16/08/2025
मित्रो आज योगेश्वर श्री कृष्ण का अवतरित दिवस "श्री कृष्ण जन्माष्टमी" है। इसे महज एक व्रत समझ कर 5 बजे शिकंजी और रात 12 बजे धनिए की पंजीरी से व्रत खोलकर मना रहें हैं तो श्री कृष्ण को हमने थोड़ा सा भी नहीं जाना।
अलौकिक, दिव्य लीलाओं के माध्यम से भगवान नारायण के इस अवतार को पूजने व समझने के अनेकों कारण हैं जिन्हें हम सभी जानते है, पर स्वयं के जीवन में एक को भी नहीं अपनाते हैं 🙏 🙏
1. जब आनंद का समय होता तो कृष्ण भूल जाते है कि में भगवान हूं और अपने बाल सखाओ पीठ पर बैठा कर संदेश देते है जबकि हम सरपंच या अन्य छोटे से जनप्रतिनिधि या सरकारी नौकरी पाकर स्वयं को भीड़ का हिस्सा ही नहीं मानते।
2. जिसके पास सुदर्शन चक्र के रूप मे साक्षात् काल हो फिर भी बांसुरी से प्रेम करते है जबकि एक छुटभैये गुंडे से दोस्ती कर इंसान खुद को हिस्ट्रीशीटर समझ रहे है।
3. सुदर्शन चक्र के बावजूद 100 गालियां सुनने का दम रखने वाला ही कृष्ण है, जबकि हम एक गाली में ही अपना धैर्य खो देते हैं।
4. अपने भक्त, मित्र व रिश्तेदार के बुरे समय में सारथी बन कर उसकी मदद करे वह कृष्ण है जबकि हम ऐसे समय मे सारथी की जगह स्वार्थी बन बैठते है।
5. जो अपने भक्त, मित्र को धर्मयोग, कर्मयोग सिखाए वह कृष्ण है, जबकि हम छल और कपट सिखाते हैं जिसे वो हमारे ऊपर ही लागू करता हैं।
6. जो बंदीगृह में जन्मा हो , जिसे शिशु अवस्था मे ही मारने का प्रयास किया हो, फिर भी मुस्कुराता रहता है वह कृष्ण है, जबकि हम एक छोटी सी विपत्ति मे ही तनाव मे आ जाते है।
7. जो दुर्योधन की मेवा त्याग कर विदुरानी के हाथ से केले के छिलके खा जाए वह कृष्ण है, जबकि हम विदुरानी (असहाय,गरीब)के मेवे (भाव) छोड़कर दुर्योधन (पावरफुल,अमीर) के हाथ से केले के छिलके (गालियां) खाना अधिक पसंद करते है।
इसलिए हम हम है...... और श्री कृष्ण कृष्ण है।।
हरे कृष्ण गोविंद नमो मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा।।
आप सभी को जन्माष्टमी की असीम बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।🙏