ओबीसी संयोजन समिति-कबीरधाम

  • Home
  • India
  • Kawardha
  • ओबीसी संयोजन समिति-कबीरधाम

ओबीसी संयोजन समिति-कबीरधाम Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from ओबीसी संयोजन समिति-कबीरधाम, Social Media Agency, Kabirdham, Kawardha.

 #10सितंबर_ओबीसी_दिवस  #ओबीसी_फर्स्ट_न्यूज    #ओबीसी_संयोजन_समिति_भारत
10/09/2026

#10सितंबर_ओबीसी_दिवस
#ओबीसी_फर्स्ट_न्यूज

#ओबीसी_संयोजन_समिति_भारत

ललई सिंह यादव(1 सितंबर 1911-7 फरवरी 1993)उत्तर भारत के पेरियार , महान समाज सुधारक, क्रांतिकारी लेखक और शोषितों, वंचितों ...
01/09/2026

ललई सिंह यादव
(1 सितंबर 1911-7 फरवरी 1993)
उत्तर भारत के पेरियार , महान समाज सुधारक, क्रांतिकारी लेखक और शोषितों, वंचितों की आवाज #पेरियार_लल्ई_सिंह_यादव की 115 वीं जयंती पर भावपूर्ण नमन!!!!

“ललई सिंह यादव ने कलम, प्रकाशन और वैचारिक संघर्ष को हथियार बनाकर जातिगत भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक असमानता के विरुद्ध आवाज उठाई।”

उन्होंने कहा था- " सच्ची आजादी तब तक अधूरी है , जब तक हर नागरिक मानसिक गुलामी से आजाद नहीं हो जाता है।"

ललई सिंह यादव ने पेरियार की लिखी 'रामायणः अ ट्रू रीडिंग' को हिंदी में सच्ची रामायण नाम से प्रकाशित किया था. ये किताब बैन हुई तो सुप्रीम कोर्ट में केस लड़े । केस संख्या 291/1971*था। इस ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने 16 सितंबर 1976 को फैसला सुनाया था और राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले का केस नंबर 412/1970 था।

ओबीसी(अन्य पिछड़ा वर्ग) संयोजन समिति, छत्तीसगढ़ (रजि.)

हेल्पलाइन -9827183817,9406061165

108 वीं जयंती विशेष:बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल( B P MANDAL) (28/08/1918-13/04/1982)एक भारतीय राजनेता थे।मुख्य तथ्यजन्म: 25 अ...
25/08/2026

108 वीं जयंती विशेष:

बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल( B P MANDAL)
(28/08/1918-13/04/1982)

एक भारतीय राजनेता थे।
मुख्य तथ्य
जन्म: 25 अगस्त 1918, वाराणसी (बनारस) में।
मृत्यु: 13 अप्रैल 1982 (उम्र लगभग 63-64 वर्ष)।
परिवार: बिहार के मधेपुरा जिले के मुरहो गांव के एक यादव जमींदार परिवार से थे। उनके पिता राय बहादुर रासबिहारी लाल मंडल थे।

राजनीतिक जीवन
वे बिहार के सातवें मुख्यमंत्री रहे (1 फरवरी 1968 से 2 मार्च 1968 तक, लगभग 30 दिन)। मधेपुरा लोकसभा सीट से सांसद भी रहे (1967–1970 और 1977–1979)। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, कांग्रेस और शोषित दल जैसी पार्टियों से जुड़कर काम किया।

मंडल आयोग
उनकी सबसे बड़ी पहचान मंडल आयोग (द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग) के अध्यक्ष के रूप में है। 1979 में मोरारजी देसाई सरकार ने इस आयोग का गठन किया। आयोग ने 1980 में रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC) की पहचान की और सरकारी नौकरियों व शिक्षा में 27% आरक्षण की सिफारिश की। यह सिफारिश 1990 में वी.पी. सिंह सरकार द्वारा लागू की गई, जिससे भारतीय राजनीति और सामाजिक न्याय आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

वे पिछड़े वर्गों के उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए जाने जाते हैं। उनकी जयंती (25 अगस्त) पर अक्सर याद किया जाता है।

महामना रामस्वरूप वर्मा(22 अगस्त 1923 – 19 अगस्त 1998)103वीं जयंती पर ओबीसी समाज और अर्जक संघ इसे क्रांति दिवस के रूप में...
22/08/2026

महामना रामस्वरूप वर्मा
(22 अगस्त 1923 – 19 अगस्त 1998)

103वीं जयंती पर ओबीसी समाज और अर्जक संघ इसे क्रांति दिवस के रूप में मनाते हैं। उन्हें राजनीति का कबीर, उत्तर भारत का आंबेडकर और मानववाद का प्रणेता कहा जाता है।

संक्षिप्त जीवन
कानपुर देहात के गौरीकरन गाँव के कुर्मी किसान परिवार में जन्म। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी एम.ए. तथा आगरा विश्वविद्यालय से एलएलबी। छात्र जीवन से समाजवादी विचारों से जुड़े रहे। 1957 में 34 वर्ष की आयु में भोगनीपुर से विधायक चुने गए। 1967 में चौधरी चरण सिंह सरकार में वित्त मंत्री बने और बिना नया कर लगाए 20 करोड़ का लाभ वाला बजट पेश किया। उनका मानना था—“किसान से बेहतर अर्थशास्त्री कोई नहीं होता।”

अर्जक संघ और सामाजिक क्रांति
1 जून 1968 को अर्जक संघ की स्थापना की। उद्देश्य था ब्राह्मणवाद, जातिवाद, अंधविश्वास, भाग्यवाद और पुनर्जन्म की धारणा को समाप्त कर समतामूलक मानववादी समाज का निर्माण। उन्होंने ‘अर्जक’ साप्ताहिक शुरू किया। डॉ. आंबेडकर से गहराई से प्रभावित रहे। ईश्वर, आत्मा और पुनर्जन्म का खंडन कर वैज्ञानिक चेतना व तर्क पर जोर दिया। 1978 में रामायण और मनुस्मृति दहन का आह्वान किया। जगदेव प्रसाद के साथ शोषित समाज दल का गठन किया।

वे मानते थे कि केवल राजनीतिक-आर्थिक समानता पर्याप्त नहीं, सामाजिक-सांस्कृतिक क्रांति जरूरी है। अर्जक संघ पारंपरिक त्योहारों की जगह गणतंत्र दिवस, आंबेडकर जयंती (चेतना दिवस), बुद्ध जयंती (मानवता दिवस) आदि मनाता है।

हर वर्ष 22 अगस्त को अर्जक संघ, शोषित समाज दल और बहुजन संगठन उनके विचारों—सामाजिक न्याय, समानता, तर्क और मानववाद—को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

महामना रामस्वरूप वर्मा को जयंती पर शत-शत नमन। उनके विचार आज भी जातिवाद, अंधविश्वास और असमानता के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा देते हैं।

OBC का सवाल सिर्फ “जाति” लिख देने से खत्म नहीं होगा!आज 14 अगस्त 2026 को Census 2027 के 40 सवाल अधिसूचित किए गए। प्रश्न स...
15/08/2026

OBC का सवाल सिर्फ “जाति” लिख देने से खत्म नहीं होगा!

आज 14 अगस्त 2026 को Census 2027 के 40 सवाल अधिसूचित किए गए। प्रश्न संख्या 10 में “SC/ST/Caste” लिखा है, लेकिन OBC का अलग कॉलम/श्रेणी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई।

अगर Narendra Modi Amit Shah Bharatiya Janata Party (BJP) सरकार सच में जातिगत जनगणना कर रही है तो OBC की जातियों का अलग-अलग वैज्ञानिक रिकॉर्ड और कुल OBC आबादी का आधिकारिक आंकड़ा कैसे सुनिश्चित होगा?

ओबीसी महासभा की मांग स्पष्ट है—जाति पूछो तो जाति का पूरा डेटा दो।
OBC की गणना करो और आधिकारिक आंकड़ा दो।

आधे-अधूरे प्रारूप से करोड़ों पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ न्याय नहीं होगा।

जनगणना हमारा अधिकार है, सही सामाजिक आंकड़ा हमारा अधिकार है।


#जातिगत_जनगणना

63वीं जयंती विशेषफूलन देवी निषाद(10 अगस्त 1963 – 25 जुलाई 2001)फूलन देवी का जीवन भारतीय इतिहास की सबसे विवादास्पद और बहु...
10/08/2026

63वीं जयंती विशेष
फूलन देवी निषाद
(10 अगस्त 1963 – 25 जुलाई 2001)
फूलन देवी का जीवन भारतीय इतिहास की सबसे विवादास्पद और बहुआयामी कहानियों में से एक है। उनकी कहानी गरीबी, जातिवाद, यौन हिंसा, बदला, डकैती और फिर राजनीति तक जाती है।
उनकी आत्मकथा I, Phoolan Devi (माला सेन की मदद से) प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने अपनी कहानी अपने शब्दों में बताई। शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन (1994) पर उन्होंने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा रोती-चिल्लाती कमजोर महिला के रूप में दिखाया गया, जबकि वे फैसले खुद लेती थीं। फिल्म के खिलाफ उन्होंने मुकदमे भी किए।
10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के गोरहा का पुरवा गाँव में एक गरीब मल्लाह परिवार में जन्म हुआ। पिता देवीदीन मल्लाह (किसान/मछुआरा) और माता मूला देवी थीं। बचपन में गरीबी, जातिगत भेदभाव और परिवार की जमीन को लेकर विवाद झेला।
लगभग 11 साल की उम्र में करीब 30-35 साल के विधुर पुत्तीलाल से शादी कर दी गई (गाय और साइकिल के बदले)। पति से शारीरिक शोषण के कारण कुछ समय बाद वापस घर लौट आईं।
किशोरावस्था में डकैतों के गिरोह द्वारा अपहरण और यौन शोषण का शिकार हुईं। विक्रम मल्लाह (एक डकैत) ने उनकी मदद की। दोनों ने मिलकर गिरोह बनाया। विक्रम की हत्या के बाद फूलन ने खुद गिरोह का नेतृत्व किया। ऊँची जाति (ठाकुर) के लोगों और अमीरों को निशाना बनाकर लूटपाट, अपहरण और हमले किए। निचली जातियों में वे “रॉबिन हुड” जैसी मानी जाने लगीं।
बेहमई हत्याकांड (सबसे कुख्यात घटना)
14 फरवरी 1981 को बेहमई गाँव में उनके गिरोह ने 20-22 ठाकुर पुरुषों की हत्या कर दी। कहा जाता है कि यह उन लोगों से बदला था जिन्होंने पहले उनका बलात्कार और अपमान किया था। इस घटना ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बना दिया।
12 फरवरी 1983 को मध्य प्रदेश के भिंड/ग्वालियर में हजारों लोगों और पुलिस के सामने सार्वजनिक रूप से आत्मसमर्पण किया। लगभग 11 साल जेल में रहीं। 1994 में उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार (मुलायम सिंह यादव) ने मामलों को वापस लेकर उन्हें रिहा कर दिया।
राजनीतिक जीवन
समाजवादी पार्टी से जुड़ीं। 1996 में मिर्जापुर/भदोही से लोकसभा सांसद चुनी गईं। 1998 में हार गईं, लेकिन 1999 में दोबारा सांसद बनीं। संसद में निचली जातियों, महिलाओं और गरीबों के अधिकारों की बात करती रहीं।
हत्या
25 जुलाई 2001 को नई दिल्ली में अपने आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। उम्र सिर्फ 37 साल थी। शेर सिंह राणा (और साथियों) को दोषी ठहराया गया। माना जाता है कि बेहमई हत्याकांड का बदला था।
विरासत
फूलन देवी निषाद निचली पिछड़ी और ओबीसी समाज में सबसे बड़ी प्रेरणा मानी जाती हैं, जिन्होंने एक डाकू बनने के बाद राजनीतिक जीवन में आकर गरीबों के लिए संघर्ष किया।
हम ओबीसी संयोजन समिति भारत क्रांतिकारी फूलन देवी को आज से “जस्टिस क्वीन” कहेंगे।
जय फूलन
जय ओबीसी!!!!

📢📢📢7 अगस्त को धमतरी शहर के जिला साहू समाज भवन, बांसपारा में “ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस” के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन ...
09/08/2026

📢📢📢
7 अगस्त को धमतरी शहर के जिला साहू समाज भवन, बांसपारा में “ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस” के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन के प्रदेश पदाधिकारी एवं कोर कमेटी के सदस्यगण शामिल हुए।
यह तारीख केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि वह महान दिवस है जब भारत गणराज्य के आठवें प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी ने ओबीसी समाज को उनकी लंबित मांग—27 प्रतिशत आरक्षण—प्रदान किया था।
इस अवसर पर आचार्य श्री नारायण कौशिक महाराज जी के श्री मुख से कार्तिकेय कथा सुनाई गई, जिसमें भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पौराणिक कथा के साथ आध्यात्मिक मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर आगामी 10 सितम्बर 2026 को “ओबीसी दिवस” को राज्यस्तरीय स्तर पर धमतरी जिले के ग्राम कचना-मडेली में मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

!!!! ॐ नमः शिवाय !!!!07 अगस्त 2026"ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस"                     एवंश्रावण मास कार्तिगई कथा आयोजन       ...
04/08/2026

!!!! ॐ नमः शिवाय !!!!

07 अगस्त 2026

"ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस"
एवं
श्रावण मास कार्तिगई कथा आयोजन

सादर आमंत्रण!!

कार्तिगई कथा श्रावण मास में जब चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में होता है, उस पावन अवसर पर भगवान महादेव एवं भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) की आराधना एवं कथा का आयोजन किया जाता है।

07 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की अनुशंसाओं के प्रथम चरण को लागू कर ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण प्रदान किया। यह स्वतंत्र भारत में सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाता है।

कार्यक्रम

1. श्रावण मास कार्तिगई कथा एवं विशेष प्रवचन - आचार्य श्री नारायण कौशिक जी महाराज (युग पुरोहित)

2. "ओबीसी सामाजिक न्याय दिवस" पर विशेष व्याख्यान:- अधिवक्ता श्री शत्रुहन सिंह साहू (सदस्य राज्य विधिज्ञ परिषद छत्तीसगढ़)

3. "ओबीसी दिवस" (10 सितम्बर 2026) की तैयारी एवं संगठनात्मक चर्चा-: श्री टिकेश्वर साहू

दिनांक: 07 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
समय: दोपहर 12:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक
स्थान: साहू समाज भवन,इतवारी बाजार, साईं मंदिर के पास,बांसपारा -धमतरी (छत्तीसगढ़)

आयोजक
ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) संयोजन समिति, छत्तीसगढ़ (रजि.)

संपर्क:
9827183817 | 940601165 | 9009190075 | 9893319674 | 9981894385 | 7828476664

सामाजिक न्याय • सामाजिक समरसता • संगठन • जागरूकता

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध ...
26/06/2026

छत्रपति शाहू जी महाराज (राजर्षि शाहू महाराज) किन152वीं जयंती विशेष -

राजर्षि शाहू जी महाराज कोल्हापुर रियासत के प्रसिद्ध शासक, सामाजिक सुधारक और शिक्षाप्रेमी थे। उनका जन्म 26 जून 1874 को कागल (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) में यशवंतराव घाटगे के रूप में हुआ था। वे शिवाजी महाराज की वंश परंपरा से जुड़े भोंसले राजवंश के थे। महारानी आनंदीबाई ने उन्हें गोद लिया और 1894 में मात्र 20 वर्ष की आयु में कोल्हापुर की गद्दी संभाली। उन्होंने 1922 तक शासन किया।
खास बातें और योगदान:
सामाजिक न्याय और आरक्षण के अग्रदूत: 1902 में उन्होंने भारत में सबसे पहले 50% आरक्षण की नीति लागू की — सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पिछड़ी जातियों (Non-Brahmin) के लिए। यह सामाजिक समानता की दिशा में क्रांतिकारी कदम था।
शिक्षा क्रांति:
मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा (1917) लागू की, जो सभी जाति-धर्म के बच्चों के लिए थी।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, लड़कियों के लिए स्कूल, हॉस्टल और छात्रवृत्तियां शुरू कीं।
कई हॉस्टल, स्कूल और कॉलेज स्थापित किए (जैसे राजाराम कॉलेज)।
पिछड़े वर्गों, दलितों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं दीं। उन्होंने डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे नेताओं का भी समर्थन किया।
किसानों और समाज के उत्थान: सिंचाई नीतियां शुरू कीं, भूमि सुधार किए और किसानों की स्थिति सुधारने के प्रयास किए।
महिलाओं के अधिकार: बाल विवाह पर रोक, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा, देवदासी प्रथा पर प्रतिबंध जैसी सुधार लाए।
व्यक्तित्व: वे "राजर्षि" उपाधि से सम्मानित थे। लोकप्रिय राजा के रूप में जाने जाते थे, जो जातिवाद के खिलाफ थे और समानता के पक्षधर थे। उनका निधन 6 मई 1922 को मात्र 47 वर्ष की आयु में हुआ।
शाहू महाराज का योगदान आज भी महाराष्ट्र और पूरे भारत में सामाजिक न्याय, शिक्षा और समावेशी विकास की प्रेरणा है।

नोट: कभी-कभी लोग 18वीं शताब्दी के मराठा सम्राट शाहू (शिवाजी के पौत्र) को भी छत्रपति शाहू कहते हैं, लेकिन "शाहू जी महाराज" से आमतौर पर कोल्हापुर वाले राजर्षि शाहू महाराज ही समझे जाते हैं।

विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) जयंती विशेष(25 जून 1931 – 27 नवंबर 2008) 🇮🇳भारत के सातवें प्रधानमंत्री (2 दिसंबर 1989...
25/06/2026

विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) जयंती विशेष
(25 जून 1931 – 27 नवंबर 2008) 🇮🇳

भारत के सातवें प्रधानमंत्री (2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 तक) विश्वनाथ प्रताप सिंह आज भी सामाजिक न्याय, ईमानदारी और सिद्धांतों की राजनीति के प्रतीक माने जाते हैं।
जीवन परिचय
एक राजपूत जमींदार परिवार (मांडा राजघराना) में जन्म। उन्होंने मांडा के राजा बहादुर राम गोपाल सिंह द्वारा गोद लिया गया था।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय और पूना (पुणे) विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की (बी.ए., एलएल.बी. और बी.एससी.)।
25 जून 1955 को श्रीमती सीता कुमारी (देवगढ़-मादड़िया राजपरिवार की राजकुमारी) से विवाह। दो पुत्र: अजेय प्रताप सिंह और अभय प्रताप सिंह।
राजनीतिक सफर
छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय; भूदान आंदोलन में भाग लिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष रहे।
कांग्रेस से राजनीतिक शुरुआत। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (1980–1982)।
राजीव गांधी सरकार में वित्त मंत्री के रूप में काले धन, कर चोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान चलाया।
रक्षा मंत्री रहते बोफोर्स घोटाले की निष्पक्ष जांच में ईमानदारी का परिचय दिया, जिसके कारण कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया। उनके प्रयासों से 12 अप्रैल 1990 को संसद के सेंट्रल हॉल में डॉ. आंबेडकर की तस्वीर लगवाई गई (संसद में पहली बार)।
1988 में जनता दल की स्थापना की। 1989 में नेशनल फ्रंट गठबंधन के जरिए प्रधानमंत्री बने।

Address

Kabirdham
Kawardha
��

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when ओबीसी संयोजन समिति-कबीरधाम posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share