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14/01/2026

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आप सभी को  #रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ..:-) "राम" का अर्थ होता है- 'रमन्ते योगिनो यस्मिन् स राम:' अर्थात् योगिगण अपने...
05/04/2017

आप सभी को #रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ..:-)

"राम" का अर्थ होता है-
'रमन्ते योगिनो यस्मिन् स राम:'
अर्थात् योगिगण अपने ध्यान में जिन्हें देखते हैं, वे हैं राम।
राम का तंत्र में अर्थ है कल्याणकारी अग्नि और प्रकाश।

चैत्र नवरात्र की नवमी को ही राम-जन्मोत्सव या "रामनवमी'' के रूप में मनाते हैं।
"रामनवमी" का पावन दिन हिंदी के "चैत्र" एवं अंग्रेज़ी के "मार्च या अप्रैल" महीने में आता है।
अक्सर आपके दिमाग में ये सवाल गूंजता होगा ना कि आखिरकार नवरात्रि और रामनवमी का कनेक्शन क्या है??

तो आइये जानते हैं:-)

रामनवमी और नवरात्रि :-
रामनवमी का त्योहार क्यों मनाया जाता है यह तो सब जानते हैं। इस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। इस दिन को राम जन्म की खुशी के रूप में मनाया जाता है। लेकिन, नवरात्रि और रामनवमी का क्या संबंध है, शायद यह लोग नहीं जानते।

असुर संहार के लिए दोनों का जन्म-:
त्रेतायुग में असुर रावण का नाश करने और धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक मेंश्री राम के रूप में राजा दशरथ के घर में श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। उसी दिन को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।
मां दुर्गा के एक स्वरूप 'कात्यायनी' का जन्म भी महिसासुर के सर्वनाश के लिए हुआ था।

सिद्धिदात्रि की पूजा और रामनवमी-:
रामनवमी के दिन मां दुर्गा नवरात्रों का समापन होता है। रामनवमी के दिन दुर्गा माता के सिद्धिदात्रि स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है और दूसरी तरफ राम- जन्म की खुशियां मनाई जाती हैं।

मां की अराधना और धर्म युद्घ में जीत:-
कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने दुर्गा मां की पूजा की थी। जिसके फलस्वरूप उन्हें धर्म युद्ध में जीत मिली थी।
ऐसे में, नवरात्रि और रामनवमी दोनों का महत्व बढ़ जाता है।

चैत्र मास की नवमी :-
कहा जाता है कि रामनवमी के दिन तुलसीदास जी ने रामचरित मानस की रचना की भी शुरुआत की थी।

कैसी भी आपद-विपदा हो, श्री “राम रक्षा कवच”का पाठ करें, राम जी अच्छा ही करेंगे इससे चमत्कारी रक्षा कवच और कोई हो ही नहीं सकता ।!!

श्री राम रक्षा कवच !!
कानन भूधर बारि बयारि महाविषव्याधि दवा अरि घेरे,
संकट कोटि जहाँ तुलसी सुत मातपिता हित बन्धु ननेरे !
राखि हैं राम कृपालु तहां हुनुमान से सेवक हैं जेहि केरे,नाक रसातल भूतल माह रघुनायक एक सहायक मेरे !!

#रामनवमी

*"हिन्दू नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2074 (28 मार्च, 2017)" की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।**चैत्र शुक्ल...
28/03/2017

*"हिन्दू नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2074 (28 मार्च, 2017)" की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।*

*चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :*

*1.* इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।

*2.* सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।

*3.* प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।

*4.* शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।

*5.* सिख परंपरा के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी के जन्म दिवस का यही दिन है।

*6.* स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना।

*7.* सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।

*8.* विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।

*9.* युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
10. न्याय शास्त्र के रचियता महर्षि गौत्तम का जन्मदिन दिन !

*हिन्दू नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :*

*1.* वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।

*2.* फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

*3.* नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

*हिन्दू नववर्ष कैसे मनाएँ :*

*1.* हम परस्पर एक दुसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें।

*2.* आपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।

*3 .* इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फेहराएँ।

*4.* आपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएँ।

*5.* घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ।

*6.* इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें।

*आप सभी से विनम्र निवेदन है कि "हिन्दू नववर्ष" हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए "समाज को अवश्य प्रेरित" करें।*
* धन्यवाद *

🚩🚩

परमगुरु ओशो के संबोधि दिवस पर सभी ओशो प्रेमियों को उत्सव पूर्ण बधाइयाँ | "Enlightenment is a simple realization that eve...
20/03/2017

परमगुरु ओशो के संबोधि दिवस पर सभी ओशो प्रेमियों को उत्सव पूर्ण बधाइयाँ |

"Enlightenment is a simple realization that everything is as it should be." - OSHO

ओशो के अनुयायियों के लिए 21 मार्च का दिन बड़ा ही खास होता है। आज ही के दिन 21 मार्च 1953 को संस्कारधानी जबलपुर के भंवरताल पार्क स्थित मौलश्री वृक्ष के तले आचार्य श्री रजनीश को संबोधि की परम उपलब्धि हुई थी। यही वजह है कि जो स्थान बुद्ध के अनुयायियों के लिए बोधिगया का है वही देश-दुनिया में फैले लाखों-करोड़ों ओशो प्रेमियों के लिए जबलपुर का।

ओशो अपनी संबोधि के बारे में कहते हैं कि वह और कुछ नहीं, बस तुम प्रकाश बन जाते हो, तुम्हारा अंतरतम प्रकाशमान हो जाता है।
पूरे विश्व में स्थित ओशो धाम में इस दिन विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। दिल्ली स्थित ओशो धाम में यह महोत्सव पांच-दिवसीय ध्यान-शिविर के साथ मनाया जाएगा।

जिस 'मौलश्री वृक्ष' के नीचे ओशो को संबोधि यानी ज्ञान की प्राप्ति हुई थी वहवृक्ष जबलपुर के भंवरलाल पार्क में स्थित है। आज यह वृक्ष भूरे रंग की पृथ्वी तथा घास के बीचों-बीच स्थित है, और एक गहरी संकरी खाई ने इसे चारों ओर से घेरा हुआ है। मध्यप्रदेश, जबलपुर के भंवताल उद्यान में इसे धातु के बने गेट से पूरी तरह संरक्षित किया गया है।


#ओशो_संबोधि_दिवस #ओशो

हमारी होली में आनन्द नहीं हो सकता:- ओशो        होली के दिन कोई कपड़े पर रंग डाल जाता हैतो दिल दुखता है। जबकि दिल को खुश ...
12/03/2017

हमारी होली में आनन्द नहीं हो सकता:- ओशो

होली के दिन कोई कपड़े पर रंग डाल जाता हैतो दिल दुखता है। जबकि दिल को खुश होना चाहिए कि किसी ने रंग डालने योग्य माना।आज हम भारत के समाज को गरीब कह सकते हैं, हालांकि बिड़ला भी मिलेंगे।
लेकिन बिड़ला के कारण भारत का समाज अमीर नहीं हो सकता।सुदामा के कारण उस दिन का समाज गरीब नहीं हो सकता। हिंदुस्तान के इतने गरीब समाज में अमीर तो मिलेगा ही।
पश्चिम के, अमरीका के संपन्न समाज में भी गरीब तो मिलेगा ही। यह सवाल नहीं है। सवाल यह है कि बहुजन, समाज का पूरा का पूरा ढांचा संपन्न था।जो उस दिन जीवन की सुविधा थी, वह अधिकतम लोगों को उपलब्ध थी। आज अमरीका में जो जीवन की सुविधा है, वह अधिकतम लोगों को उपलब्ध है।संपन्न समाज में उत्सव प्रवेश कर सकता है, गरीब समाज में उत्सव प्रवेश नहीं कर सकता। गरीब समाज में उत्सव धीरे-धीरे विदा होता जाता है। या कि उत्सव भी फिर एककाम बन जाता है।
गरीब समाज उत्सव भी मनाता है, दीवाली भी मनाता है, तो कर्ज लेकर मनाता है। होली भीखेलता है तो पिछले वर्ष के पुराने कपड़े बचाकर रखता है। होली के दिन फटे-पुराने कपड़ों को सिलाकर निकल आता है।

अब जब होली ही खेलनी है तो फटे-पुराने कपड़ों से खेली जा सकती है। तो मत ही खेलो। होली का मतलब ही यह है कि कपड़े इतने ज्यादा हैं कि रंग में भिगोए जा सकते हैं।
लेकिन, गरीब आदमी भी होली तो खेलेगा, लेकिन वह पुराने ढांचे को ढो रहा है सिर्फ। नहीं तो होली के दिन, जो सबसे अच्छे कपड़े थे, वही पहन कर निकलते थे लोग।
उसका मतलब ही यह था। उसका मतलब ही यह था कि इतने अच्छे कपड़े हैं, तुम रंग डालो! लेकिन जिससे हम रंग डलवाने जा रहे हैं, उसको भी धोखा दे रहे हैं।
कपड़ा पुराना, सी-सी कर आ गए हैं, धुलवा कर आ गए हैं। वह रंग डालने वाले को भी धोखा दे रहे हैं। रंग डालने का मतलब ही क्या था?जिन लोगों ने कपड़ों पर रंग डालने का खेल-खेला होगा, उनके पास कपड़े जरूरत से ज्यादा रहे होंगे, अन्यथा नहीं खेल सकते हैं यह खेल। हम भी खेल रहे हैं, लेकिन हमारा खेल सिर्फ एक ढोना है एक रूढि़ को।इसलिए दिल दुखता है। होली के दिन कोई कपड़े पर रंग डाल जाता है तो दिल दुखता है। दिल खुश होना चाहिए कि किसी ने रंग डालने योग्य माना, लेकिन दिल दुखता है।
दुखेगा, क्योंकि कपड़े भारी महंगे पड़ गएहैं, अब कपड़े इतने आसान नहीं रह गए हैं।हां, पश्चिम में होली खेली जा सकती है। अभी कृष्ण का नृत्य चल रहा है, आज नहीं कल होली पश्चिम में प्रवेश करेगी, इसकी घोषणा की जा सकती है।पश्चिम होली खेलेगा। अब उनके पास कपड़े हैं, रंग भी है, समय भी है, फुर्सत भी है, अब वे खेल सकेंगे। और उनकी होली में एक आनंद होगा, उत्सव होगा, जो हमारी होली मेंनहीं हो सकता।

संपन्नता से मेरा मतलब है, ऑन द होल, पश्चिम का समाज संपन्न हुआ है। और जब पूरा समाज संपन्न होता है, तो जो उस समाज में दरिद्र होता है वह भी उस समाज के संपन्न से बेहतर होता है जो समाज दरिद्र होता है।
यानी आज अमरीका का दरिद्रतम आदमी भी पैसेपर उतना पकड़ वाला नहीं है, जितना हिंदुस्तान का संपन्नतम आदमी है।

हिंदुस्तान के अमीर से अमीर-आदमी की पैसेपर पकड़ इतनी ज्यादा है, होगी ही, क्योंकि चारों तरफ दीन-दरिद्र समाज है। अगर वह जोर से न पकड़े तो कल वह भी दीन-दरिद्र हो जाएगा।

साभार: ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन
पुस्तक: कृष्ण स्मृति, प्रवचन-13

#होली2017

जानिए क्या है मकर संक्रांति, क्या करें इस दिन:- हमारे पवित्र पुराणों के अनुसारमकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महे...
13/01/2017

जानिए क्या है मकर संक्रांति, क्या करें इस दिन:-

हमारे पवित्र पुराणों के अनुसारमकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति औरसूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन व्रत है, जो तन-मन-आत्मा को शक्ति प्रदान करता है।

संत-महर्षियों के अनुसार इसके प्रभाव से प्राणी की आत्मा शुद्धहोती है। संकल्प शक्ति बढ़ती है। ज्ञान तंतु विकसित होते हैं। मकरसंक्रांति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है। यह संपूर्ण भारत वर्ष में किसी न किसी रूप में आयोजित होता है।

एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति होती है।सूर्यदेव जब धनु राशि से मकर पर पहुंचते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है।

राशि परिवर्तन :-
सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। यह परिवर्तन एक बार आता है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाने का महत्व इसलिए अधिक है कि इस समयसूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन देवताओं का दिन माना जाता है।

कैसे मनाएं संक्रांति :-

* इस दिन प्रातःकाल उबटन आदि लगाकर तीर्थ के जल से मिश्रित जल से स्नान करें।

* यदि तीर्थ का जल उपलब्ध न हो तो दूध, दही से स्नान करें।

* तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक है।

* स्नान के उपरांत नित्य कर्म तथा अपने आराध्य देव की आराधना करें।

* पुण्यकाल में दांत मांजना, कठोर बोलना, फसल तथा वृक्ष का काटना, गाय, भैंस का दूध निकालना व मैथुन काम विषयक कार्य कदापि नहीं करना चाहिए।

* इस दिन पतंगें उड़ाए जाने का विशेष महत्व है।

पुण्य पर्व है संक्रांति :- उत्तरायन देवताओं का अयन है। यह पुण्य पर्व है। इस पर्व से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। उत्तरायन में मृत्यु होने से मोक्ष प्राप्ति की संभावना रहती है। पुत्र की राशि में पिता का प्रवेश पुण्यवर्द्धक होने से साथ-साथ पापों का विनाशक है।

सूर्य पूर्व दिशा से उदित होकर 6 महीने दक्षिण दिशा की ओर से तथा 6 महीने उत्तर दिशा की ओर से होकर पश्चिम दिशा में अस्त होता है।

उत्तरायन का समय देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन का समय देवताओं की रात्रि होती है, वैदिक काल में उत्तरायन को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा गया है। मकर संक्रांति के बाद माघ मास में उत्तरायन में सभी शुभ कार्य किए जाते हैं।

संक्रांति के मुहूर्त:-

मकर संक्रांति का पर्व वर्ष 2017 में 14 जनवरी को मनाया जाएगा। संक्रांति के दिनपुण्य कालमेंदानदेना, स्नान करना या श्राद्ध कार्य करना शुभ माना जाता है। इस साल यह शुभ मुहूर्त 14 जनवरी को सुबह 7 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 57 मिनट तक का है।

मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद भगवान सूर्यदेव का स्मरण करना चाहिए। इनका स्मरण करने के लिए गायत्री मंत्र के अतिरिक्त निम्न मंत्रों से भी पूजा की जा सकती है:-
ॐ सूर्याय नम:,
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सप्तार्चिषे नम:

अन्य प्रभावी मंत्र हैं-

ॐ ऋगमंडलाय नम:,
ॐ सवित्रे नम:,
ॐ वरुणाय नम:,
ॐ सप्तसप्त्ये नम:,
ॐ मार्तण्डाय नम:,
ॐ विष्णवे नमः।।

-KPB-

दिवाली हर साल हिन्दू अश्विन महीने में यानी अक्टूबर या नवम्बर में बड़ी धूम धाम से मनायी जाती है। वर्तमान में दिवाली भले ही...
28/10/2016

दिवाली हर साल हिन्दू अश्विन महीने में यानी अक्टूबर या नवम्बर में बड़ी धूम धाम से मनायी जाती है। वर्तमान में दिवाली भले ही रंगीन तरीको से मनायी जाती हो लेकिन आज भी लोग इसके ऐतिहासिक महत्त्व को जानते है।हर साल दीवाली की अँधेरी रात में पटाखो की आवाज़ और जगमगाते कंदील से हम इसका अंदाजा लगा सकते है। दीवाली में पुरे घर को सजाया जाता है, हर किसी को मिठाई बाटी जाती है और पुरे देश में लोग अपने घरो को रौशनी से सजाते है। दिवाली का दिन वही दिन है जब भगवान श्री राम रावण का वध कर अयोध्या लौटआये थे और अयोध्या वासी उनके स्वागत में लगे हुए थे। कहा जाता है की मिथिला और अयोध्या के शाही परिवार के आदेश से ही माता सीता के राज्य से लेकर राम राज्य तक के रास्ते को उस दिन रौशनी से सजाया गया था। और इस तरह एक अँधेरी रात को जगमगाती हुई रात में परिवर्तित किया था। उनका स्वागत इसलिए महत्वपूर्ण था क्योकि भगवान राम 14 वर्षो के लंबे वनवास के बाद स्वराज्य वापिस लौटे थे और उन्होंने दानवी राजा रावण का वध भी किया था।दीवाली के दिन, सभी लोग अपने घरो के मुख्य द्वार पर आम के पेड़ की पत्तियों का तोरण बांधते है। अलग-अलग रंगों से रंगोली बनायी जाती है और आने वाले महेमानो का स्वागत किया जाता है। कहा जाता है की रंगोली को हिन्दू परंपरा में शुभ माना जाता है। इसके साथ-साथ घर के चारो तरह तेल के दिये भी एक कतार में लगाये जाते है। इसीलिए दिवाली को अक्सर “दियो की कतार” का त्यौहार भी कहा जाता है। इस दिन ज्यादातर लोग अपने घर के लिये कुछ नया खरिदने की कोशिश करते है, जैसे की ज्यादातर महिलाये इस दिन अपने लिये सोना खरीदती है। पारंपरिक सूत्रों और विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी नयी चीज को खरीदने का यह सबसे अच्छा मुहूर्त और दिन होता है। अक्सर लोग इस दिन सोने और चाँदी से बने आभूषण खरीदते है।

भले ही दिवाली त्यौहार मनाने के पीछे कोई भी कारण हो लेकिन इस त्यौहार के समय में हर साल बाजार मेंरौनक रहती है और लोग मिठाई, कपड़ो और आभूषण की खरीददारी करते है। कहा जाता है की आम आदमी दिवाली के समय में खुलकर खरीददारी भी करता है।दिवाली भारत के प्राचीनतम और प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है, हिन्दू धर्म में इसे बहुत महत्त्व दिया गया है। दिवाली शब्द का अर्थ “रौशनी के त्यौहार” से है, दिवाली शब्द का उद्गम संस्कृत शब्द “दीपावली” से हुआ है जिसका अर्थ दीपकों की कतार से है।अलग-अलग धर्म के लोग अपने रीती-रिवाजो के अनुसारदीवाली मनाते है, लेकिन यह त्यौहार हर किसी के घरमें खुशियाँ और उमंग लाता है।

दीवाली के पाँच दिन –

पाँच दिनों तक चलने वाला यह त्यौहार काफी मनोरंजक होता है।स बल्कि लोग तो हफ्तों पहले ही दीवाली की तैयारियाँ करने में लग जाते है, जिसमे मुख्य रूप से घर की सफाई भी शामिल है और हफ्तों पहले ही लोग खरीददारी करना शुरू कर देते है। इस समय में घरो और दुकानों की फूलो से सजाया जाता हैऔर लोग घरो में झालर और कंदील भी लगाते है। इसके साथ-साथ घर के आंगन को रंगोली से भी सजाया जाता है।

दीवाली के पाँच दिनों का वर्णन निचे दिया गया है –

१.धनतेरस –
पाँच दिन के इस उत्सव की शुरुवात धनतेरस से होती है। जिसमे सभी घर दिए से सजाये हुए होते है और लोग इस दिन घर से बाहर सोना, चाँदी और रसोईघर संबंधी कोई नयी चीज खरीदने के लिये बाहर निकलते है। इस दिन देवी धन्वंतरी की पूजा करते हैं कहा जाता है की इस दिन धन की देवी धन्वंतरी का भी जन्मदिन था, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखती है। बहुत से लोगो का मानना है की इस दिन घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है और बुराई का नाश होता है।

२.नरक चतुर्दशी –

यह दिन छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, नरक चतुर्दशी पाँच दिनों के इस उत्सव के दुसरे दिन आती है। इस दिन लोग अपने घरो की साफ़ सफाई करते है, घर को रंगों से सजाते है और मेहंदी भी लगाते है। इसी दिन से लोग एक-दूजे को दिवाली की शुभकामनाये देने लगते है। इस दिन लोग अपने खास के लिये उपहार खरीदने लगते है और उन्हें उपहार देकर खुश करते है।

३.दीवाली – लक्ष्मी पूजन--

पाँच दिनों के इस त्यौहार में तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण है, इस दिन दीवाली मनाई जाती है। इसी दिन रात में माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती और कुबेर भगवान की पूजा की जाती है। कहा जाता है की इस दिन माँ लक्ष्मी धरती पर प्रवेश करती है। और उन्हें अपने घर में आमंत्रित करने और हमेशा बसे रहने के लिये सभी लोग अपने घरो के दरवाजो पर दिए लगाते है और सभी दरवाजे, खिड़कियाँ और बालकॉनी खुली रखते है। और फिर पूजा होने के बाद बच्चे अपने घर के बाहर पटाखे फोड़कर माँ लक्ष्मी का स्वागत करते है।इस दिन सभी व्यापारी भी अपनी दुकानों में भगवान कुबेर और माँ लक्ष्मी की पूजा करते है।

४.पाडवा –

दिवाली के बाद आने वाले दिन को पाडवा कहते है, जिसे अक्सर शादीशुदा लोग मनाते है। इस दिन शादीशुदा लोग एक दूजे कोई सुनहरा उपहार देकर खुशकरते है। आज भी बहुत से परिवारों में इस परंपरा को मनाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन लोग भगवान श्री कृष्णा की गोवर्धन पूजा भी करते है।

५.भाई दूज –पाँच दिन के इस महोत्सव का अंत भाई-बहन के असीम प्यार और अटूट बंधन के साथ होता है। पाँचवे दिन को हम भाई दूज के नाम से जानते है, भारत के कुछ राज्यों में इस दिन को लोग “टिका” भी कहते है। यहदिन रक्षाबंधन के ही समान होता है लेकिन इसमें अलग रीती-रिवाज होते है। भाई-दूज के दिन परिवार के सभी भाई-बहन एक साथ कुछ समय बिताते है और कुछ यादगार लम्हों का निर्माण करते है। परंपरा के अनुसार इस दिन बहन अपने भाई की पूजा करती है और भाई अपनी बहन को उसका पसंदीदा उपहार भेट स्वरुप देता है। इस दिन भाई अपने बहन की सुरक्षा के लियेप्रार्थना करता है और बहन भी अपने भाई के अच्छे स्वास्थ की कामना करती है।भारत एक ऐसी जमी है जहाँ विविध समुदाय के लोग एकसाथ एक बंधन में रहते है और एकता के सूत्र में सभी त्यौहार मनाते है। लेकिन आज के वर्तमान युग में सभी लोग अपने-अपने जीवन में व्यस्त है ऐसे समय में उन्हें एक-दूजे से अपने रिश्तेदारों से मिलने का बहुत कम मौका मिलता है ऐसे समय में दीवाली ही एक ऐसा त्यौहार होता है जहाँ हर तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ छाई होती है और लोग दिल से एकदूजे से मिलते है और प्यार भरी बाते भी करते है।आज के समय में सभी देशवासी पर्यावरण को हो रहे नुकसान से परिचित हो चुके है, इसीलिए वर्तमान समय में इसमें कुछ बदलाव भी किये गए है। जिनमे भारत के कुछ परिवार प्रदुषण-मुक्त दीवाली भी मनाते है और समाज में अच्छा संदेश फैलाते है। वर्तमान समय में केवल स्कूल और संस्थाओ में ही नहीं बल्कि भारत सरकार ने भी प्रदूषित फटाखो का उपयोग करने पर रोक लगायी है और नागरिको से प्रदुषण-मुक्त दीवाली मनाने की गुजारिश भी की है।

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