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 #10955तो क्या ममता ने अपने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश वाले हालातों का टेलर दिखा दिया है?उपद्रवियों ने कोलकाता के सरकार...
17/08/2024

#10955
तो क्या ममता ने अपने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश वाले हालातों का टेलर दिखा दिया है?

उपद्रवियों ने कोलकाता के सरकारी अस्पताल में घुसकर डॉक्टरों को पीटा और तोडफ़ोड़ की। पुलिस मूकर्दशक।

राहुल-प्रियंका चुप, लेकिन अधीर रंजन ने ममता और पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।

आखिर ममता सरकार को बर्खास्त क्यों नहीं किया जा रहा?

17 अगस्त को देश भर के अस्पतालों में ओपीडी बंद।
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इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्ष के जब अनेक नेता भारत में भी पड़ोसी बांग्लादेश जैसे हालातों की बात कह रहे है, तब 14 अगस्त की रात को कोलकाता के सरकारी आरजीकर अस्पताल में एक हार से ज्यादा उपद्रवी घुसे और जमकर तोडफ़ोड़ की। उन डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को पीटा गया जो एक जूनियर लेडी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इन उपद्रवियों का उद्देश्य डॉक्टरों को ममता बनर्जी की सरकार का विरोध करने से रोकना था। गंभीर बात तो यह रही कि उपद्रवियों ने अस्पताल की महंगी मशीनें तोड़ने के साथ साथ अस्पताल परिसर में स्थापित पुलिस चौकी में रखी पुलिस वर्दी को भी आग लगा दी। उपद्रवी जब पुलिस की वर्दी जला रहे थे, तब भी कोलकाता पुलिस मूक दर्शक बनी हुई थी। जब भीड़ उपद्रव करती है तो हालात कैसे होते हैं, इसका अंदाजा कोलकाता अस्पताल में हुई तोडफ़ोड़ से लगाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल के हालात किसी से भी छिपे नहीं है, इसलिए सवाल उठा है कि कया यह बांग्लादेश के हालातों का टेलर है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब कितनी भी सफाई दे, लेकिन यदि कोलकाता पुलिस को आदेश होते तो उपद्रवी अस्पताल में घुस नहीं सकते थे। कोलकाता की जो पुलिस स्वयं को देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस मानती है, उस पुलिस को एक हजार उपद्रवियों के एकत्रित होने की सूचना तक नहीं मिली। हालांकि पुलिस ने अब 12 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इन उपद्रवियों के पीछे खड़े तत्व अभी भी गिरफ्त से बाहर है। पीटे हुए डॉक्टरों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने स्वयं माना कि उन्हें उपद्रवियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से रोका गया है। डॉक्टरों के आरोपों की पुष्टि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान से भी होती है। चौधरी का आरोप है कि बंगाल पुलिस सिर्फ ममता बनर्जी का आदेश जानती है। अस्पताल में हुए उपद्रव के लिए चौधरी ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।

बर्खास्तगी क्यों नहीं?:
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में देश में जगह जगह सकल हिंदू समाज की ओर से विरोध प्रदर्शन हो रहे है। ऐसे माहौल में कोलकाता के अस्पताल में उपद्रव होने से देश के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने ही नजरिए से शासन चलाती है। ममता ने राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सीबी आनंद बोस को राज्यपाल मानने से ही इंकार कर दिया। इतना ही नहीं ममता अपने बंगाल में केंद्रीय योजना की क्रियान्विति नहीं होने देती। ममता स्वयं को ही बंगाल का प्रधानमंत्री समझती है। यहां तक कि ममता को केंद्रीय सुरक्षा बलों को दखल भी पसंद नहीं है। राज्यपालों ने कई बार अपनी रिपोर्ट मं बंगाल के अराजक माहौल की जानकारी दी है। ममता बनर्जी सार्वजनिक तौर पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के अधिकारों को चुनौती देती है, लेकिन इसके बाद भी केंद्र सरकार ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार को बर्खास्त नहीं करती है। ताजा उपद्रव तो बर्खास्तगी का सबसे मजबूत कारण है। कोलकाता के अस्पताल में 14 अगस्त की रात को जो तोडफ़ोड़ हुई उसके बाद पूरे बंगाल में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था ठप हो गई है। इसका खामियाजा आम लोगों को उठना पड़ रहा है। यह भी चिंता की बात है कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने अभी तक भी उपद्रव के लिए ममता सरकार की आलोचना नहीं की है। जबकि टीएमसी और कांग्रेस दोनों ही इंडिया गठबंधन में शामिल हैं।

ओपीडी बंद:
कोलकाता के सरकारी अस्पताल में पहले एक जूनियर डॉक्टर के रेप और हत्या की घटना के बाद 14 अगस्त की रात को जो तोडफ़ोड़ हुई, उसके विरोध में इंडियान मेडिकल एसोसिएशन (आईएनए) ने 17 अगस्त को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। एसोसिएशन से जुड़े सभी डॉक्टर सरकारी और निजी अस्पतालों में हड़ताल पररहेंगे। हड़ताल की वजह से देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में 17 अगस्त को ओपीडी भी बंद रहेगी। मालूम हो कि देश भर के रेजीडेंट डॉक्टर पहले से ही हड़ताल पर है।
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(16-08-2024)
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 #10959ममता बनर्जी के खतरनाक इरादों को समझने की जरुरत।आखिर मरीजों को हो रही परेशानी का जिम्मेदार कौन। राजस्थान में अरिस्...
17/08/2024

#10959
ममता बनर्जी के खतरनाक इरादों को समझने की जरुरत।

आखिर मरीजों को हो रही परेशानी का जिम्मेदार कौन। राजस्थान में अरिस्दा के आव्हान पर सेवारत चिकित्सक भी हड़ताल पर रहे।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे भी ममता की राह पर।
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कोलकाता के सरकारी आरजी कर अस्पताल में जूनियर लेडी डॉक्टर से रेप, हत्या और फिर अस्पताल में उपद्रवियों की तोडफ़ोड़ के मामलों में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी को आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही करनी है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए ममता ने 16 अगस्त को कोलकाता में पैदल मार्च किया। ममता अब आरोपियों को फांसी देने की मांग कर रही है। असल में पैदल मार्च कर ममता लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है। देशवासियों को ममता बनर्जी के इन इरादों को समझना चाहिए। असल में लेडी डॉक्टर के रेप और हत्या के मामले की जांच हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई को दिए जाने से ममता बनर्जी बेहद खफा है। ममता को हाई कोर्ट का दखल पसंद नहीं है। यही वजह रही कि सीबीआई की जांच शुरू होने के साथ ही कोलकाता के उस अस्पताल में उपद्रव करवाया गया, जहां रेप और हत्या की घटना को अंजाम दिया गया था। पैदल मार्च और फांसी की मांग कर ममता बनर्जी देश की न्याय व्यवस्था को भी चुनौती दे रही है। जिस तरह 14 अगस्त की रात को कोलकाता के अस्पताल में उपद्रव हुआ वैसा उपद्रव कोलकाता में कहीं भी हो सकता है। इसमें हाईकोर्ट का परिसर भी शामिल है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में किस नजरिए से शासन कर रही है। हाईकोर्ट ने भी बंगाल सरकार की कार्य प्रणाली पर प्रतिकूल टिप्पणियां की है। लेकिन प्रतीत होता है कि ममता बनर्जी को लोकतंत्र की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। ममता सरकार की बर्खास्तगी के पर्याप्त आधार होने के बाद भी केंद्र की मोदी सरकार कोई कार्यवाही नहीं कर रही। इसे मोदी सरकार का राजनीतिक मजबूरी ही कहा जाएगा कि वे ममता सरकार के विरुद्ध कार्यवाही करने से डर रही है।

मरीजों को परेशानी का कौन जिम्मेदार:
कोलकाता के अस्पताल में लेडी डॉक्टर के साथ रेप और फिर हत्या की घटना के बाद से ही देश भर के रेजीडेंट डॉक्टर पहले ही हड़ताल पर थे, लेकिन 14 अगस्त की रात को अस्पताल में हुए उपद्रव के बाद 17 अगस्त को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर सरकारी और निजी अस्पताल के डॉक्टर भी हड़ताल पर है। इससे देश भर के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के ऑपरेशन नहीं हुए तो ओपीडी भी पूरी तरह ठप रही। निजी अस्पतालों में भी ओपीडी बंद होने से मरीजों को परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकांश डॉक्टर घरों से बाहर भी नहीं निकले। जिन मरीजों को छुट्टी मिलने वाली थी, उन्हें भी एक दिन अस्पताल में मजबूरन रहना पड़ा। मरीजों की परेशानी के लिए पश्चिम बंगाल की सरकार जिम्मेदार है, लेकिन खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पैदल मार्च कर न्याय की मांग कर रही है। सवाल उठता है कि आखिर ममता बनर्जी अपनी जिम्मेदारी से क्यों बच रही है? क्या ममता का इरादा असली आरोपियों को बचाने का है।

राजस्थान में भी हड़ताल:
अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर सरकारी अस्पताल के डॉक्टर भी हड़ताल पर रहे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि कोलकाता के अस्पताल में हुई घटनाओं के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग को लेकर चिकित्सकों ने एक दिन की हड़ताल की है। लेकिन मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए ओपीडी और अति आवश्यक सेवाओं को जारी रखा है। डॉक्टर चौधरी ने कहा कि हड़ताल में सभी सरकारी चिकित्सक एकजुट रहे। संघ के आगामी विरोध की जानकारी मोबाइल नंबर 9414053000 पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी से ली जा सकती है।
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 #10960आखिर दसवीं के मुस्लिम छात्र के पास चाकू कहां से आया?राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड की याद ताजा हुई।ह...
17/08/2024

#10960
आखिर दसवीं के मुस्लिम छात्र के पास चाकू कहां से आया?

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड की याद ताजा हुई।

हालातों को नियंत्रित करने की भाजपा सरकार के सामने चुनौती।

आरोपी छात्र के पिता के घर पर नोटिस चस्पा। चल सकता है बुलडोजर।
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राजस्थान के उदयपुर में 16 अगस्त को चाकूबाजी की जो घटना हुई उसने 28 जून 2022 को हुई सरतन से जुदा वाली घटना की याद ताजा कर दी। 28 जून 2022 को मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस नामक दो युवकों ने कन्हैयालाल टेलर की गर्दन काट दी। दोनों आरोपी आज भी अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है। 16 अगस्त को भी उदयपुर के भटियानी चौहटन स्थित सरकारी स्कूल के दसवीं के एक मुस्लिम छात्र ने अपने सहपाठी पर तीन बार धारदार चाकू से हमला किया। हमले में जख्मी छात्र की हालत नाजुक बनी हुई है। हालात और न बिगड़े इसके लिए चिकित्सकों का प्रयास है कि छात्र के जीवन को बचा लिया जाए। 16 अगस्त को चाकूबाजी की घटना का पता चलते ही पर्यटन नगरी उदयपुर में तोडफ़ोड़ और आगजनी शुरू हो गई। लोगों में इतना गुस्सा था कि सड़क पर खड़े वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। बिगड़ते हालातों को देखते हुए शहर भर में धारा 144 लागू कर इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया। सभी शिक्षण संस्थानों में अवकाश भी घोषित कर दिया गया। कन्हैयालाल हत्याकांड के समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन अब भाजपा की सरकार है। ऐसे में हालातों को नियंत्रित करने की चुनौती भाजपा सरकार के सामने हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं हालातों पर निगरानी रखे हुए हैं। कन्हैयालाल हत्याकांड की हरत इस बार भी हिंदू समुदाय में गुस्सा है। सवाल उठता है कि दसवीं में पढ़ने वाले आरोपी छात्र के पास चाकू कहां से आया और चाकू को लेकर स्कूल परिसर में कैसे आ गया? स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में वाद विवाद हो जाना आम बात है, लेकिन यदि कोई छात्र अपने सहपाठी पर ही चाकू से हमला कर दे तो यह गंभीर बात हो जाती है। हालांकि अब दोनों समुदायों के बड़े लोग मामले को शांत करने में लगे हुए है। प्रशासन का भी प्रयास है कि जल्द हालातों पर नियंत्रण पा लिया जाए। दोनों पक्षों का प्रयास है कि भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाएं न हो। पुलिस ने नाबालिग आरोपी को फिलहाल हिरासत में ले रखा है। लेकिन उसके पिता को गिरफ्तार करने की पुष्टि कर दी है। पुलिस अब आरोपी छात्र के अन्य साथियों की गतिविधियों का पता लगा रही है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपी छात्र और जख्मी छात्र के बीच सोशल मीडिया पर चैट भी हुई थी। इस चैट में भी आरोपी छात्र ने जान से मारने की धमकी दी थ। पुलिस अब झगड़े के कारण का भी पता लगाने में जुटी है।

चल सकता है बुलडोजर:
चाकूबाजी के आरोपी छात्र के पिता के उदयपुर के दीवान शाह कॉलोनी स्थित मकान पर नोटिस चस्पा किया गया है। इस नोटिस में मकान के मालिकाना हक और नगर निगम से स्वीकृत नक्शे सहित आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं। माना जा रहा है कि यह मकान बिना सरकारी अनुमति के बना हुआ है। यदि आरोपी छात्र के पिता आवश्यक दस्तावेज दिखाने में विफल रहे तो मकान पर बुलडोजर भी चल सकता है। इस बीच उदयपुर के कलेक्टर अरविंद पोसवाल ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। कलेक्टर ने कहा कि घटना के बाद उत्पन्न हालातों पर नियंत्रण पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी व्यक्ति दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
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16/08/2024

#10955
तो क्या ममता ने अपने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश वाले हालातों का टेलर दिखा दिया है?

उपद्रवियों ने कोलकाता के सरकारी अस्पताल में घुसकर डॉक्टरों को पीटा और तोडफ़ोड़ की। पुलिस मूकर्दशक।

राहुल-प्रियंका चुप, लेकिन अधीर रंजन ने ममता और पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।

आखिर ममता सरकार को बर्खास्त क्यों नहीं किया जा रहा?

17 अगस्त को देश भर के अस्पतालों में ओपीडी बंद।
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इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्ष के जब अनेक नेता भारत में भी पड़ोसी बांग्लादेश जैसे हालातों की बात कह रहे है, तब 14 अगस्त की रात को कोलकाता के सरकारी आरजीकर अस्पताल में एक हार से ज्यादा उपद्रवी घुसे और जमकर तोडफ़ोड़ की। उन डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को पीटा गया जो एक जूनियर लेडी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इन उपद्रवियों का उद्देश्य डॉक्टरों को ममता बनर्जी की सरकार का विरोध करने से रोकना था। गंभीर बात तो यह रही कि उपद्रवियों ने अस्पताल की महंगी मशीनें तोड़ने के साथ साथ अस्पताल परिसर में स्थापित पुलिस चौकी में रखी पुलिस वर्दी को भी आग लगा दी। उपद्रवी जब पुलिस की वर्दी जला रहे थे, तब भी कोलकाता पुलिस मूक दर्शक बनी हुई थी। जब भीड़ उपद्रव करती है तो हालात कैसे होते हैं, इसका अंदाजा कोलकाता अस्पताल में हुई तोडफ़ोड़ से लगाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल के हालात किसी से भी छिपे नहीं है, इसलिए सवाल उठा है कि कया यह बांग्लादेश के हालातों का टेलर है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब कितनी भी सफाई दे, लेकिन यदि कोलकाता पुलिस को आदेश होते तो उपद्रवी अस्पताल में घुस नहीं सकते थे। कोलकाता की जो पुलिस स्वयं को देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस मानती है, उस पुलिस को एक हजार उपद्रवियों के एकत्रित होने की सूचना तक नहीं मिली। हालांकि पुलिस ने अब 12 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इन उपद्रवियों के पीछे खड़े तत्व अभी भी गिरफ्त से बाहर है। पीटे हुए डॉक्टरों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने स्वयं माना कि उन्हें उपद्रवियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से रोका गया है। डॉक्टरों के आरोपों की पुष्टि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान से भी होती है। चौधरी का आरोप है कि बंगाल पुलिस सिर्फ ममता बनर्जी का आदेश जानती है। अस्पताल में हुए उपद्रव के लिए चौधरी ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।

बर्खास्तगी क्यों नहीं?:
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में देश में जगह जगह सकल हिंदू समाज की ओर से विरोध प्रदर्शन हो रहे है। ऐसे माहौल में कोलकाता के अस्पताल में उपद्रव होने से देश के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने ही नजरिए से शासन चलाती है। ममता ने राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सीबी आनंद बोस को राज्यपाल मानने से ही इंकार कर दिया। इतना ही नहीं ममता अपने बंगाल में केंद्रीय योजना की क्रियान्विति नहीं होने देती। ममता स्वयं को ही बंगाल का प्रधानमंत्री समझती है। यहां तक कि ममता को केंद्रीय सुरक्षा बलों को दखल भी पसंद नहीं है। राज्यपालों ने कई बार अपनी रिपोर्ट मं बंगाल के अराजक माहौल की जानकारी दी है। ममता बनर्जी सार्वजनिक तौर पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के अधिकारों को चुनौती देती है, लेकिन इसके बाद भी केंद्र सरकार ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार को बर्खास्त नहीं करती है। ताजा उपद्रव तो बर्खास्तगी का सबसे मजबूत कारण है। कोलकाता के अस्पताल में 14 अगस्त की रात को जो तोडफ़ोड़ हुई उसके बाद पूरे बंगाल में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था ठप हो गई है। इसका खामियाजा आम लोगों को उठना पड़ रहा है। यह भी चिंता की बात है कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने अभी तक भी उपद्रव के लिए ममता सरकार की आलोचना नहीं की है। जबकि टीएमसी और कांग्रेस दोनों ही इंडिया गठबंधन में शामिल हैं।

ओपीडी बंद:
कोलकाता के सरकारी अस्पताल में पहले एक जूनियर डॉक्टर के रेप और हत्या की घटना के बाद 14 अगस्त की रात को जो तोडफ़ोड़ हुई, उसके विरोध में इंडियान मेडिकल एसोसिएशन (आईएनए) ने 17 अगस्त को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। एसोसिएशन से जुड़े सभी डॉक्टर सरकारी और निजी अस्पतालों में हड़ताल पररहेंगे। हड़ताल की वजह से देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में 17 अगस्त को ओपीडी भी बंद रहेगी। मालूम हो कि देश भर के रेजीडेंट डॉक्टर पहले से ही हड़ताल पर है।
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 #10956राहुल जी! संविधान खतरे में होता तो जम्मू कश्मीर में विधानसभा के चुनाव नहीं होता।2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के ...
16/08/2024

#10956
राहुल जी! संविधान खतरे में होता तो जम्मू कश्मीर में विधानसभा के चुनाव नहीं होता।

2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद पहली बार चुनाव।
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किसी भी देश में लोकतंत्र होने का सबसे बड़ा सबूत चुनाव होना है। यदि चुनाव नहीं होते हैं तो माना जा सकता है कि देश का संविधान खतरे में है। भारत में हाल ही में लोकसभा के चुनाव हुए हैं, लेकिन फिर भी प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के शीर्ष नेता और मौजूदा समय में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को देश में संविधान खतरे में लगता है। राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि यदि भारत में संविधान खतरे में होता तो जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा नहीं होती। 16 अगस्त को चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर रहा है। जम्मू कश्मीर में अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाया गया था। तभी से राष्ट्रपति शासन है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने के आदेश दिए थे। अब जब जम्मू कश्मीर जैसे प्रांत में चुनाव हो रहे है तो भारत में लोकतंत्र की मजबूत स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सब जानते हैं कि अनुच्छेद 370 के रहते जम्मू कश्मीर के हालात कैसे थे। उपद्रवी आए दिन सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकते थे। राजधानी श्रीनगर के लाल चौक में वर्ष भर कर्फ्यू लगा रहता था। लेकिन आज उसी लाल चौक में तिरंगा शान से लहर रहा है। यह बात अलग है कि पाकिस्तान की शह पर अभी भी जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाएं हो रही है, लेकिन इन घटनाओं का हमारे सुरक्षा बल मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं। हालात सामान्य होने के कारण ही चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर में भी चुनाव करवा रहा है। राहुल गांधी को कम से कम अब तो यह स्वीकारना चाहिए कि भारत में संविधान को कोई खतरा नहीं है। स्वाभाविक है कि जब चुनाव होने जा रहे है, तब कांग्रेस की जम्मू कश्मीर में अपने उम्मीदवार खड़े करेगी।
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 #10954विपक्ष जब बांग्लादेश जैसे हालातों की बात कर रहा है, तब पीएम मोदी ने दृढ़ता के साथ सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष) सिविल को...
15/08/2024

#10954
विपक्ष जब बांग्लादेश जैसे हालातों की बात कर रहा है, तब पीएम मोदी ने दृढ़ता के साथ सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष) सिविल कोड लागू करने की बात कही।

जातिवाद और परिवारवाद को खत्म करने के लिए गैर राजनीतिक परिवारों के एक लाख युवाओं को आगे लाया जाएगा।

मेडिकल पढ़ाई के लिए 75 हजार सीटें बढ़ेंगी।

भारत के विकसित होने से विश्व को चिंतित होने की जरुरत नहीं।
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देश की 78वीं वर्षगांठ पर 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी ऐसे प्रधानमंत्री है, जिन्होंने लगातार 11वीं बार लाल किले से संबोधन किया है। मोदी लगातार तीसरी बार पीएम बने हैं, तीसरे कार्यकाल का 15 अगस्त को पहला संबोधन रहा। पिछले 10 संबोधन के मुकाबले मोदी का यह 98 मिनट का रिकॉर्ड संबोधन रहा। देश का विपक्ष खासकर कांग्रेस के नेता जब पड़ोसी बांग्लादेश जैसे हालात होने की बात कर रहे हैं, तब पीएम मोदी ने दृढ़ता के साथ भारत की मजबूत और उजली तस्वीर प्रस्तुत की। देश विरोधी तत्वों की परवाह किए बगैर मोदी ने कहा कि देश में धर्म के आधार पर किसी के लिए कानून नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने भी सिविल कोड यानी सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की बात कही है। संविधान निर्माताओं का सपना भी समान कानून का ही था। अब समय आ गया है कि जब देश में सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष) सिविल कोड लागू किया जाए। मोदी ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर कहा कि परिवारवाद से लोकतंत्र को खतरा हो रहा है, इसलिए देश में गैर राजनीतिक परिवारों के एक लाख युवाओं को आगे लाया जाएगा जो वार्ड पंच पार्षद से लेकर सांसद तक बनेंगे। युवाओं को जातिवाद और परिवारवाद को खत्म करने के लिए आगे आना चाहिए। मोदी ने माना कि पड़ोसी बांग्लादेश में हो रही हिंसा और हिंदुओं पर अत्याचार चिंता का विषय है, लेकिन भारत ने पहले भी बांग्लादेश की मदद की है और आने वाले दिनों में भी मदद की जाएगी। मोदी ने कहा कि भारत के मजबूत होने से दुनिया को चिंता करने की जरुरत नहीं है, क्योंकि भारत के विकास का फायदा दुनिया को मिलता है। मोदी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत ने जो विकास किया है उसी का परिणाम है कि अब हम आर्थिक क्षेत्र में विश्व की तीसरी महाशक्ति बनने की जोर बढ़ रहे है। मोदी ने कहा कि जब वह तीसरी बार पीएम बने है, तब से दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां भारत में निवेश के लिए उत्सुक हे। मोदी ने माना कि विदेशी निवेश में अकेले केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। इसके लिए राज्यों को भी सहयोग करना पड़ता है। जिन राज्यों में कानून व्यवस्था बिगड़ी है, वहां तत्काल सुधार होना चाहिए। राज्य अपने यहां अनुकूल और सकारात्मक वातावरण बनाएंगे तो विदेशी निवेश हो सकता है। मोदी ने कहा कि पहले हम मोबाइल फोन आयात करते थे, लेकिन आज हम निर्यात कर रहे है। हमने 2 जी से लेकर 5जी तक का सफर तय कर लिया है। और अब हम इंटरनेट की स्पीड 6जी करने वाले हैं। इतना ही नहीं भारत अब अंतरिक्ष में अपना स्पेस सेंटर बनाने जा रहा है। भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में अब तक जो उपलब्धियां हासिल की है उसी का परिणाम है कि प्राइवेट सैटेलाइट हमारी जमीन से छोड़े जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि आज दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियों में भारत के युवा सीईओ के पद पर कार्यरत है। इससे भारत के युवाओं की दक्षता का अंदाजा लगाया जा सकता है उन्होंने माना कि भारत में अभी भी चुनौतियां है, लेकिन मेरी सरकार की ईमानदार नीति और नीयत की वजह से इन चुनौतियों को पार कर लिया जाएगा। मोदी ने इस बात पर अफसोस जताया कि कुछ लोग भ्रष्टाचार का महिमामंडन कर रहे है, लेकिन मैं भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति पर अमल कर रहा हंू। मोदी ने स्किल डवलपमेंट पर जोर देते हुए कहा कि भारत की नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के अनुरूप है। हम इंटर्नशिप पर जो दे रहे है ताकि पढ़ाई खत्म होते ही युवाओं को रोजगार मिल जाए। मोदी ने माना कि अभी भारत के 25 हजार युवा प्रतिवर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेशों में जाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए हमने तय किया है कि अगले पांच वर्षों में देश में ही मेडिकल की 75 हजार सीटें बढ़ाई जाएगी। ताकि युवाओं को मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश न जाना पड़े। मोदी ने देश के किसानों की मौजूदा स्थिति को सुधारने की भी बात कही। खेती के लिए जहरीले रासायनिक के उपयोग से जमीन और मिट्टी की उत्पादन क्षमता घट रही है। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाए। मोदी ने कहा कि भारत ऑर्गेनिक फूड्स का हब बन सकता है। लाल किले से मोदी ने कहा कि कुछ लोग देश में निराशावादी भाव रखते हैं। जबकि उनका सपना है कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का है। उन्होंने पूर्व में कहा था कि तीसरे कार्यकाल में वे तीन गुणा ज्यादा ताकत से काम करेंगे। वे अपने इस कथन पर अमल भी कर रहे है। मोदी ने कहा कि आज भारत सुरक्षित हाथों में है और दुनिया में भारत की धाक है। ऐसे में किसी भी भारतीय को चिंता करने की जरुरत नहीं है। देश की आजादी के समय जनसंख्या चालीस करोड़ थी, जब चालीस करोड़ लोगों ने विदेशी ताकतों को भगाकर आजादी हासिल कर ली, तो आज 140 करोड़ लोग भारत को विकसित राष्ट्र क्यों नहीं बना सकते? पूरा देश एकजुट है और सभी लोग विकास चाहते हैं। देश में मैन्यू फैक्चरिंग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
Anil Rewar Govets
(15-08-2024)
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15/08/2024

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