24/10/2025
मास्टर : असालतन मास्टर
(कहानी – जय राम सिंह)
हाईस्कूल में एगो मास्टर साहेब रहथ । पूरा जिला में हुनकर ज्ञान आ शिक्षणकला के डंका बजइत रहे । समय से स्कूल अनाई, खूब मन लगा के पढ़ानाई, खाली समय में कोई खाली क्लास देख के अपने-आप घुस जनाई... आदि आदि हुनकर व्यक्तित्व के विशेषता रहे । कभियो ट्यूशन नs पढ़एलन, लेकिन स्कूल के समय के बादो हुनका डेरा पर चेला-चटिया के जमघट लागल रहइत रहे । खाली चेले-चटिया नs, कोई भी हुनका से कुच्छो पूछ सकइत रहे । मास्टर साहेब के कहनाम रहे कि केकरो जिज्ञासा के समाधान करनाई बौद्धिक पूजा के एगो रूप होइअ । भक् खादी के इस्तरी कएल कुर्ता आ धोती, इहे हुनकर पोशाक रहे । जूनियर मास्टर सs, कौनो फटफटिया से आबे, कौनो रिक्शा-टमटम से आबे, प्रिंसिपल साहेब तs कार रखले रहथ । लेकिन ई मास्टर साहेब अपना जिनगी में साइकिल के कभी नs छोड़लन । ओइसे तs ऊ साइंस टीचर रहथ, लेकिन सुभाव से कवि-मिजाज आ तनि-मनि गाइयो-बजा लेइत रहथ । हँसी-मज़ाक में तs हुनकर कोई जोड़ नs रहे । मास्टर साहेब जिनगी में आदर्श, नैतिकता, ईमानदारी आदि के बड़का पक्षधर रहथ । ताउम्र ईमानदारी से पढ़लन आ पढ़एलन । हुनकर पढ़ाएल चेला-चटिया सs दिल से हुनकर आदर करे । मास्टर साहेब के कए गो चेला-चटिया ऊँच-ऊँच पद पर पहुँच गेल रहे । कोई डॉक्टर, इंजीनियर, सफल व्यवसायी बन गेल रहे तs कोई विदेश चल गेल रहे । आजुक ज़माना में हाईस्कूल शिक्षक के एतना आदर मिलनाई दुर्लभ बात हय ।
मास्टर साहेब उमिर के साठ बरिस पूरा कएलन आ सेवा से रिटायर हो गेलन । अप्पन बाल-बच्चा के शादी-बियाह रिटायर होए से पहिलsहीं कs के निश्चिंत हो गेल रहथ । बेटी-दामाद बैंगलोर में आ बेटा-पुतोह हैदराबाद में सेटल हो गेल रहsएन । मास्टर साहेब स्वाभिमानी रहथ । हुनकर मान्यता रहे कि जब तक शरीर चले, अप्पन बाल-बच्चा पर आश्रित नs होए के चाही । हिनकर ई बात से बेटा-बेटी, दुन्नों क्षुब्ध रहइत रहे । लेकिन कोई फिकिर नs, मास्टर साहेब अप्पन मौज में मस्त रहइत रहथ । दुन्नों बेकती शहर के एगो फ्लैट में अप्पन सेवानिवृत्त जिनगी कटsइत रहथ । एही बीच राज्य में कौनो चुनाव घोषित हो गेल । चुनाव के की हय, देश में चुनाव बरमहल होइत रहइअ, कभी लोकसभा के, कभी विधानसभा के, कभी पंचायत के तs कभी कुच्छो के । साँच कहल जाए तs देश में चुनाव अब बरमसिया हय, एतना बरमसिया जेतना नs कोई फल हय आ नs कोई फूल । मास्टर साहेब अप्पन वोटर कार्ड के शहर में ट्रांसफर नs करएले रहथ । जागरूक नागरिक के कर्तव्य के तकाजा रहे कि वोट देल जाए ।
एक दिन दुन्नों बेकती गाँव चल देलन । अप्पन अपार्टमेंट से निच्चा उतरला पर मास्टर साहेब कुछ सोच में पड़ गेलन – “बिहार में चोरी-पॉकिटमारी आदि तs चलते हय, कभियो खतम नs होएवाला हय । यदि कोई चोर हम्मर फ्लैट में चोरी के लेल घुस जाएत तs ओकरा कथी हाथ लगतई ? कुच्छो नs मिलला पर पित्त के मारे ऊ एन्ने-ओन्ने तोड़फोड़ कs देत ।“
अप्पन फ्लैट के तोड़फोड़ से बचाबे के लेल एगो तरकीब सूझलएन । अप्पन कनियाँ के निचहीं छोड़ के वापिस फ्लैट में गेलन । पाँच-पाँच सौ के दू गो करारी नोट निकाललन आ एगो कागज पर कुछ लाइन लिख देलन । नोट आ कागज के टेबुल पर रख के ऊपर से एगो पेपरवेट रख देलन । कागज में लिखल रहे – “प्रिय अनजान चोर भाई, हम अपने से परिचित नs हती । लेकिन हमरा एतना मालूम हय कि केतना मेहनत से आ जोखिम के साथ ताला तोड़ के अपने फ्लैट में आएल होएम । दुर्भाग्य से ई फ्लैट में दुइए गो लोग रहइअ – एगो हम आ दोसर हम्मर बुढ़िया कनियाँ । हम हाईस्कूल के मास्टरी से रिटायर हती आ अप्पन पेंशन पर जी रहल हती । हमरा बहुत्ते दुख हय कि अपने के हम्मर फ्लैट में मेहनत के हिसाब से कुच्छो नs मिलल । हम दुन्नों प्राणी के तरफ से ई दू गो नोट तुच्छ भेंट के तौर पर स्वीकार कएल जाए । हम्मर शुभकामना हय कि भविष्य में अप्पन काम में अपने के खूब सफलता मिले । अपने के जानकारी के लेल सूचना हय कि इहे अपार्टमेंट में एगारहवाँ मंजिल पर एगो स्मगलर रहइअ, दसवाँ पर एगो भ्रष्ट मंत्री के आ ओकरे बगल में एगो राजनीतिक दलाल के फ्लैट हय । नौमा पर आएम तs एगो घूसखोर जज के फ्लैट मिलत, ओकरे बगल में ओक्कर दलाल वकीलो के फ्लैट हय । अठमा मंजिल पर चार गो फ्लैट हय - चारों एक से एक धुरंधर धाँधलीबाज । कुल मिला के पाँचम मंजिल से जइसे-जइसे ऊपर बढ़म, अपने के झोरा ओतने जादे भरत । अभी चुनाव के मौसम हय । जेतना कालाधन कभी कोई के देखे में नs आ सकल हय, ओसे जादे ई लोग के फ्लैट में मिल जाएत । हमरा उम्मेद हय कि ई सूचना अपने के काम आएत । ई लोग एतना पहुँचल भ्रष्ट हय कि अपने के बिजनेस के सफलतो से ई लोग के कुच्छो बिगड़ेवाला नs हय । विश्वास रक्खू, अपने के बिजनेस के बारे में ई लोग पुलिसो से कुच्छो नs बता सकइअ । बहुत-बहुत शुभकामना ।“
करेंसी नोट आ कागज पर लिखल नोट टेबुल पर रख के मास्टर साहेब फ्लैट में ताला लगा देलन । निच्चा अएला पर कनियाँ पुछलथिन – "कथी लेल गेल रही ?" मास्टर साहेब कुच्छो-कुच्छो बता के महटिया देलथिन । दुन्नों बेकती गाँव चल गेलन ।
चुनाव भेल, वोट पड़ल । मास्टरो साहेब दुन्नों बेकती वोट देलन । कुछ दिन आउर खेत-पथारी देख-दाख के लगभग एक महिन्ना के बाद मास्टर साहेब शहर लउट गेलन ।
फ्लैट के अंदर ओहे टेबुल पर एगो बैग रक्खल रहे । मास्टर साहेब बैग खोललन । बैग पाँच-पाँच सौ के नोट के गड्डी से भरल रहे । सबसे उप्पर एगो कागज पर लिखल नोट रहे । कागज के नोट में लिखल रहे –
“आदरणीय गुरुजी, सादर प्रणाम । सूचना आ मार्गदर्शन के लेल अपने के बहुत-बहुत धन्यवाद । अपने के आशीर्वाद से हम्मर बिजनेस खूब फल-फूल रहल हय । देओता के लेल अर्पित अगsओं के रूप में दस लाख के ई तुच्छ भेंट के स्वीकार कएल जाए । हमरा आशा हय कि अपने के आशीर्वाद भविष्य में भी मिलइत रहत ।
अपने के लाभार्थी चेला,
चोर”
मास्टर साहेब कागज के पढ़लन आ ठठा के हँस देलन । कनियाँ तुरंते पूछ देलथिन – कथी लेल हँस रहल हती ?
- “हमरा बुझाइअ जे हम्मर मास्टरी के काम अभियो खूब चल रहल हय – वंस अ टीचर, ऑलवेज अ टीचर !”
कनियाँ भड़क गेलथिन – “ई अँग्रेजी में गिटिर-पिटिर नs करू, हमरा अँग्रेजी नs अबइअ ।“ मास्टर साहेब मुस्कुरा के कहलथिन – “एक्कर मतलब हय कि जे एक बेर मास्टर बन गेल ऊ ताउम्र मास्टर रहइअ ।“ कनियाँ तइयो नs मानलsथिन – “ई बात तs सबके मालूम हय, एमें हँसे के कौन बात हय ? सही-सही बताऊ, कथी लेल हँसली ?”
- “नs, नs, कौनो बात नs हय, अइसsहीं गाँव के इयाद पड़ गेल तs हँसी छूट गेल ।“
लेकिन कनियाँ के विश्वास नs भेलएन । पुछइत-पुछइत मास्टर साहेब के लग चल अलथिन । बैग देखते चिकर पड़लथिन – “ई कथी हय ? एतना नोट ?” मास्टरनियो जी सिद्धांत के पक्का रहथिन । अप्पन रौद्र रूप में आ गेलथिन – “ई नाजायज रुपइया के जल्दी से जल्दी हम्मर घर से हटाऊ । हमरा से ई बर्दाश्त नs होएत । हम्मर घर पवित्र हय, एक्कर पवित्रता से कोई समझौता नs हो सकइअ ।“
कनियाँ के समझा-बुझा के मास्टर साहेब चुप करsएलन । एक महिन्ना से बंद फ्लैट में झाड़ू—बुहारू देइत-देइत साँझ हो गेल रहे । हाथ-गोर धो के चाय पिए लगलन । मास्टर साहेब के मन में धमगुज्जर मच्चल रहे कि ई नाजायज नोट के कथी कएल जाए । हुनका मालूम रहे कि पुलिस में जमा करे जएतन तs पुलिस हिनके फँसा देत । मास्टर साहेब के पक्का विश्वास रहे कि नाजायज धन संस्कारहीन होइअ । नाजायज धन के परिणाम हमेशा भयानक होइअ । मास्टर साहेब खुद से सवाल पूछथ आ खुद्दे ओक्कर जवाबो देइत रहथ – “मंदिर में ? नs, मंदिर में नाजायज पइसा नs देबे के चाही, मंदिर के पवित्रता पर असर पड़ जाएत । धरमशाला में ? नs, ओहो तs मंदिरे जइसन हय । केकरा देल जाए, कइसे जान छोड़ाएल जाए ?” मास्टर साहेब के माथा रॉकेट के गति से चलइत रहे । एगो पेंसिल निकाललन आ नोट के गड्डी के गिन के ओपर सही करे लगलन ।
चाय पी के मास्टर साहेब चुपचाप बैग उठएलन आ बाहर निकल गेलन । लगभग दू सौ मीटर के दूरी पर पुलिस-थाना रहे । बेरा डूब गेल रहे, अन्हार बढ़ल जाइत रहे । थाना के नजदीक पहुँच के बगल के नाला में ऊ बैग के फेंक देलन । जोर से ‘छपाक’ के आवाज भेल । थाना से कए लोग आवाज के तरफ दउरलन । एतने देर में मास्टर साहेब अन्हार में अलोप हो गेलन आ घरे लउट गेलन ।
अगिला दिन अखबार में मोट-मोट हेडलाइन छप्पल रहे – “कोतवाली पुलिस के छापेमारी में चुनाव में प्रयोग होएवाला कालाधन बरामद, एक लाख कैश जब्त !” मास्टर साहेब अखबार पढ़ के पहिले माथा पीटलन आ बाद में हँसे लगलन । कनियाँ फेर पूछ देलथिन – “अब कथी ला ठठा के हँस रहल हती ?” मास्टर साहेब सब बात कनियाँ के बता देलथिन ।
- “ई तs सरासर अन्याय हय, चोरी से भी जादे भयानक चोरी हय । कोई उचित जगह खोज के एक्कर शिकायत करू ।“ सजग आ जिम्मेदार भारतीय नारी के रूप में कनियाँ के आवाज में तागत रहे ।
मास्टर साहेब फेर से एगो कागज लेके कुछ लिखे लगलगन । कागज के मोड़ के लिफाफा में रखलन आ उठके कुर्ता-धोती पेन्हे लगलन । अपार्टमेंट से उतरके रिक्शा धs लेलन । आधा घंटा के बाद एगो ऑफिस के सामने रिक्शा रुकल । ऑफिस के रिसेप्शन में जाके कुच्छो कहतन रs, ओसे पहिलsहीं हुनकर नजर एगो बोर्ड पर पड़ गेल । ऊ बोर्ड पर ऊ ऑफिस के सब अधिकारी लोग के नाम लिखल रहे । ऑफिस-हेड के नाम देख के कुछ अचरज भेलsएन । रिसेप्शनिस्ट से ऑफिस-हेड के बारे में पूछे पर मास्टर साहेब के बुझाएल जे शायद ऊ नाम से परिचित हतन । एगो चिट पर अप्पन नाम लिख के देलथिन । रिसेप्शनिस्ट साहेब के फोन लगा देलक । साहेब आगंतुक के नाम, पता, देह-धुआ आदि के बारे में पूछताछ करे लागल । दू—तीन मिनट में सामने के लिफ्ट से एगो सूट-बूटधारी अधिकारी निकलल । मास्टर साहेब के देखते दउर के आएल आ गोर लाग के प्रणाम कएलक । असुविधा के लेल माफी मँङइत ऊ साहेब मास्टर साहेब के अप्पन चैम्बर में ले गेल ।
अगिला दिन के अखबार के हेडलाइन रहे – “सीबीआई द्वारा थाना-प्रभारी समेत कोतवाली पुलिस-थाना के सब अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार, थाना से नौ लाख रुपइया कैश बरामद ।“ बरामद कैश के एक-एक गड़डी पर मास्टर साहेब द्वारा कएल गेल दस्तखत सीबीआई अधिकारी के देल गेल नोट पर कएल गेल दस्तखत से हू-ब-हू मिलइत रहे ।
मास्टर साहेब अखबार के हेडलाइन पढ़लन आ फेर से ठठा के हँस देलन – “वंस अ टीचर, ऑलवेज अ टीचर ।“ कनियाँ फेर से भड़क गेलथिन – “कए बेर कहली जे हमरा अँग्रेजी समझ में नs अबइअ ।“ मास्टर साहेब मुस्कुरा के कहे लगलsथिन – “अपने के ई मास्टर हमेशा मास्टर रहत, कभी रिटायर नs हो सकइअ ।“ एमरी कनियाँ लजा के मुस्कुरा देलथिन ।
(समाप्त)
© जय राम सिंह (24.10.2025)