27/03/2020
भारतीय संविधान का सबसे बड़ा झूठ ये है कि सब इंसान बराबर हैं..विदेशों में फंसे भारतीयों को स्पेशल प्लेन से वापस लाया गया..भारतीय शहरों में फंसे लोगों को 100-200-400 किलोमीटर दूर उनके घरों तक नहीं पहुंचाया जा रहा.पपैदल ही घर को निकल गए ह उसके बाद भी जब बीच रास्ते मे कहि साहब लो Mइल जा रहे तो दे दनादन।नही ऐसा नही होना चाहिए ।.अगर प्लेन sanetise हो सकता है तो बसों को sanetise कर गरीबों को उनके घर क्यों नहीं पहुंचाया जा सकता..स्क्रीनिंग/जांच करो और सीधे घर पहुंचा दो..ये बिचारे तो सहयोग भी करेंगे जबकि विदेशों से आए लोग तो एयरपोर्ट पर हंगामा कर रहे थे
दूसरी बात- अगर कोरोना के संक्रमण के खौफ की वजह से इन्हें गांव भेजना रिस्की है तो ये जो लुटियंस दिल्ली में उत्तराखंड भवन, यूपी भवन, बिहार भवन बना रखें हैं इनमें क्यों नहीं रखा जा रहा इन्हें ? ओके..गरीब हैं, गंदा कर देंगे तो छुट्टी की वजह से सारे सरकारी स्कूल बंद हैं इन्हें कम्युनिटी सेंटर में तब्दील कर बेघर-बेरोजगार मजदूरों को यहां क्यों नहीं टिकाया जा रहा..यहीं कम्युनिटी किचन बनाओ..खाना खिलाओ..सरकार इनके गांव जाने का इंतज़ाम नहीं कर रही तो ये पैदल ही जा रहे हैं..कोरोना के संक्रमण का खतरा तो ऐसे भी रहेगा ही..ऐसे में अगर सरकार दखल देती है तो फिर या तो ये जांच के बाद घर पहुंचेंगे या यहीं सरकार की निगरानी में रहेंगे..इनका भी भला होगा..संक्रमण का खतरा भी टलेगा...
वैसे आज सरकार ने गरीबों की मदद के लिए कई कदमों के एलान किया है..लेकिन शहरों में फंसे लोगों की फौरी राहत भी हो जाती तो बेहतर..भगवान भला करे..
नोट- सरकार से सवाल करते रहिए..अगर आप सरकार से सवाल नहीं करते तो जिस्मानी तौर पर ज़िंदा होने के बावजूद वैचारिक तौर पर मुर्दा हैं..सरकार पर दवाब बनाए रखिए.. सब दवाब बनाएंगे तो,राहत पैकेज के लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंच पाएंगे.....