27/12/2020
केंद्र सरकार द्वारा बनाए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन के मध्य दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सिंधु बार्डर किसानों के पास पहुँचे।।
नई दिल्ली/सिंधु बार्डर से रिपोर्ट(27 दिसंबर): दिल्ली के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री आज किसानों के बीच सिंधु बार्डर पहुँचे। अरविंद केजरीवाल ने वहाँ कहा कि हमारे किसान पिछले 32 दिनों से ठंड के बीच सड़कों पर सोने को मजबूर हैं,क्यों? इससे मुझे दुख होता है कि अब तक 40 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मैं केंद्र सरकार से उनकी बात सुनने और कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपील करता हूं। इसके अलावा केजरीवाल ने कहा कि मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं, इनकी बातें सुनकर कृषि के तीनों कानूनों को वापस ले लीजिए। किसानों को राष्ट्रद्रोही कहा जा रहा है, अगर किसान राष्ट्रद्रोही हो गया तो तुम्हारा पेट कौन भरेगा? किसानों की खेती चली गई तो किसान कहां जाएगा? किसानों के पास क्या बचेगा?
बता दें कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य राज्यों के सैंकड़ों किसान केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले काफी दिनों से सिंघु बॉर्डर पर जमे हुए हैं। सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले हुए किसानों की मांग है कि तीन नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं, लिहाजा केंद्र सरकार इनको रद्द करे।एक महीने में अरविंद केजरीवाल दूसरी बार सिंघु बॉर्डर पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने 8 दिसंबर को सिंघु बॉर्डर जाकर आंदोलनरत किसानों से मुलाकात की थी।इस दौरान सीएम ने एक सेवादार की तरह उनकी सेवा करने की बात कही थी।
उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रदर्शनकारी किसानों से कहा, ‘‘हम सभी व्यवस्थाओं पर करीब से नजर रख रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि आपको (किसानों को) कम से कम परेशानी हो.’’ सिंघू बॉर्डर के दौरे में केजरीवाल ने दिल्ली सरकार द्वारा की गई व्यवस्था का भी जायजा लिया। गौरतलब है कि केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का मजबूती से समर्थन कर रही हैं। सिंघू बॉर्डर के अलावा किसान जिनमें से अधिकतर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं, दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।
29 दिसंबर को सरकार से बातचीत के लिए किसानों ने भेजा प्रस्ताव: बता दें कि किसानों ने सरकार से अगले दौर की बातचीत के लिए 29 दिसंबर को 11 बजे का समय तय किया है। बातचीत के लिए किसानों ने सरकार के सामने चार शर्तें रखी हैं, जिसमें तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग है।
वहीं दूसरी तरफ़ हिमाचल प्रदेश सरकार के तीन साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किसान आंदोलन और कृषि क़ानूनों के संदर्भ में कहा कि कोई भी मां का लाल किसानों से उनकी जमीन नहीं छीन सकता है। ये मुकम्मल व्यवस्था कृषि कानूनों में की गई है। इसमें ये दुष्प्रचार किया गया है कि किसानों की जमीन कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग (Contract Farming) के माध्यम से छीन ली जाएगी।
रक्षा मंत्री ने कहा, 'जब भी देश में व्यापक सुधार हुए हैं उनका असर दिखने में थोड़ा समय लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में सुधार की शुरुआत की है, मैं किसान भाइयों से अपील करता हूं कि कम से कम डेढ़-दो साल इन कृषि सुधारों के असर को देख लीजिए।’ उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक कृषि सुधार से उन लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई है, जो लोग किसानों के नाम पर अपने निहित स्वार्थ साधते थे। उनका धंधा खत्म हो जायेगा, इसलिए जानबूझ कर देश के कुछ हिस्सों में एक गलतफहमी पैदा की जा रही है कि हमारी सरकार MSP की व्यवस्था खत्म करना चाहती है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये क़ानून सिर्फ़ और सिर्फ़ कृषि को बढ़ावा देने और किसानों के हित सुरक्षित रखने हेतु बनाए गये हैं।