15/08/2025
प्रिय देशवासियों,
15 अगस्त केवल एक तारीख़ नहीं, बल्कि करोड़ों बहुजन, श्रमिक, किसानों और क्रांतिकारियों के संघर्ष, बलिदान और सपनों का प्रतीक है। तिरंगा केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं — यह हमारे संविधान में लिखे न्याय, समानता और बंधुत्व की शपथ है।
लेकिन क्या हम सच में आज़ाद हैं?
जब देश में कोई बच्चा जाति के नाम पर स्कूल में पीटा जाता है…
जब किसी को मंदिर में घुसने से रोका जाता है…
जब बेटियों को बराबरी का हक़ नहीं मिलता…
तो हमें याद रखना होगा — यह लड़ाई अभी अधूरी है।
आज़ादी का असली अर्थ तभी पूरा होगा, जब न जाति रहेगी, न छुआछूत, न भेदभाव; जब शिक्षा, रोज़गार और अवसर सबके लिए बराबर होंगे; जब संविधान का हर शब्द धरातल पर उतरेगा।
इस स्वतंत्रता दिवस, आइए हम सब शपथ लें —
कि हम किसी भी अन्याय, भेदभाव और पाखंड के सामने चुप नहीं रहेंगे।
हम मिलकर एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और भेदभाव-मुक्त भारत बनाएँगे।
जय भीम! जय भारत! जय संविधान!
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