10/06/2026
MLC का पद एक था, लेकिन दावेदार ज्यादा...आरजेडी में ऐसी स्थिति शायद पहले नहीं बनी होगी। एक तरफ परिवार यानी तेज प्रताप की दावेदारी थी, जिसका समर्थन राबड़ी देवी समेत परिवार के कई सदस्य कर रहे थे, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव MLC सीट के लिए बेहतर राजनीतिक फैसला लेना चाहते थे, ताकि विधान परिषद में प्रतिरोध की आवाज बनी रहे, लेकिन उनके इस फैसले के बीच में परिवार के वो लोग थे, जिनके खिलाफ अब तक उन्होंने फैसला नहीं लिया था, लेकिन तेजस्वी यादव ने मन बना लिया था और उसका नतीजा सुनील सिंह की फिर से MLC पद की उम्मीदवारी के रूप में आया, जिनका चुनाव जीतना अब महज औपचारिकता है। 11 को पर्चा वापस लेने का समय जैसे बीतेगा, सभी सदस्यों को विजेता घोषित कर दिया जाएगा और जीत का प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा। आरजेडी की ओर से विधान परिषद में रहने के दौरान पिछले छह सालों में सुनील सिंह ने सत्ता पक्ष से सीधी टक्कर ली है, इसके लिए भले ही कोई कीमत चुकानी पड़ी है। एक बार तो विधान परिषद सदस्य के रूप से बर्खास्त भी हुए और बहाली के लिए कोर्ट जाना पड़ा, जहां से उनकी सदस्यता बहाल हुई, लेकिन उन्होंने सरकार को घेरना नहीं छोड़ा। वो तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार के सामने सदन में मुद्दा उठाते और उस पर अड़े रहते। अपने तर्कों से इस बात को प्रूफ करते कैसे सरकार गलत है और उससे आम लोगों को कितना नुकसान हो रहा है। सत्ता से टकराने का एक और खामियाजा उनकी बिस्कोमान से विदाई के रूप से भी सामने आया, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दल के साथ खड़े रहे। वो लालू परिवार के चहेते नेताओं में से हैं। पूर्व सीएम राबड़ी देवी उन्हें राखी बांधती हैं, जो इस चुनाव में उनके प्रत्याशी बनने के खिलाफ थीं, लेकिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सबके विरोध ने जाकर सुनील सिंह को प्रत्याशी बनाया और जब वो नामांकन करके निकल रहे थे तो सत्ता पक्ष के एक बड़े नेता ने कहा कि अब सदन में लगेगा कि विपक्ष है। मुझे लगता है विपक्षी नेता और विधान परिषद सदस्य के तौर पर सुनील सिंह की यही सबसे बड़ी उपयोगिता है, जिसका मोल नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ सत्ता पक्ष के सदस्यों को भी है।