Reina Ledner

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प्रिय पाठको, अपनी कहानी में मैं अपनी सगी भाभी की सच्ची दास्ताँ सुना रहा हूँ !आप सबको सबसे पहले मैं अपना परिचय देना चाहता...
04/01/2026

प्रिय पाठको, अपनी कहानी में मैं अपनी सगी भाभी की सच्ची दास्ताँ सुना रहा हूँ !आप सबको सबसे पहले मैं अपना परिचय देना चाहता हूँ।मेरा नाम विजय अग्रवाल है और मैं हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) के एक गाँव में रहता हूँ, मेरी अभी तक शादी नहीं हुई है। मुझे इस बात का पक्का यक़ीन है जिसे भी मैंने किया है वो पूरी तरह सन्तुष्ट हुई है।मेरी इस कहानी की नायिका की बात करता हूँ।जिन भाभी की ठुकाई मैंने की है, उनकी उम्र 24 साल की है वो काफ़ी कामुक और आकर्षक माल हैं।उनका नाम सरिता है, इतनी ख़ूबसूरत हैं कि जो भी एक बार उन्हें देख ले.. तो बस उनका दीवाना हो जाए।उनका 36-26-36 का फ़िगर बहुत ही मस्त है।मेरे भैया की नई-नई शादी हुई थी।

भाभी को जब मैंने पहली बार देखा, तब से ही मैं ये सोचने लगा थी कि मैं उन भाभी की ठुकाई एक बार ज़रूर तो जरूर करूँगा और उनके नाम से मारा करता था।
शादी के कुछ दिनों बाद ही भैया को ऑफिस के काम से एक महीने के लिए अमेरिका जाना पड़ा।
तब भैया ने भाभी से कहा- तू क्यों परेशान होती है.. तेरी सभी ज़रूरतों को तेरा यह देवर पूरा करेगा।
काश उस वक्त वो समझे होते कि सभी ज़रूरतों को मैं पूरा कर दूँगा यानि कि भैया ने सोचा ही नहीं था कि मैं उनकी बीवी को करूंगा ।
बस वो दिन आया और भैया चले गए अमेरिका।
अभी 4-5 दिन ही बीते थे कि भाभी को बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मैं तो उन्हें करने का बहुत दिनों से प्लान बना रहा था।
एक दिन मैं अपने कमरे में सोया हुआ था कि भाभी मुझे उठाने के लिए आईं।
मैं सिर्फ़ अपने अंडरवियर में था।
जब भाभी मुझे उठाने के लिए आईं तब उनकी नज़र मेरे तने हुए सामान पर पड़ी।
मैं भी जानबूझ कर वैसा ही पड़ा रहा।
ख़ैर भाभी ने देखा और शरमा कर चली गईं।
अगले दिन भी यही हुआ।
अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
इसके अगले दिन जब भाभी मुझे उठाने के लिए आईं तब मैंने उन्हें मेरे पास खींच लिया और उनके होंठों पर एक चुम्बन जड़ दिया।
भाभी भी 8-10 दिनों से भूखी थीं।
उन्होंने भी सहयोग किया।
फिर मैंने धीरे-धीरे उनके चेहरे पर से जाते हुए उनकी गर्दन पर चुम्बन करना शुरू किया।
भाभी और गरम होती गईं।
मैंने धीरे-धीरे उनके गोलाइयों को दबाया और उनका ब्लाउज उतार दिया।
फिर उनकी साड़ी खोल दी।
अब भाभी सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में रह गई थीं।
मैं उनके होंठों पर चुम्बन किए जा रहा था और उनके संतरो को दबा रहा था।
फिर मैंने उनकी ब्रा भी खोल दी।
अब उनके बड़े-बड़े उभार मेरे सामने सर उठाए खड़े थे।
मैं पागल हुए जा रहा था।
उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगी और मेरा सहलाने लगीं।
मुझे लगा मैं सपना देख रहा हूँ।
उसने मेरे कपड़े उतारे।
मैं भी नंगा हो गया फिर उसने मेरा सामान अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।
इससे पहले किसी औरत ने मेरा नहीं चूसा था।

मैंने सिसकारी भरते हुए कहा- भाभी… मजा आ रहा है!
फिर वह मुझे करने के लिए कहने लगी और मेरे नीचे लेट गई।
अब मेरी भाभी की ठुकाई का वक्त आ गया था।
मैंने भाभी की गुफा पर सामान रख कर धक्का मारा।
उनकी गुफा बहुत ज़्यादा ठुकि हुई थी, मेरा एक बार में पूरा खा गई।

उन्होंने कहा- आह.. मज़ा आ गया.. और ज़ोर से पेलो ..
मैं अपना पूरा बाहर निकालता और एकदम से डाल देता।
वो भी नीचे से धक्के मार रही थी और कह रही थी- हाय…मेरे..विज्जू.. ज़ोर से .. मज़ा आ रहा है..
धकापेल धकापेल भाभी की ठुकाई होने लगी।
फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों झड़ गए उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और कहा- मेरे ऊपर ही लेटे रहो।
फिर क़रीब 30 मिनट तक हम मस्ती करते रहे, फिर उसने मेरा सामान अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
मैं उसकी गुफा में ऊँगली डाल कर उसे मज़ा दे रहा था।
कुछ ही पलों के बाद मैं फिर से तैयार हो गया था।
अब की बार उसने मुझसे कहा- मुझे पीछे से ठुकना अच्छा लगता है… तुम मुझे पीछे से करो ।
मैंने उसके हिप को फैला कर उसकी उठी हुई गुफा में अपना साढ़े सात इन्ची सामान फंसा कर भाभी की ठुकाई की, कुतिया की तरह से तरह से उन्हें किया ।

अबकी बार वो जल्दी झड़ गई, मेरा अभी भी मस्त था।
मैं उसे धकापेल कर रहा था।
मेरा पानी नहीं निकल रहा था।
वो तड़फ कर कह रही थी- बस विज्जू.. अब बस करो मेरी टाँगें दुख रही हैं।
मैंने कहा- थोड़ी देर.. और..मेरी जान।
मैं धक्के मार रहा था..
वो चिल्ला रही थी।
मैं पीछे से कुत्ते जैसा लग कर भाभी की ठुकाई किये जा रहा था और उनकी संतरे हवा में झूल रही थीं।

मैंने अपने हाथों में उसकी संतरो को पकड़ कर खूब मसला।
उसके संतरो को भी मैं खूब दबा रहा था।
भाभी के मुँह से मादक मस्ती की सिसकारियाँ निकल रही थीं।
खूब मजा आ रहा है.’
तभी मेरे सामान ने उसकी गुफा की गर्मी से उन पर जुल्म कर दिया और मैं तेजी पेलने लगा..
तभी उनका पानी निकल गया।
पानी से लबालब गुफा से ‘फ़च-फ़च’ की आवाज़ आ रही थी।
मैं उसे लगातार बेरहमी से ठुकाई करता रहा…
वो कह रही थी- बस मैं मर जाऊँगी..
फिर मेरा पानी उसकी गुफा में निकल गया।
ठुकाई से थक कर हम दोनों लेट गए।
उन्होंने कहा- तुमने मेरी गुफा का भुरता बना दिया, तुम्हारे भाई ने आज तक कभी ऐसा नहीं पेला ।
फिर मैं रोज़ भाभी की ठुकाई करने लगा।

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है.  मैं नर्सिंग की पढ़ाई के लिए एडमिशन लेने के लिए गई थी.मेरे एडमिशन के वक्त मुझे एक लड़...
04/01/2026

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है.
मैं नर्सिंग की पढ़ाई के लिए एडमिशन लेने के लिए गई थी.मेरे एडमिशन के वक्त मुझे एक लड़की मिली थी.
वह भी बाहर गांव से आई थी.
ये बात मैंने अपनी मम्मी को बताई और उनसे कहा कि उसने खुद के रहने के लिए एक रूम देखा है. क्या हम भी चल कर उसका रूम देख लें. उस पर मम्मी ने हामी भर दी और उसका कमरा देखने जाने के लिए राजी हो गईं.
मम्मी के हां कहने के बाद मैं और मम्मी, उस नई लड़की सीमा और उसके पापा से मिले.

यहीं से कहानी शुरू होती है.
मम्मी ने सीमा के पापा को देखा और कहा- नमस्कार, मैं प्रीति की मम्मी शोभना हूँ. आज इसका एडमिशन हो गया है. अभी उसका रहने का देखना है, तो प्रीति मुझको बोली कि आपने सीमा के लिए रूम देखा है. अगर आप बुरा ना माने तो क्या प्रीति और सीमा एक साथ रह सकती हैं. रूम का किराया और खाने के लिए जो भी खर्च लगेगा, उसका आधा-आधा हम दोनों साझा कर सकते हैं. हम लोग ज्यादा धनवान नहीं हैं. अलग रूम का किराया और मेस के पैसे ज्यादा लगेंगे, वो हमारी सामर्थ्य के बाहर होगा.

सीमा के पापा- नमस्कार, मेरा नाम राजू है और मैं एक सिक्योरिटी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की जॉब करता हूं. बेटी की अच्छी पढ़ाई के लिए मैंने उसको इधर भेज दिया है. इधर हमारे एक दूर के रिश्तेदार हैं. कॉलेज के पीछे की तरफ एक घर है. वहां पर हमने एक कमरा देखा है. अगर आप कहेंगी तो हम सब जाकर उसे देख लेंगे. हमारा भी खर्च कम हो, इसके लिए मैं भी अपनी बेटी के साथ किसी एक लड़की को रखना चाहूँगा.

मम्मी ने सीमा के पापा की बात सुनकर झट से हां कह दिया. फिर हम सब कॉलेज के पीछे झोपड़पट्टी का एरिया था, उधर गए. उधर हमें सीमा के रिश्तेदार अंकल ने रूम दिखाया. उन अंकल का नाम संजू था.
आप सोच सकते हो कि झोपड़पट्टी वाले इलाके में कैसे रूम रहते हैं. बस हमें एक छोटा सा कमरा मिला और उसका रेंट भी कम था, केवल 700 था. उसमें अन्दर ही नहाने के लिए छोटी सी जगह थी, लेकिन बाकी लेट्रिन आदि के लिए सार्वजनिक शौचालय यूज़ करना था.

मम्मी और सीमा के पापा ने हां बोल दिया. हमने भी ज्यादा नहीं सोचा क्योंकि हमारे पास पैसे की तंगी थी.
मैं बताना भूल ही गई कि हम दोनों को भी गवर्नमेंट से स्कॉलरशिप मिलने वाली थी, इसलिए कॉलेज की फीस का कुछ टेंशन नहीं था और सेक्रेटरी सर भी मम्मी के लपेटे में थे तो वो तो वैसे भी कोई समस्या नहीं थी.
उन तीनों ने मिलकर हमसे पूछा- तो फाइनल है इधर ही रहोगी न हम दोनों ने उनको हां बोल दिया.
हम सब वहां पर बातचीत करने लगे. मैंने ध्यान दिया की सीमा के पापा और अंकल, दोनों लोग मेरी मम्मी को घूर रहे थे.

हम दोनों के लिए जो खाने का सामान चाहिए था, वह मम्मी और अंकल में बात हो गई. उनके बीच ये तय हो गया कि मम्मी क्या क्या सामान लाने वाली थीं और अंकल कौन सा सामान लाने वाले थे. सीमा और उसके पापा पुणे जाने के लिए निकल गए और हम वापस कोल्हापुर आ गए.
दो दिन में मम्मी ने राशन वालों से खाने का पूरा सामान ले लिया. अब आपको तो पता ही है कि मम्मी ने यह सामान लेने के लिए क्या किया होगा.

हां आप सही सोच रहे हैं. मम्मी ने ठीक वैसे ही अपनी ठुकवाई थी जैसे वो हमेशा मम्मी राशन लेते समय उससे अपनी मरवाती थीं.
अब हमने खाने-पीने का पूरा सामान और मेरे कपड़े आदि लगा लिए थे और वापस कॉलेज वाले शहर आ गए.
मम्मी, सीमा के पापा व हम दोनों एक साथ चार दिन के लिए रहने वाले थे. सीमा के पापा ने भी अपने काम से छुट्टी ले ली और गए थे.

जब हम वहां पहुंचे, तो सीमा, उसके पापा और अंकल तीनों पहले से ही वहां मौजूद थे और सामान सैट कर रहे थे.
हम दोनों ने भी वहां जाकर पूरा सामान सैट करवाने में सहयोग किया. सामान आदि लग गया था थोड़ा बहुत बचा था, तो राजू अंकल और संजू अंकल बाहर निकल गए.
वो थोड़ी देर में ही घूम फिर कर आ गए. आते समय वो दोनों देसी दारू लेकर आए थे. कमरे पर आकर उन्होंने वहां पर पीना चालू कर दिया. राजू अंकल लगभग 45 साल के थे और उनका कुछ पेट बाहर आ गया था.

उनका वजन कम से कम 120 किलो रहा होगा. उनके अन्दर सब बुरी आदतें थीं, जैसे कि सिगरेट तंबाकू दारू वे मम्मी को घूर रहे थे और मेरी तरफ भी देख रहे थे.
वहीं संजू अंकल 40 साल के थे. वे भी एक काले सांड के जैसे थे. उनके मुँह में हमेशा पान घुसा रहता था और उनकी आदतें भी राजू अंकल के जैसी ही थीं.

हम सब खाना खा रहे थे. तभी संजू अंकल की बीवी अंकिता वहां पर आ गई. अंकल तो दारू के नशे में थे, तो आंटी उनको लेकर अपने घर जाने लगीं. तभी नशे की हालत में अंकल ने अंकिता आंटी की हिप के ऊपर जोर से चमाट मारी. उसकी आवाज हमें सुनाई दे गई थी.
हम अब उनकी ये हरकत देख रहे थे.

तभी मेरी मम्मी चुटकी लेती हुई संजू अंकल से बोलीं- आपकी आज खैर नहीं आज आपका घोड़ा बहुत दौड़ेगा.
अंकिता आंटी- मेरे पास तो घोड़ा है वह दौड़ेगा भी, लेकिन आपके पास तो घोड़ा नहीं है. आपकी तो आज मुश्किल है.
यह बोलकर आंटी ने हंस कर हम सबके सामने संजू अंकल को किस कर लिया. मैं और सीमा यह देख कर हैरान थे.
अंकिता आंटी- बच्चो, तुम ज्यादा टेंशन मत लो और सो जाओ. तुम दोनों की शादी होने के बाद तुम भी मजे करोगी.
इतना कह कर वो अंकल को लेकर चली गईं.

हमारा खाना होने के बाद अब हम सोने लगे. मैं और सीमा बीच में सोईं. राजू अंकल सीमा के बाजू में और मम्मी मेरी बाजू में सो गईं. सुबह हम तीनों जल्दी उठ गए और शौचालय के लिए बाहर गए. शौचालय के आगे लाइन में लग गए, उसकी हमें आदत थी.

सबसे पहले मम्मी शौचालय चली गईं. बाहर आने के बाद वह बोलीं- मैं कुछ नाश्ता और खाने के लिए बनाती हूं, तुम दोनों फ्रेश होने के बाद रूम में आ जाना. मेरा नंबर आने तक और शौचालय से निवृत होने तक 30 मिनट हो गए.
मैं सीमा से बोली- मैं घर जाकर मम्मी को हेल्प करती हूँ. अभी तेरा नंबर आने में और शौचालय से फ्री होने में तुझे आधा घंटा लगेगा.

उसने हां में सर हिला दिया.
मैं घर की तरफ गई.
घर का दरवाजा अन्दर से बंद था.
मैं दरवाजा में खटखटाने वाली थी, उतने में मुझको आवाज आई.

राजू अंकल- अरे शोभना रानी, चूसने दो, जब तक लड़कियां नहीं आतीं, तब तक मैं चूस लेता हूँ. ठुकाई तो हम लड़कियों कॉलेज जाने के बाद करेंगे.
मम्मी- अभी नहीं, दो दिन के बाद कर लेना.
अंकल कहां मानने वाले थे, उन्होंने जबरदस्ती से मम्मी के बॉल दबाने चालू कर दिए.

मम्मी- मर्द लोगों का यही प्रॉब्लम है, आप कंट्रोल नहीं करते और आपकी वजह से हम औरतें कंट्रोल नहीं कर पातीं. अभी खाली संतरे चूसने का वादा करो.
अंकल- वादा रहा जानेमन अभी सिर्फ संतरे ही चूसूंगा. तेरी गुफा का कबाड़ा तो बाद में तसल्ली से करूंगा.
यह बोलकर उन्होंने मम्मी के संतरो के ऊपर एक तमाचा मारा.
वो तमाचा इतना जोर से लगा था कि मुझको मारने तेज आवाज सुनाई दी.

मम्मी के मुँह से आवाज निकली और उतने में ही मैंने दरवाजा खटखटा दिया.
अंकल ने दरवाजा खोला और मैं अन्दर जाने लगी.
अंकल ने मुझको किस किया.
मैं अन्दर आ गई.
मम्मी- सीमा कहां है
मैं- मेरा हो गया था, इसके लिए मैं आपकी मदद करने के लिए आ गई.

इसी तरह से 15 मिनट में सीमा और उसके बाद राजू अंकल भी फ्रेश होकर आ गए.
हम चारों ने मिलकर नाश्ता किया और बैठ कर बातें करने लगे.
मैंने ध्यान दिया कि राजू अंकल डबल मीनिंग वाली बात करते थे.
मम्मी भी उनके जोक्स के ऊपर हंस देती थीं.
हम सबके बीच अभी हंसी मजाक चल ही रहा था कि तभी अंकिता आंटी आ गईं.

अब मैं आपको अंकिता आंटी के बारे में बताती हूं.
आंटी 5 फुट 5 इंच की 30-28-32 के फिगर वाली माल महिला थीं. वो करीब 35 साल की थीं और उनके दो बच्चे थे.
दिखने में आंटी आलिया भट्ट जैसी थीं. वह जब हंसती थीं, तब उनके गाल में गड्डे पढ़ते थे, उससे उनकी खूबसूरती और निखर रही थी.
आंटी उस इलाके में रानी की तरह थीं. नौजवान लड़के, अंकल और बूढ़े सबके मुँह से पानी टपकता था.
जैसे ही अंकिता आंटी आईं. उनकी चाल में थकान सी थी.

मम्मी- लगता है कल रात घोड़ी को घोड़े ने बहुत दौड़ाया दूसरा घोड़े की चाल आने से ही रही.
आंटी- अरे नहीं मेरा घोड़ा है तो बहुत बड़ा लेकिन घोड़ी को अभी दूसरा घोड़ा भी चाहिए. तुम अपनी सुनाओ, तुमने भी तो कल दूसरा घोड़ा लिया होगा

मेरी मम्मी कुछ नहीं बोलीं.
मगर अंकल बोल पड़े- रात को लिया तो नहीं लेकिन सुबह घोड़े ने घोड़ी का दूध पिया. अगर दो घोड़ी एक साथ मिल गईं, तो घोड़े को मजा आ जाएगा. एक घोड़ी 90 किलो की और एक घोड़ी 60 किलो की सच में क्या मस्त मजा आएगा.

ये सब बातें करते हुए वह तीनों हंसने लगे.
हमें भी उनकी बातें समझ में आ गई थीं.
आंटी- देखो, कहीं दो घोड़ी के चक्कर में घोड़े का दम ना निकल जाए.
अंकल बीड़ी पीते हुए बोले- जब तक घोड़ी घोड़ा चलाना चाहेगी, तब तक वह दौड़ेगा यह मेरा वादा रहा.

अंकल ये कहते हुए अपने पजामे के ऊपर से ही अपने सामान को दबाने लगे थे.
उनका बहुत बड़ा दिख रहा था. पजामा एकदम फूल गया था.
आंटी और मम्मी दोनों ने उनके फूलते पजामे को देखा और एक साथ बोलीं- अच्छा ऐसा क्या चलो कभी देखेंगे

ये कह कर वो दोनों हंसने लगीं.
हम दोनों भी एक दूसरे की आंखों में देख कर मुस्करा रही थीं.
तभी सीमा ने मुझको आंख मारी, मैंने भी उसकी फितरत को समझ लिया कि साली ये भी पूरी है. इसके साथ मैं पक्के में ठुक जाऊंगी.
आपको तो मालूम ही है कि मेरी गुफा अभी तक सील पैक है.

मेरे प्यारे दोस्तों, आपका स्वागत है एक बहूत ही ज्यादा कामुक स्टोरी ले के आया हु, और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को यह ...
03/31/2026

मेरे प्यारे दोस्तों, आपका स्वागत है एक बहूत ही ज्यादा कामुक स्टोरी ले के आया हु, और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को यह बहुत पसंद आएगी अब में आपका टाइम समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ।

मोहनलाल की पत्नी सुमित्रा की मौत 3 साल पहले हो गयी थी। अब वो 46 साल का एक असंतुष्ट आदमी था और अपनी गरमी निकालने के लिए नई गुफा की तलाश में था। उसका एक बेटा अविनाश और एक बेटी दीपा थी। बेटी की शादी गौतम के साथ हो चुकी थी जो कि फौज में काम करता था। गौतम की पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में थी और दीपा से अलग रहने पर मज़बूर था। दीपा 19 साल की जवान औरत थी.. गोरी चिट्टी, गदराया हुआ बदन, , भरी हुई संतरे , मोटे होंठ, लंबा कद और कसरती जांघे। कई बार तो अपनी ही बेटी के जिस्म की कल्पना से उत्तेजित हो चुका था। वो एक ही शहर में होते हुए भी अपनी बेटी से कम ही मिलता क्योंकि वो नहीं चाहता था कि उसका हाथ अपनी ही बेटी पर लगकर इस पवित्र रिश्ते को तोड़ डाले।

अविनाश ने भी अपनी प्रेमिका मानसी से शादी करके घर बसा लिया था। मानसी एक साँवली 20 साल की लड़की थी.. बिल्कुल स्लिम, खूबसूरत आँखें, लंबी टाँगें और भरा हुआ जिस्म। मानसी की ज़िद थी कि वो अलग घर में रहेगी.. तो अविनाश ने अलग घर ले लिया था। मोहनलाल अब अकेलेपन का शिकार हो रहा था कि अचानक एक दिन उसकी बहूरानी मानसी का फोन आया और वो बोली कि बाबूजी आप यहाँ पर चले आइए.. मुझे आपकी ज़रूरत है। अविनाश ने मुझे धोखा दिया है और में आपके बेटे से तलाक़ चाहती हूँ.. आप अभी चले आये बाबूजी।


तभी मोहनलाल जल्दी से अपने बेटे के घर पहुँचा तो देखा कि मानसी ने रो रो रोकर अपना बुरा हाल कर लिया था। फिर मोहनलाल उसके पास आया और पूछने लगा कि बेटी क्या हुआ? रोना बंद करो अब और मुझे पूरी बात बताओ बेटी.. तू घबरा नहीं.. तेरे बाबूजी हैं ना? शाबाश बेटी मुझे सारी बात बताओ? लेकिन मानसी कुछ नहीं बोली बल्कि उसने तस्वीरों का एक लिफ़ाफ़ा अपने ससुर की तरफ बढ़ा दिया। फिर मोहनलाल ने एक नज़र जब तस्वीरों पर डाली तो हक्का बक्का रह गया। अविनाश क़िसी पराई औरत को कर रहा था और उसकी हर तस्वीर साफ थी और एक तस्वीर में वो औरत अविनाश का चूस रही थी तो दूसरी में अविनाश उसकी चाट रहा था, चूम रहा था और तस्वीरें बिल्कुल साफ थी और उस औरत की शक्ल भी जानी पहचानी लग रही थी। वो औरत भी बहुत खूबसूरत थी। गोरी, गदराया हुआ बदन, 25-26 साल की हसीना थी। फिर मोहनलाल बोला कि बेटी यह औरत कौन है? कब से चल रहा है ये सब कुछ?

फिर मानसी बोली कि बाबूजी क्या आप नहीं जानते इस औरत को? ये रीना है.. मेरी भाभी जिसको आपके बेटे ने फंसाया हुआ है। आपका बेटा मुझसे और मेरी सग़ी भाभी से शारीरिक संबंध बनाए हुए है। तभी मोहनलाल कहने लगा कि यह शरम की बात है उसको मर जाना चाहिए.. जो अपनी बहन समान भाभी को कर रहा है और दिन रात उसके साथ चिपका रहता है। तभी मानसी बोली कि हाँ बाबूजी और में यहाँ करवटें बदलती रहती हूँ। तभी मोहनलाल की नज़र अब अपनी बहूरानी के रोते हुए चेहरे पर से ऊपर नीचे होते हुए सीने पर जा रुकी। मानसी का कमीज़ बहुत नीचे गले का था और उसके सीने का उभार आधे से अधिक बाहर खनक रहा था। तभी संतरो की गहरी घाटी देखकर ससुर का दिल बहक उठा और मोहनलाल जानता था कि जब औरत के साथ बेवफ़ाई हो रही हो तो वो गुस्से और जलन में कुछ भी कर सकती है। इस वक्त उसकी बहूरानी को कोई भी ज़रा सी हमदर्दी जता कर पेल सकता था और अगर कोई भी कर सकता था तो फिर मोहनलाल क्यों नहीं? और ऐसा माल बाहर वाले के हाथ क्यों लगे? और बेटे की पत्नी उसके बाप के काम क्यों ना आए?

फिर मोहनलाल बोला कि बेटी घबरा मत.. में हूँ ना तेरी हर तरह की मदद के लिए। बोलो कितने पैसे चाहिए तुझे.. दस लाख, बीस लाख.. में तुझे इतना धन दूँगा कि तुझे कोई कमी ना रहेगी और कभी अविनाश के आगे हाथ नहीं फैलने पड़ेंगे। बस तुम मेरे घर की इज़्ज़त रख लो और अविनाश की बात किसी से मत कहना और तुझे जब भी किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना। गोपी ने कहा और अपनी बहूरानी को बाहों में भर लिया। रोती हुई बहूरानी उसके सीने से चिपक गयी और जब मानसी का गरम जिस्म ससुर के साथ लिपटा तो एक करंट उसके जिस्म में दौड़ गया जिसका सीधा असर उसके औजार पर हुआ। तभी 45 साल के पुरुष में पूरा जोश भर गया और उसने अपनी बहूरानी को सीने से भींच लिया और उसके गालों को सहलाने लगा।

उधर जवान बहूरानी ने जब इतने दिनों के बाद आदमी के जिस्म को स्पर्श किया तो उसकी गुफा में भी एक आग सी मच गयी और वो एक मिनट के लिए भूल गयी कि मोहनलाल उसका पति नहीं बल्कि पति का बाप था। मोहनलाल ने बहूरानी को गले से लगाया हुआ था और फिर वो सोफे पर बैठ गया और मानसी उसकी गोद में। जब अपने ससुर के सामान की चुभन बहूरानी के गुफा पर होने लगी तो बहूरानी भी रोमांचित हो उठी और वैसे भी ससुर ने पैसे देने का वादा तो कर लिया था।

अब उसकी जिस्मानी ज़रूरतों की बात थी तो वो सोचने लगी कि क्यों ना अविनाश से बदला लेने के लिए उसके बाप को ही अपने जाल में फंसा लूँ? बाबूजी का तो बहुत मोटा ताज़ा महसूस हो रहा है.. अगर अविनाश ने मेरी भाभी को फंसाया है तो क्यों ना में उसके बाप को अपना पालतू आदमी बना लूँ? और वैसे भी बुजुर्ग आसानी से पट जाते हैं और फिर औरत को एक जानदार सामान तो चाहिए ही। अब तरकीब लगानी है कि ससुर जी को कैसे लाईन पर लाया जाए? और उसके लिए खुल जाना बहुत ज़रूरी है। तभी मानसी अपनी स्कीम पर मुस्कुरा उठी और कहने लगी कि मेरे प्यारे बाबूजी, आप कितना ख्याल रखते हैं अपनी बहूरानी का? में आपकी बात मानूँगी और घर की बात बाहर नहीं जाने दूँगी.. यह बात कहते हुए उसने प्यार से अपने ससुर के होंठों को चूम लिया।

मोहनलाल भी औरतों के मामले में बहुत समझदार था और जनता था कि उसकी बहूरानी को करने में कोई मुश्किल नहीं आएगी। तभी उसका उसकी बहूरानी के गुफा में घुसने लगा तो बहूरानी भी शरारत से बोली कि बाबूजी ये क्या चुभ रहा है मुझे? शायद कोई सख्त चीज़ मेरे हिप में चुभ रही है। फिर मोहनलाल बड़ी बेशर्मी से हंस कर बोला कि बेटी तुझे धन के साथ साथ इसकी भी बहुत ज़रूरत पड़ेगी.. धन बिना तो तू रह लेगी लेकिन सामान के बिना रहना बहुत मुश्किल होगा.. मेरी प्यारी बेटी को इसकी ज़रूरत बहुत रहेगी और बेटे का तो ले चुकी है अब अपने बाबूजी का भी लेकर देख लो और अगर तुझे खुश ना कर सका तो जिसको मर्ज़ी अपना यार बना लेना।

तभी मोहनलाल का हाथ सीधा बहूरानी की संतरो पर जा टिका और बहूरानी मुस्कुरा पड़ी और उसने अपने ससुर के सामान पर हाथ रखा तो फूंकार उठा। पेंट में तंबू बन चुका था। तभी मानसी समझ गयी थी कि अब बेटे के बाद बाप को ही अपना पति मान लेने में भलाई है। फिर मोहनलाल ने बहूरानी के सर पर हाथ फैरते हुए कहा कि रानी बेटी अब ज़िप भी खोल दो ना और देख लो अपने बाबूजी का हथियार और अपने कपड़े उतार फेंको और मुझे भी अपना खज़ाना दिखा दो।

तभी बहूरानी ने झट से ज़िप खोल दी और बाबूजी की अंडरवियर नीचे सरकाते हुए सामान को अपने हाथों में ले लिया और कहने लगी कि बाबूजी आपका तो आग की तरह दहक रहा है.. लगता है माँ जी के जाने के बाद से यह बेचारा प्यासा है। खैर अब में आ गयी हूँ इसका ख्याल रखने के लिए। ये बहुत बैचेन हो रहा है अपनी बहूरानी को देख कर। फिर मोहनलाल ने भी अब अपना हाथ कमीज़ के गले में डालकर मानसी की संतरे भींच ली और उसके निप्पल को मसलने लगा।

तभी जल्दी जल्दी दोनों प्यासे जिस्म नंगे होने को बेकरार हो रहे थे और बहूरानी ने ससुर की पेंट नीचे सरका दी और उसके सामान को किस करने लगी। फिर मोहनलाल बोला कि बेटी तेरे बाबूजी का कैला कैसा है स्वाद पसंद आया? लेकिन बहूरानी तो बस कैला खाने में मग्न हो चुकी थी। फिर मानसी बोली कि बाबूजी मेरा मन तो कैले के साथ आपके भी खा जाने को कर रहा है.. कितने भारी हो चुके है यह .. इनका पूरा रस मुझे दे दो आज बाबूजी प्लीज।

तभी मोहनलाल बोला कि इनका रस तुझे मिल जाएगा लेकिन उसके लिए तुमको पूरा नंगा होना पड़ेगा और अपने बाबूजी को अपने जिस्म का हर अंग दिखना पड़ेगा ताकि तेरे बाबूजी तुझे प्यार कर सकें। अपनी बेटी के अंग अंग को चूम सकें, सहला सकें और अपना बना सकें। बेटी आज मुझे अपने जिस्म की खूबसूरती दिखा दो। मुझे तो कल्पना करने से ही उतेज्ना हो रही है। मेरी रानी बेटी.. आज तेरी फिर से सुहागरात होने वाली है अपने बाबूजी के साथ। आज हम दो जिस्म एक जान हो जाने वाले हैं। बेटी क्या घर में विस्की है? लेकिन मुझे अपनी किस्मत पर विश्वास नहीं हो रहा.. अपनी रानी बेटी को आज नागन रूप में देखकर कहीं में मर ना जाऊ? में अपना मन मज़बूत करने के लिए दो घूँट पी लूँ तो बहुत अच्छा होगा। आज मेरी अप्सरा जैसी बेटी मेरी हो जाएगी बेटी तुम कपड़े उतार लो और ज़रा विस्की ले आना मानसी मुस्कुराती हुई उठी और दूसरे रूम में चली गयी।

फिर 10 मिनट के बाद जब वो लौटी तो केवल काली पेंटी और ब्रा में थी और मोहनलाल पूरी तरह से नंगा था। वो अपने सामान को हिला रहा था और वासना भरी नज़र से मानसी को घूर रहा था और मानसी का सांवला जिस्म देखकर उसका आसमान की तरफ उठा हुआ था। कसी हुई पेंटी में उसकी बहूरानी की गुफा उभरी हुई थी और संतरे तो ब्रा को फाड़कर बाहर आने को उतावली हो रही थी। मानसी के हाथ में ट्रे थी जिसमे शराब की बॉटल रखी हुई थी जो उसने टेबल पर रखी और बाबूजी के लिए पेक बनाने लगी। तभी गोपी ने अपना एक हाथ आगे बड़ाकर उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और वो मचल गयी.. लेकिन मुस्कुरा पड़ी। बाबूजी ने अपनी बहूरानी की संतरो को मसल दिया और बोली कि बेटी क्या मेरा बेटा भी तेरी संतरो को इतना प्यार करता है? इसको चूसता है? और बेटी तुम भी तो एक पेक पी लो.. अपने लिए भी पेक बनाओ।

तभी मानसी पहले झिझकी लेकिन फिर दूसरे ग्लास में शराब डालने लगी और जब पेक बन गये तो गोपी ने बहूरानी को गोद में बैठा लिया और अपने हाथ से पिलाने लगा। फिर वो कहने लगी कि बाबूजी जब में पी लेती हूँ तो मेरी वासना बहुत बड़ जाती है और में अपने होश में नहीं रहती। तभी मोहनलाल मुस्कुरा कर बोला कि बेटी आज होश में रहने की ज़रूरत भी नहीं है और मुझे ज़रा अपने दूध पी लेने दो। ऐसी कड़क संतरे मैंने आज तक नहीं देखी है और मोहनलाल वो संतरे चूसने लगा.. जिसको कभी उसका बेटा चूसा रहा था। तभी ग्लास ख़त्म हुआ तो मोहनलाल मस्ती में भर गया और उसने अपनी बहूरानी को अपने सामने खड़ा किया और अपने होंठ उसकी फूली हुई गुफा पर रख दिए और पेंटी के ऊपर से ही किस करने लगा।

मानसी कहने लगी कि बाबूजी क्या एसे ही करते रहोगे या फिर बेटिंग भी करोगे? मैंने आपके लिए पिच से घास साफ कर रखी है दिखाऊँ क्या? मोहनलाल जोर से हंस पड़ा। क्योंकि ठुकाई में बेशर्मी बहुत ज़रूरी होती है और उसकी सामान की प्यासी बहूरानी बेशर्म हो रही थी। वो कहने लगा कि बेटी मेरा कैसा लगा? और में भी देखता हूँ कि तेरा पिच तैयार है.. सेंचुरी बनाने के लिए या नहीं? पिच से खुश्बू तो बहुत बढ़िया आ रही है और यह कहते हुए उसने पेंटी की इलास्टिक को बहूरानी के हिप से नीचे सरका दिया और तभी कसे हुए गुफा नंगे हो उठे और शेव की हुई गुफा मोहनलाल के सामने मुस्कुरा उठी। मोहनलाल ने धीरे से पेंटी को बहूरानी की कसी हुई जांघों से नीचे गिरा दिया और अपने बेटे की पत्नी की गुफा को प्यार से निहारने लगा। गुफा के उभरे हुए होंठ मानो आदमी के स्पर्श के लिए तरस गये हों।

फिर मोहनलाल ने एक सिसकी भरकर अपना हाथ गुफा पर फैरा और फिर अपने होंठ गुफा पर रख दिए। मानो आग में दहक रही हो। फिर मानसी कहने लगी कि ओह बाबूजी मेरे प्यारे बाबूजी क्यों आग भड़का रहे हो? इस प्यासी गुफा की प्यास बुझा दो ना.. प्लीज। अब आप ही इस जवान गुफा के मालिक हो.. इसको चूसो, चाटो, पेलो , लेकिन अब देर मत करो बाबूजी.. में मरी जा रही हूँ। फिर मोहनलाल ने बहूरानी के गुफा कसकर थाम लिए और जलती हुई गुफा में जीभ घुसाकर चूसने लगा। जवान गुफा के नमकीन रस की धारा ने उसकी जीभ का स्वागत किया जिसको मोहनलाल पीने लगा। बहूरानी ने अपनी जांघे खोल दी जिससे ससुर के मुहं को चूसने में आसानी हो और कामुक ससुर किसी कुत्ते की तरह चूसने लगा और उधर मानसी की वासना भड़की हुई थी और वो अपने ससुर के सामान को चूसने के लिए उतावली और गरम हो रही थी।

तभी मानसी कहने लगी कि बाबूजी मुझे बिस्तर पर ले चलो.. मुझे भी आपका कैला खाना है आपके बेटे को तो मेरी परवाह नहीं है.. उसने तो मेरी भाभी को ही मेरी सौतन बना रखा है। आप मुझे पेलकर अविनाश की माँ का दर्जा दे दो बाबूजी.. प्लीज। उधर मोहनलाल बहूरानी की मुहं हटाने वाला नहीं था.. लेकिन बहूरानी का कहा भी टाल नहीं सकता था। तभी कामुक ससुर ने अपनी नग्न बहूरानी के जिस्म को बाहों में उठाया और अपने बेटे के बिस्तर पर ले गया।

बहूरानी का नंगा जिस्म बिस्तर पर फैला हुआ देखकर मोहनलाल नंगा हो गया और इतनी खूबसूरत औरत तो उसकी सग़ी बेटी भी होती तो आज वो उसको भी कर देता। मोहनलाल अपनी बहूरानी पर उल्टी दिशा में लेट गया था तो उसका बहूरानी के मुहं के सामने था और बहूरानी की गुफा पर उसका मुहं झुक गया। मानसी समझ गयी कि उसे क्या करना है। उसने दोनों हाथों में ससुर जी का थाम लिया और उस आग के शोले को मुहं में भर लिया और मानसी मोहनलाल के सूपाड़े को चाटने लगी। चूसते हुए उस पर दाँत से भी काटने लगी और मसलने लगी।

उधर ससुर भी अपनी जीभ बहूरानी की गुफा की गहराई में मुहं घुसाकर करने लगा। दोनों कामुक जिस्म मुहं से करते हुए सिसकियाँ भरने लगे.. तभी गोपी को लगा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो जल्दी ही झड़ जाएगा। इसलिए उसने बहूरानी को अपने आप से अलग कर लिया और उसने बहूरानी को लेटा लिया और उसकी जांघों को खोल कर ऊपर उठा दिया। फिर उसने अपना सुपाड़ा मानसी की गुफा पर टिकाया और रगड़ने लगा और मानसी सिसकियाँ भरने लगी और कहने लगी कि आह बाबूजी क्यों इतना तरसा रहे हो? डाल दो ना और वो कराह उठी.. बाबूजी पेल डालो अपनी बहूरानी को.. आपकी बहूरानी की गुफा मस्ती से भरी पड़ी है.. मसल डालो अपनी बेटी की प्यासी गुफा को और जो काम आपका बेटा ना कर सका आज आप कर डालो। बाबूजी अब जल्दी से शुरू करो.. मेरी जल रही है।

तभी गोपी ने अपना सुपाडा मानसी की गुफा पर टिकाया और रगड़ने लगा। बाबूजी.. क्यों तरसा रहे हो? डाल दो ना प्लीज कहते हुए बहूरानी ने ससुर के सामान को अपनी दहकती हुई गुफा पर रखकर ऊपर उछाल दिए और लोहे जैसा समाता चला गया। आह मर गयी.. में माँ डाल दो बाबूजी.. शाबाश बाबूजी पेल डालो मुझे.. मेरी जल रही है। तभी मानसी की गुफा से इतना पानी बह रहा था कि आसानी से गहराई में उतर गया और बहूरानी ने अपनी टाँगें बाबूजी की कमर पर कस दी और वो अपनी हिप उछालने लगी। ससुर बहूरानी की साँस भी बहुत भारी हो चुकी थी और दोनों कामुक सिसकियाँ भर रहे थे। तभी गोपी ने बहु की संतरो को ज़ोर से मसलते हुए धक्कों की स्पीड बढ़ा डाली और औजार फ़चा फ़च अंदर बाहर होने लगा। फिर गोपी ने बहूरानी के निप्पल चूसना शुरू किया तो वो बेकाबू हो गयी और पागलों की तरह लेने लगी। वाह! बाबूजी वाह पेल डालिए मुझे.. पेल डालो अपनी बहूरानी की .. पेलो अपनी बेटी को बाबूजी..

फिर बाबूजी ने भी जोश में आकर धक्के और तेज़ कर दिए और इतनी जवान गुफा गोपी ने आज तक नहीं पेली थी। ऐसा बढ़िया माल उसे मिला भी तो अपने ही घर में और उत्तेजना में उसने बहूरानी के निप्पल को काट लिया तो बहूरानी चिल्ला उठी आह । बहूरानी पूरी तरह से होश खो चुकी थी मदहोश हो होकर अपने ससुर की ठुकाई का मज़ा ले रही थी। पूरा कमरा कामुक सिसकियों से गूँज रहा था। मुझे मार डाला आपने बाबूजी में जन्नत में पहुँच गयी। तभी गोपी ने अपना बहूरानी की गुफा की गहराईयों में उतार दिया और पागलों की तरह करने लगा और बहूरानी ससुर ठुकाई के परम आनंद में डूब चुके थे ससुर का तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था और बहूरानी की गुफा की दीवारों ने उसको जकड़ रखा था। तभी बहूरानी ने बिखरती साँसों के बीच कहा आह मर गयी में। मेरे राजा बाबूजी पेलो मुझे और ज़ोर से मेरे बाबूजी आज मेरी गुफा की तृप्ति कर डालो.. आज मुझे निहाल कर दो अपने मूसल सामान के साथ मुझे पेल दो मेरे बाबूजी.. मेरी किसी भी वक्त पानी छोड़ सकती है।

फिर मोहनलाल का भी समय नज़दीक ही पहुँच चुका था और वो बहूरानी को जकड़ कर अपनी हिप आगे पीछे करते हुए ठुकाई में लग गया और कमरे में फ़चा फ़च की आवाज़ें गूँज रहीं थी। उसने पूरे ज़ोर से धक्के मारते हुए कहा कि बहु मेरी रानी बेटी ठुकवा ले मुझसे। अब ज़ोर लगा कर मेरा भी झड़ने के पास ही है.. ले लो इसको अपनी गहराई में मेरा अब तेरी गुफा में अपना पानी छोड़ने वाला है। मेरी रानी बेटी तेरी गुफा ग़ज़ब की टाईट है.. में सदा ही तेरी पेलने का वादा करता हूँ.. मेरी रानी लो में झड़ा .. मेरी बेटी मेरा तेरी गुफा में पानी छोड़ रहा है। मेरा रस समा रहा है तेरी प्यारी गुफा में में झड़ा और इसके साथ ही उसके सामान ने और मानसी की गुफा ने एक साथ पानी छोड़ना शुरू कर दिया और दोनों निढाल होकर एक दूसरे से लिपट कर सो गये। दोस्तों इस तरह ससुर और बहूरानी की ठुकाई की शुरुआत हुई.. जो कि आज तक भी जारी है ।।

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम फजल है और में हैदराबाद का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 साल है, दोस्तों आज में आप सभी को जो अपनी ...
03/31/2026

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम फजल है और में हैदराबाद का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 साल है, दोस्तों आज में आप सभी को जो अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ और यह मेरी एक सच्ची घटना है। दोस्तों में जिस घर में किराए से रहता था उसमे गरिमा आंटी जो मेरी मकान मालकिन है वो भी रहती है और उनकी उम्र करीब 34 साल है और उनके फिगर का साईज़ 34-28-36 है और वो दिखने में बहुत ही सुंदर है और एक बहुत ही मस्त औरत है और में हमेशा उनको देखते ही रहता था क्योंकि मुझे उनके वो बड़े बड़े झूलते हुए संतरे बहुत ज्यादा पसंद थे और उसकी वजह से में उनकी तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित था। में हमेशा उनके संतरो को दबाना चाहता था और उन्हें छूकर महसूस करना चाहता था।

एक दिन आंटी ने मेरे दरवाजे की घंटी को बजाया, लेकिन में उस समय सोया हुआ था तो में आंटी की आवाज सुनकर जल्दी उठा और मैंने जाकर दरवाजा खोल दिया। मैंने देखा कि बाहर दरवाजे पर आंटी खड़ी हुई थी और उस समय मेरा तनकर खड़ा हुआ था जिसको आंटी ने भी देख लिया। वो मुझे नाश्ता देने के लिए आई थी और फिर वो मुझे देकर चली गई। एक दिन ऐसे ही चला गया और दूसरे दिन में आंटी के पास चला गया तो आंटी उस समय लाल कलर की साड़ी पहने हुए हुए सोफे पर बैठी हुई थी और उनके बच्चे अपने स्कूल का काम कर रहे थे। में अंदर आकर कम आवाज करके टीवी देखने बैठ गया और फिर कुछ देर बाद आंटी मुझसे बोली कि तू बैठ में तेरे लिए चाय लेकर अभी आती हूँ। तो वो मुझसे इतना कहकर किचन में चली गई और कुछ देर में मेरे लिए चाय बनाकर ले आई और जब वो मुझे चाय देने के लिए झुकी तो अचानक से उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया, वाह दोस्तों वो क्या नजारा था, वो संतरे मेरे सामने आने को बिल्कुल बैताब थे तो में उन्हें अपने सामने देखते ही एक टक नजर से देखता ही रह गया।

तभी आंटी ने मुझसे कहा कि क्यों ऐसे क्या घूर रहे हो? तो में एकदम से हड़बड़ा गया और उनके हाथ से चाय लेकर अपनी नज़र नीचे करके बैठ गया और चुपचाप चाय पीने लगा। फिर में कुछ देर बाद वापस बाहर आकर सिगरेट पीने के लिए बाहर निकल गया और बस उनके बारे में सोचने लगा और उनके संतरो को अपनी आखों के सामने देखने लगा। रात को 11 बजे मेरे दरवाजे की घंटी बजी, लेकिन उस समय तक भी में सुबह वाली उस घटना के बारे में सोच रहा था और अब भी मेरा थोड़ा थोड़ा सा खड़ा हुआ था। फिर मैंने उठकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि बाहर आंटी पर्पल कलर की मेक्सी में ठीक मेरे सामने खड़ी हुई थी।

मैंने उनसे कहा कि हाँ आइए ना आंटी क्या चाहिए आपको? तो उन्होंने मुझसे थोड़ा ऊँची आवाज में पूछा कि तू सुबह ऐसे क्या देख रहा था? तो में उनके मुहं से यह बात सुनकर अचानक से डर गया और मैंने उनसे कहा कि सॉरी आंटी वो बस ऐसे ही मुझसे ग़लती से हो गया और में अब ऊपर से नीचे तक पूरी तरह पसीने से भीग चुका था। तो आंटी ने अब मुझसे बहुत नरम आवाज से कहा कि चलो कोई बात नहीं है तुम यहाँ पर बैठो। में उनके कहते ही तुरंत बैठ गया और अब आंटी मुझसे पूछने लगी कि क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है? तो मैंने कहा कि जी नहीं, दोस्तों में अचानक से बदले उनके इस स्वभाव से बहुत चकित था कि वो मुझसे अब यह सब क्या पूछ रही है? क्योंकि अब मैंने गौर किया था कि उनके चेहरे की बनावट और मुझसे बात करने का तरीका बिल्कुल बदल सा गया था और उनके चेहरे पर मुझे एक अजीब सी शरारती हंसी नजर आ रही थी।

फिर आंटी ने मेरी बात सुनकर कहा कि ठीक, लेकिन क्या तुमने कभी किसे से किया है? तो मैंने कहा कि नहीं, दोस्तों अब मुझे उनकी बातों से इस बात का अंदाजा हो गया कि वो मुझसे क्या पूछना या मेरे मन में क्या है वो जानना चाहती है? तभी उन्होंने मुझसे कहा कि तू क्या मेरे साथ करेगा? दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर में तो जैसे सातवें असमान में उड़ने लगा और बहुत खुश होकर मन ही मन सोचने लगा कि जैसे कि वो खुद ही मेरे पास आज आ गई है मुझसे अपनी करवाने के लिए और अब मैंने ज्यादा समय खराब ना करते हुए तुरंत ही आंटी को अपनी बाहों में जकड़कर किस करते हुए उनके संतरो को उनकी मेक्सी में से ही दबाना शुरू कर दिया क्योंकि अब में इतना अच्छा मौका बिल्कुल भी अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता था। वाह मज़ा आ गया मुझे उनके वो मुलायम बड़े बड़े संतरे दबाकर।

फिर करीब पांच मिनट के बाद मैंने आंटी की मेक्सी को खोल दिया और अपने भी कपड़े उतार दिए। तो आंटी ने मुझसे पूछा कि क्या तुम्हारे पास कोई फिल्म की सीडी है?
फिर मैंने कहा कि मेरे पास ऐसी कोई भी सीडी नहीं है, लेकिन में वो सब ऑनलाईन ही देखता हूँ तो मैंने एक मस्त फिल्म नेट पर लगा दी और अब मैंने जैसे अपना सामान पेंट से बाहर निकाला तो आंटी देखती ही रह गई और मुझसे कहने लगी कि वाह तेरा तो इतना बड़ा और मोटा भी है, मुझे पता होता तो में पहले ही तुझसे करवा लेती, लेकिन अब में तुझसे हर रोज़ अपनी करवाया करूंगी क्योंकि मेरा पति तो बाहर है और वो दो साल में एक बार आता है और वो उसका काम होने के बाद ही मुझे ऐसे ही छोड़कर सो जाता है और फिर में अपनी उंगली से ही काम चलाती हूँ, लेकिन अब तू आ गया है तो मुझे मज़ा आ गया और फिर वो इतना कहकर मेरा चूसने लगी। वाह दोस्तों क्या मज़ा आ रहा था और अब में उसके मुहं में मेरा देकर में आसमान में उड़ रहा था। मुझे ऐसे महसूस हो रहा था और करीब दस मिनट चूसने के बाद में करीब 15 मिनट तक उसके संतरो को दबाता ही रहा।

तभी आंटी मुझसे कहने लगी कि प्लीज थोडा आहिस्ता आहिस्ता दबा मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
में : आंटी मुझे अब इनको चूसना और दबाना बहुत अच्छा लगता है, प्लीज आप मुझे आज कुछ भी मत कहो, में आज आपकी कोई बात नहीं सुनूंगा।
आंटी : प्लीज थोड़ा धीरे करो

अब आंटी ने मेरे सर को पकड़कर अपनी गुफा में दबाने लगी और में ना ना कहता रहा, लेकिन वो अब मुझसे अपनी गुफा को ज़बरदस्ती चटवाना चाह रही थी। अब वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है प्लीज फजल आज डाल दे तेरा सामान मेरी इस भूखी गुफा में। पिछले 15 महीने से नहीं ठुकि हूँ, प्लीज आज बुझा दे इसकी प्यास, अब से में तेरी ही पत्नी बनकर रहूंगी डाल। अब मैंने आंटी को सीधा लेटाकर उनकी कमर के नीचे एक तकिया रखकर मेरा सामान गुफा के मुहं पर रख दिया और फिर एक ज़ोर का धक्का देने के साथ ही सामान को गुफा के अंदर डालने लगा जिसकी वजह से आंटी बहुत ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी और फिर उन्होंने मुझे गाली देते हुए कहा कि इतने ज़ोर से मत कर, अब इसे बाहर निकाल दे
में मर गई माँ बहुत दर्द हो रहा है बाहर निकाल इसे।

दोस्तों मैंने महसूस किया कि वो अब उस होने दर्द से कांप रही थी। में थोड़ा ऐसे ही रुका रहा और अब धीरे धीरे धक्का देने लगा, आंटी अब भी दर्द से करहा रही थी और सिसकियाँ लेकर मुझे गालियाँ देकर कह रही थी हाँ और ज़ोर से , इस भूखी पुजारन को, आज से में तेरी ही हूँ, पेल दे आज इसकी प्यास बुझा दे ज़ोर लगाकर दे। अब में ज़ोर ज़ोर से धक्के पे धक्के दे रहा था और आंटी भी बहुत मस्त पूरी तरह जोश में आकर मस्ती में मुझसे ठुकवा रही, वाह क्या मज़ा आ रहा था। फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी तुमको करने का ख्याल बहुत दिनों से था, लेकिन आज में हक़ीक़त में तुम्हे कर दूंगा, यह मैंने कभी नहीं सोचा था और फिर बीस मिनट के बाद मैंने उनसे कहा कि आंटी में अब झड़ने वाला हूँ तो में अपना माल कहाँ पर निकालूं? तो आंटी ने मुझसे कहा कि तू मुझे आज तेरा पिला दे, मुझे आज उसे चखना है।

फिर मैंने तुरंत अपना सामान उसकी गुफा से बाहर निकालकर उसके मुहं में डालकर मुहं में झड़ गया और उस बीच में आंटी दो बार झड़ चुकी थी, वो कहने लगी कि वाह मज़ा आ आ गया। दोस्तों उस रात में उनके पास में लेट गया और थोड़ी देर बाद आंटी मेरे सामान को चूसने लगी। मैंने उनसे कहा कि आंटी अब हम कल करते है तो आंटी ने मुझसे कहा कि मुझे तेरे साथ और भी गेम खेलना है। फिर उन्होंने चूसते चूसते मेरे सामान को एकदम से खड़ा कर दिया और मेरा अब गरम सरीए की तरह खड़ा था और अब वो मेरे सामान पर बैठकर आहिस्ता आहिस्ता उछलने लगी और चीखते चिल्लाते हुए माँ मर गई कहती रही, जिसकी वजह से पूरे कमरे में अब आवाज़ गूंज रही थी और करीब दस मिनट बाद आंटी उछलते उछलते फजल कहते हुए झड़ गई और मेरे पास में लेट गई।

अब में उठाकर एक बार फिर से डालकर करने लगा क्योंकि में अभी भी नहीं झड़ा था और करीब दस मिनट तक में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर करता रहा। आंटी का क्या? वो तो बस पड़ी हुई फजल में मर गई हाँ करो मुझे और ज़ोर से कहती रही और इस बीच हम दोनों ही एक साथ झड़ गए। उस समय में आंटी की गुफा में ही झड़ गया और जब मैंने घड़ी में समय देखा तो उस वक्त सुबह के 2:45 बज गए थे। तो आंटी ने कहा कि हम कल फिर से करेंगे और फिर वो चली गई।

दोस्तों अब हमारा जब भी मन करे तो हम एक साथ पति पत्नी की तरह मस्ती करते है और में उनके साथ बहुत मज़े लेता हूँ, मैंने उनको दिन रात जब में बहुत बार किया और वो मुझसे करवाकर अपनी आग को शांत करती है।

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