Bhalai Lama

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4 saal Huye Mummy Ko Gaye... Lekin Lagta hai jaise ek sadi beet gayi hai, pata nahi logon ko kaise lagta hai ki "jaise k...
31/05/2026

4 saal Huye Mummy Ko Gaye... Lekin Lagta hai jaise ek sadi beet gayi hai, pata nahi logon ko kaise lagta hai ki "jaise kal ki hi baat ho". mujhe kabhi nahi laga, Mujhe lagta hai jaise 10-12 saal ho gaye mujhe apni maa ke bina rehte, bahut sara time beet gaya.

Mummy ke jaane ke baad mujhe rone ka bhi mauka nahi mila, jab rone lagta fatak se 2-3 log aa ke chup kara dete tu royega to sabko kaun sambhalega. meri aise shubhchintakon se request hai ki kahin jao aur aisa kuch hua hai to rone do, aap chup karwa doge aur insan ke andar wo dukh bharta jayega, baad mein wo ya to anger mein badal jayega ya phir over emotion mein. sahanubhuti jatao par chup mat karwao.

bas yahi prarthana hai agar koi ishwar, bhagwan, devi devta hain aur mujhe sun ya dekh sakte hain to, ki meri maa zabardasti bhi kare wapas aane ki to mat aane dena is duniya main, swarg lok ka sabse unncha pad dena aur unko araam karne dena. ek ipad de dena ya jo kuch bhi wahan milta ho wo, araam se let ke meri maa jismein game khel sake, bahut saari kitaabein de dena meri maa jisko padhte rahe aur pair mein maalish karwa dena yahan neha roz karti thi.

दिल और दिमाग़ एक कर लिया इसलिए शांत हूँ - मुझसे आजकल अक्सर लोग पूछते हैं की - तुम इतने चुप क्यों हो गए हो?? कोई दुख है क...
21/05/2026

दिल और दिमाग़ एक कर लिया इसलिए शांत हूँ -

मुझसे आजकल अक्सर लोग पूछते हैं की - तुम इतने चुप क्यों हो गए हो?? कोई दुख है क्या?? क्या बात है बताओ?? मुझे तो बता ही सकते हो??कोई बात है क्या जो तुमने मन में ही रख ली है??

मैं बस एक ही बात बोलता हूँ - शोक और शांति में फ़र्क़ है, मैं शोक में नहीं हूँ बस शांत हूँ. मुझे कोई दुख, रोग, गुस्सा, नाराज़गी या जलन नहीं है. मैं बस शांत हूँ.
और मेरी बात मानेंगे तो आप लोग भी शांत हो जाइए.

हर तरफ़ लोग भाग रहे हैं, कहाँ और क्यों उनको भी नहीं पता, घर से निकलते समय भाग रहे हैं, चलो माना देर से निकले इसलिए भाग रहे हैं, घर जाते समय भी भाग रहे हैं, लटक के या भीड़ में बस, मेट्रो और ट्रेन में जा रहे हैं, फिर प्लेटफॉर्म्स पर लिफ्ट के लिए भाग रहे हैं, घर ही जाना है अगर 5-10-20 मिनट देर भी हो जाएगी तो क्या हो जाएगा?? घर जाने के बाद देखना तो रील ही है घंटों. थोड़ा रुक के सोचो की क्यों भाग रहा हूँ?? कहाँ भाग रहा हूँ? क्यों इतना बेचैन हूँ? इसका जवाब बहुत से लोग के पास नहीं होगा, और इसका कारण है सामने वाला भाग रहा है तो हमको भी भागना है, पीछे वाला भी भाग रहा है, क्यों की उसके सामने वाले हम भी भाग रहे हैं. और कब तक भागोगे? कितने दिन तक ऐसे ही भागते रहोगे? और कब तक अपनी बेहतरीन ज़िंदगी को कोसते रहोगे की - "अपनी लाइफ में आराम ही नहीं है भाई, सुबह से रात तक भागना है".

कुछ देर शांत रहो, ज़रूरी नहीं है बैठो, खड़े हो तो भी शांत रहो, फ़ोन जेब में रख दो, और अपने आप से वो सारे सवाल करो जिसका जवाब तुमको जानना है, जब सवाल करोगे तब जवाब भी ढूँढोगे, फिर जब जवाब मिलने लगेगा तब अपने आप जीवन आसान होता जाएगा, लाइफ में कॉम्प्लिकेशन कम होते जाएँगे, मन शांत होता जाएगा, दिल और दिमाग़ एक हो जाएँगे, जो दिल प्लान करेगा दिमाग़ उसका एक्ज़िक्यूशन करेगा.

अपना दिल दिमाग़ एक करो, फिर शिवमंगल सिंह सुमन जी की ये पंक्तियां आपके लिए ही होंगी -

क्या हार में, क्या जीत में,
किंचित नहीं भयभीत मैं,
संघर्ष पथ पर जो मिले,
यह भी सही, वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं!

18/05/2026

Saurabh Dwivedi ko Bigg Boss Mein Jaana Hai... Isliye hi ye sara taam jhaam chal raha hai.

फ्रस्ट्रेशन एक ऐसी चीज़ है जो न्यूटन के तीसरे नियम को भी तोड़ देती है. न्यूटन का तीसरा नियम कहता है की - प्रत्येक क्रिया...
17/05/2026

फ्रस्ट्रेशन एक ऐसी चीज़ है जो न्यूटन के तीसरे नियम को भी तोड़ देती है. न्यूटन का तीसरा नियम कहता है की - प्रत्येक क्रिया (Action) के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया (Reaction) होती है। जब भी कोई वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर उतना ही और विपरीत दिशा में बल लगाती है।

लेकिन फ्रस्ट्रेशन के साथ ऐसा नहीं है, फ्रस्ट्रेशन "बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया" में तो काम करता है लेकिन वो यहाँ दिशा विहीन हो जाता है, यानी अपनी दिशा से भटक जाता है, अक्सर आपने देखा होगा लोगों का ऑफिस का फ्रस्ट्रेशन ट्रेन/बस/मेट्रो/कैब/वेब जैसी जगह पर निकलता है, और अगर किसी दिन इस फ्रस्ट्रेशन को रास्ते में कोई दिशा नहीं मिली तो फिर ये घर में बाल पूर्वक प्रतिक्रिया देता है.

अक्सर लोग कहीं और का फ्रस्ट्रेशन कहीं और निकालते हैं, और जब ये पूरी क्रिया हो रही होती है तब उनका लॉजिक(तर्क) से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं होता, कई बार वो बिना सर पैर की बात करते हैं, और इसमें कमल की बात ये है की उनकी इस इलॉजिकल(कुतर्क) बात का भी एकदम से ही न्यूटन के नियम की तरह ही सामने वाला भी बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया देने लगता है,क्यूंकि उसका भी फ्रस्ट्रेशन कहीं से भरा हुआ है.

और जब शांत दिमाग वाला आदमी इस फ्रस्ट्रेशन में लॉजिक के साथ प्रतिक्रिया देता है तो वहाँ ना न्यूटन का नियम चलता है ना फ्रस्ट्रेशन का रिएक्शन आता है.

हाल ही का एक वाक्या यहाँ लिख रहा हूँ - शाम को ४-५ बजे मैं मेट्रो से आ रहा था भीड़ बहुत थी ही क्यूँकि वो मुख्य समय होता है लोगों का कार्यालय से छूटने का, अब इसी भीड़ में एक महिला भी चढ़ी और पीछे जा के खड़ी हो गई, मैं दरवाज़े से थोड़ा साइड में खड़ा था, और मेरे आगे २ लोग और थे, अब जब एक दो स्टेशन से लोग और चढ़ने लगे और भीड़ बढ़ी तो अगले स्टेशन पर इस महिला ने मेरे सामने वालों से कहा - "दरवाज़े के पास खड़े हो जाते हैं लोगों को रोकते भी नहीं"... अब क्यूँकि सामने के २ लोग भी मेरे साथी थे, तो मैंने पूछ लिया की उन्हें क्या करना चाहिए दरवाज़े के पास खड़े होने के नाते???

महिला - भीड़ को कंट्रोल करो,
मैंने पूछा - कैसे??
महिला - चढ़ने मत दो उनको, रोक दो.
मैंने कहा - पब्लिक ट्रांसपोर्ट में हम लोगों को चढ़ने से रोक दें?? बोलें मत चढ़ो इसमें???
महिला - तो भीड़ है तो रोकना तो पड़ेगा ही ना??
मैंने - मैडम आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ख़ुद ट्रैवल करके ये कह रही हैं की यात्रियों को चढ़ने से रोक दें?? आपकी बात में कोई लॉजिक है???
महिला - ख़ुद की बात में कोई सेंस नहीं है और मुझे लॉजिक का बोल रहे हैं..
मैंने बड़े ही अदार से कहा - मैडम, मेरी अंदर सेंस है, इसलिए आपकी बात में लॉजिक नहीं दिख रहा.

इस बीच आस पास खड़े सभी लोगों ने उस महिला को देखा और कहा सर जाने दो येड़ी (पागल) हैं कहीं का फ्रस्ट्रेशन कहीं निकाल रही है. अब मुझे अभी तक समझ नहीं आया की मेट्रो में लोगों को चढ़ने से कैसे रोक सकते हैं,भीड़ है बोलकर??

खैर इसके बाद मुझे पूरा यकीन है की जो कार्यालय का फ्रस्ट्रेशन उनका मेट्रो में नहीं निकला वो निश्चित रूप से उनके घर पे पति बच्चों या सास ससुर पर निकलेगा.

इसका एक मात्र उपाय ये है की जब भी फ्रस्ट्रेशन होने लगे, अपने किसी मित्र, सगे संबंधी, या किसी प्रिय जन से बात करके सब बता दो की आज ऐसा हुआ है जिसकी वजह से मेरे अंदर गुस्सा भरा है, कोई कितना ही अल्प ज्ञानी क्यों ना हो वो कुछ ऐसा ज़रूर कहेगा जिससे आपका फ्रस्ट्रेशन ख़त्म हो जाएगा या कम हो जाएगा.

Thanks  for this lovely book and specially your drawing and autograph copy... Congratulations on Your new collab with Di...
12/05/2026

Thanks for this lovely book and specially your drawing and autograph copy... Congratulations on Your new collab with Diamond Comics (Chacha Chaudhary). Excited for More Editions. Jaldi Tayyaar Karke Publish Karo Bhai.

11/05/2026

Kyun bhai Chacha?? Aree Han Bhatijaa

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