17/08/2024
#10955
तो क्या ममता ने अपने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश वाले हालातों का टेलर दिखा दिया है?
उपद्रवियों ने कोलकाता के सरकारी अस्पताल में घुसकर डॉक्टरों को पीटा और तोडफ़ोड़ की। पुलिस मूकर्दशक।
राहुल-प्रियंका चुप, लेकिन अधीर रंजन ने ममता और पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।
आखिर ममता सरकार को बर्खास्त क्यों नहीं किया जा रहा?
17 अगस्त को देश भर के अस्पतालों में ओपीडी बंद।
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इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्ष के जब अनेक नेता भारत में भी पड़ोसी बांग्लादेश जैसे हालातों की बात कह रहे है, तब 14 अगस्त की रात को कोलकाता के सरकारी आरजीकर अस्पताल में एक हार से ज्यादा उपद्रवी घुसे और जमकर तोडफ़ोड़ की। उन डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को पीटा गया जो एक जूनियर लेडी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इन उपद्रवियों का उद्देश्य डॉक्टरों को ममता बनर्जी की सरकार का विरोध करने से रोकना था। गंभीर बात तो यह रही कि उपद्रवियों ने अस्पताल की महंगी मशीनें तोड़ने के साथ साथ अस्पताल परिसर में स्थापित पुलिस चौकी में रखी पुलिस वर्दी को भी आग लगा दी। उपद्रवी जब पुलिस की वर्दी जला रहे थे, तब भी कोलकाता पुलिस मूक दर्शक बनी हुई थी। जब भीड़ उपद्रव करती है तो हालात कैसे होते हैं, इसका अंदाजा कोलकाता अस्पताल में हुई तोडफ़ोड़ से लगाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल के हालात किसी से भी छिपे नहीं है, इसलिए सवाल उठा है कि कया यह बांग्लादेश के हालातों का टेलर है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब कितनी भी सफाई दे, लेकिन यदि कोलकाता पुलिस को आदेश होते तो उपद्रवी अस्पताल में घुस नहीं सकते थे। कोलकाता की जो पुलिस स्वयं को देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस मानती है, उस पुलिस को एक हजार उपद्रवियों के एकत्रित होने की सूचना तक नहीं मिली। हालांकि पुलिस ने अब 12 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इन उपद्रवियों के पीछे खड़े तत्व अभी भी गिरफ्त से बाहर है। पीटे हुए डॉक्टरों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने स्वयं माना कि उन्हें उपद्रवियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से रोका गया है। डॉक्टरों के आरोपों की पुष्टि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान से भी होती है। चौधरी का आरोप है कि बंगाल पुलिस सिर्फ ममता बनर्जी का आदेश जानती है। अस्पताल में हुए उपद्रव के लिए चौधरी ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।
बर्खास्तगी क्यों नहीं?:
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में देश में जगह जगह सकल हिंदू समाज की ओर से विरोध प्रदर्शन हो रहे है। ऐसे माहौल में कोलकाता के अस्पताल में उपद्रव होने से देश के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने ही नजरिए से शासन चलाती है। ममता ने राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सीबी आनंद बोस को राज्यपाल मानने से ही इंकार कर दिया। इतना ही नहीं ममता अपने बंगाल में केंद्रीय योजना की क्रियान्विति नहीं होने देती। ममता स्वयं को ही बंगाल का प्रधानमंत्री समझती है। यहां तक कि ममता को केंद्रीय सुरक्षा बलों को दखल भी पसंद नहीं है। राज्यपालों ने कई बार अपनी रिपोर्ट मं बंगाल के अराजक माहौल की जानकारी दी है। ममता बनर्जी सार्वजनिक तौर पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के अधिकारों को चुनौती देती है, लेकिन इसके बाद भी केंद्र सरकार ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार को बर्खास्त नहीं करती है। ताजा उपद्रव तो बर्खास्तगी का सबसे मजबूत कारण है। कोलकाता के अस्पताल में 14 अगस्त की रात को जो तोडफ़ोड़ हुई उसके बाद पूरे बंगाल में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था ठप हो गई है। इसका खामियाजा आम लोगों को उठना पड़ रहा है। यह भी चिंता की बात है कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने अभी तक भी उपद्रव के लिए ममता सरकार की आलोचना नहीं की है। जबकि टीएमसी और कांग्रेस दोनों ही इंडिया गठबंधन में शामिल हैं।
ओपीडी बंद:
कोलकाता के सरकारी अस्पताल में पहले एक जूनियर डॉक्टर के रेप और हत्या की घटना के बाद 14 अगस्त की रात को जो तोडफ़ोड़ हुई, उसके विरोध में इंडियान मेडिकल एसोसिएशन (आईएनए) ने 17 अगस्त को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। एसोसिएशन से जुड़े सभी डॉक्टर सरकारी और निजी अस्पतालों में हड़ताल पररहेंगे। हड़ताल की वजह से देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में 17 अगस्त को ओपीडी भी बंद रहेगी। मालूम हो कि देश भर के रेजीडेंट डॉक्टर पहले से ही हड़ताल पर है।
Anil Rewar Govets
(16-08-2024)
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