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😂ना जाने ये काल की कर डारे, किस विधि से ढल जा पासा वे। जिनहादे सिर ते मौत खुदगदी, उन्हानू केदा हांसा वे।।😂

♥️कबीर, स्वांस-स्वांस में नाम जपो, व्यर्था स्वांस मत खोए। न जाने इस स्वांस का, आवन हो के ना होए।।♥️

नाम- सतलोक का सेवादार

03/06/2026

यह संसार बहुत गहरा भवसागर है, और यहां जन्म मृत्यू का खेल।
इनसे बचना है तो करो सतगुरु की पहचान ?

यह संसार आग का कुआं है और यहां रोज मनुष्य जल रहे है इस संसार के चक्र से निकलना है तो पढ़ो संत रामपाल जी महराज का अनमोल किताब ( ज्ञान गंगा )...

यह संसार समंझदा नाहीं, कहंदा शाम दोपहरे नूं। गरीब दास यह वक्त जात है, रोवोगे इस पहरे नूँ।।भावार्थ  -  गरीबदास जी ने बताय...
01/06/2026

यह संसार समंझदा नाहीं, कहंदा शाम दोपहरे नूं। गरीब दास यह वक्त जात है, रोवोगे इस पहरे नूँ।।

भावार्थ - गरीबदास जी ने बताया है कि यह मानव शरीर का वक्त एक बार हाथ से निकल गया और भक्ति नहीं की तो इस समय (इस पहरे) को याद करके रोया करोगे ।

संत रामपाल जी महराज एक ऐसा संत है जो संसार के सभी मानव को एक मत कर सकता है,अपने वेदों के प्रमाणित आधार पर, संत जी दुनिया...
31/05/2026

संत रामपाल जी महराज एक ऐसा संत है जो संसार के सभी मानव को एक मत कर सकता है,

अपने वेदों के प्रमाणित आधार पर, संत जी दुनियां को एक नई दिशा दे रहा है।

जहां लोग चोरी घूसखोरी, जुआ शराब मांस तम्बाकू खाते थे जब से उन लोगों के बीच संत रामपाल जी महराज का ज्ञान उन लोगों के पास पहुंचा है, लोगों ने उनके ज्ञान को काफी पसंद किया और अनैतिक कार्य छोड़ चुके है।

संत रामपाल जी महराज का ज्ञान ऐसा है जिसने भी ध्यान से सुना उनका मानो नया जन्म ही होगा यह मै नहीं कहा रहा हूं जिसने संत जी का ज्ञान सुना उनका आपबीती बोल रहा हूं।

संसार में कई धर्म और कई मजहब है लेकिन सबका क्रिया अलग अलग है ऐसा क्यों,...? क्यों कि मनुष्य ने ज्ञान बांटने वाले संतों का ज्ञान परखना नहीं चाहते है, सभी संतों का अलग अलग ज्ञान है।

एक संत रामपाल जी महराज ही ऐसे संत है जो मनुष्य जिस धर्म मजहब का है उनको उन्हीं के शास्त्र और वेदों से एक परमात्मा का परख करवाता है जो सभी वादों और शास्त्रों में विराजमान है।

ठीक ज्ञान और ठीक परमात्मा के बारे में जानना है तो संत रामपाल जी महराज का सत्संग सुनने का प्रयास करें,

11/05/2026

भारत को फिर से अखंड भारत कौन बना सकता है
A - संत रामपाल जी महराज
B - धीरेन्द्र शास्त्री
अपना राय कमेंट में बताए

11/05/2026

लाखों लोगो को नया जीवन दान दिया संत रामपाल जी महराज ने

11/05/2026

लाखों लोगों को संत रामपाल जी महाराज ने मरने से बचा बचा लिया। यह काम कोई आम इंसान नहीं कर सकता ।

10/05/2026

देश विदेश के सीमाओं को अगर कोई समाप्त कर सकता है तो वह केवल संत रामपाल जी महराज है।

ब्राह्मण धर्म में अश्लीलता फैलाने को भी धर्म माना जाता है... और पूजा पाठ करने वाले तथाकथित हिन्दू खास कर महिलाएं ये भूल ...
09/08/2025

ब्राह्मण धर्म में अश्लीलता फैलाने को भी धर्म माना जाता है... और पूजा पाठ करने वाले तथाकथित हिन्दू खास कर महिलाएं ये भूल जाती हैं कि जिस मंत्र का वो जाप कर रही हैं उसका शाब्दिक अर्थ क्या है...?
ऐसा ही एक मंत्र है जिसे गायत्री मंत्र के नाम से जाना जाता है...!
आईए जानते हैं इस गायत्री मंत्र का अर्थ 👇
गायत्री कोई मंत्र नही ।
विदेश से भारत आये ब्राह्मण की टुकड़ी का मुखिया का नाम ब्रह्मा था, वो अपनी ही बेटी गायत्री पे मोहित हो जाता है और उसके साथ समागम करना चाहता था।
बेटी के मना करने पर उसे जिन वाक्यो से पटाया गया उसे मंत्र का नाम देके सत्य पे पर्दा डालने की कोशिश की गई है।
मंत्र - ॐ भू: भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्
प्रत्येक शब्द की अलग-अलग व्याख्या :-
ॐ भूर्भुवः (भुः भुवः), स्वः तत्सवितुर्वरेण्य (तत् सवित उर वरणयं),
भर्गो=भार्गव/भृगु,देवस्य(देव स्य), धीमहि धियो योनः प्र चोद्यात.
ॐ =प्रणव।
भूर = भूमि पर।
भुवः = आसीन / निरापद हो जाना / लेट जाना [(भूर्भुवः=भुमि पर)]।
स्व= अपने आपको।
तत्= उस।
सवित = अग्नि के समान तेज, कान्तियुक्त की।
उर = भुजाओं में।
वरण्यं = वरण करना, एक दूसरे के/ एकाकार हो जाना।
भर्गोः देवस्य = भार्गवर्षि / विप्र (ब्राहमण) के लिये।
धीमहि = ध्यानस्थ होना / उसके साथ एक रूप होना.
( धी =ध्यान करना ),
( महि = धरा, धरती, धरणी, धारिणी के / से सम्बद्ध होना )
धियो = उनके प्रति / मन ही मन मे ध्यान कर / मुग्ध हो जाना / भावावेश क्षमता को तीव्रता से प्रेरित करना।
योनः = योनि / स्त्री जननांग।
प्र = [उपसर्ग] दूसरों के / सन्मुख होना/ आगे करना या होना / समर्पित / समर्पण करना।
चोदयात् = मँथन / मेथुन / सहवास / समागम / सन्सर्ग के हेतु।
सरलार्थ:- हे देवी (गायत्री), भू पर आसीन होते (लेटते) हुए, उस अग्निमय और कान्तियुक्त सवितदेव के समान तेज भृगु (ब्राहमण) की भुजाओं में एकाकार होकर मन ही मन में उन्ही के प्रति भावमय होकर उनको धारण कर लो और पूर्ण क्षमता से अपनी योनि को संभोग (मैथुन) हेतु उन्हें समर्पित कर दो.
वैदिक धर्म का मूल आधार सुरा - सुंदरी, सम्भोग, मांसाहार और युद्ध है। गायत्री मन्त्र सम्भोग मन्त्र है। गायत्री मंत्र को नव योनि मंत्र भी कहते है। जिस अश्लील मंत्र को आज भी ब्राह्मणवादी लोग शुभ बताते हैं। ऐसे ही ब्राह्मणवादी अंधविश्वासों से देश का बंटाधार होता जा रहा है। हम अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति के नाम पर अश्लीलता परोस रहे हैं। जबकि यह भारतीय संस्कृति नही है। यह विदेशी आर्यों की ब्राह्मणवादी अश्लील संस्कृति है, जिसको कुछ ब्राह्मणवादी अश्लील लोग इस संस्कृति को शुभ बताकर देश में अश्लीलता फैला रहे हैं।
अगर इस मंत्र का असली अर्थ क्या है ये समझ गए हैं तो हमें नहीं लगता कि आप इसे फिर से दौहराएंगे ...

#सत्य #धर्म #ब्राह्मण #सनातन #हिन्दू #गायत्रीमंत्र

10/07/2025

नारायण vs सत्यनारायण

दिनांक 09 से 11 जून 2025 को होने जा रहे विशाल भंडारे में आप सभी को सादर आमंत्रित किया जाता है : सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल...
03/06/2025

दिनांक 09 से 11 जून 2025 को होने जा रहे विशाल भंडारे में आप सभी को सादर आमंत्रित किया जाता है : सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल


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