14/11/2025
तहसील सरोजनीनगर लखनऊ में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला NT विवेक कुमार सिंह पर अंशल समूह से करोड़ों रुपये लेकर हेराफेरी और फर्जीवाड़ा कर आदेश करने पर जिलाधिकारी एवं पुलिस कमिश्नर ने दिया जांच कार्यवाही का आदेश
राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री आदि को प्रार्थना पत्र प्रेषित कर दोषियों पर FIR दर्ज कराने तथा विभागीय दंडात्मक कार्यवाही, एनकाउंटर व भ्रष्टाचार से अर्जित करोड़ो रूपयो की संपत्ति की ईडी / सीबीआई जांच का किया अनुरोध
फर्जीवाड़ा कर पूर्व तहसीलदार आकृति श्रीवास्तव द्वारा आदेश पारित करने पर दोषियों पर थाना बिजनौर कमिश्नरेट लखनऊ में दर्ज है धारा- 419 / 420 / 467 /B468 / 471 की FIR-8/2024
प्रदेश के तहसील कर्मचारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे जनता बदहाल न्यायालयों में लगे सीसीटीवी कैमरे
सेवा में,
1-माननीय राष्ट्रपति महोदय
भारत सरकार नई दिल्ली
2-माननीय प्रधानमंत्री महोदय
भारत सरकार नई दिल्ली
3-माननीय मुख्यमंत्री महोदय
उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ
4-माननीय राजस्व मंत्री महोदय
उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ
5-श्रीमान प्रमुख सचिव राजस्व महोदय
उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ
6-माननीय अध्यक्ष राजस्व परिषद महोदय
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद लखनऊ
7- श्रीमान मंडल युक्त महोदय
लखनऊ मंडल लखनऊ
8-श्रीमान जिलाधिकारी महोदय
जनपद लखनऊ
9-श्रीमान पुलिस आयुक्त महोदय,
कमिश्नरेट लखनऊ
10-श्रीमान पुलिस उपायुक्त महोदय,
दक्षिणी कमिश्नरेट लखनऊ
11-श्रीमान उप जिलाधिकारी महोदय
तहसील सरोजनी नगर जनपद लखनऊ
12-श्रीमान तहसीलदार महोदय
तहसील सरोजनी नगर जनपद लखनऊ
13-श्रीमान प्रभारी महोदय,थाना सुशांत गोल्फ सिटी
दक्षिणी कमिश्नरेट लखनऊ
14-श्रीमान प्रभारी महोदय,थाना बिजनौर
दक्षिणी कमिश्नरेट लखनऊ
बिषय-भृष्ट, नकारा, निरंकुश गैर जिम्मेदार विवेक कुमार सिंह नायब तहसीलदार बिजनौर तहसीलदार सरोजनी नगर थाना बिजनौर दक्षिणी कमिश्नरेट लखनऊ व उनके पेशकार,लिपिक,डेटा ऑपरेटर/फीडर द्वारा अंसल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रणव अंसल व सुशील अंसल व अध्यक्ष राजेश्वर राव,अपर महाप्रबंधक विनय तिवारी व उनके लिए काम करने वाले दबंग भूमिया विकास सिंह व तिलक राज सिंह तथा उनकी सहयोगी कंपनी चक्रधारी प्रॉपर्टीज के अधिकृत हस्ताक्षरी के0के0 सिंह सहित 20-25 अन्य सहयोगी अज्ञात साथियों से मिलकर छल-कपट,जालसाजी, धोखाधड़ी कूट रचना व अपराधिक साजिश करके करोड़ों रुपए लेकर फर्जी मूल्यवान प्रतिभूति अभिलेख / दस्तावेज तैयार कर व माननीय राजस्व परिषद लखनऊ की पूर्ण पीठ द्वारा वाद संख्या-REV/3014/2014 कंप्यूटरीकृत वाद संख्या-R20141064003014 में आपत्ति का अधिकार बिषय पर पारित आदेश दिनांक-19-07-2019 कि जिसका नाम राजस्व अभिलेख खतौनी में दर्ज नहीं है उसके द्वारा वर्षों पुराने निष्पादित विक्रय विलेख के आधार पर तथा किसी न्यायालय से स्थगन आदेश पारित एवं प्रभावी होने पर दाखिल खारिज न किया जाए के विरुद्ध व माननीय उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के द्वारा प्रतिपादित की गई विधि व्यवस्थाओं के विरुद्ध वाद संख्या-27850/2025 कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या टी-202510460577850 चक्रधारी प्रॉपर्टीज बनाम पूर्णमासी आदि अन्तर्गत धारा 34 / 35 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 में दिनांक -16-09-2025 को विवेक कुमार सिंह द्वारा न्यायिक कार्य से विरक्त होकर प्रशासनिक कार्य में व्यस्त रहने के बावजूद मूल्यवान फर्जी अवैध न्यायिक आदेश दिनांक -16-09-2025 पारित करने व उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रणाली (आर0सी0एम0एस0) को अवैध रूप से संचालित कर उसमें पूर्व से निर्धारित तिथि -22-11-2025 को आदेश हेतु सुरक्षित दिनांक-07-11-2025 दर्ज कर तथा न्यायालय की मूल्यवान प्रतिभूति कॉजलिस्ट में दिनांक-29-10-2025 में कूटरचना से वाद को दर्जकर एवं सुरक्षित दर्ज कर तथा फर्जीवाड़ा से असल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड व चक्रधारी प्रॉपर्टीज की आपत्ति दर्शाकर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ में उपरोक्त याचिका संख्या -6873 / 2009 में स्थगन आदेश दिनांक -11-11-2009 प्रवर्तनी नहीं होने व उपरोक्त रिट याचिका भी निरस्त होने की फर्जी कहानी बनाकर आदेश दिनांक 07-11-2025 पारित करने पर थाना सुशांत गोल्फ सिटी / थाना बिजनौर दक्षिणी कमिश्नरेट लखनऊ में प्राथमिकी दर्ज करवाने के साथ विभागीय दंडात्मक कार्यवाही करवाकर दंडित कराये जाने व एनकाउंटर कराए जाने व नायब तहसीलदार बिजनौर विवेक कुमार सिंह द्वारा भ्रष्टाचार पूर्वक अर्जित की गई अकूत संपत्ति की जांच ई0डी0 / सी0बी0आई0 से कराए जाने हेतु।
सरोजनीनगर तहसील में कार्यरत नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह पर गंभीर भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और न्यायिक आदेशों की अवमानना के आरोप लगे हैं।
अधिवक्ता सुनील कुमार लोधी द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने तहसील प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।
अधिवक्ता लोधी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित कई उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज कराने, विभागीय दंडात्मक कार्रवाई, तथा विवेक कुमार सिंह की अवैध संपत्ति की ईडी/सीबीआई जांच की मांग की है।
सुनील कुमार लोधी अधिवक्ता -9415635373 उच्च न्यायालय लखनऊ के प्रेषित पत्र के अनुसार उनकी भूमि खसरा संख्या- 68 / 0.3160 हे0,112/0.9760 हे0, 138/0. 1770 हे0 व 177/0.7120 हे0 कुल 4 किता कुल रकबा 2.1810 हेo स्थित ग्राम- मुजफ्फर नगर घुसवल, परगना बिजनौर थाना सुशांत गोल्फ सिटी तहसील सरोजनीनगर जनपद लखनऊ के स्वामित्व को लेकर प्रार्थी आदि व अंसल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड व चक्रधारी प्रॉपर्टीज आदि के मध्य माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ के समक्ष याचिका संख्या WRIT-C(WRIC)-1006873 OF 2009 में माननीय न्यायालय ने दिनांक -11-12-2009 को अपर आयुक्त प्रशासन लखनऊ मंडल लखनऊ के आदेश दिनांक -03-03-2009 को स्थगित कर दिया जो आज भी प्रभावी है तथा अंतिम आदेश हेतु याचिका लंबित है ।
उक्त भूमि के संबंध में सिविल न्यायालय लखनऊ मे पुराना मूल वाद संख्या- 7500545 / 2006 व नया मूल वाद संख्या - 81 / 2016 व न्यायालय तहसीलदार न्यायिक सरोजनी नगर के यहां पुराना वाद संख्या- RST / 16300 कंप्यूटरीकृत वाद संख्या-T202310460516300 गौरी शंकर बनाम गांव सभा व पुराना वाद संख्या- RST / 16300 कंप्यूटरीकृत वाद संख्या-T202310460516301 विमला बनाम गांव सभा धारा-34 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता -2006 लंबित है जिसकी सुनवाई की नियत तिथि-29-11-2025 है
उक्त भूमि का दिनांक-14-06-2006 को चक्रधारी प्रॉपर्टीज के पक्ष में उक्त भूमि का अनाधिकार फर्जी विक्रय विलेख निष्पादित करने वाले गंगाराम एवं कृष्णावती की मृत्यु लगभग 10 वर्ष पूर्व हो गई है।
अंशल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रणव अंसल व अध्यक्ष राजेश्वर राव,अपर महाप्रबंधक विनय तिवारी व सुशील अंसल व उनके लिए काम करने वाले दबंग भूमिया विकास सिंह व तिलक राज सिंह तथा उनकी सहयोगी कंपनी चक्रधारी प्रॉपर्टीज के अधिकृत हस्ताक्षरी के0के0 सिंह सहित 20-25 अन्य सहयोगी अज्ञात साथियों ने भृष्ट, नकारा, निरंकुश गैर जिम्मेदार विवेक कुमार सिंह नायब तहसीलदार बिजनौर तहसीलदार सरोजनी नगर थाना बिजनौर दक्षिणी कमिश्नरेट लखनऊ व उनके पेशकार,लिपिक,डेटा ऑपरेटर/फीडर के साथ मिलकर छल-कपट,जालसाजी, धोखाधड़ी कूट रचना व अपराधिक साजिश करके जानबूझकर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ द्वारा पारित / प्रभावी स्थगन आदेश दिनांक-11-11-2009 व सिविल न्यायालय में तथा न्यायिक तहसीलदार सरोजनी नगर लखनऊ न्यायालय में लंबित उक्त वाद की बात छुपाकर माननीय राजस्व परिषद लखनऊ की पूर्ण पीठ द्वारा वाद संख्या-REV/3014/2014 कंप्यूटरीकृत वाद संख्या-R20141064003014 में आपत्ति का अधिकार बिषय पर पारित आदेश दिनांक-19-07-2019 कि जिसका नाम राजस्व अभिलेख खतौनी में दर्ज नहीं है उसके द्वारा वर्षों पुराने निष्पादित विक्रय विलेख के आधार पर तथा किसी न्यायालय से स्थगन आदेश पारित एवं प्रभावी होने पर दाखिल खारिज न किया जाए के विरुद्ध व माननीय उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के द्वारा प्रतिपादित की गई विधि व्यवस्थाओं के विरुद्ध वाद संख्या-27850 / 2025 कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या टी-202510460577850 चक्रधारी प्रॉपर्टीज बनाम पूर्णमासी आदि अन्तर्गत धारा 34 / 35 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 में दिनांक -16-09-2025 को नायब तहसीलदार बिजनौर तहसील सरोजनी नगर जनपद लखनऊ से न्यायिक कार्य से विरक्त होकर प्रशासनिक कार्य में व्यस्त रहने के बावजूद मूल्यवान फर्जी अवैध न्यायिक आदेश दिनांक -16-09-2025 पारित करवाया ।
दिनांक-17-10-2025 को सुनील कुमार सिंह लोधी अधिवक्ता ने विपक्षी विवेक कुमार सिंह न्यायालय नायब तहसीलदार बिजनौर तहसील सरोजनीनगर जनपद लखनऊ के समक्ष एक पक्षीय आदेश दिनांक -16-09-2025 को रिकाल / निरस्त करने हेतु अंतर्गत धारा:- 209 (ज), अधिनियम: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 प्रेषित किया जो वाद संख्या:-आरएसटी/ 40047 /2025कंप्यूटरीकृत वाद संख्या :- टी202510460540047 सुनील कुमार सिंह लोधी बनाम चक्रधारी प्रापर्टीज अंतर्गत धारा 209 (ज) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता -2006 पंजीकृत कर सुनवाई की तिथि-22-11-2025 नियत की गई थी ।
उक्त अंसल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड व चक्रधारी प्रॉपर्टीज को नोटिस सूचना हेतु कोई भी आदेश पारित नहीं हुआ था। उनको कोई सूचना नहीं थी।
भृष्ट, नकारा, निरंकुश गैर जिम्मेदार विवेक कुमार सिंह नायब तहसीलदार बिजनौर तहसीलदार सरोजनी नगर थाना बिजनौर दक्षिणी कमिश्नरेट लखनऊ व उनके पेशकार,लिपिक,डेटा ऑपरेटर/फीडर द्वारा अंसल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रणव अंसल व सुशील अंसल व अध्यक्ष राजेश्वर राव,अपर महाप्रबंधक विनय तिवारी व उनके लिए काम करने वाले दबंग भूमिया विकास सिंह व तिलक राज सिंह तथा उनकी सहयोगी कंपनी चक्रधारी प्रॉपर्टीज के अधिकृत हस्ताक्षरी के0के0 सिंह सहित 20-25 अन्य सहयोगी अज्ञात साथियों से मिलकर छल-कपट,जालसाजी, धोखाधड़ी कूट रचना व अपराधिक साजिश करके करोड़ों रुपए लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रणाली (आर0सी0एम0एस0) को अवैध रूप से संचालित कर उसमें पूर्व से निर्धारित तिथि -22-11-2025 को आदेश हेतु सुरक्षित दिनांक-07-11-2025 दर्ज कर तथा न्यायालय की मूल्यवान कॉजलिस्ट दिनांक-29-10-2025 में कूटरचना से वाद को दर्जकर एवं सुरक्षित दर्ज कर कूटरचित फर्जी मूल्यवान फर्जी कॉजलिस्ट तैयार कर तथा फर्जीवाड़ा से असल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड व चक्रधारी प्रॉपर्टीज की आपत्ति दर्शाकर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ में उपरोक्त याचिका संख्या -6873 / 2009 में स्थगन आदेश दिनांक -11-11-2009 प्रवर्तनी नहीं होने व उपरोक्त रिट याचिका भी निरस्त होने की फर्जी कहानी बनाकर आदेश दिनांक 07-11-2025 से प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 209 (ज) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता -2006 निरस्त कर दिया है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार उपरोक्तों के द्वारा किया गया अपराध भारतीय न्याय संहिता की धारा-198,316,318(4),336(3),338,340(2),217,246,247,316,236,237,239,227,228,230,233,255,61, 3(5)का गंभीर अपराध है।
ई0डी0 / सीबीआई जांच के बाद यह साबित हो जाएगा कि विवेक कुमार सिंह ने ने भ्रष्टाचार करके करोड़ोंं रूपयों की संपत्ति अर्जित कर भ्रष्टाचार व अपराध के मामले में कानपुर के अधिवक्ता अखिलेश दुबे व 100 करोड़ रूपयो की संपति अर्जित करने वाले डी0एस0पी0 ऋषिकांत शुक्ला को काफी पीछे छोड़ दिया है।
सुनील कुमार लोधी अधिवक्ता द्वारा मुख्य रूप से राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री आदि को प्रार्थना पत्र प्रेषित कर वास्तविक रूप से धरातल पर सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास ना गुंडाराज न भ्रष्टाचार को उतार कर दोषियों पर FIR दर्ज कराने तथा विभागीय दंडात्मक कार्यवाही व विवेक सिंह द्वारा भ्रष्टाचार से अर्जित करोड़ रूपयो की संपत्ति की ईडी / सीबीआई जांच का अनुरोध किया है।
पूर्व में आकृति श्रीवास्तव तहसीलदार सरोजनी नगर द्वारा आदेश पारित करने पर सुनील कुमार सिंह लोधी अधिवक्ता द्वारा थाना बिजनौर कमिश्नरेट लखनऊ में FIR -0008/2024 धारा -419/420/467/468/471 भारतीय दंड संहिता दर्ज कराई गई जिसकी विवेचना आर्थिक अपराध शाखा महानगर लखनऊ में लंबित है।
तहसील में मचा हड़कंप, अधिवक्ताओं में रोष
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद सरोजनीनगर तहसील के कर्मचारियों और अधिवक्ताओं में आक्रोश व्याप्त है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील में भ्रष्टाचार चरम पर है और प्रशासन को इस प्रकरण की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए।