25/09/2026
भारत संगठनों का देश है। यहाँ हर वर्ग, हर समस्या के लिए संगठन है। फिर भी समस्याएँ ज्यों की त्यों हैं। सवाल यह है कि क्यों? और इसका उत्तर हमें जैन समाज से मिलता है और समाधान हमें सारथी सेवा दल के रूप में मिल रहा है।
भारत में संगठनों के प्रकार और उनकी संरचना
हमारे देश में लगभग हर वर्ग के लिए संगठन बने हुए हैं:
1. महिला संगठन - राष्ट्रीय महिला आयोग, महिला मोर्चा, स्वयं सहायता समूह SHG, महिला किसान संगठन।
2. किसान संगठन - भारतीय किसान यूनियन, किसान सभा, किसान मोर्चा।
3. श्रमिक व चालक संगठन - ट्रक यूनियन, ऑटो यूनियन, टैक्सी यूनियन, बस ऑपरेटर एसोसिएशन, INTUC, AITUC जैसी ट्रेड यूनियनें।
4. बच्चों व युवाओं के संगठन - बाल अधिकार संगठन, NSS, NYKS, युवा मोर्चा।
5. जातिगत व सामाजिक संगठन - यादव महासभा, जाट महासभा, ब्राह्मण समाज, दलित सेना आदि।
6. धार्मिक व सांस्कृतिक संगठन
7. छात्र व शिक्षक संगठन
नाम अनेक हैं, बैनर अनेक हैं, पदाधिकारी अनेक हैं।
2. फिर भी समस्याएं खत्म क्यों नहीं हुईं?
इतने संगठनों के बाद भी किसान आत्महत्या कर रहा है, महिला असुरक्षित है, चालक सड़क पर लावारिस मर रहा है। इसके मुख्य कारण हैं:
क. संगठन में व्यक्ति पूजा, विचार नहीं - संगठन व्यक्ति विशेष और उसके परिवार तक सीमित हो जाता है।
ख. पद लोलुपता - अध्यक्ष, महामंत्री बनना लक्ष्य है, सेवा करना नहीं।
ग. कागजों पर संगठन - मीटिंग, रजिस्टर और चंदे तक सीमित।
घ. जाति, धर्म, क्षेत्र में बंटवारा - हम चालक पहले नहीं, जाति पहले बन जाते हैं।
ङ. सहयोग का अभाव - संकट में साथी चालक मदद के लिए फोन करता है तो दूसरा फोन काट देता है। संगठन का भय नहीं है।
इसीलिए संगठन होते हुए भी समाज असंगठित है।
3. सबसे बड़ी उपमा - बिना रजिस्टर्ड संगठन के जैन समाज का विकास
जैन समाज के पास कोई एक राष्ट्रीय रजिस्टर्ड संगठन नहीं है जो सबको कंट्रोल करता हो, फिर भी वह भारत का सबसे विकसित समाज क्यों है?
क्योंकि उनके पास संगठन नहीं, सिस्टम और संस्कार है -
आर्थिक विकास - एक जैन व्यापारी दूसरे जैन को बिना ब्याज के, बिना कागज के लाखों का उधार दे देता है। उनका पैसा समाज से बाहर नहीं जाता।
बौद्धिक विकास - वे शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च करते हैं। मंदिर के साथ हॉस्टल और स्कूल अनिवार्य है।
सामाजिक विकास - कोई जैन भूखा नहीं सोता, क्योंकि जैन भोजनशाला और धर्मशाला हर शहर में है।
मानसिक व राजनीतिक विकास - वे कभी अपनी जाति का प्रदर्शन नहीं करते, वे शांत रहकर व्यापार और राजनीति में अपनी जगह बनाते हैं। वे दिखावे पर नहीं, संस्कार पर खर्च करते हैं।
यह है असली संगठन - बिना बोर्ड के, बिना पद के।
4. इसी उपमा पर - सारथी सेवा दल : बिना संगठन के एकजुटता
सारथी सेवा दल कोई पद, कोई चंदा, कोई ऑफिस वाला संगठन नहीं है। यह चालकों को एकजुट करने का एक विचार और डिजिटल व्यवस्था है।
आज के युग में हमें रजिस्टर और माला पहनाने वाले संगठन की जरूरत नहीं है। हमें नेटवर्क की जरूरत है।
हमारा मॉडल है :
1. ऑनलाइन न्यूज़ और ऑडियो कॉल कॉन्फ्रेंस मीटिंग - अब हर जिले में हॉल बुक करने की जरूरत नहीं। रोज रात 9 बजे एक ऑडियो कॉन्फ्रेंस लिंक पर 500-1000 चालक जुड़कर अपनी समस्या, समाधान और अनुभव साझा करेंगे।
2. व्हाट्सएप चैनल की शक्ति - एक व्हाट्सएप चैनल में लाखों लोगों को जोड़ा जा सकता है। यही हमारा राष्ट्रीय कार्यालय है। खबर, कानून, RTO नियम, हेल्पलाइन नंबर - सब एक क्लिक पर।
3. पोल से निर्णय - किसी नेता की मनमानी नहीं। किसी भी बड़े निर्णय से पहले पोल कराया जाएगा। 70% चालक जो कहेंगे, वही दल का निर्णय होगा। यह लोकतंत्र है।
4. सर्वांगीण विकास ही लक्ष्य - केवल भाड़ा बढ़ाओ आंदोलन नहीं। हमें बचत कैसे करनी है, बच्चों को कैसे पढ़ाना है, दुर्घटना में बीमा कैसे लेना है, नई गाड़ी की तकनीक क्या है - इन सब पर काम करेंगे।
5. एक दूसरे के लिए खड़े होना - भयमुक्त समाज का निर्माण
सारथी का सबसे बड़ा नियम होगा - मदद
यदि हाईवे पर कोई सारथी भाई संकट में है - गाड़ी खराब, एक्सीडेंट, पुलिस या किसी माफिया द्वारा परेशान किया जाना - तो वह सारथी सेवा दल के ग्रुप में HELP अपील भेजेगा।
जो नजदीक है, उसकी मदद करना उसका धर्म है। क्योंकि आज वह संकट में है, कल आप हो सकते हैं।
यदि कोई सक्षम होते हुए भी जानबूझकर मदद नहीं करता, मदद के नाम पर लूटता है या चालक को डराता है, तो उसकी सूचना दल को दें। हम ऐसे गैर-जिम्मेदार व्यवहार को अपने मंच पर प्रमाण के साथ उजागर करेंगे ताकि समाज ऐसे लोगों से सावधान रहे। मदद करना ही भयमुक्त समाज की नींव है।
और यदि मामला जटिल है, तो हमारे अनुभवी पदाधिकारी नहीं, अनुभवी सारथी - 20-30 साल सड़क पर बिताने वाले बुजुर्ग चालक - तुरंत वीडियो कॉल पर मार्गदर्शन देंगे।
6. साथियों, आधुनिक सोच का विकास करो
राजनीति से भागो मत, राजनीति में रुचि लो।
पर वोट जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र के नाम पर मत दो। वोट विकास के नाम पर दो। उस पार्टी को वोट दो जो सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बीमा और चालकों के सम्मान की बात करे।
हमारा भारत धर्मनिरपेक्ष भारत है। हमारा संविधान किसी भी व्यक्ति को जातिगत और धार्मिक उन्माद फैलाने का अधिकार नहीं देता। यदि कोई नेता, कोई पार्टी, कोई व्यक्ति समाज को तोड़ने का प्रयास करता है, तो उसे भी तथ्यों के साथ एक्सपोज करना हमारा कर्तव्य है।
7. अंतिम संकल्प - हर चालक का संकल्प
सारथी का सर्वांगीण विकास ही सारथी सेवा दल का लक्ष्य है।
इसके लिए हमें सर्वप्रथम हर चालक से जुड़ना है।
आप सभी से निवेदन है - प्रतिदिन 10 चालक जोड़ो। बोलकर, वीडियो भेजकर, लेख भेजकर।
जो व्यक्ति केवल ग्रुप में नंबर बनकर पड़ा है, तमाशा देख रहा है, वह चालक नहीं हो सकता। चालक तो वह है जो स्टेयरिंग के साथ-साथ समाज की दिशा भी संभाले।
यदि आप वीडियो, लेख, ऑडियो के माध्यम से चालकों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, तो आप हमारे सच्चे साथी हैं। यदि आप केवल दर्शक हैं, तो विचार कीजिए।
शास्त्र कहते हैं -
शिक्षित व्यक्ति यदि शिक्षा न बांटे, समाजसेवी सेवा न करे, संगठन सहयोग न करे, गरीब और अबला की मदद न करे और धनी व्यक्ति दान न करे तो उसका विनाश निश्चित है।
आइए, हम विनाश का नहीं, विकास का मार्ग चुनें।
जय सारथी, जय सारथी सेवा दल।
प्रस्तुत कर्ता - सारथी दर्पण
(सत्य का प्रतिबिंब)