19/04/2026
कबीर ज्ञान पूर्ण ज्ञान..
कबीर,धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, फल आवै ऋतु होय।।
कबीर,ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए।
औरन को शीतल करें, आपहुं शीतल होय।।
कबीर, और ज्ञान सब ज्ञानडी, कबीर ज्ञान सो ज्ञान।
जैसे गोला तोप का, करता चले मैदान।।
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।