23/08/2026
बिहार की बराबर गुफाएं (Barabar Caves) हाल ही में प्रसिद्ध लेखिका और समाजसेवी सुधा मूर्ति जी ने बिहार की ऐतिहासिक बराबर गुफाओं का दौरा किया और इस अद्भुत प्राचीन धरोहर के बारे में अपने विचार साझा किए:
अद्भुत अनुभव: उन्होंने बताया कि वह पहली बार यहाँ आई हैं और 2,400 साल पुरानी इन गुफाओं की फिनिशिंग और सटीकता देखकर हैरान हैं।
इंजीनियरिंग का कमाल: बिना किसी आधुनिक उपकरण के, कठोर ग्रेनाइट पत्थरों पर इस तरह की शीशे जैसी चमक और बारीक नक्काशी भारतीय वास्तुकला की महानता को दर्शाती है।
वर्ल्ड हेरिटेज की मांग: उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस ऐतिहासिक स्थल को UNESCO की विश्व धरोहर (World Heritage Site) सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
युवाओं से अपील: उन्होंने देश की नई पीढ़ी से आग्रह किया कि वे ऐसी जगहों पर आएं, अपने इतिहास को देखें, समझें और अपनी समृद्ध संस्कृति पर गर्व करें।
सोशल मीडिया पोस्ट (Draft)
प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का अजूबा: बराबर गुफाओं पर सुधा मूर्ति जी
बिहार की प्राचीन और ऐतिहासिक बराबर गुफाओं (Barabar Caves) का भ्रमण करते हुए सुधा मूर्ति जी ने भारत के गौरवशाली इतिहास और शिल्प कला को नमन किया।
सम्राट अशोक और बुद्ध के काल की ये गुफाएं लगभग 2,400 साल पुरानी हैं। इतने कठोर ग्रेनाइट पत्थरों को बिना किसी आधुनिक मशीन के तराशना और उन्हें शीशे जैसी फिनिशिंग देना प्राचीन भारत के कारीगरों की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है।
"बिना किसी आधुनिक औजार के ग्रेनाइट पर इतना सटीक काम करना केवल कड़ी मेहनत और अटूट श्रद्धा से ही संभव है। यह जगह हमारी राष्ट्रीय धरोहर है और इसे UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में जगह मिलनी चाहिए।" — सुधा मूर्ति