्रश्नचिह्न का है, जिसका पारदर्शी जवाब विद्युत निगम के उच्च अधिकारियों को देना ही होगा।
क्या प्रकाशित होने के बाद सीएमडी और एमडी इस मामले में दूध का दूध पानी का पानी करेंगे ये देखना होगा।।

इनका क्या कहना हैं।👇🏼

काफी पुरानी बाते हैं। फतेहपुर में तारो की चोरी होना और उसके बाद एफआईआर दर्ज नही होना की ये खबर पढ़ने के बाद मेने दो जांच अधिकारी एक्सईएन लेवल के नियुक्त किए थे जिनको आदेश मेने ही दिए थे। जिनमे पीएस ठाक्कन जी और मूलचंद वर्मा जी थे दोनो को फतेहपुर मेने ही भेजा था जांच शुरू ही हुई थी कि ऊपर से आदेश आ गया और दूसरे जांच अधिकारी एमडी ऑफिस से लगा दिए गए थे और इन दोनो को हटा दिया गया था। मुझे अच्छे से याद हैं-- गिरिस पारीक, तत्कालीन चीफ इंजीनियर (संभागीय मुख्य अभियंता) बिजली विभाग

हा मैं और मूल चंद जी जांच करने गए थे आप से भी काफी एविडेंस लिए थे आपके घर भी आए थे आप से एविडेंस लेने के लिए, बाद में हम फतेहपुर सिटी ऑफिस गए तो वहां जाते ही हमने रिकॉर्ड चेक करना शुरू ही किया था कि अचानक से जांच रोकने का मेसेज आ गया था और हम वापिस आ गए पता चला कि दूसरी जांच कमिटी बना दी गई हैं। और हमे हटा दिया गया हैं --
पी एस ठाक्कन तत्कालीन जांच अधिकारी एक्सईएन बिजली विभाग


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फतेहपुर में कोतवाल का कड़ा एक्शन बाइकर्स  में मची खलबली, 10 दोपहिया वाहन जब्त!पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से नाबालिग बाइ...
10/10/2026

फतेहपुर में कोतवाल का कड़ा एक्शन बाइकर्स में मची खलबली, 10 दोपहिया वाहन जब्त!

पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से नाबालिग बाइकर्स में भगदड़,

खबर का असर
टीम खोल पोल

​फतेहपुर / सीकर।
शहर की सड़कों पर फर्राटा भरते नाबालिग बाइकर्स, स्कूटी सवार और देर रात तक पबजी जैसे ऑनलाइन गेम में डूबी युवाओं की फौज को लेकर 'जयपुर गुलाबी टाइम्स' ने पिछले दिनों एक खोजी व प्रमुख खबर प्रकाशित की थी। हमारी पड़ताल का असर ऐसा हुआ कि पुलिस महकमे ने कानूनी चाबुक चलाना शुरू कर दिया हैं। और कोतवाली थाना फतेहपुर के कोतवाल महेंद्र कुमार मीणा ने कानून का डंडा चलाते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है।

उच्च अधिकारियों के कड़े निर्देश पर पुलिस की कार्रवाई

​जयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईपीएस) राहुल प्रकाश एवं सीकर पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) संजीव नैन के निर्देशानुसार जिले में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. तेजपाल सिंह (आरपीएस) तथा वृत्त अधिकारी (आरपीएस) नोपाराम भाकर के सुपरविजन में फतेहपुर कोतवाली पुलिस के कोतवाल महेंद्र मीणा ने शहर में ताबतोड़ अभियान छेड़ दिया है।

​इसी कड़ी में आज (10 अक्टूबर 2026) कोतवाली पुलिस ने कस्बे में बड़ी कार्रवाई करते हुए नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन चलाते पाए जाने पर एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत 10 दोपहिया वाहनों को जब्त कर लिया।

​​पुलिस ने अभियान के दौरान नाबालिग वाहन चालकों को यातायात नियमों की जानकारी दी और आमजन से अपील की कि वे नाबालिग बच्चों को वाहन न चलाने दें। पुलिस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नाबालिग वाहन चलाते पकड़े गए, तो वाहन स्वामी और अभिभावकों के विरुद्ध भी सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम:
​इस सफल व त्वरित कार्रवाई को अंजाम देने वाली गठित टीम में शामिल रहे:
​महेंद्र कुमार मीणा थानाधिकारी, पुलिस थाना कोतवाली फतेहपुर
​राजेश कुमार (स.उ.नि.) -
​सूर्यप्रकाश (कानि.)
​शुभम (कानि.)
​श्री महेन्द्र (कानि.)
पुलिस थाना कोतवाली फतेहपुर

​
क्या बोले कोतवाल�

"सड़क हादसों पर अंकुश लगाना और कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी पहली प्राथमिकता है। अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों को गाड़ियां सौंपकर उनकी और दूसरों की जान खतरे में न डालें। नियम तोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा, यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।" बच्चो को ऑनलाइन गेम से दूर रखे
— *महेंद्र कुमार (थानाधिकारी, पुलिस थाना कोतवाली फतेहपुर)*

बड़ा सवाल:
​'जयपुर गुलाबी टाइम्स' की पड़ताल के बाद नाबालिग वाहन चालकों पर तो पुलिस का चाबुक चल गया है, लेकिन अब देखना यह होगा कि क्या कोतवाल महेंद्र कुमार मीणा देर रात तक ऑनलाइन गेम खेलकर माहौल खराब करने वालों और उन्हें शह देने वालों पर भी इसी तरह सख्त कानूनी चाबुक चलाएंगे?


Rajasthan Police
Sikar Police

10/10/2026

ज्ञानेश कुमार के साथ मोदी जी का इस्तीफा मांगते युवा

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