28/09/2026
इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज्बातों से,
अगर मैं इश्क लिखना भी चाहूँ तो इंकलाब लिख जाता है 🇮🇳
वह भगत सिंह था—
जिसने देश की आज़ादी के लिए यातनाएँ सहीं,
जेल की काल कोठरियों में महीने और साल बिताए,
फाँसी का फंदा स्वीकार किया,
लेकिन देश से गद्दारी करना स्वीकार नहीं किया।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव—
तीनों ने हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
उनके बलिदान के सामने आज भी सिर झुक जाता है।
और आज?कुछ लोग देश को लूटकर
अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य विदेशों में सुरक्षित करना चाहते हैं।देश की संपत्ति से अपना स्वार्थ साधते हैं,
लेकिन देश के प्रति जिम्मेदारी से बचते हैं।
वह पीढ़ी देश के लिए मरने को तैयार थी,
और आज कुछ लोग देश को अपने लिए इस्तेमाल करने को तैयार हैं।भगत सिंह ने देश को अपना भविष्य दिया,
आज कुछ लोग देश का भविष्य अपने बच्चों के नाम करना चाहते हैं।शहीदों ने हमें आज़ादी विरासत में दी है—
अब हमारी जिम्मेदारी है कि
हम उस आज़ादी, संविधान और देश की संपत्ति की रक्षा करें।
शहीद भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव को शत्-शत् नमन।
देश के महान स्वतंत्रता सेनानी,साहस और शौर्य के प्रतीक 'शहीद-ए-आजम' भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें नमन 🙏 💐