Shahar Jehanabad

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इनका नाम निक्की यादव था।वो 23 साल की थीं। हरियाणा के झज्जर की रहने वाली थीं।2018 में, उनकी मुलाकात दिल्ली के उत्तम नगर क...
23/05/2026

इनका नाम निक्की यादव था।
वो 23 साल की थीं। हरियाणा के झज्जर की रहने वाली थीं।

2018 में, उनकी मुलाकात दिल्ली के उत्तम नगर के एक कोचिंग सेंटर में साहिल गहलोत से हुई।
वो मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी कर रही थीं।
वो SSC एग्जाम की तैयारी कर रहा था।

दोनों को प्यार हो गया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार,
1 अक्टूबर 2020 को दोनों ने ग्रेटर नोएडा के एक आर्य समाज मंदिर में गुपचुप शादी कर ली।
बताया जाता है कि उनके परिवारों को इस शादी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

लेकिन साहिल का परिवार उसके लिए दूसरी लड़की की तलाश करता रहा।
दिसंबर 2022 में उसकी सगाई दूसरी लड़की से तय कर दी गई।

निक्की पूरी तरह टूट चुकी थीं।
बताया जाता है कि वो एक डायरी लिखती थीं, जिसमें उन्होंने अपने रिश्ते और साहिल पर उसके परिवार के दबाव के बारे में लिखा था।

एक जगह उन्होंने लिखा था कि साहिल नहीं चाहता था कि
“एक लड़की की वजह से उसके माता-पिता मर जाएं।”

फिर भी उन्हें उम्मीद थी कि वो उन्हें ही चुनेगा।

9 फरवरी 2023 की रात,
साहिल उत्तम नगर स्थित निक्की के फ्लैट पर गया।
उसकी आने वाली शादी को लेकर दोनों के बीच घंटों बहस हुई।

10 फरवरी की सुबह तड़के,
वो उसे कार में लेकर दिल्ली के निगमबोध घाट के पास पार्किंग एरिया में गया।

पुलिस का कहना है कि उसने मोबाइल फोन के चार्जिंग केबल से कार के अंदर ही निक्की का गला घोंट दिया।

इसके बाद वो करीब 40 किलोमीटर दूर दिल्ली के बाहरी इलाके मित्रांव गांव में अपने परिवार के ढाबे तक गया।

निक्की का शव पूरी देर कार के अंदर ही रहा,
जबकि वो घर गया, तैयार हुआ और उसी दिन अपनी शादी में शामिल हुआ।

उसी शाम, पुलिस के अनुसार,
वो वापस ढाबे पर आया और निक्की के शव को एक फ्रिज के अंदर छिपा दिया।

उधर निक्की का परिवार लगातार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा था।
साहिल ने कथित तौर पर उनसे कहा कि वो देहरादून गई हैं।

14 फरवरी 2023 को,
सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने ढाबे के फ्रिज से निक्की यादव का शव बरामद किया।

साहिल गहलोत गिरफ्तार हुआ।
बाद में पुलिस ने उसके पिता, दो चचेरे भाइयों और दो दोस्तों को भी गिरफ्तार किया,
जिन पर साजिश और सबूत मिटाने में शामिल होने के आरोप लगे।

मामला अभी भी अदालत में चल रहा है।

2020 में उसने निक्की से गुपचुप शादी की थी।

और 2023 में अपनी दूसरी शादी की सुबह,
पुलिस के अनुसार उसने निक्की की हत्या की, अपनी शादी में शामिल हुआ,
और बाद में लौटकर उसका शव छिपा दिया।

ऐसी कहानियों के लिए फॉलो करें,
जिन्हें सब को याद रखना चाहिए।

इनका नाम अनु कुमारी है।उनका जन्म 1984 में हरियाणा के सोनीपत में हुआ था।उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से फिज...
23/05/2026

इनका नाम अनु कुमारी है।
उनका जन्म 1984 में हरियाणा के सोनीपत में हुआ था।

उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से फिजिक्स की पढ़ाई की।
इसके बाद IMT नागपुर से MBA किया।

उनकी शादी हो गई।
वो एक नए शहर में चली गईं और अपने छोटे बेटे की परवरिश करते हुए एक फुल टाइम होममेकर बन गईं।

वो दुखी नहीं थीं।
लेकिन उन्हें लगता था कि कुछ अधूरा है।

2013 में उन्होंने पहली बार UPSC Civil Services Examination दिया।
वो सफल नहीं हो पाईं।

वो 29 साल की थीं।
एक बच्चा था।
कोई कोचिंग इंस्टिट्यूट नहीं।
कोई संस्थागत सहायता नहीं।

उनके आसपास ज्यादातर लोगों का कहना था कि
उनका समय निकल चुका है।

उन्होंने 2016 में फिर प्रयास किया।

और इस बार—
उन्होंने परीक्षा पास कर ली।

All India Rank 2.
उस साल देश की दूसरी सबसे बड़ी रैंक।

उन्होंने लगभग पूरी तैयारी घर पर रहकर की थी।
अपने बेटे के सो जाने के बाद पढ़ती थीं।
और उसके उठने से पहले जाग जाती थीं।

उन्होंने मुफ्त ऑनलाइन संसाधनों का इस्तेमाल किया।
उनका कोई स्टडी ग्रुप नहीं था।

पूरे सफर में उनके पति ने उनका पूरा साथ दिया।

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि
एक बार असफल होने के बाद उन्हें दोबारा कोशिश करने की प्रेरणा कहां से मिली,
तो उन्होंने कहा—

“मैं चाहती थी कि मेरा बेटा देखे कि
आप एक बार असफल होने से नहीं रुकते।
आप तब रुकते हैं जब आप खुद रुकने का फैसला करते हैं।
और मैंने रुकने का फैसला नहीं किया था।”

वर्तमान में वो केरल कैडर की IAS अधिकारी हैं
और केरल में ही कार्यरत हैं।

उस साल UPSC Rank 2 लाने वाले ज्यादातर लोग
सीधे कोचिंग अकादमियों से आए थे।

लेकिन वो—

32 साल की एक होममेकर थीं,
जो अपने बच्चे के सो जाने के बाद पढ़ाई करती थीं।

ऐसी कहानियों के लिए फॉलो करें,
जिन्हें हम सभी को हमेशा याद रखना चाहिए।

जहानाबाद जिले में भीषण गर्मी के कारण स्कूलों पर पाबंदीभीषण गर्मी की लहर के चलते बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जह...
22/05/2026

जहानाबाद जिले में भीषण गर्मी के कारण स्कूलों पर पाबंदी

भीषण गर्मी की लहर के चलते बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जहानाबाद जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।

जिला दंडाधिकारी अलंकृता पाण्डेय, आईएएस द्वारा 21 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, कक्षा 1 से 5 तक (प्राथमिक स्कूलों सहित) तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी शैक्षणिक गतिविधियां पूर्ण रूप से बंद रहेंगी। कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए दोपहर 11:00 बजे के बाद कोई भी शैक्षणिक गतिविधि नहीं होगी।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जारी इस आदेश में कहा गया है कि दोपहर में अत्यधिक तापमान के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

यह आदेश 22 मई 2026 से लागू होगा और 26 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा।

आदेश में सभी स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और संबंधित अधिकारियों को सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश की प्रतियां पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई हैं।

बिहार के कई जिलों में लगातार चल रही भीषण गर्मी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। मौसम विभाग ने राज्य में और गर्मी बढ़ने की चेतावनी दी है। इससे पहले भी कई जिलों में इसी तरह के प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।

अभिभावकों के लिए सलाह:
- दोपहर के समय बच्चों को घर के अंदर रखें।
- उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
- स्कूलों को सुबह के समय ही आवश्यक गतिविधियां पूरी करने की सलाह दी गई है।

यह आदेश बच्चों को लू लगने और गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

मोतिहारी में रेप पीड़िता से बयान दर्ज करने के नाम पर एक महिला दरोगा द्वारा 9 हजार रुपये मांगने और पीड़िता की गाड़ी लेकर ...
21/05/2026

मोतिहारी में रेप पीड़िता से बयान दर्ज करने के नाम पर एक महिला दरोगा द्वारा 9 हजार रुपये मांगने और पीड़िता की गाड़ी लेकर कई दिनों तक घुमाने का मामला सामने आया है।

इस मुद्दे पर बिहार के DGP विनय कुमार ने पटना पुलिस मुख्यालय में कड़ी नाराज़गी जताई।

उन्होंने कहा—

“जब कोई मुझे कॉल करता है, तो मैं ‘जी बोलिए’ कहकर बात करता हूं। लेकिन कुछ पुलिस पदाधिकारी जनता से बेहद रूड तरीके से बात करते हैं। उन्हें लगता है कि वर्दी और पिस्तौल रौब झाड़ने के लिए मिली है।”

उन्होंने साफ कहा—

“अगर ऐसा है, तो वर्दी छोड़ दीजिए, घर जाइए। जनता के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को आत्ममंथन करना चाहिए।”

DGP ने बताया कि मोतिहारी में एक गरीब रेप पीड़िता से बयान दर्ज करने के लिए पैसे मांगे गए। इतना ही नहीं, पीड़िता से फोर व्हीलर लेकर कई दिनों तक उसे इधर-उधर घुमाया गया। मामला सामने आने के बाद संबंधित महिला दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या आम जनता को न्याय पाने के लिए भी रिश्वत और अपमान सहना पड़ेगा?

पुलिस व्यवस्था में सुधार सिर्फ कानून से नहीं, व्यवहार से भी आता है।

जनता से सम्मानपूर्वक बात करना भी वर्दी की जिम्मेदारी है।

29 नई रेललाइनों का सर्वेक्षण..जहानाबाद से बिहारशरीफ वाया एकंगरसराय रेलखंड भी शामिल।।
21/05/2026

29 नई रेललाइनों का सर्वेक्षण..
जहानाबाद से बिहारशरीफ वाया एकंगरसराय रेलखंड भी शामिल।।

मिलिए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके से:महाराष्ट्र से आते हैंअमेरिका में रहते हैं2018 से AAP के साथ काम किय...
20/05/2026

मिलिए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके से:
महाराष्ट्र से आते हैं
अमेरिका में रहते हैं
2018 से AAP के साथ काम किया
AAP सरकार के तहत CM कार्यालय में काम किया
राजनीतिक रूप से तटस्थ नहीं हैं
भारत विरोधी प्रदर्शनों को बढ़ावा देते हैं
जाति राजनीति को बढ़ावा देते हैं
अक्सर GCs को लक्षित करते हैं
कांग्रेस और बीजेपी पर निशाना साधते हैं
लेकिन AAP की नारेटिव को आगे बढ़ाते हैं
सोशल मीडिया पर बड़ा PR और बॉट प्रमोशन
CJP का कोई भी पोस्ट 1M लाइक्स को पार नहीं कर सका
फिर भी 5 दिनों में इंस्टाग्राम पर 5M फॉलोअर्स प्राप्त किए
बॉट फॉलोअर्स खरीद रहे हैं
PR और बॉट्स पर भारी पैसा निवेश कर रहे हैं
कई AAP नेता CJP को प्रमोट कर रहे हैं
2019 में, उत्तेजक पोस्ट और कश्मीर से संबंधित सामग्री पर पुलिस मामला दर्ज होने की रिपोर्ट मिली थी
Gen Z को ऐसे खातों से सावधान रहना चाहिए जो उनके गुस्से में भरे भावनाओं का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, किसी पर भी अंधाधुंध भरोसा न करें।

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट: क्या केवल UPA या NDA जिम्मेदार है?पिछले दो दशकों में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मु...
18/05/2026

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट: क्या केवल UPA या NDA जिम्मेदार है?

पिछले दो दशकों में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी दिखाई है। वर्ष 2004 में 1 डॉलर लगभग ₹44–45 के आसपास था। 2014 तक यह बढ़कर लगभग ₹62–63 तक पहुंच गया और हाल के वर्षों में यह और अधिक स्तरों तक पहुंचा। यह बदलाव UPA और NDA दोनों सरकारों के कार्यकाल में देखने को मिला, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर रुपये की कमजोरी के पीछे कारण क्या हैं।

UPA सरकार (2004–2014) के दौरान भारत ने तेज आर्थिक विकास देखा, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी सामने आईं। बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल के आयात पर अधिक खर्च, व्यापार घाटा और 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाला। 2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण विदेशी निवेशकों ने उभरते देशों से पूंजी निकालना शुरू किया, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।

NDA सरकार (2014 से आगे) के दौरान डिजिटल भुगतान, GST, आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने जैसे कई कदम उठाए गए। हालांकि इस अवधि में भी देश को COVID-19 महामारी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संकट, बढ़ती तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा।

सवाल यह नहीं है कि केवल एक सरकार असफल रही। दोनों सरकारों ने अलग-अलग परिस्थितियों में काम किया। भारत आज भी कच्चे तेल के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। जब तेल महंगा होता है, तो अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा महंगाई, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजार की स्थितियां भी मुद्रा को प्रभावित करती हैं।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केवल रुपये की कीमत देखकर किसी सरकार की सफलता या असफलता तय नहीं की जा सकती। अधिक महत्वपूर्ण यह है कि रोजगार, आय, उद्योग, निर्यात और लोगों के जीवन स्तर में कितना सुधार हुआ।

रुपये की लंबी अवधि की यह गिरावट बताती है कि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल की विफलता का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक चुनौती है। UPA हो या NDA, किसी भी सरकार के लिए असली चुनौती अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना और दीर्घकालिक स्थिरता बनाए रखना है।

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17/05/2026

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एक हज़ार साल बाद घर वापसी: नीदरलैंड ने भारत को लौटाए चोल काल के ताम्रपत्रभारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी और खुश...
17/05/2026

एक हज़ार साल बाद घर वापसी: नीदरलैंड ने भारत को लौटाए चोल काल के ताम्रपत्र

भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी और खुशी की खबर सामने आई है। नीदरलैंड ने भारत को चोल काल के लगभग 1000 साल पुराने ताम्रपत्र (कॉपर प्लेट्स) वापस लौटा दिए हैं। यह वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान हुई और इसके पीछे दोनों देशों के बीच कई वर्षों से चल रही बातचीत और प्रयास रहे हैं।

माना जाता है कि ये ताम्रपत्र चोल साम्राज्य के समय के हैं। चोल राजवंश भारत के सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध राजवंशों में से एक था। ये ताम्रपत्र सिर्फ पुरानी वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि उस समय के इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हैं। इनमें प्रशासन, समाज, धार्मिक दान और समुद्री व्यापार से जुड़ी जानकारी दर्ज है।

इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए ऐसी चीजें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि इनके जरिए हमें यह जानने का मौका मिलता है कि पुराने समय में राज्य कैसे चलते थे, लोग कैसे रहते थे और व्यापार कैसे होता था।

आज दुनिया के कई देश अपनी पुरानी और महत्वपूर्ण धरोहरों को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि ऐतिहासिक वस्तुएँ उसी देश में होनी चाहिए जहाँ से वे जुड़ी हुई हैं।

इन ताम्रपत्रों की वापसी भारत और नीदरलैंड के बीच अच्छे संबंधों को भी दिखाती है। यह सिर्फ एक वस्तु की वापसी नहीं है, बल्कि भारत की संस्कृति, इतिहास और गौरव से फिर से जुड़ने का एक खास पल है।

करीब एक हजार साल बाद अपने देश लौटे ये ताम्रपत्र हमें याद दिलाते हैं कि हमारी विरासत सिर्फ अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि हमारी पहचान भी है।

18 साल के बाद आखिरकार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर से कल आईएएस IAS पद्मा जायसवाल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया ...
17/05/2026

18 साल के बाद आखिरकार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर से कल आईएएस IAS पद्मा जायसवाल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

इन्हें नौकरी से हटाने के लिए सरकार को बहुत पापड़ बेलने पड़े।

साल 2008 से ही इन्हें हटाने की कोशिशें चल रही थीं जो आखिरकार 18 साल बाद मुकाम पर पहुंचीं।

यह मामला 2007-2008 का है, जब वह अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में DC के पद पर तैनात थीं।

फरवरी 2008 में वहां के स्थानीय निवासियों ने शिकायत दर्ज कराई कि वह अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।

जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने से ₹28 लाख रुपये का गबन किया

इस पैसे से अपने रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदीं।

जनता की शिकायत के बाद उन्हें अप्रैल 2008 में निलंबित किया गया था,

लेकिन अक्टूबर 2010 में बहाल कर दिया गया।

इसके बाद अखिल भारतीय सेवा नियमों के तहत उनके खिलाफ लंबी विभागीय जांच चली।

CAT के एक फैसले के कारण केंद्र की कार्रवाई रुकी हुई थी,

लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने CAT के आदेश को पलटते हुए DOPT को जांच और बर्खास्तगी की अंतिम अनुमति दे दी।

अब बात करते हैं उस लेडी अफसर की, जिनकी आहट सुनकर असम के घने जंगलों में छिपे आतंकी कांपने लगते थे।लोग इन्हें ‘असम की आयरन...
17/05/2026

अब बात करते हैं उस लेडी अफसर की, जिनकी आहट सुनकर असम के घने जंगलों में छिपे आतंकी कांपने लगते थे।

लोग इन्हें ‘असम की आयरन लेडी’ कहते हैं।

हाथ में AK-47।
चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास।
और आँखों में आतंकियों के लिए मौत का खौफ।
ये कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि IPS संजुक्ता पराशर की असलियत है।
2006 बैच की जांबाज अफसर।

असम कैडर चुना, क्योंकि उन्हें पता था कि असली चुनौती वहीं है।
जब उनकी तैनाती असम के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में हुई,
तो आतंकियों ने सोचा था— "एक महिला अफसर हमारा क्या बिगाड़ लेगी?"
लेकिन संजुक्ता ने उनकी सोच को धूल चटा दी।
असम के घने जंगल, जहाँ सूरज की रोशनी भी मुश्किल से पहुँचती है...
वहाँ संजुक्ता अपनी टीम के साथ हफ्तों तक पैदल चलती थीं।
कीचड़, बारिश और मच्छरों के बीच, वो खुद अपनी AK-47 लेकर कमांडो टीम को लीड करती थीं।
सिर्फ 15 महीनों में उन्होंने जो किया, वो मिसाल बन गया:

16 खूंखार उग्रवादियों को मार गिराया।
64 से ज्यादा आतंकियों को गिरफ्तार किया।
और भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया।
उग्रवादी संगठन NDFB के लिए वो एक 'काल' बन चुकी थीं।
लोग बताते हैं कि वो आधी रात को ऑपरेशन प्लान करती थीं।
जब पूरी दुनिया सोती थी, संजुक्ता अपनी टीम के साथ उग्रवादियों के ठिकानों पर धावा बोल देती थीं।
लेकिन इस 'आयरन लेडी' का एक और रूप भी है।

एक तरफ वो आतंकियों के लिए कठोर थीं,
तो दूसरी तरफ आम लोगों और बच्चों के लिए उतनी ही नरम।
राहत शिविरों में जाकर लोगों की मदद करना और बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।
अक्सर लोग पूछते थे— "क्या आपको डर नहीं लगता?"
उनका सीधा सा जवाब होता— "डर कायरों के लिए है, वर्दी पहनने वालों के लिए नहीं।"
उन्होंने साबित कर दिया कि—
एक महिला सिर्फ घर नहीं, बल्कि देश की सीमाएं और आंतरिक सुरक्षा भी बखूबी संभाल सकती है।
आज वो दिल्ली में तैनात हैं, लेकिन असम के जंगलों में आज भी उनके नाम की गूँज सुनाई देती है।

कहानी का सार:
बहादुरी का कोई जेंडर नहीं होता।
जब एक महिला ठान लेती है कि उसे सिस्टम और समाज से गंदगी साफ करनी है,
तो वो 'संजुक्ता पराशर' बनकर इतिहास रच देती है।

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