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31/12/2019

LIC की इस स्कीम में बच्चे के लिए रोज बचाएं 206 रुपये, 27 लाख का हो जाएगा इंतजामअगर आप एलआईसी (LIC) की इस पॉलि‍सी को लेते हैं तो रोजाना 206 रुपये की बचत कर अपने बच्‍चे के लि‍ए 27 लाख रुपये का फंड इकट्ठा कर सकते हैं.

यूं तो हर माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं, लेकिन ऐसा आसान नहीं होता है. बच्चों के हायर एजुकेशन के लिए जहां मोटी फीस देनी पड़ती है, जिसके बाद ही अच्छे भविष्य की गारंटी मिलती है. भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने भी ऐसा ही एक प्लान बनाया है, जो बच्‍चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार कि‍या गया है. LIC के 'न्‍यू चि‍ल्‍ड्रंस मनी बैक प्‍लान' (New Children's Money Back Plan) की बात कर रहे हैं.
ऐसे मिलेगा 27 लाख रुपये
अगर आपके बच्‍चे की उम्र 5 साल है और आप उसके लि‍ए यह प्‍लान लेते हैं तो आपको 20 साल बाद यानी जब आपका बच्‍चा 25 साल का होगा तब यह पॉलि‍सी मैच्‍योर होगी. ऐसे में अगर आप सम एश्योर्ड 14,00,000 रुपए की पॉलि‍सी लेते हैं तो आपको लगभग मैच्‍योरि‍टी पर 26,74,000 रुपए मि‍लेंगे.
इस पॉलिसी की खास बातें
(1) इस बीमा को लेने की न्यूनतम आयु 0 वर्ष है.

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LIC की इस स्कीम में बच्चे के लिए रोज बचाएं 206 रुपये, 27 लाख का हो जाएगा इंतजामअगर आप एलआईसी (LIC) की इस पॉलि‍सी को लेते हैं तो रोजाना 206 रुपये की बचत कर अपने बच्‍चे के लि‍ए 27 लाख रुपये का फंड इकट्ठा कर सकते हैं.

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NEWS18HINDILAST UPDATED:DECEMBER 30, 2019, 1:36 PM IST

नई दिल्ली. यूं तो हर माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं, लेकिन ऐसा आसान नहीं होता है. बच्चों के हायर एजुकेशन के लिए जहां मोटी फीस देनी पड़ती है, जिसके बाद ही अच्छे भविष्य की गारंटी मिलती है. भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने भी ऐसा ही एक प्लान बनाया है, जो बच्‍चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार कि‍या गया है. LIC के 'न्‍यू चि‍ल्‍ड्रंस मनी बैक प्‍लान' (New Children's Money Back Plan) की बात कर रहे हैं.

अगर आप एलआईसी (LIC) की इस पॉलि‍सी को लेते हैं तो रोजाना 206 रुपये की बचत कर अपने बच्‍चे के लि‍ए 27 लाख रुपये का फंड इकट्ठा कर सकते हैं.

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ऐसे मिलेगा 27 लाख रुपये
अगर आपके बच्‍चे की उम्र 5 साल है और आप उसके लि‍ए यह प्‍लान लेते हैं तो आपको 20 साल बाद यानी जब आपका बच्‍चा 25 साल का होगा तब यह पॉलि‍सी मैच्‍योर होगी. ऐसे में अगर आप सम एश्योर्ड 14,00,000 रुपए की पॉलि‍सी लेते हैं तो आपको लगभग मैच्‍योरि‍टी पर 26,74,000 रुपए मि‍लेंगे.

ये भी पढ़ें: इस सरकारी बैंक ने रात में ATM से पैसे निकालने का बदला नियम, आपको होगा फायदा

इस पॉलिसी की खास बातें
(1) इस बीमा को लेने की न्यूनतम आयु 0 वर्ष है.

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(2) बीमा लेने की अधिकतम आयु 12 वर्ष
(3) न्यूनतम बीमा राशि 1,00,00 रुपए
(4) अधिकतम बीमा राशि की कोई सीमा नहीं
(5) प्रीमियम वेवर बेनिफिट राइडर- ऑप्शन उपलब्ध.

मैच्योरिटी बेनिफिट
पॉलिसी मैच्योरिटी के समय (बीमाधारक की पॉलिसी अवधि के दौरान मृत्यु नहीं होने पर) पॉलिसीधारक को बीमा राशि का बचा हुआ 40 फीसदी बोनस के साथ मिलेगा.

डेथ बेनिफिट
पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु की स्थिति में बीमा राशि के अलावा निहित साधारण प्रत्यावर्ती बोनस और अंतिम अतिरिक्त बोनस दिया जाता है. डेथ बेनिफिट कुल प्रीमियम पेमेंट का 105 फीसदी से कम नहीं होगा.

31/12/2019

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27/12/2019

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100 , 0141-2619725

Fire

101

Ambulance

108 / 102

Department of Tourism (Government)

M.I Road , Jaipur

0141-5110598/ 5155100

Rajasthan State Centralized Call Centre

1800-180-6127

Women helpline

1090 , 1091

Child Helpline

1098

Gas Leakage

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181

Hospitals and Blood BanksBlood Bank

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Emergency Oxygen

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Hospital S.M.S

0141-2560291

Apex Hospital

0141-2751871,2751872

Bhagwan Mahavir Cancer Hospital

0142-700107,2702899

Bhandari Hospital

0141-2703851,2705122

Jain E.N.T Hospital

2742828 / 2742541

Anand Hospital

2371107

Tagore Hospital

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South Jaipur

0141-2575171

North Jaipur

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West Jaipur

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Website

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LAW protection पुरुष पर रेप का झूठा केस लगाया, शासन से क्षतिपूर्ति राशि भी ले ली; हाईकोर्ट ने आरोपियों को रिहा किया और द...
21/11/2019

LAW protection
पुरुष पर रेप का झूठा केस लगाया, शासन से क्षतिपूर्ति राशि भी ले ली; हाईकोर्ट ने आरोपियों को रिहा किया और दिया ऐसा आदेश कि ऐसा करने वाली महिलाओं को मिलेगा सबक
आपको कोई महिला झूठे केस में फंसा दे तो ये है बचने का तरीका
How To Protect Yourself Against False FIR
Dainikbhaskar.Com
Aug 20, 2018, 12:01 AM IST
न्यूज डेस्क। महिला ने रेप के झूठे आरोप लगाए। शासन से क्षतिपूर्ति राशि भी ले ली। फिर बाद में बयान से पलट गईं। इस तरह के दो मामलों को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने आरोपियों को रिहा किए जाने के आदेश दिए हैं, वहीं राज्य शासन को आदेश दिया है कि वह अनुसूचित जाति की कथित पीड़िता को जो क्षतिपूर्ति राशि दी गई है, उसे वापस प्राप्त करने की कार्रवाई करे। साथ ही युवती के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो। कानूनी कार्रवाई की रिपोर्ट 3 माह में मप्र हाईकोर्ट (ग्वालियर) के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार को सौंपना है। हम बता रहे हैं यह दोनों मामले क्या हैं और यदि कोई आपके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवाए तो आप कैसे बच सकते हैं।

क्या हैं दोनों मामले...

केस नंबर : 1
- लाखन नामक शख्स के खिलाफ एक युवती ने नरवर थाने में आईपीसी की धारा 376,457 और 506 के तहत रिपोर्ट दर्ज करवाई।
- इसके बाद पुलिस ने आरोपी को 3 अप्रैल 2018 को गिरफ्तार कर लिया।
- आरोपी ने तीसरा जमानती आवेदन प्रस्तुत कर कहा कि दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने वाली युवती ने कोर्ट में आरोपों को नकार दिया।
- हाईकोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
- युवती को शासन द्वारा क्षतिपूर्ति के तौर पर 3 लाख रुपए दिए गए थे। कोर्ट ने इस राशि को वसूलने के आदेश दिए हैं।

केस नंबर : 2
- बीरबल सिंह के खिलाफ एक नाबालिग बालिका ने पॉक्सो एक्ट के तहत थाना अंबाह जिले मुरैना में मामला दर्ज कराया था। आरोपी को 17 मार्च को गिरफ्तार किया गया।

- आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में जमानत आवेदन में कहा गया कि, पहले जिस घटना के आधार पर उसने एफआईआर दर्ज करवाई थी, उसमें मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 161 के तहत बयान दिए लेकिन बाद में पलट गई।

- आरोपी को अदालत ने जमानत दे दी और अधिकारियों को निर्देश दिए कि झूठे बयान देने पर लड़की पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

कोई झूठी एफआईआर दर्ज करवाए तो आप कैसे बचें...
- यदि किसी ने आपके खिलाफ झूठी FIR कर दी है तो आप उसे चैलेंज कर सकते हैं। ऐसे में आपकी दलीलें सही रहीं तो आपको हाईकोर्ट के जरिए राहत मिल सकती है। इस बारे में हाईकोर्ट एडवोकेट संजय मेहरा का कहना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 482 के तहत इस तरह के मामलों में चैलेंज किया जा सकता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलें सही पाईं तो रिलीफ मिल सकता है।

- किसी ने आपके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवाई है तो आप धारा 482 का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस धारा के तहत वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र लगाया जा सकता है।

- इस पत्र के साथ में आप अपनी बेगुनाही के सबूत भी दे सकते हैं। जैसे आप, वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफ्स, डॉक्युमेंट्स प्रार्थनापत्र के साथ अटैच कर सकते हैं। इससे आप अपनी बेगुनाही को मजबूती से कोर्ट में रख पाएंगे।

- चोरी, मारपीट, बलात्कार या किसी दूसरे मामले में आपको षडयंत्र करके फंसाया गया है तो आप हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। हाईकोर्ट में केस चलने के दौरान पुलिस आपके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकती। इतना ही नहीं यदि आपके खिलाफ वारंट भी जारी कर दिया गया है, तब भी केस चलने के दौरान आपको गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। कोर्ट जांच अधिकारी को जांच के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी दे सकती है।

- यदि आप इस धारा के तहत हाईकोर्ट में याचिका लगाना चाहते हैं तो पहले एक फाइल तैयार करें। इस फाइल में एफआईआर की कॉपी के साथ ही एविडेंस के जो भी जरूरी डॉक्युमेंट्स हैं, वे लगाएं। आप वकील के माध्यम से एविडेंस तैयार कर सकते हैं। आपके पक्ष में कोई गवाह है तो इसमें उसका भी जिक्र करें।

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19/11/2019

बालविवाह केवल भारत मैं ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में होते आएं हैं और समूचे विश्व में भारत का बालविवाह में दूसरा स्थान हैं। सम्पूर्ण भारत मैं विश्व के 40% बालविवाह होते हैं और समूचे भारत में 49% लड़कियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पूर्व ही हो जाता हैं। भारत में, बाल विवाह केरल राज्य, जो सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है, में अब भी प्रचलन में है। यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल आपात निधि) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीय क्षेत्रों से अधिक बाल विवाह होते है। आँकड़ो के अनुसार, बिहार में सबसे अधिक 68% बाल विवाह की घटनाएं होती है जबकि हिमाचल प्रदेश में सबसे कम 9% बाल विवाह होते है।

यह सोच कर बड़ा अजीब लगता हैं कि वह भारत जो अपने आप में एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा हैं उसमें आज भी एक ऐसी कुरीति जिन्दा हैं। एक ऐसी कुरीति जिसमें दो अपरिपक्व लोगो को जो आपस में बिलकुल अनजान हैं उन्हें जबरन ज़िन्दगी भर साथ रहने के एक बंधन में बांध दिया जाता हैं और वे दो अपरिपक्व बालक शायद पूरी ज़िन्दगी भर इस कुरीति से उनके ऊपर हुए अत्याचार से उभर नहीं पाते हैं और बाद में स्तिथियाँ बिलकुल खराब हो जाती हैं और नतीजे तलाक और मृत्यु तक पहुच जाते हैं।

तो क्या यह प्रथा भारत में आदिकाल से ही थी? या इसे बाद में प्रचलन में लाया गया? और यदि बाद में लाया गया तो इसका क्या कारण था?

यह प्रथा भारत में शुरू से नहीं थी। ये दिल्ली सल्तनत के समय में अस्तित्व में आया जब राजशाही प्रथा प्रचलन में थी। भारतीय बाल विवाह को लड़कियों को विदेशी शासकों से बलात्कार और अपहरण से बचाने के लिये एक हथियार के रूप में प्रयोग किया जाता था। बाल विवाह को शुरु करने का एक और कारण था कि बड़े बुजुर्गों को अपने पौतो को देखने की चाह अधिक होती थी इसलिये वो कम आयु में ही बच्चों की शादी कर देते थे जिससे कि मरने से पहले वो अपने पौत्रों के साथ कुछ समय बिता सकें।

बालविवाह के दुस्परिणाम?

बालविवाह के केवल दुस्परिणाम ही होते हैं जीनमें सबसे घातक शिशु व माता की मृत्यु दर में वृद्धि | शारीरिक और मानसिक विकास पूर्ण नहीं हो पता हैं

और वे अपनी जिम्मेदारियों का पूर्ण निर्वेहन नहीं कर पाते हैं और इनसे एच.आई.वि. जेसे यौन संक्रमित रोग होने का खतरा हमेशा बना रहता हैं।

बालविवाह होने के कारण?

भारत में बालविवाह होने के कई कारण हैं जैसे-

1. लड़की की शादी को माता-पिता द्वारा अपने ऊपर एक बोझ समझना |

2. शिक्षा का अभाव |

3. रूढ़िवादिता का होना |

4. अन्धविश्वास |

5. निम्न आर्थिक स्थिति |

क्या बालविवाह को रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया?

बालविवाह को रोकने के लिए इतिहास में कई लोग आगे आये जिनमें सबसे प्रमुख राजाराम मोहन राय, केशबचन्द्र सेन जिन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा एक बिल पास करवाया जिसे Special Marriage Act कहा जाता हैं इसके अंतर्गत शादी के लिए लडको की उम्र 18 वर्ष एवं लडकियों की उम्र 14 वर्ष निर्धारित की गयी एवं इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। फिर भी सुधार न आने पर बाद में Child Marriage Restraint नामक बिल पास किया गया इसमें लडको की उम्र बढ़ाकर 21 वर्ष और लडकियों की उम्र बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गयी। स्वतंत्र भारत में भी सरकार द्वारा भी इसे रोकने के कही प्रयत्न किये गए और कही क़ानून बनाये गए जिस से कुछ हद तक इनमे सुधार आया परन्तु ये पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ। सरकार द्वारा कुछ क़ानून बनाये गए हैं जैसे बाल-विवाह निषेध अधिनियम 2006 जो अस्तित्व में हैं। ये अधिनियम बाल विवाह को आंशिक रूप से सीमित करने के स्थान पर इसे सख्ती से प्रतिबंधित करता है। इस कानून के अन्तर्गत, बच्चे अपनी इच्छा से वयस्क होने के दो साल के अन्दर अपने बाल विवाह को अवैध घोषित कर सकते है। किन्तु ये कानून मुस्लिमों पर लागू नहीं होता जो इस कानून का सबसे बड़ी कमी है।

बाल विवाह को रोकने हेतु उपाय?

बालविवाह रोकने हेतु कुछ उपाय हो सकते हैं जैसे-

1. समाज में जागरूकता फैलाना |

2. मीडिया इसे रोकने में प्रमुख भागीदारी निभा सकती हैं।

3. शिक्षा का प्रसार |

4. ग़रीबी का उन्मूलन |

5. जहाँ मीडिया का प्रसार ना हो सके वह नुक्कड़ नाटको का आयोजन करना चाहिए।

19/11/2019

बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। इसकी रोकथाम के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा, तभी समाज इस बीमारी से मुक्त हो सकेगा। यह बात उपखंड अधिकारी रिछपाल सिंह बुरड़क ने राजस्थान सरकार के निर्देशों के तहत बाल विवाह व अन्य कुरीतियों को रोकने के लिए ग्राम पंचायत जाखेड़ा, चांदारूण व गुणसली में आयोजित सभा में सं‍बोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए सभी विभागों के साथ-साथ आमजन को सजगता से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना होगा। इसके लिए वार्ड स्तर पर टीमें गठित करनी चाहिए। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 को एक नवम्बर 2007 से लागू किया गया। इसमें बाल विवाह करना या करवाना संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है।

जो माता-पिता अपने पुत्र पुत्रियों का बाल विवाह करवाते है तो उन्हें 2 वर्ष का कारावास व 1 लाख रुपयों का दंड देने का प्रावधान है। उपखंड अधिकारी ने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए सीडीपीओ कार्यालय की महिला पर्यवेक्षक सहित स्वास्थ्य विभाग की कार्यकर्ता बहुत अच्छे ढंग से कार्य कर सकती है। कम उम्र की कन्याओं का विवाह होने या करवाने से बालिकाओं के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है।

बाल विवाह कानूनी जुर्म और अपराध : बीडीओ

विकास अधिकारी शिवदयाल शर्मा ने कहा कि बाल विवाह कानूनी जुर्म और अपराध है। लड़का और लड़की की सही उम्र होने के बाद ही शादी करें अगर कोई भी व्यक्ति बाल विवाह में सहयोग करते हैं या प्रोत्साहन देता है तो उसे कठोर से कठोर सजा दी जा सकती है।

उन्होंने बाल विवाह से परिवार में आने वाली परेशानियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बाल विवाह से बहुत सारी हानियां भी होती है, जिसमें कम उम्र में बच्ची का मां बनना, शारीरिक और मानसिक विकास का न होना, छोटी-छोटी बातों पर घर में लड़ाई-झगड़े होना आदि परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस मौके पर ग्राम सेवक हरिप्रसाद शर्मा, पटवारी रामकुवार विश्नोई, जाखेड़ा सरपंच जगदीश प्रजापत, ग्रामसेवक राम प्रेम सहित महिला बाल विकास विभाग की कार्यकर्ता, आशा सहित सुपरवाइजर, चिकित्सा विभाग के अधिकारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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