दुनियादारी- DuniyaDari

दुनियादारी- DuniyaDari Market Research Solution

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ये जनाब तो वास्तविक जीवन मे भी खलनायक ही हैं.....
06/04/2026

ये जनाब तो वास्तविक जीवन मे भी खलनायक ही हैं.....

रायबरेली के अमर शहीद राणा बेनीमाधव सिंह 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रायबरेली की धरती से जो महावीर योद्धा अंग्रे...
03/09/2025

रायबरेली के अमर शहीद राणा बेनीमाधव सिंह

1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रायबरेली की धरती से जो महावीर योद्धा अंग्रेजी साम्राज्य से लोहा लेने के लिए खड़ा हुआ, वह था,राणा बेनीमाधव सिंह। रायबरेली जिले के प्रतिष्ठित राजवंश में जन्मे राणा जी बचपन से ही शौर्य, साहस और न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध थे। ग्रामीण अंचल में उन्हें जनता का संरक्षक और अत्याचारियों के विरुद्ध ढाल माना जाता था।

1857 की क्रांति में जब मंगल पांडे की चिंगारी पूरे देश में फैली, तब राणा बेनीमाधव सिंह ने रायबरेली से लेकर बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर तक अपने रणनाद से अंग्रेजों की नींद उड़ा दी। उन्होंने स्थानीय किसानों और नौजवानों को संगठित कर अंग्रेज छावनियों पर धावा बोला।

किवदंती है कि जब अंग्रेजों ने उन्हें आत्मसमर्पण की धमकी दी, तो राणा जी ने गरजकर कहा -
“राणा की तलवार सिर झुकाना नहीं जानती, यह केवल दुश्मनों के सिर उतारना जानती है।”

प्रतापगढ़ और रायबरेली की धरती पर उनके संघर्ष ने अंग्रेजों को भयभीत कर दिया। कहा जाता है कि युद्ध के समय वे स्वयं सेनापतियों के आगे बढ़कर तलवार उठाते थे, जिससे क्रांतिकारियों में उत्साह और दुश्मनों में आतंक व्याप्त हो जाता था।

अंततः गोंडा-बाराबंकी सीमा पर हुए भयंकर युद्ध में उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति पाई। उनकी वीरता और बलिदान को आज भी रायबरेली और अवध की जनता गर्व से स्मरण करती है।

राणा बेनीमाधव सिंह केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि 1857 की क्रांति के सच्चे ध्वजवाहक और स्वतंत्रता के अमर सेनानी थे।

#राणा_बेनीमाधव_सिंह
े_वीर
#रायबरेली_का_गौरव

10/10/2024
29/06/2016

*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*

पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!

ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!

प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाधार!!

भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!

प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!

दही उडद की दाल सँग, पपीता दूध के संग!
जो खाएं इक साथ में, जीवन हो बदरंग!!

प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार! तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!

देश, भेष, मौसम यथा, हो जैसा परिवेश!
वैसा भोजन कीजिये, कहते सखा सुरेश!!

इन बातों को मान कर, जो करता उत्कर्ष!
जीवन में पग-पग मिले, उस प्राणी को हर्ष!!

घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!

रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड़ दो चाय!!

सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश!!

देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल!!

टूथपेस्ट-ब्रश छोड़कर, हर दिन दोनो जून!
दांत करें मजबूत यदि, करिएगा दातून!!

हल्दी तुरत लगाइए, अगर काट ले श्वान!
खतम करे ये जहर को, कह गए कवि सुजान!!

मिश्री, गुड, खांड, ये हैं गुण की खान!
पर सफेद शक्कर सखा, समझो जहर समान!!

चुंबक का उपयोग कर, ये है दवा सटीक!
हड्डी टूटी हो अगर, अल्प समय में ठीक!!

दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!

हँसना, रोना, छींकना, भूख, प्यास या प्यार!
क्रोध, जम्हाई रोकना, समझो बंटाधार!!

सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!

यदि सरसों के तेल में, पग नाखून डुबाय!
खुजली, लाली, जलन सब, नैनों से गुमि जाय!!

भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड़!!

जो भोजन के साथ ही, पीता रहता नीर!
रोग एक सौ तीन हों, फुट जाए तकदीर!!

पानी करके गुनगुना, मेथी देव भिगाय!
सुबह चबाकर नीर पी, रक्तचाप सुधराय!!

अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!!

पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!

तेल वनस्पति खाइके, चर्बी लियो बढाइ!
घेरा कोलेस्टरॉल तो, आज रहे चिल्लाइ!!

अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!

फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!

चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!

नींबू पानी का सदा, करता जो उपयोग!
पास नहीं आते कभी, यकृति-आंत के रोग!!

दूषित पानी जो पिए, बिगड़े उसका पेट!
ऐसे जल को समझिए, सौ रोगों का गेट!!

रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!

भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!

लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!!

हृदय रोग, खांसी और आंव करें बदनाम!
दो अनार खाएं सदा, बनते बिगडे काम!!

चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!

सौ वर्षों तक वह जिए, लेत नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!

सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!

हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!

अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!

तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में, तन के सारे रोग!

27/06/2016

शुभ प्रभात . . . . . 💐

किसी विवाद से कुशलता पूर्वक बच कर निकल जाना भी बुद्धिमानी का परिचय है ।

✨🌞✨

21/06/2016
20/06/2016

!!!...एक बेहतरीन सोच...!!!
हर एक की सुनो और हर एक से सीखो ।।
क्योंकि हर कोई सब कुछ नहीं जानता ।।
लेकिन हर एक कुछ ना कुछ ज़रुर जानता है।।
🌹शुभ प्रभात 🌹

19/06/2016

परेड में अबाउट टर्न बोलते ही पहला आदमी आखरी और आखरी आदमी पहले नंबर पे आ जाता है।

जीवन में कभी आगे होने का घमंड और आखिरी होने का गम न करे, पता नहीं कब जिंदगी अबाउट टर्न बोल दे।

18/06/2016

अकबर की महानता का गुणगान तो कई इतिहासकारों ने किया है लेकिन अकबर की औछी हरकतों का वर्णन बहुत कम इतिहासकारों ने किया है
अकबर अपने गंदे इरादों से प्रतिवर्ष दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करवाता था जिसमें पुरुषों का प्रवेश निषेध था अकबर इस मेले में महिला की वेष-भूषा में जाता था और जो महिला उसे मंत्र मुग्ध कर देती थी उसे दासियाँ छल कपटवश अकबर के सम्मुख ले जाती थी एक दिन नौरोज के मेले में महाराणा प्रताप की भतीजी छोटे भाई महाराज शक्तिसिंह की पुत्री मेले की सजावट देखने के लिए आई जिनका नाम बाईसा किरणदेवी था जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराज जी से हुआ

बाईसा किरणदेवी की सुंदरता को देखकर अकबर अपने आप पर काबू नही रख पाया और उसने बिना सोचे समझे दासियों के माध्यम से धोखे से जनाना महल में बुला लिया जैसे ही अकबर ने बाईसा किरणदेवी को स्पर्श करने की कोशिश की किरणदेवी ने कमर से कटार निकाली और अकबर को ऩीचे पटकर छाती पर पैर रखकर कटार गर्दन पर लगा दी और कहा नींच... नराधम तुझे पता नहीं मैं उन महाराणा प्रताप की भतीजी हुं जिनके नाम से तुझे नींद नहीं आती है बोल तेरी आखिरी इच्छा क्या है अकबर का खुन सुख गया कभी सोचा नहीं होगा कि सम्राट अकबर आज एक राजपूत बाईसा के चरणों में होगा अकबर बोला मुझे पहचानने में भूल हो गई मुझे माफ कर दो देवी तो किरण देवी ने कहा कि आज के बाद दिल्ली में नौरोज का मेला नहीं लगेगा और किसी भी नारी को परेशान नहीं करेगा अकबर ने हाथ जोड़कर कहा आज के बाद कभी मेला नहीं लगेगा उस दिन के बाद कभी मेला नहीं लगा

इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रचित सगत रासो मे 632 पृष्ठ संख्या पर दिया गया है बीकानेर संग्रहालय में लगी एक पेटिंग मे भी इस घटना को एक दोहे के माध्यम से बताया गया है

""किरण सिंहणी सी चढी उर पर खींच कटार
भीख मांगता प्राण की अकबर हाथ पसार""

धन्य है किरण बाईसा
उनकी वीरता को कोटिशः प्रणाम !

जय महाराणा

02/06/2016

●मंदिर में घंटा लगाने का कारण....

जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।

●दीपक के उपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण...

आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।

●परिक्रमा करने के पीछे वेज्ञानिक कारण...

हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 8 से 9 बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।

●भगवान की मूर्ति...

मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।

●चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं.....

मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।



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