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 #भारत की महान  #श्रमण परंपरा, #अन्तर्राष्ट्रीय  #त्रिविध पावनी महापर्व वैशाख पूर्णिमा/ #बुद्ध_पूर्णिमा के पावन अवसर पर ...
01/05/2026

#भारत की महान #श्रमण परंपरा, #अन्तर्राष्ट्रीय #त्रिविध पावनी महापर्व वैशाख पूर्णिमा/ #बुद्ध_पूर्णिमा के पावन अवसर पर समस्त जनमानस को हार्दिक बधाई मंगलकामनाएं।

आज वैशाख पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर #सम्राट_असोक_क्लब भारत, सम्पूर्ण विश्व में #शांति, #करुणा, #मैत्री सौहार्द पूर्ण वातावरण में तथागत गौतम बुद्ध के #धम्म मार्ग पर चलते हुए। सम्पूर्ण मानव में मानवता जागृत हो। जिससे सबका मंगल व कल्याण हो सके। ऐसा मंगल कामना करता है।

वैश्विक स्तर पर जो परिस्थितियां उत्पन्न हुई है, एक तरफ युद्ध से पूरी मानवता त्राहिमाम कर रही है। ऐसे में भगवान तथागत गौतम बुद्ध के धम्म की आवश्यकता महसूस होती है, #वैश्विक #शांति के लिए युद्ध नहीं #बुद्ध के #धम्म की जरूरत है।

भगवान तथागत गौतम बुद्ध के #जन्म, #संबोधि और #महापरिनिर्वाण का प्रतीक यह पावन दिन है। भगवान तथागत गौतम बुद्ध की शिक्षाएं हम सभी को आंतरिक शांति, करुणा, मैत्री, मानव कल्याण और धम्म के मार्ग की ओर जाने के लिए प्रेरणादायी हैं। इस पावन अवसर पर आप सभी लोग वैश्विक शांति विकसित करने और आम जनमानस में करुणामयी सौहार्द बनाने में अपना योगदान देने का प्रयास किजिए।

बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर सम्राट असोक क्लब भारत संपूर्ण विश्व में मानवता, सद्भावना, आपसी प्रेम, भाईचारा, करुणा, मैत्री के साथ समस्त विश्व जनमानस के सुखमय जीवन की धम्म मंगल कामना एवं हार्दिक बधाई देता है।
#बुद्ध_पूर्णिमा



lllभवतु सब्ब मंगलंlll

 #अखंड  #भारत के  #निर्माता  #राष्ट्रनायक  #चक्रवर्ती  #सम्राट  #चंद्रगुप्त  #मौर्य  #जयंती 10 अप्रैल 2026सम्राट चंद्रगु...
08/04/2026

#अखंड #भारत के #निर्माता #राष्ट्रनायक #चक्रवर्ती #सम्राट #चंद्रगुप्त #मौर्य #जयंती 10 अप्रैल 2026

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म वेसाको अट्ठमी कण्ह पक्ख (वैसाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी) को मनाया जाता है। #पालि में कण्ह का अर्थ होता है काला अर्थात अंधेरी रात, वही रात जो अमावस्या से पहले होती है।

इस प्रकार सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की जयंती का स्पष्ट, ऐतिहासिक और वास्तविक प्रमाण मिलता है। वर्ष 2026 में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी 10 अप्रैल को पड़ रही है, अर्थात सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य जयंती 10 अप्रैल 2026 को है।

#सम्राट_असोक_महान के #पुत्र महाथेर #महिंद तथा उनके साथ #मगध से गए विद्वान #बौद्ध भिक्षुओं ने सिरीलंका में #उत्तरविहारट्ठकथा नामक ग्रंथ की रचना की थी। इस ग्रंथ के अनुसार #मोरिय नगर में राजा #चंदवद्धन राज्य कर रहे थे और उनकी जीवनसंगिनी महारानी #धम्म #मोरिया थीं।

उत्तरविहारट्ठकथा का हिन्दी #अनुवाद माननीय #सिद्धार्थ_वर्धन_सिंह जी ने किया है, जिनके माध्यम से हम लोग आज #इतिहास को वास्तविक रूप से जान पा रहे हैं।

#यूनानी दूत #मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक Indica में लिखा है कि #पाटलिपुत्र नगर गंगा और सोन नदी के संगम पर स्थित था, तथा यह नगर चारों ओर से लगभग 184 मीटर चौड़ी और 30 क्यूबिक गहरी खाई से घिरा हुआ था।

दिनांक 28 फरवरी 1793 ई. को कलकत्ता की एशियाटिक सोसाइटी के संस्थापक विलियम जोन्स ने एक सम्मेलन में यह घोषणा की कि “सेंड्रोकोटस” ही चंद्रगुप्त मौर्य हैं।भारत के इतिहास की इस सबसे बड़ी खोज पर इतिहासकार राधाकुमुद मुखर्जी ने विलियम जोन्स का आभार व्यक्त किया था। इस खोज से चंद्रगुप्त मौर्य और उनके शासनकाल के ठोस प्रमाण प्राप्त हुए।_

फिर भी भारत के कुछ संकीर्ण इतिहासकारों की मानसिकता देखिए, वे आज भी “जो जीता वही सिकंदर” का गुणगान करते नहीं थकते, जबकि उन्हें यह कहना चाहिए कि जिसने सिकंदर को भी जीता, वह चंद्रगुप्त मौर्य थे।
इसीलिए हमे कहना चाहिए " जो जीता वही सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य " यही सार्थक है, यही सत्य है।

आइए, 10 अप्रैल 2026 को सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की जयंती धूमधाम से मनाएं।

#चंद्रगुप्त_मौर्य

#मौर्य_साम्राज्य
#अखण्ड_भारत
सम्राट अशोक महान:: वर्तमान भारत Shakyanshmangal Maurya सम्राट अशोक क्लब, शाखा विहार Durgesh Maurywanshi Mohan Maurya

सम्राट असोक महान की 2330वीं जयंती (लोक कल्याणकारी पर्व) की पूर्व संध्या पर आप सभी देशवासियों को हार्दिक मंगलकामनाएं।यह स...
25/03/2026

सम्राट असोक महान की 2330वीं जयंती (लोक कल्याणकारी पर्व) की पूर्व संध्या पर आप सभी देशवासियों को हार्दिक मंगलकामनाएं।

यह सिर्फ एक जयंती नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और लोककल्याण की उस महान विरासत को स्मरण करने का अवसर है, जिसने संसार को नई दिशा दी।
आइए, हम सब मिलकर उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
#सम्राट_अशोक_जयंती




#सम्राट_अशोक_जयंती_पर_राष्ट्रीय_अवकाश

आप सभी भारतवासियों को सम्राट असोक महान जी के 2330 वें जन्मोत्सव (26 मार्च 2026, चैत द्वितीय पक्ष अष्टमी 304 BC) के मंगल ...
20/03/2026

आप सभी भारतवासियों को सम्राट असोक महान जी के 2330 वें जन्मोत्सव (26 मार्च 2026, चैत द्वितीय पक्ष अष्टमी 304 BC) के मंगल अवसर पर बधाईयां, मंगल कामनाएं, जय भारत, जय सम्राट असोक महान।

1️⃣ स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्मृतिशेष मा.पं.जवाहर लाल नेहरू ने अपनी लोकप्रिय पुस्तक *विश्व इतिहास की झलक* में तीन सम्राटों के नाम अंकित किए हैं
1. अखंड भारत के निर्माता-सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य
2. सर्वलोकहितकारी कार्यों के संवाहक - सम्राट असोक महान
3. प्रयागराज के महाकुम्भ में अपनी प्रजा के कल्याण के लिए धम्म दान करने वाले - सम्राट हर्षवर्द्धन
नेहरू जी ने सम्राट असोक महान को महानतम सम्राट की संज्ञा दिया है।

2️⃣ इसके साथ-साथ भारतीय संविधान निर्माताओं ने सम्राट असोक महान के स्थापत्य कला को समर्पित सारनाथ स्तम्भ का शीर्ष भाग, अशोक चक्र सहित भारतीय तिरंगा,पुरस्कार के रूप में असोक चक्र सहित अनेक संदर्भों में सम्राट असोक महान के धम्म और प्रजा के कल्याण की नीतियों को अक्षरशः स्वीकार किया है।

3️⃣ अंग्रेज अधिकारी और पुरातत्वविद जेम्स प्रिंसेज और अलेक्जेंडर कनिंघम महोदय ने मिट्टी की परत को हटाकर सम्राट असोक महान के धम्म,इतिहास,भूगोल, राजनीति,अहिंसक साम्राज्य, प्रकृति संवर्द्धन के कार्य और उनके द्वारा अंकित शिलालेखों,स्तम्भ लेखों, गुहा लेखों को दुनियां के सामने ला दिया और उनके परिश्रम को कालजयी बनाने के लिए सम्राट अशोक क्लब भारत ने उनसे कदम से कदम मिलाते हुए भारत के लोगों तक सम्राट असोक महान के व्यक्तित्व और सम्राट असोक महान जन्मोत्सव महोत्सव को पहुंचा दिया।

4️⃣ मगध विहार से सम्राट असोक महान जी का जन्म जन्मों का रिश्ता रहा है और मगध विहार ने उन्हें अपने प्रदेश में उनके नाम पर अवकाश तथा उनके जन्मोत्सव को राजकीय समारोह के रूप में मनाकर स्वयं को कृतज्ञ किया है ।

➡️ अब बस भारत सरकार से विनम्र निवेदन है कि सम्राट असोक महान जन्मोत्सव महोत्सव पर सार्वजिक राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर भारत वर्ष के महान सम्राट,सम्राट असोक महान के सर्व लोक कल्याण कारी कार्यों और नीतियों को प्रचारित-प्रसारित कर उनके धम्म संदेश *सब्ब मनुहस्से मम पजा* को सफल बनाएं।

#सम्राट_अशोक_जयंती

#सम्राट_अशोक_जयंती_पर_राष्ट्रीय_अवकाश
#26मार्च

अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री माननीय स्वामी प्रसाद मौर्य जी के आह्वान पर आज दिल्ली में जंतर-मंत...
18/03/2026

अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री माननीय स्वामी प्रसाद मौर्य जी के आह्वान पर आज दिल्ली में जंतर-मंतर पर बहुजन समाज का विशाल जनसैलाब उमड़ा।
यह भीड़ नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान और न्याय की निर्णायक आवाज़ है।
अब UGC कानून लागू करना सरकार की मजबूरी है, बहुजन समाज जाग चुका है।
Swami Prasad Maurya Apni Janta Party 🛺

भारत को सोने की चिड़िया बनाने वाले  चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की युद्ध से धम्मघोष तक की अद्भुत यात्राभारतीय इतिहास में ...
18/03/2026

भारत को सोने की चिड़िया बनाने वाले चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की युद्ध से धम्मघोष तक की अद्भुत यात्रा

भारतीय इतिहास में यदि किसी शासक ने शक्ति, शासन, करुणा और मानवता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है तो वह चक्रवर्ती सम्राट असोक महान हैं वे महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र और महाराज बिंदुसार के पुत्र थे। लगभग 268 ईसा पूर्व में उन्होंने मगध साम्राज्य की गद्दी संभाली और अपने पराक्रम, प्रशासन और नीतियों से भारत को एक विशाल और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किये।

सम्राट असोक का साम्राज्य उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तक, और पश्चिम में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में बंगाल तक फैला हुआ था। वे एक शक्तिशाली और पराक्रमी राजा थे, जिन्होंने अपने साम्राज्य को मजबूत बनाने के लिए कई युद्ध लड़े और एक भी युद्ध नहीं हारे।

सम्राट असोक के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना कलिंग युद्ध थी, जो लगभग 261 ईसा पूर्व में हुआ। यह युद्ध आज के ओडिशा क्षेत्र में लड़ा गया था। कलिंग युद्ध से उनका हृदय परिवर्तन हुआ। इसी घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने साम्राज्य विस्तार का मार्ग त्याग कर घम्मघोष का रास्ता चुने। और अपने शासन की नीति को “धम्म” अर्थात नैतिक जीवन पर आधारित लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना किये। उनका धम्म किसी एक धर्म/सम्प्रदाय तक सीमित नहीं था, बल्कि वह मानवता, करुणा, अहिंसा, सहिष्णुता और सभी धर्मों के सम्मान पर आधारित था।

सम्राट असोक ने अपने शासनकाल में जनता के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने सड़कों का निर्माण कराया, यात्रियों के लिए सराय बनवाई, जगह-जगह कुएँ और तालाब खुदवाए तथा मनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सालय बनवाए। उन्होंने सड़कों के किनारे पेड़ लगवाए ताकि यात्रियों को छाया मिल सके। असोक ने प्रशासन को न्यायपूर्ण और जनकल्याणकारी बनाया।

सम्राट असोक महान ने बुद्ध धम्म के प्रचार -प्रसार के लिए अपने पुत्र महाथेर महिन्द (महेंद्र) और पुत्री महाथेरी संघमित्ता (संघमित्रा) को श्रीलंका भेजे। उनके प्रयासों से तथागत बुद्ध का धम्म भारत के साथ-साथ एशिया के कई देशों श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार थाईलैंड से होते हुए लगभग पूरी दुनिया तक पहुँच गया।

आधुनिक भारत में भी सम्राट असोक की गौरवशाली विरासत स्पष्ट रूप से आज भी दिखाई देती है भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ के असोक स्तंभ से लिया गया है, जिसमें चार सिंह चारों दिशाओं में खड़े दिखाई देते हैं। यह शक्ति, साहस, गर्व और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इसके नीचे लिखा "सत्यमेव जयते” सत्य की विजय का संदेश देता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के मध्य में बना 24 तीलियों वाला नीला असोक चक्र धर्म, न्याय, गति और प्रगति का प्रतीक है। भारतीय संविधान में भी समानता, धार्मिक सहिष्णुता, न्याय और कल्याणकारी राज्य की भावना देखने को मिलती है, जो काफी हद तक सम्राट असोक की शासन नीतियों से प्रेरित मानी जाती है हम यह कह सकते हैं वर्तमान भारतीय संविधान सम्राट असोक महान के शिलालेखों का दस्तावेज है।

सम्राट असोक को महान इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने केवल साम्राज्य का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि मानवता, करुणा और नैतिकता को शासन का आधार बनाया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्ची विजय तलवार से नहीं बल्कि दया, सत्य और धम्म से प्राप्त होती है। इस प्रकार चक्रवर्ती सम्राट असोक महान केवल भारत के ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास के महानतम शासकों में प्रथम स्थान रखते हैं। उनका जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि शक्ति का सर्वोत्तम उपयोग मानवता और शांति की स्थापना के लिए होना चाहिए।

आओ 26 मार्च 2026 को सम्राट असोक महान जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाएं, घर घर खीर बनाएं ।

#सम्राट_अशोक_जयंती

#सम्राट_अशोक_जयंती_पर_राष्ट्रीय_अवकाश
#26मार्च

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