Maharashtra, Janrliest: Jitesh Patil

Maharashtra, Janrliest: Jitesh Patil Janrliest peg Nashik, Maharashtra,India

30/04/2026

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नाशिकच्या तेवीस अधिकारी, अंमलदारांना ‘पोलीस महासंचालक सन्मानचिन्ह’ जाहीर

1)04/2026
महाराष्ट्र पोलीस दलात अत्यंत मानाचे समजले जाणारे ‘पोलीस महासंचालक सन्मानचिन्ह-२०२५’ नुकतेच जाहीर झाले असून, यामध्ये नाशिकमधील २३ पोलीस अधिकारी आणि अंमलदारांनी बाजी मारली आहे. पोलीस महासंचालक सदानंद दाते यांनी २९ एप्रिल २०२६ रोजी या सन्मानचिन्हांची घोषणा केली.

यात नाशिक शहर पोलीस दलातील दहा आणि सीआयडी विभागातील एका अधिकार्‍याचा समावेश आहे. या पुरस्कारामुळे नाशिक पोलीस दलाच्या शिरपेचात मानाचा तुरा रोवला गेला असून, यामुळे पोलीस दलाचे मनोबल उंचावण्यास मदत होणार आहे.

पद सन्मानचिन्ह प्राप्त अधिकारी, अंमलदार

पोलीस निरीक्षक अशोक उमाजी शरमाळे, सोहन कनियन माछरे, तृप्ती दत्तात्रय सोनवणे, सचिन मुरलीधर खैरनार, संतोष बबनराव नरुटे
सहायक पोलीस निरीक्षक हेमंत सुभाष तोडकर
पोलीस उपनिरीक्षक संदीप रामराव पवार
सहायक उपनिरीक्षक संजय विठोबा सानप, दिलीप धोंडू भारते, दिनकर बाबूराव खैरनार, सुनील खंडेराव कोकाटे
पोलीस निरीक्षक (सीआयडी) राजेंद्र धर्मा उशिरे (गुन्हे अन्वेषण विभाग

ग्रामीण पोलीस दलातील यांचा गौरव
ग्रामीण पोलीस दलातून सोमनाथ बाजीराव ह्याळीज (नियंत्रण कक्ष, मालेगाव), शरद पांडुरंग गांगुर्डे (जातपडताळणी विभाग), सचिन दिलीप धारणकर (स्थानिक गुन्हे शाखा), शांताराम पंढरीनाथ घुगे (विमानसेवा, ओझर), कैलास रामभाऊ खैरे (चांदवड पोलीस ठाणे), सतीश रामनाथ जगताप (स्थानिक गुन्हे शाखा), दिनेश माधवराव पवार (नियंत्रण कक्ष, मालेगाव), करुणा अनिल आहेर (एएचटीयू), नीलिमा माधवराव मोरे (अर्ज शाखा), प्रदीप श्रावण बहिरम (सायबर पोलीस ठाणे), रमेश वामनराव काकडे (मोटर परिवहन विभाग) आणि जितेंद्र शिवराम रायते (नागरी हक्क संरक्षण विभाग) या अंमलदारांचा समावेश आहे.

30/04/2026

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सर्वांना महाराष्ट्र दिनाच्या हार्दीक शुभेच्छा..,,,!

30/04/2026

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30/04/2026
30/04/2026
30/04/2026

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दाभोलकर हत्याकांड में बड़ा मोड़, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषी शरद कलास्कर को दी जमानत

30/04/2026
बांबे हाई कोर्ट ने बुधवार को अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की 2013 की हत्या के मामले में दोषी शरद कलास्कर को जमानत दे दी और उसकी आजीवन ...और पढ़ें

दाभोलकर हत्याकांड में बांबे हाई कोर्ट ने शरद कलास्कर को दी जमानत

पीटीआई, मुंबई। बांबे हाई कोर्ट ने बुधवार को अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की 2013 की हत्या के मामले में दोषी शरद कलास्कर को जमानत दे दी और उसकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया।

कोर्ट ने कथित हमलावर के तौर पर उसकी पहचान पर संदेह जताया और दो प्रत्यक्षदर्शियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

जस्टिस अजेय गडकरी और जस्टिस रणजीतसिंह भोंसले की बेंच ने कलास्कर को 50,000 रुपये का निजी मुचलका जमा करने और पुणे के डेक्कन पुलिस स्टेशन में, जहां हत्या का मामला दर्ज किया गया था, हर महीने एक बार पेश होने का निर्देश दिया।

उन्होंने 2024 में एक विशेष अदालत द्वारा अपनी दोषसिद्धि को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, और अपील पर अंतिम सुनवाई और फैसला होने तक जमानत की मांग की थी। कलास्कर पर कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या का भी मुकदमा चल रहा है।

पिछले साल अक्टूबर में हाई कोर्ट ने उसे इस मामले में जमानत दे दी थी। दाभोलकर मामले में जमानत मिलने के बाद कलास्कर जेल से बाहर आ सकता है।

अंधविश्वास विरोधी संगठन "महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति" के संस्थापक दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

29/04/2026

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पूर्व PM राजीव गांधी की हत्या के जुर्म में 31 साल जेल की सजा भुगती, अब हाई कोर्ट में वकील बने ए.जी. पेरारिवलन

29/04/2026
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Former Prime Minister Rajiv Gandhi) की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए ए.जी. पेरारिवलन (A.G. Perarivalan) ने 31 वर्ष जेल में बिताने के बाद एक नया अध्याय शुरू किया है। ए.जी. पेरारिवलन अब हाई कोर्ट में वकील बन गए हैं। आइए जानते हैं, उनके संघर्ष की कहानी…

राजीव गांधी हत्याकांड में 31 साल जेल की सजा काटने वाले ए.जी. पेरारिवलन मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करेंगे। साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिहा किए जाने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की और अब मद्रास उच्च न्यायालय में वकील के रूप में पंजीकृत हो गए हैं। 54 साल के ए.जी. पेरारिवलन ने 27 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु और पुडुचेरी बार एसोसिएशन में अपना नाम दर्ज कराया है। उनके नामांकन समारोह में मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी, तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के अध्यक्ष पी.एस. अमलराज, उपाध्यक्ष एस. प्रभाकरन सहित सहित कई अधिवक्ता उपस्थित रहे।

19 साल में हुई गिरफ्तारी, अब वकील बने पेरारिवल
ए.जी. पेरारिवलन ने अपनी जेल यात्रा को जीवन की बड़ी अंतर्दृष्टि बताया है। ए.जी. पेरारिवलन PTI को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे गलत हिरासत, न्यायिक देरी और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों से संबंधित मामलों पर विशेष रूप से काम करेंगे। इंटरव्यू में पेरारिवलन ने कहा- हमारा मुख्य ध्यान उन कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने पर होगा, जिन्हें प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता।

साल 1991 में आतंकवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। जब राजीव गांधी की LTTE द्वारा हत्या की गई, तब पेरारिवलन की उम्र मात्र 19 वर्ष थी। गिरफ्तारी के समय उनके परिवार को लगा था कि उनसे सिर्फ पूछताछ होगी और अगले दिन वे घर लौट आएंगे। हालांकि, उन्हें रिहा नहीं किया गया। पेरारिवलन की गिरफ्तारी के बाद उनके परिजनों को 59 दिनों तक इसकी जानकारी नहीं हुई।

पेरारिवलन पर आरोप
पेरारिवलन पर आरोप था कि उन्होंने हत्या में इस्तेमाल बम के लिए 9 वोल्ट की बैटरी खरीदी थी। TADA अदालत ने 1998 में उन्हें दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में बरकरार रखा। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका पर 11 वर्ष की अनावश्यक देरी का हवाला देते हुए उनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। इसके बाद 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया।

पेरारिवलन अधिवक्ता बनने का सफर
जेल से रिहाई के बाद पेरारिवलन ने बेंगलुरु के डॉ. बी.आर. अंबेडकर लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री पूरी की और 2025 में अखिल भारतीय बार परीक्षा उत्तीर्ण की, अब वे वकील बन गए हैं। जिस कानूनी व्यवस्था में पेरारिवलन ने आरोपी और दोषी के रूप में अपने जीवन के 31 वर्ष बिताए, वही अब मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करेंगे। पेरारिवलन ने तमिलनाडु मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित डिप्लोमा पाठ्यक्रम में शीर्ष स्थान प्राप्त करके उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही, उन्होंने प्लस टू परीक्षा में कैदियों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त किया और 1200 में से 1096 अंक हासिल किए।

28/04/2026

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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना चीफ राज ठाकरे ,BT सेनाप्रमुख यांची मुलाकात ओबीसी समाजसेवक कलाकार ,डारेक्टर महेश मांजरेकर यांनी मुलाकात घेतली. ती मुलाकात फक्त राज ठाकरे याच्या समर्थकांनसाठी आणि मराठी जनांनसाठी कारण मुलाकात मराठीत आहे.

27/04/2026

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ईरान के विदेश मंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात की, पुतिन बोले, 'रूस हर संभव मदद को तैयार'

28/04/2026
ईरान के विदेश मंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात की, पुतिन बोले, 'रूस हर संभव मदद को तैयार'ईरान के विदेश मंत्री इस्लामाबाद की अपनी संक्षिप्त यात्रा के बाद रूस पहुंचे.अराघची ने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान दुनिया ने अमेरिका का मुकाबला करने में ईरान की ताकत देखी और इस्लामी गणराज्य एक ‘‘स्थिर और शक्तिशाली व्यवस्था’’ है.

अराघची ने बताया कि ईरान ने अमेरिका का साहसिक मुकाबला किया और रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनी रहेगीअराघची ने पाकिस्तान की यात्रा को सार्थक बताया और वहां सेना प्रमुख के साथ शांति वार्ता की दिशा पर चर्चा कीअमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर विफल रहा, दूसरा दौर प्रगति के साथ जारी है

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. इससे पहले उन्होंने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बात की. पुतिन ने अपनी संप्रभुता के लिए बहादुरी और वीरता से लड़ने को लेकर ईरानियों की सराहना की. पुतिन ने यह भी कहा कि मॉस्को पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति लाने में मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास' की रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को पहुंचने से पहले अराघची ने ओमान और पाकिस्तान के नेतृत्व से बातचीत की. ईरानी विदेश मंत्री ने सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन से मुलाकात की और ईरान को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया.

पुतिन क्या बोले
पुतिन ने अराघची के साथ अपनी मुलाकात के दौरान कहा, ‘‘रूस पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास करने को तैयार है.'' इस मुलाकात में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी मौजूद थे. पुतिन ने बताया कि उन्हें पिछले सप्ताह ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का संदेश मिला था. उन्होंने इस संदेश के लिए अराघची को उनकी ओर से आभार व्यक्त करने और उनके अच्छे स्वास्थ्य एवं सकुशल होने के लिए शुभकामनाएं देने को कहा. ईरान के सरकारी समाचार चैनल ‘प्रेस टीवी' के अनुसार, पुतिन ने अपनी संप्रभुता के लिए ‘‘वीरता और साहस'' से लड़ने के लिए ईरानी अवाम की सराहना की.

पुतिन ने कहा, ‘‘हम आशा करते हैं कि स्वतंत्रता के लिए साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर, नये नेता के मार्गदर्शन में ईरानी अवाम इस कठिन दौर से निकल जाएगी और शांति स्थापित होगी.''

ईरान के विदेश मंत्री क्या बोले
अराघची ने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान दुनिया ने अमेरिका का मुकाबला करने में ईरान की ताकत देखी और इस्लामी गणराज्य एक ‘‘स्थिर और शक्तिशाली व्यवस्था'' है. उन्होंने कहा, ‘‘ईरानी अवाम ने अपने साहस से अमेरिकी आक्रमण का सफलतापूर्वक सामना किया है....'' उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के पास रूस जैसे ‘‘महान मित्र और सहयोगी'' हैं और उन्होंने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की ओर से रूसी नेतृत्व को ‘‘हार्दिक शुभकामनाएं'' दीं. अराघची ने कहा कि मॉस्को और तेहरान के बीच संबंध ‘‘उच्चतम स्तर की रणनीतिक साझेदारी'' का प्रतिनिधित्व करते हैं और ‘‘परिस्थितियों की परवाह किए बिना'' विकसित होते रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘इस्लामी गणराज्य ईरान के समर्थन में आपके ठोस और मजबूत रुख के लिए हम आपके आभारी हैं.''

पाकिस्तान पर क्या बोले
ईरान के विदेश मंत्री इस्लामाबाद की अपनी संक्षिप्त यात्रा के बाद रूस पहुंचे, जो उनके अनुसार ‘‘बहुत ही सार्थक'' रही और इसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ ‘‘अच्छी बातचीत'' शामिल थी. यह घटनाक्रम, पश्चिम एशिया युद्ध का समाधान करने के लिए शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता के बीच हुआ. सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचने पर अराघची ने अपने टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किये एक वीडियो में कहा, ‘‘हमने पाकिस्तान में अपने मित्रों के साथ सार्थक बातचीत की. यह यात्रा सफल रही. हमने अपनी हालिया बैठकों के परिणामों का आकलन किया और चर्चा की कि बातचीत किस दिशा में और किन परिस्थितियों में आगे बढ़ सकती है.''

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर
पश्चिम एशिया युद्ध के समाधान के लिए अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर का जिक्र करते हुए अराघची ने कहा, ‘‘वार्ता में प्रगति हुई है.''ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इरना' के अनुसार, ‘‘पहले दौर में कुछ प्रगति होने के बावजूद, अमेरिकियों के रवैये, उनकी अत्यधिक मांगों और उनके द्वारा अपनाए गए गलत तरीकों के कारण वार्ता अपने उद्देश्यों तक नहीं पहुंच सकी. इसलिए, नवीनतम स्थिति की समीक्षा करने के लिए पाकिस्तान में हमारे मित्रों से परामर्श करना आवश्यक था.''अराघची सोमवार तड़के सेंट पीटर्सबर्ग के पुलकोवो हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां रूसी अधिकारियों और रूस में ईरान के राजदूत काजिम जलाली ने उनका स्वागत किया. ईरान और अमेरिका के बीच 11 और 12 अप्रैल को हुई शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा था.

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