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28/08/2026
28/08/2026

Waah

दुग्गल साहब अल्ट्रा प्रो मैक्स वाले
23/08/2026

दुग्गल साहब अल्ट्रा प्रो मैक्स वाले

एक बड़ी ही प्रसिद्ध लोक कथा है.....एक गाँव था... उस गाँव में एक तालाब था, तालाब बड़ा ही साफ और निर्मल जल वाला था...तो एक द...
23/08/2026

एक बड़ी ही प्रसिद्ध लोक कथा है.....एक गाँव था... उस गाँव में एक तालाब था, तालाब बड़ा ही साफ और निर्मल जल वाला था...तो एक दिन शाम को गाँव के मुखिया का लड़का तालाब के किनारे टहल रहा था...टहलते टहलते रात घिर आयी... सुन्दर चाँदनी रात...तभी मुखिया के लड़के जिसे गाँव वाले गाँव का सबसे विद्वान लड़का मानते थे उसे तालाब में कुछ दिखा..... "चाँद"...चाँद का प्रतिबिम्ब...
लड़के ने शोर मचाया... पूरे गाँव को जुटाया और दिखाया... देखो चाँद चाँद तालाब में गिर गया है... डूब जायेगा... हमें इसे बचाना चाहिए...बस गाँव वाले दौड़ पड़े.... रस्सी बाल्टी... जाल लेकर आये... और चाँद को निकालने का अभियान जोर शोर से चालू हुआ...रात भर अभियान चला... कई बार प्रयत्न हुए, एक दो डूब भी गए चाँद बचाने में...पर मुखिया के "विद्वान लड़के" के नेतृत्व में अभियान चलता रहा...
फिर सुबह हुईं.... सूरज निकल आया...तालाब से चाँद का प्रतिबिंब गायब हो गया और तभी अचानक मुखिया के लड़के ने आसमान की तरफ़ देख लिया और वो जोर से चिल्लाया "वैरी गुड मेरे गाँव वालों... देखो हमने चाँद को बचा लिया... अब वो फिर आसमान में है"
पूरे गाँव ने मुखिया के बेटे की समझदारी के गीत गाये.... सोशल मीडिया पर पोस्ट की... अख़बार, टीवी पर उसके हगे को हलुआ साबित किया....करते भी क्या भाई... गाँव में सबके अपने कारोबारी हित थे... और धंधा कायम रखना है तो चुप चाप चाँद डूबने से बचाने के अभियान का हिस्सा भी बनना है और मुखिया के लड़के को चाँद बचाने का श्रेय भी .....
खैर एक बात आपको बताई ही नहीं
उस गाँव का नाम "खानग्रेस" है .....
और मुखिया के उस विद्वान बेटे को तो आप जानते ही हैं जिसके हगे को पूरा गाँव हलुआ साबित करता रहता है! 😂😂😂😂

लखनऊ का नवाब नसीरुद्दीन हैदर तबीयत से बड़ा लीचड़ किस्म का शख़्स था जिसे भिशतन, मेहतरानी , धोबिन औरतें पसंद आती थी। क़िस्...
23/08/2026

लखनऊ का नवाब नसीरुद्दीन हैदर तबीयत से बड़ा लीचड़ किस्म का शख़्स था जिसे भिशतन, मेहतरानी , धोबिन औरतें पसंद आती थी। क़िस्मत की बात नसीरुद्दीन को औलाद किसी से नसीब ना हुई थी। लिहाज़ा इस बात से वो बहुत चिड़चिड़ा रहता था।

इत्तेफाक से महल में काम करने वाली एक कनीज़ सुखचैन से नवाब की आँखें लड़ गई। सुखचैन केवल नाम की सुखचैन थी- परले दर्ज की भद्दी थुलथुल और कर्कश औरत। किंतु नवाब तो नवाब था- दिल आया गधी पे तो परी क्या चीज़ है। नवाब ने सुखचैन कनीज़ को अपनी सोहबत में शामिल कर लिया।

कुछ दिन बाद सुखचैन ने महल में एलान किया कि वो हमल से है, उसके पेट में नवाब का बच्चा है। नवाब ख़ुशी से बावला हो गया। सुखचैन को तमाम सुविधाएं मुहैया करवाई। सुखचैन अब और कर्कश हो गई। महल में अर्दली , सिपाही , अन्य कनीज़ आदि से और बेसुर कर्कश स्वर में बात करने लगी। बात बात पे झगड़ना और चिल्लाना सुखचैन का शग़ल हो गया।

नवाब सुखचैन के तमाम नखरे चीख चिल्लाहट सहता रहा। जब चार महीने हुए तो शाही हकीम सुखचैन का मुआइना करने आए। साथ में खूसट दाइयाँ भी आई। उन्होंने सुखचैन का मुआइना कर बताया- ये पेट से नहीं है, बेहिसाब गोश्त खा खा कर और थुलथुला गई है, गुबरीली हो चुकी है। सुखचैन को मुफ़्त खाने की इतनी आदत हो चुकी थी कि उसने पेट की गैस को नवाब का कमाल मान लिया।

इसके बाद सुखचैन महल में कभी ना दिखी- ना जाने आसमान खा गया या फिर ज़मीन निगल गई!

और फिर दो सौ साल बाद अचानक सुखचैन ने सोशल मीडिया पे अपने वीडियो से बतला दिया- वो आज भी थुलथुल कर्कशा है जिसे बात कहने करने का शऊर नहीं है!

आज की ये सुखचैन ना जाने किस नवाब के भरोसे है!

23/08/2026

जय श्री श्याम

खाटू राजस्थान

22/08/2026

सुना है फेसबुक पर अब बहुत ज्ञानी आ चुके हैं, 3 साल बाद आखिरकार चमचो की पेलाई चालू होगी

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