वीरा जोधपुरी

वीरा जोधपुरी 🌹जय श्री कृष्णा राधे राधे तमाम दोस्तों से मिलना मुलाकात करना मुलाकात का सिलसिला हजारों लोगों तक पहुंचाना 🌹🌹🌹🙏🙏🙏👍💯💯

17/04/2026

मैं Veerchand Chouhan के टॉप 4% फ़ैन्स में शामिल हूँ. मैंने पिछले हफ़्ते उनकी 'एंगेजमेंट की साप्ताहिक लिस्ट' पर 453 पॉइंट हासिल किया.

बेटियां घर की शान होती है......!!जब पिता रक्षक के बजाय भक्षक बन जाए या अपनी ही बेटियों के प्रति नफरत और भेदभाव का भाव रख...
16/04/2026

बेटियां घर की शान होती है......!!
जब पिता रक्षक के बजाय भक्षक बन जाए या अपनी ही बेटियों के प्रति नफरत और भेदभाव का भाव रखे, तो यह न केवल गलत है, बल्कि अमानवीय भी है। जो पिता अपनी बच्चियों के बारे में गलत सोच रखता है, वह वास्तव में खुद मानसिक रूप से बहुत कंगाल है। बेटियों को मारना या उनसे नफरत करना मर्दानगी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी कायरता है। समाज को बदलने के लिए सबसे पहले पुरुषों की इस सोच को बदलना होगा कि बेटियाँ कमतर हैं। बेटियाँ बोझ नहीं, बल्कि किस्मत वालों के घर आने वाला सौभाग्य हैं।
#बेटियां_घर_की_शान_होती_है
#बेटियां_बोझ_नहीं_है
#बेटियां_अनमोल_रत्न_होती_है
chouhan
#वीरा जोधपुरी

16/04/2026

मारवाड़ के मेघवालों का वस्त्र बुनाई की कला और सौंदर्य में योगदान:
जहां मेघवाल समुदाय की महिलाएँ पारंपरिक बुनाई (weaving) और कढ़ाई (embroidery/kadhai) की कला में माहिर हैं, तो वहीं पुरुष भी वस्त्र निर्माण की पारंपरिक कला में अपना कोई शानी नहीं रखते है। यह कला मुख्य रूप से मारवाड़ और सिंध के मेघवाल परिवारों से जुड़ी है, जो अब भी बाड़मेर आदि के ग्रामीण क्षेत्रों में देखी जा सकती हैं। मेघवालों का वस्त्र उद्योग देश की आजादी से पहले मारवाड़ राज्य के आर्थिक तंत्र की मजबूत धुरी था। मारवाड़ से सबसे ज्यादा निर्यात मेघवालों द्वारा निर्मित कपड़ों को होता था। (गजेटियर्स)। मेघवाल लोग यह कार्य घरेलू उपयोग, दहेज और शादी के कपड़ों (घाघरा, ओढ़नी, कंचली आदि) के लिए तो करते ही थे, साथ ही पूरे गांव की आवश्यकता की पूर्ति भी करते थे और उनके द्वारा बने हुए अतिरिक्त कपड़े निर्यात भी किए जाते थे। खेती बाड़ी के अलावा वस्त्र बुनाई उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन था। टेक्सटाइल मिले आ जाने से और अन्यान्य कई कारणों से अब यह कार्य समाप्त प्रायः है, फिर भी अब भी कई मेघवालों की आजीविका का साधन बुनाई ही बना हुआ है। कई मेघवाल महिलाएँ फैबइंडिया, आईकिया जैसे बड़े ब्रांड्स को सामान सप्लाई करती हैं।

बुनाई (Bunayi / Weaving)
अब भी मेघवाल समुदाय विशेष रूप से पट्टू (Pattu) बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। यह ऊनी (wool) कपड़े की हस्तबुनाई है, जिसमें रंग-बिरंगे ज्यामितीय पैटर्न (geometric patterns) होते हैं। इनमें झोपड़ियाँ (huts), पेड़, पक्षी, जानवर और प्रकृति से प्रेरित डिज़ाइन बुनकर बनाए जाते हैं। पट्टू मुख्य रूप से शॉल, कंबल या ओढ़ने के कपड़े के रूप में इस्तेमाल होता है। बुनाई पुरुष या परिवार के सदस्य भी करते हैं, जबकि महिलाएँ इसमें मदद करती हैं। यह कला थार रेगिस्तान की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
(महिलाओं की कढ़ाई (Kadhai / Embroidery) के बारे में पूर्व में साझा की गई पोस्ट्स में जानकारी दे दी गई है। मेघवाल महिलाएँ पक्को कढ़ाई (Pakko embroidery) में विशेष निपुण हैं, जिसमें कपड़े पर लगभग हर इंच कढ़ाई भरी होती है (solid/dense stitching)। प्रमुख प्रकार:
* सूफ (Suf) और खरक/खारेक (Kharak/Kharek) कढ़ाई — ज्यामितीय और फूल-पत्ती के डिज़ाइन।
* आभला/शिशा

15/04/2026

जय भीम जय संविधान से गूंज उठा जोधपुर
#जोधपुर ीम_जय_संविधान #रेली

जय भीम जय संविधान बाबा साहब की जयंती पर सभी दोस्तों को कोटि-कोटि प्रणाम
14/04/2026

जय भीम जय संविधान बाबा साहब की जयंती पर सभी दोस्तों को कोटि-कोटि प्रणाम

14/04/2026

दोस्तों कुछ यादगार पल सांझा कर रहा हूं अच्छा लगता है तो वीडियो जरुर शेयर करना

13/04/2026

आरसीएम वंडर वर्ड में सुरेश जी गढवीर का हार्दिक स्वागत
#फॉलोअर

13/04/2026

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