Mission Spiritualism मिशन आध्यात्मिकता

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Mission Spiritualism मिशन आध्यात्मिकता Mission Spiritualism @ KSRMP For SPIRITUALITY is A Developing BEHAVIORAL SCIENCE To Reveal The TRUTH. At TTI.

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Mission Spiritualism मिशन आध्यात्मिकता  @ KSRMP For SPIRITUALITY is A Developing BEHAVIORAL SCIENCE To Reveal The TRUTH....
01/09/2022

Mission Spiritualism मिशन आध्यात्मिकता @ KSRMP For SPIRITUALITY is A Developing BEHAVIORAL SCIENCE To Reveal The TRUTH.

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08/05/2017

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जनेऊ पहनने के लाभ

पूर्व में बालक की उम्र आठ वर्ष होते ही उसका यज्ञोपवित संस्कार कर दिया जाता था। वर्तमान में यह प्रथा लोप सी हो गई है। जनेऊ पहनने का हमारे स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। पूर्व काल में जनेऊ पहनने के पश्चात ही बालक को पढऩे का अधिकार मिलता था। मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व जनेऊ को कानों पर कस कर दो बार लपेटना पड़ता है। इससे कान के पीछे की दो नसे जिनका संबंध पेट की आंतों से है, आंतों पर दबाव डालकर उनको पूरा खोल देती है जिससे मल विसर्जन आसानी से हो जाता है तथा मल-मूत्र विसर्जन के समय कान के पास ही एक नस से कुछ द्रव्य विसर्जित होता है। जनेऊ उसके वेग को रोक देता है, जिससे कब्ज, एसीडीटी, पेट रोग, मूत्रन्द्रीय रोग, रक्तचाप, हृदय रोगों सहित अन्य संक्रामक रोग नहीं होते। जनेऊ पहनने वाला नियमों में बंधा होता है। वह मल विसर्जन के पश्चात अपना जनेऊ कान पर से तब तक नहीं उतार सकता जब तक वह हाथ पैर धोकर कुल्ला न कर ले। अत: वह अच्छी तरह से अपनी सफाई करके ही जनेऊ कान से उतारता है। यह सफाई उसे दांत, मुंह, पेट, कृमि, जिवाणुओं के रोगों से बचाती है। जनेऊ का सबसे ज्यादा लाभ हृदय रोगियों को होता है।

✨✨✨💎💖👏🌞🐒 WELCOME INTO www.diarytv.in ✨✨✨💎💖👏🌞🐒पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन4. नकु...
08/11/2015

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पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -
1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन
4. नकुल। 5. सहदेव

( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )

यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।

वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..
कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -
1. दुर्योधन 2. दुःशासन 3. दुःसह
4. दुःशल 5. जलसंघ 6. सम
7. सह 8. विंद 9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष 11. सुबाहु। 12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण। 14. दुर्मुख 15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण 17. शल 18. सत्वान
19. सुलोचन 20. चित्र 21. उपचित्र
22. चित्राक्ष 23. चारुचित्र 24. शरासन
25. दुर्मद। 26. दुर्विगाह 27. विवित्सु
28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ
31. नन्द। 32. उपनन्द 33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा 35. सुवर्मा 36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु 38. महाबाहु 39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग 42. भीमबल
43. बालाकि 44. बलवर्धन 45. उग्रायुध
46. सुषेण 47. कुण्डधर 48. महोदर
49. चित्रायुध 50. निषंगी 51. पाशी
52. वृन्दारक 53. दृढ़वर्मा 54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति 56. अनूदर 57. दढ़संघ 58. जरासंघ 59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा 62. उग्रसेन 63. सेनानी
64. दुष्पराजय 65. अपराजित
66. कुण्डशायी 67. विशालाक्ष
68. दुराधर 69. दृढ़हस्त 70. सुहस्त
71. वातवेग 72. सुवर्च 73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी 75. नागदत्त 76. उग्रशायी
77. कवचि 78. क्रथन। 79. कुण्डी
80. भीमविक्र 81. धनुर्धर 82. वीरबाहु
83. अलोलुप 84. अभय 85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय 87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी। 89. विरवि
90. चित्रकुण्डल 91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि 93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान 95. दीर्घबाहु
96. सुजात। 97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी 99. विरज
100. युयुत्सु

( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,
जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )

"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-

ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।
ॐ . कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।

ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।

ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी

ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।

ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में

ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।

ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय

ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक

ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।

ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने

ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को

ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में

ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।

ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद

ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना

ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.

अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद

अधूरा ज्ञान खतरना होता है।

33 करोड नहीँ 33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ।

कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,

कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।

हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू संस्कृति के जनक "सनातन धर्म" में :-

12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...!

8 प्रकार हैं :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार है :-
रुद्र:, हर, बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी

अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं। ।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
१ "सनातन" होने के नाते जानना ज़रूरी है

This is very good information for all of us ... जय श्रीकृष्ण ...

अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाएँ ......

अपनी भारत की संस्कृति
को पहचाने.
ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पहुचाये.
खासकर अपने बच्चो को बताए
क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा...

📜😇 दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

📜😇 तीन ऋण -

देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

📜😇 चार युग -

सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

📜😇 चार धाम -

द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

📜😇 चारपीठ -

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

📜😇 चार वेद-

ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !

📜😇 चार आश्रम -

ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !

📜😇 चार अंतःकरण -

मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !

📜😇 पञ्च गव्य -

गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !

📜😇 पञ्च देव -

गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !

📜😇 पंच तत्त्व -

पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !

📜😇 छह दर्शन -

वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिमाँसा ,
दक्षिण मिमाँसा !

📜😇 सप्त ऋषि -

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!

📜😇 सप्त पुरी -

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !

📜😊 आठ योग -

यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समाधि !

📜😇 आठ लक्ष्मी -

आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !

📜😇 नव दुर्गा --

शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !

📜😇 दस दिशाएं -

पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !

📜😇 मुख्य ११ अवतार -

मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !

📜😇 बारह मास -

चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !

📜😇 बारह राशी -

मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
कन्या !

📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग -

सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !

📜😇 पंद्रह तिथियाँ -

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !

📜😇 स्मृतियां -

मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !

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स्वामी आकाशानंद जी महाराज़

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🚩🚩नवरात्री क्यों मानते है ??🚩🚩🎯www.diarytv.in🎯 🚩🚩नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ रूपों को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाताहै, ल...
13/10/2015

🚩🚩नवरात्री क्यों मानते है ??🚩🚩
🎯www.diarytv.in🎯
🚩🚩नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ रूपों को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता
है, लेकिन इसका अभिप्राय मौसम के बदलाव के साथ भी है। यह प्रकृति में कई
बदलाव के साथ सर्दियों के मौसम की शुरुआत की निशानी है। भारतीय चंद्र
कैलेंडर माह में अश्विन माह के बढ़ते चंद्र चरण की शुरूआत की तारीख है,
जब नवरात्रि उपवास और अन्य रीति-रिवाज/उत्सव शुरू होते है।

त्योहार के पीछे की कहानी यह है कि देवी दुर्गा ने इन नौ दिनों के दौरान
दानव महिषासुर के साथ लड़ाई के बाद उसका वध किया। नवरात्रि उपवास के हवन
या आग अनुष्ठान में जिसमें देवता को मंत्रो के साथ चढ़ावा चढ़ाया जाता
है, के साथ नौवें दिन में समाप्त होता है। आम तौर पर एक मूर्ति की
नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान पूजा की जाती है और यह दसवें दिन उसका
विसर्जन किया जाता है, जो विजय दशमी या दशहरा का दिन होता है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से, यह सर्दियों के आने से पहले आपके शरीर को शुद्ध
और डिटोक्सीफाई करने का एक तरीका माना जाता है। अश्विन के महीने के बढ़ता
चाँद चरण शरद ऋतु से सर्दियों के लिए परिवर्तनशील चरण है और इस दौरान किए
गए उपवास सबसे अधिक लाभकारी होते हैं और वे पूरे वर्ष आप को स्वस्थ रख
सकते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने व्रत में अपनी कैलोरी पर नजर रखे।
कई बार, यह पाया गया है कि लोगों नवरात्रि के दौरान उपवास के नाम पर काफी
कैलोरी से भरपूर खाना खाते है।

हालांकि नवरात्रि दो सिज़न में आती है, ऐसे में ग्रहों की स्थिति और
वातावरण देवताओं की पूजा के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है। शरीर में जैव
रासायनिक परिवर्तन मन और शरीर के विभिन्न शुद्ध आचार के प्रदर्शन के लिए
अनुकूल होता है। अपने नौ रूपों में देवी दुर्गा के आशीर्वाद विभिन्न
अनुसरण(रीति-रिवाजों) के द्वारा प्रार्थना की जाती है। वर्ष के इस समय को
भक्तो द्वारा परंपरा के अनुसार इस उद्देश्य के लिए बहुत शुभ माना जाता
है।

देवी दुर्गा या शक्ति ज्ञान, समृद्धि, और ईश्वर की अनुकंपा के लिए मानी
जाती है। नवरात्रि के दौरान उपवास की परंपरा भी आयुर्वेद से जुड़ी है। यह
माना जाता है कि इस अवधि के दौरान उपवास करना अधिक स्वास्थ्य लाभ देता
है, आयुर्वेदिक भाषा में वर्ष के अन्य समय की तुलना में दोषों का संतुलन
होता है। नवरात्रि वर्ष में दो अवसरों पर आता है। पहला शरद ऋतु और
Navratris दो अवसरों पर एक वर्ष में गिरावट. शरद ऋतु और शीत ऋतु के
बीच(शारदीया नवरात्रि) जबकि दूसरा शीत ऋतु और वसंत ऋतु(वसंतिका
नवरात्रि)) के बीच।🚩🚩

26/08/2015

श्रीराम कवच Shri Ram Kawach with Mission Spiritualism मिशन "आध्यात्मिकता" !!!
Must watch & Take appropriate action according to your choice 4 Mission Behaviourism मिशन व्यावहारिकता...

Mission SPIRITUALISM with Spiritual Transcription आध्यात्मिक लिप्यन्तरण
22/03/2015

Mission SPIRITUALISM with Spiritual Transcription आध्यात्मिक लिप्यन्तरण

Link to Part 1 http://www.youtube.com/watch?v=2fBI-TNT-Yk Awesome Krishna Bhajan : मैया मॊरी मैं नहीं माखन खायॊ-Part 2 By Shri Anup Jalota Maiya Mori Main Nahin Maakhan Khaayo

MUST WATCH & REVERT WITH YOUR OPINION AS नज़रिया, एक दृष्टिकोण/ Nazariya, Ek Drishtikon  + नज़रिया {एक दृष्टिकोण...} NAZAR...
14/01/2015

MUST WATCH & REVERT WITH YOUR OPINION AS नज़रिया, एक दृष्टिकोण/ Nazariya, Ek Drishtikon + नज़रिया {एक दृष्टिकोण...} NAZARIYA {Ek Drishtikon...} ...!!!!!........... ::: https://www.youtube.com/watch?v=6OT6_FeqvVQ

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20/11/2014

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