25/09/2026
॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥
पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तर भारत में गणेश विसर्जन करना आवश्यक सही नहीं माना जाता है।धार्मिक मान्यताएं और कारण निवास स्थान: शास्त्रों अनुसार है कि भगवान गणेश का मुख्य निवास उत्तर भारत है
अतिथि रूप: दक्षिण भारत में गणेश चतुर्थी के दौरान बप्पा को अतिथि (मेहमान) के रूप में कुछ दिनों के लिए घर लाया जाता है, कयोंकि भगवान गणेश जी अपने भैया श्री कार्तिकेयन जी से मिलने को दक्षिण भारत गए थे इसलिए उत्सव के बाद उनका विसर्जन किया जाता है।स्थाई उपस्थिति: चूंकि उत्तर भारत में भगवान गणेश का वास सदाबहार और निरंतर माना जाता है, इसलिए उन्हें विदा करने या विसर्जित करने की पारंपरिक स्थानीय संस्कृति यहां नहीं रही है।
आजकल मीडिया, लोक-लुभावने प्रचार और भेड़चाल के कारण उत्तर भारत में भी बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और घरेलू गणेश स्थापना व विसर्जन होने लगा है।विचारों में भेद: कई धर्मगुरु इसे केवल "भेड़चाल" या दूसरे राज्यों की देखा-देखी मानते है,
उदाहरण: आपके घर के बड़े बजुर्ग कुछ दिनों के लिए आपने बड़े भैया या अन्य किसी भी परिचित से मिलने जाते है ओर कुछ दिनों बाद वह अपने निवास स्थान पर वापसी करते है तो क्या आप उनको घर से बाहर निकाल दोगे , उसी तरह गणेश जी उत्तर के स्वामी है, उत्तर उनका निवास स्थान है ओर मुझे यह बात जनता को बताते हुए 10 - 12 सालो से अधिक समय हो गया है
सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार हम उत्तर भारतीय को भगवान गणेश जी का सवागत करना चाहिए, हर हर महादेव शम्भो 🌺🙏🌺