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10/09/2020

कभी आडवाणी जी के सम्मान की खोज करने वाले आज रघुवंश जी का सम्मान क्यों नहीं कर पा रहे हैं?

वैशाली यानी लोकतंत्र की जन्मभूमि, भगवान बुद्ध की कर्मभूमि और नृत्यांगना आम्रपाली की रंगभूमि। वैशाली नाम कहते हैं राजा वि...
10/05/2020

वैशाली यानी लोकतंत्र की जन्मभूमि, भगवान बुद्ध की कर्मभूमि और नृत्यांगना आम्रपाली की रंगभूमि। वैशाली नाम कहते हैं राजा विशाल की नगरी के नाम पर पड़ा। वाल्मिकी रामायण में भी वैशाली का जिक्र आता है। अब वैशाली जैसा कोई बड़ा नगर नहीं है यहां। बैसोढ़ नाम का गांव है।

एक सैलानी के रुप में भी आप वैशाली घूमने जाना चाहें तो काफी कुछ देखने लायक है यहां। कैसे पहुंचे। बिहार की राजधानी पटना से हाजीपुर 20किलोमीटर। हाजीपुर से लालगंज। और लालगंज से वैशाली। जिला मुख्यालय हाजीपुर से वैशाली तकरीबन 40 किलोमीटर है।
वैशाली के ऐतिहासिक स्मृति चिन्हों के बीच हर साल अप्रैल महीने में वैशाली महोत्सव का आयोजन होता है। ऐसे ही एक वैशाली महोत्सव में जाना हुआ। वैशाली के पुराने गौरव को याद करने के लिए आईसीएस और लेखक जगदीशचंद्र माथुर ने वैशाली महोत्सव की शुरूआत कराई थी।

वैशाली में विशाल गजेंद्र पुष्करिणी ( सरोवर ) के साथ बना है विश्वशांति स्तूप। ये विशाल शांति स्तूप को जापान सरकार ने सहयोग देकर बनवाया है। भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के 12 साल वैशाली में गुजारे। यहीं पर आम्रपाली उनकी शिष्या बनी। कहते हैं बौद्ध भिक्षुणी बनने से पहले वह वैशाली की सबसे महंगी गणिका थी। आचार्य चतुरसेन का उपन्यास वैशाली की नगर वधु तो रामवृक्ष बेनीपुरी ने भी लिखा अंबपाली। आम्रपाली एक फिल्म भी बनी थी। इसमें सुनील दत्त बने अजातशत्रु तो वैजंतीमाला बनीं थीं आम्रपाली।
वैशाली के पास कोल्हुआ गांव में अशोक की लाट। खेतों के बीच स्थित इस लाट की तस्वीर हमारे स्कूल के दिन में हर कॉपी पर होती थी। बहुत लोकप्रिय थी वैशाली कॉपी।
वैशाली में शांति स्तूप के बगल में एक बड़ा म्यूजिम भी है। म्यूजिम में ऐतिहासिक सामग्री देखी जा सकती है। हालांकि आजादी के सात दशक बाद भी वैशाली गांव जैसा ही है। यहां एक प्राकृत जैन संस्थान नामक शैक्षणिक केंद्र भी है। hh

10/05/2020

बलात्कारी को सिर्फ फांसी हो ऐसा कानून लाया जाएं.. इसकी कुछ दिनों पहले आवाज उठी , फिर राजनीति हुई लेकिन नतीजा कुछ नहीं...खबर है राजस्थान टोंक में 15 वर्ष की बच्ची के साथ बलात्कार

10/05/2020

NCERT की 4 बुक 180 में...
और प्राईवेट स्कूलों की सैटिंग वाली 1 बुक 400 /- रु की यह भी एक घोटाला , जो दिखते हुए भी नहीं दिखता

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर जाती कहां हैं ?पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्...
10/05/2020

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर जाती कहां हैं ?

पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है।
श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है।
एक दिन देवी गंगा श्री हरि से मिलने बैकुण्ठ धाम गई और उन्हें जाकर बोली," प्रभु ! मेरे जल में स्नान करने से सभी के पाप नष्ट हो जाते हैं लेकिन मैं इतने पापों का बोझ कैसे उठाऊंगी? मेरे में जो पाप समाएंगे उन्हें कैसे समाप्त करूंगी?"
इस पर श्री हरि बोले,"गंगा! जब साधु, संत, वैष्णव आ कर आप में स्नान करेंगे तो आप के सभी पाप घुल जाएंगे।"
गंगा नदी इतनी पवित्र है की प्रत्येक हिंदू की अंतिम इच्छा होती है उसकी अस्थियों का विसर्जन गंगा में ही किया जाए लेकिन यह अस्थियां जाती कहां हैं?
इसका उत्तर तो वैज्ञानिक भी नहीं दे पाए क्योंकि असंख्य मात्रा में अस्थियों का विसर्जन करने के बाद भी गंगा जल पवित्र एवं पावन है। गंगा सागर तक खोज करने के बाद भी इस प्रश्न का पार नहीं पाया जा सका।
सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए मृत व्यक्ति की अस्थि को गंगा में विसर्जन करना उत्तम माना गया है। यह अस्थियांं सीधे श्री हरि के चरणों में बैकुण्ठ जाती हैं।
जिस व्यक्ति का अंत समय गंगा के समीप आता है उसे मरणोपरांत मुक्ति मिलती है। इन बातों से गंगा के प्रति हिन्दूओं की आस्था तो स्वभाविक है।
वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा जल में पारा अर्थात (मर्करी) विद्यमान होता है जिससे हड्डियों में कैल्सियम और फोस्फोरस पानी में घुल जाता है। जो जलजन्तुओं के लिए एक पौष्टिक आहार है। हड्डियों में गंधक (सल्फर) विद्यमान होता है जो पारे के साथ मिलकर पारद का निर्माण होता है।

इसके साथ-साथ यह दोनों मिलकर मरकरी सल्फाइड साल्ट का निर्माण करते हैं। हड्डियों में बचा शेष कैल्शियम, पानी को स्वच्छ रखने का काम करता है। धार्मिक दृष्टि से पारद शिव का प्रतीक है और गंधक शक्ति का प्रतीक है। सभी जीव अंततःशिव और शक्ति में ही विलीन हो जाते हैं।

"Happy Mothers Day Maa!" - Lord Ganesha and Lord Kartikeya 😍 💕
10/05/2020

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09/05/2020

कोरोना ख़तरनाक और ताकतवर वायरस है। ये नहीं देखता आपका पद, कद, ओहदा।

इसे इंसानी जिस्म की तलाश है। दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति, डोनाल्ड ट्रम्प की नजदीक सुरक्षा में सीक्रेट सर्विस के 11 मेंबर्स कोरोना के शिकार हो चुके हैं।

सबका टेस्ट हो रहा है।आप घर पर रहेंगे-जरुर बचेंगे।

बिहार में क्या आर्थिक घाटे को दूर करने के लिए नीतीश सरकार फिर से शराब की बिक्री शुरू करेगी! अटकलों का बाजार है गर्म
09/05/2020

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गौरव, शौर्य और आत्मसम्मान की मिसाल कहे जाने वाले, 'शूरवीर महाराणा प्रताप जी’ का जीवन देशवासियों के लिए प्रेरणा है। उनका ...
09/05/2020

गौरव, शौर्य और आत्मसम्मान की मिसाल कहे जाने वाले, 'शूरवीर महाराणा प्रताप जी’ का जीवन देशवासियों के लिए प्रेरणा है। उनका जीवन संघर्ष की सही परिभाषा बतलाता है कि कर्तव्यों के प्रति सच्ची निष्ठा और दृढ़ संकल्प ही सफलता की कुंजी है। हम सब भी दृढ़ संकल्प से कोरोना की ये लड़ाई जीत सकते हैं। उनकी जयंती पर उन्हें मेरा शत् शत् नमन।

04/05/2020

वैशाली जिले के कोर्ट का काम 17 मई तक बंद रहेगा.

04/05/2020

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