03/07/2022
दोस्तों आज जब मैं अपने मित्र हरेंद्र से बात करने के लिए कॉल मिला रहा था तो मुझे अपने नंबर पर दूसरी ओर से सुनाई दिया कि आपका बैलेंस ख़त्म हो गया है। संयोग वश मेरा एक मित्र जिसका नाम सोनू है मेरा पास खड़ा था और पूछने लगा
"नंबर क्यों नहीं मिला? लगता है बैलेंस ख़त्म हो गया है। "
"हां, मैं अभी इसे रिचार्ज कर लेता हूँ और हरेंद्र भाई को भी यहीं बुला लेता हूँ।"
"मेरे से कर लो, मैंने अभी अभी पूरे साल का रिचार्ज किया है।"
"ठीक है मैं भी रिचार्ज कर लेता हूँ , वैसे भी रिचार्ज करना तो है ही "
इतना कहकर मैं सोनू के सामने ही अपने फोन में रिचार्ज या वॉलेट ऐप्प खोल कर करने ही वाला था तो उसने मुझे रोका और कहा:
"प्रशांत क्या तुम इससे रिचार्ज करोगे ?"
"हां इससे ही तो पूरा हिंदुस्तान रिचार्ज करता है" इतना कहकर मैंने 3-4 और प्रचलित नाम गिना दिए।
सोनू ने कहा
"भाई पता है २ साल पहले कोरोना के कारण पूरा देश बेरोज़गार हो गया था, और ठीक उसी समय चीन ने हमारी सीमा पे २० भारतीय जवानो को कायरता पूर्ण छुप कर मार दिया था।"
"हां तो भाई कहना क्या चाहते हो ? आप भी अब बैन चीन की ऍप्स मत कहना क्यूंकि मेरा छोडो आपका फ़ोन भी चीन की कंपनी का है "
"सही बात है फ़ोन तो चीनी है , पर तुम्हे इतना तो पता है न कि ये विदेशी कंपनियां हैं?"
"भाई मुझे आज आप एक भारतीय फ़ोन बनाने वाली बताओ जो फ़ोन में विदेशी माल न लगती हो। फ़ोन छोड़ो कपड़े तक, वो भी छोड़ो एक सूई से लेकर आज हमारे यहाँ क्या क्या विदेशी नहीं मिलता। ग्लोबलाइजेशन कहते हैं इसे सोनू भाई"
"सही बात है प्रशांत भाई, पर ये ग्लोबलाइजेशन अब कहाँ चला जाता है जब हमारे देश में चीनी हमला होता है या पाकिस्तानी हमला होता है और पूरा विश्व हमारी बात को ढंग से सुनता नहीं है और न ही कोई कदम उठाता है? जब हम बेराज़गारी से गुज़र रहे थे तब क्या इन विदेशी कंपनियों ने हमारे लिए क्या किया ? क्या हम 135 करोड़ हिंदुस्तानी मात्र एक बाजार हैं ? हमारी व्यथा क्या कुछ नहीं ? तब याद कीजिये इसी देश की कंपनियों ने छोटे कारखानों ने और हमारी भारत सरकार ने हमारा ध्यान रखा था। प्रधानमंत्री ने ये कहा था कि आत्मनिर्भर बनो और आपदा में अवसर ढूंढो। क्यूंकि वो ये जानते हैं और चाहते हैं कि भारत एक बाज़ार सिर्फ भारतवासियों के लिए हो। और ऐसा सिर्फ सरकार के करने होगा हमे भी अपनी भागीदारी दिखानी होगी। हमें भारतीय कंपनियों को मौका देना होगा। आज सड़क पर टाटा की गाड़ियाँ ज़्यादा हैं। अच्छा लगता है "वोकल फॉर लोकल" को लेकर लोग जागरूक हो रहे हैं, मानता हूँ अभी फ़ोन के बाजार में काफी काम करना है परन्तु जहां - जहां हम देसी कम्पनियाँ प्रयोग कर सकते हैं, वहां तो करें। आप भी करो"
"सोनू भाई बताओ फिर कौन सी रिचार्ज कंपनी भारतीय है?"
"प्रशांत भाई, एंड्राइड प्लेस्टोर पे जाओ और टैपमॉल सर्च करो और इनस्टॉल करो। ये पूरी भारतीय कंपनी है जो उत्तर प्रदेश से शुरू हुई है। इससे रिचार्ज करो। और सुनो जितनी भी प्रचलित वॉलेट या रिचार्ज कंपनी है वो अब आपको कैशबैक नहीं देती। याद करो पिछला कैशबैक कब मिला था?"
"सोनू भाई 3 साल से तो कुछ नहीं मिला, क्या इससे मिलता है?"
"बिलकुल मिलता है, खुद रिचार्ज कर लो और देख लो प्रशांत भाई।"
मैंने पहले 15 रू का रिचार्ज करके देखा, मुझे 2 रू कैशबैक मिला, फिर मैंने 499 का रिचार्ज किया और तब मुझे 25 रू कैशबैक मिला।
"मैंने कहा सोनू भाई ये तो कमाल है, क्या इससे हर बार कैशबैक मिलता है रिचार्ज करने पर?"
"हाँ प्रशांत भाई, मैंने लगभग 100 लोगों का रिचार्ज तो किया होगा, हर बार कैशबैक मिला है मुझे। आपको भी मिलेगा। बल्कि मिलता रहेगा।
मैंने रिचार्ज किया और हरेंद्र भाई को फ़ोन करके बुला लिया था। सिनेमाघर में फ़िल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजा और हम उसके सम्मान में खड़े हो गए।
आप भी लगातार कैशबैक पा सकते हैं। टैपमॉल ऍप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं https://play.google.com/store/apps/details?id=com.tap.mall.partner