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नेपाल में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, अपर त्रिशूली-1 सुरंग से 13 शव बरामदनेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता ...
19/09/2026

नेपाल में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, अपर त्रिशूली-1 सुरंग से 13 शव बरामद

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश के दौरान अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 13 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल के रसुवा क्षेत्र में स्थित इस जलविद्युत परियोजना के Audit-3 टनल के भीतर नेपाल सेना और परियोजना से जुड़े कर्मचारियों की संयुक्त टीम लगातार खोज एवं बचाव अभियान चला रही है। शुक्रवार को शुरुआती चरण में सुरंग के अंदर स्टील की मजबूत रॉड से बने रिइनफोर्समेंट मेष में फंसे छह शव बाहर निकाले गए थे। इसके बाद सुरंग के अंदर तलाश जारी रखने पर सात और शव बरामद किए गए, जिससे इस सुरंग से बाहर निकाले गए शवों की कुल संख्या 13 हो गई। बचाव दल को सुरंग के अंदर भारी मिट्टी, मलबे और निर्माण सामग्री के बीच बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। शवों को बाहर निकालने के लिए ग्राइंडर, गैस कटर और विशेष रोटरी रेस्क्यू उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों के अनुसार सुरंग के भीतर अभी भी तलाशी अभियान समाप्त नहीं हुआ है और कुछ अन्य शवों के मिट्टी और मलबे में दबे होने की आशंका के चलते जवान लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इस परियोजना में बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में लोग लापता हुए थे और इसी वजह से Upper Trishuli-1 का टनल रेस्क्यू ऑपरेशन बाढ़ के बाद चल रहे सबसे महत्वपूर्ण खोज अभियानों में शामिल है। स्थानीय अधिकारियों और सेना की टीमें सुरंग के अलग-अलग हिस्सों में सावधानीपूर्वक तलाशी ले रही हैं, जबकि बरामद शवों की पहचान और आधिकारिक सत्यापन की प्रक्रिया भी की जा रही है। नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी, जिससे कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुईं और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए। राहत और बचाव एजेंसियां Upper Trishuli-1 के साथ-साथ क्षेत्र की अन्य प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं में भी खोज अभियान चला रही हैं। सेना का कहना है कि जब तक सुरंग के संभावित प्रभावित हिस्सों की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक खोज और बचाव अभियान जारी रहेगा।

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भारत और मालदीव के बीच वित्तीय सहयोग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। मालदीव सरकार ने 17 सितंबर 2026 को 150 मिलियन अमेरिक...
19/09/2026

भारत और मालदीव के बीच वित्तीय सहयोग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। मालदीव सरकार ने 17 सितंबर 2026 को 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर की पूरी Treasury Bill सुविधा का भुगतान कर दिया, जिसमें अंतिम 50 मिलियन डॉलर की राशि शामिल थी। यह सुविधा 2019 में मालदीव सरकार द्वारा जारी Treasury Bills की सदस्यता के जरिए State Bank of India (SBI) ने उपलब्ध कराई थी और बाद में इसे छह बार, प्रत्येक बार एक वर्ष के लिए, आगे बढ़ाया गया। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, मालदीव ने इस सुविधा की मूल राशि यानी 150 मिलियन डॉलर का principal चुकाया, लेकिन पिछले करीब पांच वर्षों के दौरान इन Treasury Bills पर बनने वाले ब्याज का भुगतान भारत सरकार ने किया, जिसकी कुल राशि लगभग 45 मिलियन डॉलर रही। MEA ने इसे भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति और मालदीव के साथ लंबे समय से चले आ रहे विकास एवं वित्तीय सहयोग का हिस्सा बताया है। मालदीव के वित्त मंत्रालय के अनुसार, 150 मिलियन डॉलर का भुगतान तीन चरणों में पूरा हुआ—पहली 50 मिलियन डॉलर की राशि जनवरी 2024 में, दूसरी 50 मिलियन डॉलर 11 मई 2026 को और अंतिम 50 मिलियन डॉलर 17 सितंबर 2026 को चुकाई गई। इस भुगतान के बाद इस विशेष Treasury Bill सुविधा के तहत मालदीव की पूरी देनदारी समाप्त हो गई है। हालांकि, यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब मालदीव अपने विदेशी मुद्रा भंडार और आगामी बाहरी ऋण दायित्वों को लेकर वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान दे रहा है। मालदीव के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आवश्यक वस्तुओं, ईंधन, खाद्य सामग्री और दवाओं के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बनाए रखने की व्यवस्था की गई है तथा सरकार Sovereign Development Fund में नियमित योगदान और पहले से वित्तीय योजना बनाकर भविष्य की देनदारियों को पूरा करने पर काम कर रही है। भारत की ओर से मालदीव को केवल Treasury Bill सुविधा ही नहीं, बल्कि लगभग ₹3,000 करोड़ की currency swap facility भी दी गई है, जबकि SBI ने करीब 350 मिलियन डॉलर के मालदीवी Treasury Bonds में भी निवेश किया है, जिनकी परिपक्वता 2029 और 2030 में है। MEA के मुताबिक दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के साथ-साथ विकास परियोजनाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़ा सहयोग भी जारी है। इस पूरे घटनाक्रम को भारत-मालदीव के बीच वित्तीय सहयोग के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें मालदीव ने मूलधन की पूरी राशि वापस कर दी, जबकि भारत ने वित्तीय दबाव के दौरान ब्याज लागत का बड़ा हिस्सा वहन करके पड़ोसी देश को राहत दी।
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सऊदी अरब ने हूती चुनौती से निपटने के लिए चीन का रुख किया, ईरान से हस्तक्षेप की अपील के बाद बढ़ी कूटनीतिक हलचल — यमन में ...
18/09/2026

सऊदी अरब ने हूती चुनौती से निपटने के लिए चीन का रुख किया, ईरान से हस्तक्षेप की अपील के बाद बढ़ी कूटनीतिक हलचल — यमन में ईरान समर्थित हूती संगठन की हालिया सैन्य बढ़त ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा तथा वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। Reuters की 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों की लाल सागर के तटवर्ती इलाकों में तेजी से आगे बढ़ने और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब के आसपास अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद सऊदी अरब ने चीन से मदद मांगी। मामले से परिचित तीन ईरानी सूत्रों के अनुसार, इसके बाद चीन ने निजी तौर पर तेहरान से कहा कि वह हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उनके सैन्य अभियान को सीमित करने और संघर्ष को यमन से आगे क्षेत्रीय ऊर्जा एवं समुद्री मार्गों तक फैलने से रोकने में मदद करे। चीन ने सार्वजनिक रूप से अब तक संयम, बातचीत और सुरक्षित नौवहन बहाल करने की अपील की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सऊदी अपील के बाद बीजिंग का निजी संदेश इससे अधिक स्पष्ट था और उसका मुख्य उद्देश्य उन समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखना है जिन पर चीन की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार काफी हद तक निर्भर करता है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है और यहां किसी भी बड़े व्यवधान का असर तेल, कंटेनर तथा अन्य वैश्विक माल ढुलाई पर पड़ सकता है। इसी वजह से हूतियों की हालिया बढ़त को लेकर सऊदी अरब की चिंता बढ़ी है, खासकर तब जब क्षेत्र में पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी गंभीर ऊर्जा और नौवहन समस्याएं बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि चीन का संदेश ईरान तक किस माध्यम से पहुंचाया गया और क्या यह संदेश ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की चीन यात्रा के दौरान दिया गया था। ईरानी सूत्रों ने बताया कि तेहरान की ओर से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष तथा अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी गई। चीन ने इस मामले में किसी स्पष्ट आर्थिक या अन्य दबाव की धमकी नहीं दी है। बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने Reuters को बताया कि वह क्षेत्रीय तनाव को यमन और लाल सागर तक फैलते हुए नहीं देखना चाहता तथा बढ़ती अस्थिरता किसी भी पक्ष के हित में नहीं है; चीन ने सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करने, नागरिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना न बनाने तथा विवादों को बातचीत और वार्ता के जरिए सुलझाने की अपील की है। इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार और उसके तेल का बड़ा खरीदार है। Reuters के अनुसार, Kpler के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में ईरान के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चीन ने खरीदा था, जिससे बीजिंग के पास तेहरान पर कुछ आर्थिक प्रभाव मौजूद है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार चीन के लिए स्थिति आसान नहीं है, क्योंकि उसे एक तरफ ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखना है और दूसरी तरफ सऊदी अरब तथा अन्य खाड़ी देशों के साथ व्यापार एवं ऊर्जा संबंधों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। 2023 में चीन ने ईरान और सऊदी अरब के बीच राजनयिक संबंध बहाल कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, लेकिन हूतियों पर ईरान के प्रभाव का इस्तेमाल करवाना उसके लिए अलग तरह की चुनौती हो सकती है। इस बीच यमन में बढ़ते संघर्ष का मानवीय असर भी गंभीर बताया जा रहा है। AP की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया लड़ाई के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं और पहले से गंभीर मानवीय संकट झेल रहे यमन में खाद्य, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की जरूरत और बढ़ गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या चीन की कूटनीतिक पहल के बाद ईरान हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करता है और क्या इससे लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में तनाव कम करने में मदद मिलती है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर चीन की ओर से ईरान को किसी स्पष्ट अल्टीमेटम या आर्थिक दबाव की बात सामने नहीं आई है और सऊदी अरब, ईरान तथा हूतियों की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सभी पहलुओं की स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि अभी सीमित है।

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17 सितंबर 2026 को निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की आगामी विधानसभा उपचुनाव प्रक्रिया के बीच तृणमूल कांग्रेस के नाम और आरक...
18/09/2026

17 सितंबर 2026 को निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की आगामी विधानसभा उपचुनाव प्रक्रिया के बीच तृणमूल कांग्रेस के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया। आयोग ने कहा कि पार्टी के नाम ‘All India Trinamool Congress’ और ‘Flowers & Grass’ यानी जোड़ा घास-फूल चिन्ह का इस्तेमाल फिलहाल दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट नहीं कर सकेंगे। यह फैसला उस समय आया है जब नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है और दोनों गुटों ने इन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारते हुए तृणमूल कांग्रेस की पहचान पर दावा किया है। आयोग ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से मिले दस्तावेजों और दावों पर विचार करते हुए कहा कि पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद का अंतिम फैसला अभी बाकी है। इसी वजह से फिलहाल दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की गई है। आयोग ने दोनों गुटों से 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन-तीन वैकल्पिक पार्टी नाम और तीन-तीन उपलब्ध चुनाव चिन्हों के विकल्प देने को कहा है, जिनमें से आयोग उपचुनाव के लिए प्रत्येक गुट को एक नाम और अलग चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा। यह विवाद उस समय और महत्वपूर्ण हो गया जब दोनों पक्षों ने नंदीग्राम और रेजीनगर में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचित‍ा प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया, जबकि रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीज्जमान शेख को मैदान में उतारा था। आयोग का कहना है कि चूंकि दोनों पक्ष खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के नाम और चिन्ह पर दावा कर रहे हैं, इसलिए चुनाव चिन्ह संबंधी नियमों के तहत इस विवाद पर विस्तृत निर्णय की जरूरत है। फिलहाल उपचुनाव की समयसीमा को देखते हुए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है, ताकि दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिन्ह के साथ चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिल सके। इस आदेश का अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे आयोग पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और वैध पहचान को लेकर क्या निर्णय करता है। इसलिए मौजूदा आदेश को अंतिम रूप से किसी एक गुट को पार्टी का नाम या चुनाव चिन्ह सौंपने वाला फैसला नहीं माना गया है; फिलहाल दोनों पक्षों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग चुनावी पहचान के साथ आगे बढ़ना होगा।

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दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए भारत और अफगानिस्तान के बीच तीसरे और आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारती...
18/09/2026

दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए भारत और अफगानिस्तान के बीच तीसरे और आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय टीम ने धमाकेदार अंदाज में 127 रन से जीत दर्ज करते हुए तीन मैचों की सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी भारतीय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की तूफानी बल्लेबाजी रही, जिन्होंने महज 34 गेंदों पर 108 रन की अविश्वसनीय पारी खेलकर टी20 क्रिकेट में इतिहास रच दिया। अभिषेक ने अपना शतक केवल 30 गेंदों में पूरा किया, जो किसी भारतीय बल्लेबाज का टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज शतक है और किसी टेस्ट खेलने वाले देश के बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सबसे तेज T20I शतक भी है। इससे पहले भारतीय रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम था, जिन्होंने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ 35 गेंदों में शतक लगाया था। अभिषेक की पारी में 9 चौके और 11 छक्के शामिल रहे और उन्होंने शुरुआत से ही अफगानिस्तान के गेंदबाजों पर ऐसा दबाव बनाया कि भारत ने पावरप्ले के छह ओवरों में ही 100 रन का आंकड़ा पार कर लिया। अभिषेक ने अपना अर्धशतक भी बेहद तेज अंदाज में पूरा किया और इसके बाद अगले कुछ ओवरों में लगातार बड़े शॉट लगाते हुए शतक तक पहुंच गए। उनका साथ विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने दिया, जिन्होंने 35 गेंदों पर 50 रन की उपयोगी पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों के बीच पहले विकेट के लिए 142 रन की शानदार साझेदारी हुई, जो केवल 9.5 ओवर में पूरी हुई। अभिषेक 108 रन बनाकर राशिद खान की गेंद पर आउट हुए, लेकिन तब तक भारतीय टीम को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके थे। इसके बाद भारत की पारी के अंतिम हिस्से में कुछ विकेट जल्दी गिरने के बावजूद टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 221 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। जवाब में अफगानिस्तान की शुरुआत भारत की तरह तेज नहीं रही और भारतीय गेंदबाजों ने लगातार अंतराल पर विकेट निकालकर लक्ष्य का पीछा मुश्किल बना दिया। अफगानिस्तान की ओर से इब्राहिम जादरान 25 रन के साथ सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे, जबकि बाकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजी के सामने बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। भारत की ओर से नितीश कुमार रेड्डी और रवि बिश्नोई ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन-तीन विकेट हासिल किए, जबकि अक्षर पटेल ने भी दो विकेट लेकर अफगानिस्तान की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई। पूरी अफगानिस्तानी टीम 14.1 ओवर में 94 रन पर ऑलआउट हो गई और भारत ने मुकाबला 127 रन से जीत लिया। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की पूरी सीरीज में अफगानिस्तान को 3-0 से हराया। अभिषेक शर्मा की 108 रन की पारी इस मैच का मुख्य आकर्षण रही, जबकि संजू सैमसन की लगातार अच्छी बल्लेबाजी और भारतीय गेंदबाजों के अनुशासित प्रदर्शन ने जीत को एकतरफा बना दिया। मुकाबले के बाद अभिषेक का रिकॉर्ड शतक भारतीय क्रिकेट में एक और यादगार टी20 अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।

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चीन-अमेरिका के बीच रूसी तेल को लेकर नया तनाव सामने आया है। अमेरिकी संसद ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले एक व्यापक प्रत...
18/09/2026

चीन-अमेरिका के बीच रूसी तेल को लेकर नया तनाव सामने आया है। अमेरिकी संसद ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले एक व्यापक प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी है, जिसमें रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भारी अमेरिकी टैरिफ लगाने का रास्ता खुलता है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के बड़े ऊर्जा खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति मिल सकती है, जिससे चीन और भारत जैसे देशों पर भी असर पड़ने की संभावना है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को इस विधेयक को 262-159 वोट से पारित किया, जबकि सीनेट इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी थी और अब इसे राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। चीन ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि देशों के बीच सामान्य आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में किसी तीसरे पक्ष की जबरदस्ती या हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि बीजिंग समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर दूसरे देशों के साथ व्यापार करता है और चीन ऐसी “लॉन्ग-आर्म जूरिस्डिक्शन” को स्वीकार नहीं करता, जिसका आधार अंतरराष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति में न हो। चीन और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार पिछले वर्षों में काफी महत्वपूर्ण हो चुका है और चीन रूसी तेल एवं गैस के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल है। इसी वजह से अमेरिकी कानून का संभावित प्रभाव केवल रूस तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि रूस के साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों तक भी पहुंच सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, नए अमेरिकी कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को के आर्थिक संसाधनों को सीमित करना है। चीन का विरोध ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रस्तावित शिखर बैठक को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। इस घटनाक्रम ने आगामी अमेरिका-चीन वार्ता के सामने व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रूस के साथ चीन के संबंध और अमेरिकी प्रतिबंध नीति जैसे कई संवेदनशील मुद्दे ला दिए हैं। हालांकि चीन ने अपने बयान में सीधे आगामी शिखर बैठक को लेकर कोई अलग रुख घोषित नहीं किया है, लेकिन रूसी ऊर्जा खरीद पर अमेरिकी दबाव और बीजिंग की प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद व्यापारिक और रणनीतिक मतभेदों के बीच एक नया मुद्दा जरूर जोड़ते हैं। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि राष्ट्रपति ट्रंप इस कानून के तहत टैरिफ लगाने की शक्तियों का इस्तेमाल किस तरह करते हैं और चीन तथा अन्य प्रभावित देश इस संभावित आर्थिक दबाव का जवाब किस रूप में देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की भी नजर रहेगी, क्योंकि भारत भी रूसी ऊर्जा का एक प्रमुख खरीदार है और अमेरिकी कानून में भारत जैसे देशों पर संभावित टैरिफ का प्रावधान शामिल है।
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भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संपर्क को लेकर एक नया घटनाक्रम सामने आया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर ...
18/09/2026

भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संपर्क को लेकर एक नया घटनाक्रम सामने आया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 15 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत की ओर से दो अलग-अलग निमंत्रण दिए गए थे—पहला निमंत्रण द्विपक्षीय यात्रा के लिए और दूसरा नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में BIMSTEC के वर्तमान अध्यक्ष के तौर पर शामिल होने के लिए। जायसवाल के अनुसार, तारिक रहमान को पहले भारत की द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया गया था और इसके बाद उन्हें BIMSTEC अध्यक्ष की हैसियत से BRICS बैठक में शामिल होने के लिए अलग से आमंत्रित किया गया। हालांकि, 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में तारिक रहमान शामिल नहीं हुए और उनकी प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर भी नई दिल्ली को अब तक बांग्लादेश की ओर से कोई अंतिम सूचना नहीं मिली है। जायसवाल ने कहा कि जब इस यात्रा को लेकर कोई नई जानकारी उपलब्ध होगी तो विदेश मंत्रालय उसे साझा करेगा। इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि BRICS का निमंत्रण बांग्लादेश को BRICS सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि BIMSTEC की अध्यक्षता करने वाले देश के प्रतिनिधि के तौर पर दिया गया था। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायुन कबीर ने इससे पहले इसी पहलू पर जोर देते हुए कहा था कि निमंत्रण BIMSTEC अध्यक्ष को मिला था, न कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में तारिक रहमान को। इसी वजह से BRICS सम्मेलन में बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर दोनों पक्षों की सार्वजनिक व्याख्याओं में अंतर दिखाई दिया। दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि BRICS निमंत्रण के अलावा तारिक रहमान के लिए एक अलग द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण भी मौजूद है। बांग्लादेश की ओर से यह संकेत दिया गया है कि प्रधानमंत्री की भारत यात्रा का कार्यक्रम दोनों पक्षों के बीच बातचीत और उपयुक्त समय पर निर्भर करेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध कई संवेदनशील मुद्दों से गुजर रहे हैं और दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत को लेकर लगातार कूटनीतिक संपर्क जारी है। इसलिए फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि तारिक रहमान की प्रस्तावित द्विपक्षीय भारत यात्रा के लिए दोनों देशों के बीच तारीख और कार्यक्रम पर सहमति कब बनती है।
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरों से जुड़े आधिकारिक ...
18/09/2026

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरों से जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों में वरिष्ठ मुस्लिम IAS और IPS अधिकारियों को कथित तौर पर उनके धर्म के आधार पर बाहर रखे जाने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के विशेष रैपोर्टेयर को पत्र लिखा है। रिपोर्टों के मुताबिक, मोइत्रा ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) से जुड़े Special Rapporteur on Minority Issues प्रोफेसर निकोलस लेव्रैट से इस मामले में हस्तक्षेप करने और भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगने का अनुरोध किया है। मोइत्रा के पत्र में सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर वकार रजा, पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख जावेद शमीम और वरिष्ठ IAS अधिकारी खलील अहमद का नाम लिया गया है। मोइत्रा का आरोप है कि जुलाई और अगस्त 2026 में अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरों के दौरान इन अधिकारियों को अलग-अलग मौकों पर या तो कार्यक्रमों से दूर रहने के लिए कहा गया या बैठक से जाने को कहा गया, जबकि अन्य अधिकारियों को कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति दी गई। उनके अनुसार, 18 जुलाई को सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा से संबंधित बैठक के दौरान वकार रजा को कथित तौर पर बैठक से अलग किया गया और आधिकारिक प्रोटोकॉल में उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। इसी तरह जावेद शमीम के बारे में मोइत्रा ने दावा किया कि उन्हें कुछ आधिकारिक बैठकों में शामिल नहीं किया गया और उनकी जगह दूसरे अधिकारी ने STF का प्रतिनिधित्व किया। 19 जुलाई को कोलकाता में कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़ी बैठक के संदर्भ में भी मोइत्रा ने आरोप लगाया कि IAS अधिकारी खलील अहमद को बैठक से जाने के लिए कहा गया, जबकि जावेद शमीम को भी कार्यक्रम से दूर रखा गया। मोइत्रा ने दावा किया कि अगस्त में अमित शाह के दोबारा पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान भी ऐसी ही स्थिति दोहराई गई। उनका कहना है कि इन तीनों अधिकारियों को कथित तौर पर अलग रखने की घटनाओं में एक समान बात उनका मुस्लिम होना थी और इसी आधार पर उन्होंने इसे धार्मिक भेदभाव का मामला बताया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मोइत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस विवाद के बीच उनके पहले सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर डायमंड हार्बर में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज होने और साइबर क्राइम पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। UN Special Rapporteur को लिखे पत्र में मोइत्रा ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) और नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय समझौते (ICCPR) समेत अधिकारों से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयर से भारत सरकार से कथित घटनाओं के कारण और ऐसे निर्देश जारी करने वाले प्राधिकरण के बारे में जानकारी मांगने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरों से संबंधित CCTV फुटेज, टूर डायरी और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की है, ताकि कथित घटनाओं की जांच के लिए संबंधित सामग्री उपलब्ध रहे। मोइत्रा ने यह भी कहा है कि पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को धर्म के आधार पर किसी आधिकारिक जिम्मेदारी या कार्यक्रम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों को धार्मिक आधार पर बाहर रखने का दावा महुआ मोइत्रा की ओर से किया गया है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

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UPI चार्ज को लेकर देश में सियासी और कारोबारी विवाद तेज हो गया है। केंद्र सरकार के नए UPI Merchant Discount Rate (MDR) ढा...
18/09/2026

UPI चार्ज को लेकर देश में सियासी और कारोबारी विवाद तेज हो गया है। केंद्र सरकार के नए UPI Merchant Discount Rate (MDR) ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान में ₹2,000 से अधिक की राशि पर MDR लागू होगा। सामान्य श्रेणी में यह दर 0.4% रखी गई है, जबकि पेट्रोल-डीजल जैसे कुछ आवश्यक और कम-मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर ₹5 प्रति लेनदेन का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाना है और UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा; ₹2,000 तक के कई मर्चेंट भुगतान और छोटे कारोबारियों के लिए भी जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार करीब 96% मर्चेंट UPI लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि पेट्रोल पंप डीलरों के संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय से ईंधन कारोबार को MDR से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। डीलरों का कहना है कि पेट्रोल पंप कारोबार में मार्जिन सीमित और निर्धारित होते हैं, इसलिए हर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर ₹5 का अतिरिक्त खर्च उनके मुनाफे पर असर डाल सकता है। दिल्ली-NCR, पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान समेत कई क्षेत्रों के डीलरों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें इस शुल्क से राहत नहीं मिली तो वे ₹2,000 या उससे अधिक के UPI भुगतान स्वीकार करना बंद करके बड़े लेनदेन में नकद भुगतान की ओर लौटने पर विचार कर सकते हैं। दूसरी ओर, पेट्रोलियम डीलरों और मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई है और डीलर संगठनों ने सरकार के सामने अपने मार्जिन तथा अतिरिक्त भुगतान लागत से जुड़ी चिंताएं रखी हैं। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। विपक्षी दलों ने नए MDR को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और इसे डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर असर डालने वाला कदम बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थानों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है, जिसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है। AAP ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए दावा किया है कि अतिरिक्त लागत का असर व्यापारियों और अंततः आम लोगों पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और पेट्रोल पंप डीलरों के बीच बातचीत से क्या कोई छूट या वैकल्पिक व्यवस्था निकलती है, क्योंकि डीलरों के कैश की ओर लौटने की चेतावनी से डिजिटल भुगतान के विस्तार, ग्राहकों की सुविधा और पेट्रोल पंपों पर भुगतान व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदलने की योजना को लेकर अब राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। 15 सितंब...
18/09/2026

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदलने की योजना को लेकर अब राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। 15 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना के लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि रखी गई है और स्मार्ट क्लास की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जानी है। सरकारी जानकारी के मुताबिक प्रति विद्यालय प्रस्तावित दर 2,07,910 रुपये, जिसमें संबंधित शुल्क और GST शामिल हैं, तय की गई है; टेंडर प्रक्रिया में यदि इससे कम दर मिलती है तो इसी कुल बजट के भीतर अधिक विद्यालयों को योजना में शामिल किया जा सकता है। इसी फैसले पर CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उत्तर प्रदेश में CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ सोशल ऑडिट अभियान की शुरुआत के छह घंटे के भीतर ही सरकार ने हजारों स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने का निर्णय लिया, और उन्होंने प्रति स्कूल उपलब्ध राशि को लेकर सवाल खड़े किए। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 300 करोड़ रुपये को केवल 300 स्कूलों के लिए मंजूर किया गया है, ऐसा सरकारी दस्तावेजों में नहीं कहा गया है; उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 300 करोड़ रुपये की कुल स्वीकृत राशि से 14,429 स्कूलों में चरणबद्ध स्मार्ट क्लास स्थापित करने की योजना है। सरकार के अनुसार इन स्कूलों में डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट क्लास, इंटरनेट आधारित शिक्षण और ICT सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। राज्य में पहले से ही 32,000 से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास, 15,000 से अधिक स्कूलों में ICT लैब और 1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है, जबकि 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत 2021 में हुई थी और इसका औपचारिक संचालन शैक्षणिक सत्र 2022-23 से शुरू हुआ था। वहीं CJP अपने ‘School Theek Karo’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति का सोशल ऑडिट करने और युवाओं को अपने आसपास के स्कूलों की स्थिति देखने के लिए प्रेरित कर रहा है। 15 सितंबर को नोएडा में भी इस अभियान के तहत स्कूलों का निरीक्षण किया गया था और सौरव दास ने उत्तर प्रदेश के युवाओं से स्थानीय सरकारी स्कूलों की स्थिति का ऑडिट करने की अपील की थी। ऐसे में स्मार्ट स्कूल योजना एक तरफ उत्तर प्रदेश में डिजिटल शिक्षा के विस्तार का सरकारी प्रयास है, जबकि दूसरी तरफ CJP इस योजना के बजट, क्रियान्वयन और स्कूलों की वास्तविक जमीनी जरूरतों को लेकर सवाल उठा रहा है; आने वाले समय में इस योजना का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि स्वीकृत धनराशि के तहत कितने स्कूलों में सुविधाएं स्थापित होती हैं और उनका उपयोग विद्यार्थियों की पढ़ाई में किस तरह होता है।

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