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सुलोचना वासुकी नाग की पुत्री और लंका के राजा रावण के पुत्र मेघनाद की पत्नी थी। लक्ष्मण के साथ हुए एक भयंकर युद्ध में मेघ...
15/01/2026

सुलोचना वासुकी नाग की पुत्री और लंका के राजा रावण के पुत्र मेघनाद की पत्नी थी। लक्ष्मण के साथ हुए एक भयंकर युद्ध में मेघनाद का वध हुआ। उसके कटे हुए शीश को भगवान श्रीराम के शिविर में लाया गया था।

अपने पति की मृत्यु का समाचार पाकर सुलोचना ने अपने ससुर रावण से राम के पास जा कर पति का शीश लाने की प्रार्थना की। किंतु रावण इसके लिए तैयार नहीं हुआ। उसने सुलोचना से कहा - कि वह स्वयं राम के पास जाकर मेघनाद का शीश ले आये। क्योंकि राम पुरुषोत्तम हैं, इसीलिए उनके पास जाने में तुम्हें किसी भी प्रकार का भय नहीं करना चाहिए।

रावण के महापराक्रमी पुत्र इन्द्रजीत (मेघनाद) का वध करने की प्रतिज्ञा लेकर लक्ष्मण जिस समय युद्ध भूमि में जाने के लिये प्रस्तुत हुए, तब राम उनसे कहते हैं - "लक्ष्मण! रण में जाकर तुम अपनी वीरता और रणकौशल से रावण-पुत्र मेघनाद का वध कर दोगे, इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है।

परंतु एक बात का विशेष ध्यान रखना कि मेघनाद का मस्तक भूमि पर किसी भी प्रकार न गिरे। क्योंकि मेघनाद एक नारी-व्रत का पालक है और उसकी पत्नी परम पतिव्रता है।

ऐसी साध्वी के पति का मस्तक अगर पृथ्वी पर गिर पड़ा तो हमारी सारी सेना का ध्वंस हो जाएगा और हमें युद्ध में विजय की आशा त्याग देनी पड़ेगी। लक्ष्मण अपनी सेना लेकर चल पड़े। समरभूमि में उन्होंने वैसा ही किया। युद्ध में अपने बाणों से उन्होंने मेघनाद का मस्तक उतार लिया, पर उसे पृथ्वी पर नहीं गिरने दिया। हनुमान उस मस्तक को रघुनंदन के पास ले आये।

मेघनाद की दाहिनी भुजा आकाश में उड़ती हुई उसकी पत्नी सुलोचना के पास जाकर गिरी। सुलोचना चकित हो गयी। दूसरे ही क्षण अन्यंत दु:ख से कातर होकर विलाप करने लगी। पर उसने भुजा को स्पर्श नहीं किया। उसने सोचा, सम्भव है यह भुजा किसी अन्य व्यक्ति की हो।

ऐसी दशा में पर-पुरुष के स्पर्श का दोष मुझे लगेगा। निर्णय करने के लिये उसने भुजा से कहा - "यदि तू मेरे स्वामी की भुजा है, तो मेरे पतिव्रत की शक्ति से युद्ध का सारा वृत्तांत लिख दे। भुजा को दासी ने लेखनी पकड़ा दी। लेखिनी ने लिख दिया - "प्राणप्रिये! यह भुजा मेरी ही है।

युद्ध भूमि में श्रीराम के भाई लक्ष्मण से मेरा युद्ध हुआ। लक्ष्मण ने कई वर्षों से पत्नी, अन्न और निद्रा छोड़ रखी है। वह तेजस्वी तथा समस्त दैवी गुणों से सम्पन्न है। संग्राम में उनके साथ मेरी एक नहीं चली। अन्त में उन्हीं के बाणों से विद्ध होने से मेरा प्राणान्त हो गया। मेरा शीश श्रीराम के पास है।

पति की भुजा-लिखित पंक्तियां पढ़ते ही सुलोचना व्याकुल हो गयी। पुत्र-वधु के विलाप को सुनकर लंकापति रावण ने आकर कहा - 'शोक न कर पुत्री।

प्रात: होते ही सहस्त्रों मस्तक मेरे बाणों से कट-कट कर पृथ्वी पर लोट जाऐंगे। मैं रक्त की नदियां बहा दूंगा। करुण चीत्कार करती हुई सुलोचना बोली - "पर इससे मेरा क्या लाभ होगा, पिताजी। सहस्त्रों नहीं करोड़ों शीश भी मेरे स्वामी के शीश के अभाव की पूर्ती नहीं कर सकेंगे। सुलोचना ने निश्चय किया कि 'मुझे अब सती हो जाना चाहिए।'

किंतु पति का शव तो राम-दल में पड़ा हुआ था। फिर वह कैसे सती होती? जब अपने ससुर रावण से उसने अपना अभिप्राय कहकर अपने पति का शव मँगवाने के लिए कहा, तब रावण ने उत्तर दिया- "देवी! तुम स्वयं ही राम-दल में जाकर अपने पति का शव प्राप्त करो।

जिस समाज में बालब्रह्मचारी हनुमान, परम जितेन्द्रिय लक्ष्मण तथा एक पत्नी व्रती भगवान श्रीराम विद्यमान हैं, उस समाज में तुम्हें जाने से डरना नहीं चाहिए। मुझे विश्वास है कि इन स्तुत्य महापुरुषों के द्वारा तुम निराश नहीं लौटायी जाओगी।"

सुलोचना के आने का समाचार सुनते ही श्रीराम खड़े हो गये और स्वयं चलकर सुलोचना के पास आये और बोले - "देवी! तुम्हारे पति विश्व के अन्यतम योद्धा और पराक्रमी थे। उनमें बहुत-से सदगुण थे। किंतु विधि की लिखी को कौन बदल सकता है। आज तुम्हें इस तरह देखकर मेरे मन में पीड़ा हो रही है। सुलोचना भगवान की स्तुति करने लगी।

श्रीराम ने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा - "देवी! मुझे लज्जित न करो। पतिव्रता की महिमा अपार है, उसकी शक्ति की तुलना नहीं है। मैं जानता हूँ कि तुम परम सती हो। तुम्हारे सतित्व से तो विश्व भी थर्राता है। अपने स्वयं यहाँ आने का कारण बताओ, बताओ कि मैं तुम्हारी किस प्रकार सहायता कर सकता हूँ?

सुलोचना ने अश्रुपूरित नयनों से प्रभु की ओर देखा और बोली - "राघवेन्द्र! मैं सती होने के लिये अपने पति का मस्तक लेने के लिये यहाँ पर आई हूँ। श्रीराम ने शीघ्र ही ससम्मान मेघनाद का शीश मंगवाया और सुलोचना को दे दिया।

पति का छिन्न शीश देखते ही सुलोचना का हृदय अत्यधिक द्रवित हो गया। उसकी आंखें बड़े जोरों से बरसने लगीं। रोते-रोते उसने पास खड़े लक्ष्मण की ओर देखा और कहा - "सुमित्रानन्दन! तुम भूलकर भी गर्व मत करना कि मेघनाथ का वध मैंने किया है। मेघनाद को धराशायी करने की शक्ति विश्व में किसी के पास नहीं थी।

यह तो दो पतिव्रता नारियों का भाग्य था। आपकी पत्नी भी पतिव्रता हैं और मैं भी पति चरणों में अनुरक्ती रखने वाली उनकी अनन्य उपसिका हूँ। पर मेरे पति देव पतिव्रता नारी का अपहरण करने वाले पिता का अन्न खाते थे और उन्हीं के लिये युद्ध में उतरे थे, इसी से मेरे जीवन धन परलोक सिधारे।

सभी योद्धा सुलोचना को राम शिविर में देखकर चकित थे। वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि सुलोचना को यह कैसे पता चला कि उसके पति का शीश भगवान राम के पास है।
सुग्रीव ने पूछ ही लिया कि यह बात उन्हें कैसे ज्ञात हुई कि मेघनाद का शीश श्रीराम के शिविर में है। सुलोचना ने स्पष्टता से बता दिया - "मेरे पति की भुजा युद्ध भूमि से उड़ती हुई मेरे पास चली गयी थी। उसी ने लिखकर मुझे बता दिया।

व्यंग्य भरे शब्दों में सुग्रीव बोल उठे - "निष्प्राण भुजा यदि लिख सकती है फिर तो यह कटा हुआ सिर भी हंस सकता है। श्रीराम ने कहा - "व्यर्थ बातें मत करो मित्र। पतिव्रता के महाम्तय को तुम नहीं जानते। यदि वह चाहे तो यह कटा हुआ सिर भी हंस सकता है।

श्रीराम की मुखकृति देखकर सुलोचना उनके भावों को समझ गयी। उसने कहा - "यदि मैं मन, वचन और कर्म से पति को देवता मानती हूँ, तो मेरे पति का यह निर्जीव मस्तक हंस उठे। सुलोचना की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि कटा हुआ मस्तक जोरों से हंसने लगा।

यह देखकर सभी दंग रह गये। सभी ने पतिव्रता सुलोचना को प्रणाम किया। सभी पतिव्रता की महिमा से परिचित हो गये थे। चलते!समय सुलोचना ने श्रीराम से प्रार्थना की- "भगवन, आज मेरे पति की अन्त्येष्टि क्रिया है और मैं उनकी सहचरी उनसे मिलने जा रही हूँ।

अत: आज युद्ध बंद रहे। श्रीराम ने सुलोचना की प्रार्थना स्वीकार कर ली। सुलोचना पति का सिर लेकर वापस लंका आ गई। लंका में समुद्र के तट पर एक चंदन की चिता तैयार की गयी। पति का शीश गोद में लेकर सुलोचना चिता पर बैठी और धधकती हुई अग्नि में कुछ ही क्षणों में सती हो गई...!!

।। जय जय सियाराम ।।

बड़ी जद्दोजहद के बाद आख़िरकार वह बन्दूक मिल ही गई जो दूसरों के कन्धे पर रख कर चलाई जाती हैं..   #भारतीयइतिहास    #भारत
24/06/2024

बड़ी जद्दोजहद के बाद आख़िरकार वह बन्दूक मिल ही गई जो दूसरों के कन्धे पर रख कर चलाई जाती हैं..
#भारतीयइतिहास #भारत

02/06/2024

मैं करनाल हरियाणा से पोस्ट कर रहा हूं !😁
आप कहां कहां से इग्नोर कर रहे हो ? 🙄
😂🤞🤟✍️

ब्राह्मणों के क्रोध कुलधरा के 85 गांव आज भी वीरान हे कुलधरा - ब्राह्मणों के क्रोध का प्रतीक जहां आज भी लोग जाने से डरते ...
20/05/2024

ब्राह्मणों के क्रोध कुलधरा के 85 गांव आज भी वीरान हे

कुलधरा - ब्राह्मणों के क्रोध का प्रतीक जहां आज भी लोग जाने से डरते हैं।

राजस्थान के जैसलमेर शहर से 18 किमी दूर स्थित कुलधरा गाव आज से 500 साल पहले 600 घरो और 85 गावो का पालीवाल ब्रह्मिनो का साम्राज्य ऐसा राज्य था जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती हे...
रेगिस्तान के बंजर धोरो में पानी नहीं मिलता वहा पालीवाल ब्रह्मिनो ने ऐसा चमत्कार किया जो इंसानी दिमाग से बहुत परे थी.

उन्होंने जमीन पे उपलब्ध पानी का प्रयोग नहीं किया,न बारिश के पानी को संग्रहित किया बल्कि रेगिस्तान के मिटटी में मोजूद पानी के कण को खोजा और अपना गाव जिप्सम की सतह के ऊपर बनाया,उन्होंने उस समय जिप्सम की जमीन खोजी ताकि बारिश का पानी जमीन सोखे नहीं.

और आवाज के लिए गाव ऐसा बंसाया की दूर से अगर दुश्मन आये तो उसकी आवाज उससे 4 गुना पहले गाव के भीतर आ जाती थी.
हर घर के बीच में आवाज का ऐसा मेल था जेसे आज के समय में टेलीफोन होते हे.

जैसलमेर के दीवान और राजा को ये बात हजम नहीं हुई की ब्राह्मण इतने आधुनिक तरीके से खेती करके अपना जीवन यापन कर सकते हे तो उन्होंने खेती पर कर लगा दिया पर पालीवाल ब्रह्मिनो ने कर देने से मना कर दिया.

उसके बाद दीवान सलीम सिंह को गाव के मुख्या की बेटी पसंद आ गयी तो उसने कह दिया या तो बेटी दीवान को दे दो या सजा भुगतने के लिए तयार रहे.
ब्रह्मिनो को अपने आत्मसम्मान से समझोता बिलकुल बर्दास्त नहीं था इसलिए रातो रात 85 गावो की एक महापंच्यात बेठी और निर्णय हुआ की रातो रात कुलधरा खाली करके वो चले जायेंगे.

रातो रात 85 गाव के ब्राह्मण कहा गए केसे गए और कब गए इस चीज का पता आजतक नहीं लगा.पर जाते जाते पालीवाल ब्राह्मण शाप दे गए की ये कुलधरा हमेसा वीरान रहेगा इस जमीन पे कोई फिर से आके नहीं बस पायेगा.

आज भी जैसलमेर में जो तापमान रहता हे गर्मी हो या सर्दी,कुलधरा गाव में आते ही तापमान में 4 डिग्री की बढ़ोतरी हो जाती हे.विज्ञानिको की टीम जब पहुची तो उनके मशीनो में आवाज और तरगो की रिकॉर्डिंग हुई जिससे ये पता चलता हे की कुलधरा में आज भी कुछ शक्तिया मोजूद हे जो इस गाव में किसी को रहने नहीं देती.मशीनो में रिकॉर्ड तरंग ये बताती हे की वहा मोजूद शक्तिया कुछ संकेत देती हे.
आज भी कुलधरा गाव की सीमा में आते हे मोबाइल नेटवर्क और रेडियो कम करना बंद कर देते हे पर जेसे ही गाव की सीमा से बाहर आते हे मोबाइल और रेडियो शुरू हो जाते हे..

आज भी कुलधरा शाम होते ही खाली हो जाता हे और कोई इन्सान वहा जाने की हिम्मत नहीं करता.जैसलमेर जब भी जाना हो तो कुलधरा जरुर जाए.
ब्राह्मण के क्रोध और आत्मसम्मान का प्रतीक हे कुलधरा.

जय प्रभु श्री परशुराम🙏🚩
राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ भारत

 #साइकिल की सवारी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था (GDP) के लिए बेहद हानिकारक है....! सुनने में ये हास्यास्पद लग सकता है , पर...
15/05/2024

#साइकिल की सवारी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था (GDP) के लिए बेहद हानिकारक है....!

सुनने में ये हास्यास्पद लग सकता है , परन्तु सत्य है....

एक साइकिल चलाने वाला देश के लिए बहुत बड़ी आपदा है, क्योंकि.......

वो गाड़ी नहीं खरीदता,
वो लोन नहीं लेता,
वो गाड़ी का बीमा नहीं करवाता,
वो तेल नहीं खरीदता,
वो गाड़ी की सर्विसिंग नहीं करवाता,
वो पैसे देकर गाड़ी पार्किंग नहीं करता,
वो ट्रैफ़िक फाइन नहीं देता ,
और तो और
वो मोटा (मोटापा) नहीं होता।

जी हां .....यह सत्य है कि एक स्वस्थ व्यक्ति
अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है, क्योंकि...

वो दवाईयां नहीं खरीदता,
वो अस्पताल व चिकित्सक के पास नहीं जाता
वो राष्ट्र की GDP में कोई योगदान नहीं देता।

ठीक इसके विपरित एक फ़ास्ट फूड की दुकान 30 नौकरी पैदा करती है........

10 हृदय चिकित्सक,
10 दंत चिकित्सक,
10 वजन घटाने वाले...!



नोट :-पैदल चलना इससे भी अधिक ख़तरनाक होता है, क्योंकि पैदल चलने वाला व्यक्ति तो साइकिल भी नहीं खरीदता...................!!🤔

फलाने की गारंटी 😀😀
01/04/2024

फलाने की गारंटी 😀😀

मुख्यमंत्री ने 200 गज का पैतृक घर दान किया:मनोहर बोले- यह माता-पिता की निशानी; MLA कांडा का फार्म हाउस ऑफर ठुकरा चुकेरोह...
31/01/2024

मुख्यमंत्री ने 200 गज का पैतृक घर दान किया:मनोहर बोले- यह माता-पिता की निशानी; MLA कांडा का फार्म हाउस ऑफर ठुकरा चुके
रोहतक 29 जनवरी
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को अपना पैतृक घर गांव-समाज के नाम कर दिया। उन्होंने इस 200 गज के घर को बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाने के लिए दे दिया। उनका पैतृक घर रोहतक के गांव बनियानी में है। जहां उन्होंने दौरा कर अपनी बचपन की यादें भी ताजा की।कुछ दिन पहले ही सिरसा से विधायक गोपाल कांडा ने कहा था कि उन्होंने CM मनोहर को चंडीगढ़ या दिल्ली में फार्म हाउस बनाकर देने का ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने नकारते हुए कहा कि वह तो अपनी सारी पूंजी प्रधानमंत्री राहत कोष के नाम कर देंगे।CM मनोहर रविवार देर शाम रोहतक पहुंचे थे। सोमवार सुबह वह भिवानी जाने लगे तो रास्ते में पैतृक गांव चले गए। यहां सीएम मनोहर लाल ने कहा कि मेरा बहुत सौभाग्य है कि वे अपने पैतृक गांव में आए हैं।

उन्होंने कहा कि यह गांव उनके लिए बहुत ही दर्शनीय है। क्योंकि उनका बचपन यहां बीता है और पढ़ाई यहां हुई है। माता-पिता की निशानी उनका पैतृक घर भी गांव में है। जिसका सीएम ने दौरा किया। गांव का मकान भी उनके नाम है। यह मकान गांव के काम आना चाहिए।

सीएम ने खुद के साथ चचेरे भाई का मकान भी किया समर्पित
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की कि इस मकान के साथ लगता उनके चाचा के बेटे का मकान है। दोनों को मिलाकर करीब 200 गज का मकान गांव को समर्पित कर दिया। ताकि गांव के लोग यहां आने वाली पीढ़ी (बच्चों व नौजवानों) के लिए पढ़ाई के नाते से एक लाइब्रेरी की व्यवस्था हो जाए।

यहां पर ई-लाइब्रेरी की व्यवस्था करेंगे। गांव के लोग इसका उपयोग जो करना चाहेंगे, वह कर सकते हैं। इस घोषणा को करते हुए बहुत खुशी हो रही है।सिरसा से हरियाणा लोकहित पार्टी (हलोपा) के विधायक गोपाल कांडा का एक वीडियो सामने आया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं राजनेता के साथ ही एक बिजनेसमैन भी हूं। मैं मुख्यमंत्री मनोहर लाल को परख चुका हूं। CM मनोहर लाल को मैंने रिटायरमेंट के बाद चंडीगढ़ और दिल्ली में फार्म हाउस बनाकर देने का ऑफर दिया था।

इस पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गोपाल मैं इसका क्या करूंगा। मेरे मरने के बाद इसको लेकर भाई बंटवारे के लिए लड़ाई करेंगे। मैं अपनी सारी संपत्ति जो भी मेरे नाम पर है, वह मैं प्रधानमंत्री फंड के नाम करके जाऊंगा

क्या आप बता सकते हैं कि ये बस किस दिशा में चल रही है- लेफ़्ट या राइट?ज़रा डालिए दिमाग पर ज़ोर और कॉमेंट सेक्शन के ज़रिए ...
21/01/2024

क्या आप बता सकते हैं कि ये बस किस दिशा में चल रही है- लेफ़्ट या राइट?

ज़रा डालिए दिमाग पर ज़ोर और कॉमेंट सेक्शन के ज़रिए भेज दीजिये जवाब हमारी ओर 🤓👍

सही जवाब के लिए मिलते हैं कल सुबह 10 बजे

साल 1657 में शिवाजी महाराज ने अफजल खान को मारा था। इसके ठीक 100 साल बाद 1758 में पेशवा रघुनाथ राव ने पेशवा नानासाहब को च...
18/01/2024

साल 1657 में शिवाजी महाराज ने अफजल खान को मारा था। इसके ठीक 100 साल बाद 1758 में पेशवा रघुनाथ राव ने पेशवा नानासाहब को चिट्ठी लिखी थी.... "हमने लाहौर, मुल्तान, कश्मीर, और दूसरे सूबों को अटक की तरफ मिला लिया है. हमारे साम्राज्य में. जो नहीं आ पाए हैं, वो जल्द ही हमारी मातहती में होंगे. अहमद खान अब्दाली का बेटा तैमूर सुलतान और जहां खान हमारी सेनाओं द्वारा खदेड़े और लूटे जा चुके हैं. दोनों ही कुछ टूटे-फूटे दल-बल के साथ पेशावर पहुंचे हैं. हमने कांधार पर अपना राज घोषित करने का निर्णय ले लिया है"

100 साल के संघर्ष में े_कटक तक भगवा फहरा दिया गया था। कंधार के लिये लड़़ने की तैयारी चल रही थी।

लेकिन फिर आई 1761 की ंक्रांति...
जहां एक तरफ देश की सारी सेक्युलर ताकतें थीं, तो
दूसरी तरफ मराठे, जिनका अहंकार ठिकाने लगाने के लिए बाकी का सारा देश दिल थाम कर प्रतीक्षा कर रहा था।

पहले दोनों सेनाओं की तोपें आपस में लड़ीं, फिर बंदूकें चलीं, फिर तलवार और भाले निकले, फिर खंजर, चाकू और तीर चले, फिर पत्थर और ईंटें चलीं और अंत में मुक्के और घूसे बजे...

(पानीपत के युद्ध के बाद अब्दाली द्वारा पेशवा नाना साहब को लिखे गए पत्र से जिसमें वो अब्दाली कुल मिलाकर ये कह रहा है कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, मैं वापस जा रहा हूं)

और कोई देश होता तो शायद त्योहार मनाना अगर बंद नहीं भी करता तो कम से कम हर साल मकर संक्रांति पर 10 मिनट का शोक जरूर मनाता। शोक भी नहीं मनाता तो कम से कम स्मरण तो करता ही कि कैसे साल 1761 की मकर संक्रांति में पानीपत के मैदान में युद्ध के बाद 7 घंटे तक निहत्थे हारे हुए हिन्दुओं को नरसंहार चला था।

मगर हमारे सामने ये सब छोटी बातें हैं। हमें इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता। इतिहास के लगभग हर दशक में हमारा कोई ना कोई नरसंहार लिखा हुआ है, हमारी खोपड़ियों की पिरामिड बने हुए हैं। धर्म के आधार पर हिंसा करके हमारी मातृभूमि का विभाजन हो चुका है लेकिन हमें इस बात की ज्यादा चिंता रहती है कि हिटलर ने यहुदी कैसे मारे थे। वो यहूदी जिन्होंने इज़रायल बनने के बाद ढूंढ-ढूंढकर नाजी अफसर मारे, जिन्होंने अपने मरे हुए लोगों की याद में पूरी दुनिया में स्मारक बनाए और पूरी दुनिया को उनके साथ हुई ज्यादतियां बताईं।

हमारे रक्त रंजित इतिहास का एक भी स्मारक नहीं है, हमें जरूरत भी नहीं है क्योंकि हमें पता भी नहीं और हमें जानना भी नहीं है।

पानीपत में युद्ध के बाद जो घंटों मारकाट मची हम उसे ऐसे भूले हैं जैसे वो कभी हुआ ही नहीं, हम अपने ही देश का इतिहास ऐसे पढ़ते हैं जैसे ये किसी और दुनिया की बात हो रही है....

सोमनाथ मंदिर के साथ सोमनाथ मैमोरियल भी होना चाहिए ताकि लोगों को पता चले की गजनी से लेकर औरंगजेब तक ने सोमनाथ के साथ क्या-क्या किया।

रामजन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ और कृष्णजन्मभूमि सबके साथ में उनका इतिहास भी दिखाना चाहिए

लेकिन 1761 के बाद फिर पश्चिम से भारत में कोई गजनी से लेकर अब्दाली तक हमला करने की हिम्मत नहीं कर पाया।
इसके बाद 1920 में अफगानिस्तान के सुल्तान को गांधी जी ने भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया लेकिन वो योजना विफल रही और 1947 में मेज पर पूरा पश्चिमी भारत जिहादियों के सामने हम हार गये।

जो हमने 1761 के कथित हार के बाद नहीं खोया
वो हमने 1947 की आजादी में खो दिया

लेकिन कहानी यहां भी खत्म नहीं हुई।

1925 में शुरू हुआ संघ अपनी पहली शताब्दी से पहले ही आज देश की नीति तय करने वाल संगठन बन चुका है। एक स्वयंसेवक देश का प्रधानमंत्री है।

अगर संकल्प करके कोई चले तो 100 साल में पूरे देश का राजनीतिक मानचित्र बदल सकता है। हमने ये काम दो बार करके दिखाया है।

लेकिन मकर संक्रांति का दिन ये सीख देता है कि भविष्य के पानीपत के लिये तैयार रहना है ताकि फिर संघर्ष को शुरू से शुरू न करना पड़े।
क्योंकि अब ये देश और 100 साल इंतजार नहीं कर सकता।

शत शत नमन...
हर हर महादेव

एक डुबकी से हीमालदीव का दिवाला निकाल दिया
15/01/2024

एक डुबकी से ही
मालदीव का दिवाला निकाल दिया

यह पड़ा है 👇जमीनी विवाद. छल, कपट, षड्यंत्र, हुस्न, शबाव, जवानी, धन, दौलत ,शोहरत बेईमानी, नफरत, अभिमान,ईर्ष्या लड़ाई, झगड...
26/12/2023

यह पड़ा है 👇
जमीनी विवाद. छल, कपट, षड्यंत्र, हुस्न, शबाव, जवानी, धन, दौलत ,शोहरत बेईमानी, नफरत, अभिमान,ईर्ष्या लड़ाई, झगडे.........,......…......
सबका यही हाल होना है फिर घमंड किस चीज का समझ से परे है....... पता नहीं लोग क्यों एक दूसरे को नीचा दिखाने में और टांग खींचने में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं
ादेव🙏🙏🙏@ Everyone

वैज्ञानिको  ने खोज किया है कि चीटियां अनाज और बीजों को जमा करने के बाद !उनको जमीन में ले जाने और उन्हें जमीन के अंदर अपन...
07/12/2023

वैज्ञानिको ने खोज किया है कि चीटियां अनाज और बीजों को जमा करने के बाद !
उनको जमीन में ले जाने और उन्हें जमीन के अंदर अपने बिलों में रखने से पहले दो हिस्सों में तोड़ देती हैं

क्योंकि अगर आनाज वा बीज दो हिस्सों में ना किया जाए तो वह जमीन के अंदर ही फूट जाता है, और एक पौधा बन जाता है

उन्होंने हैरत से कहा कि चीटियां धनिया के बीज को चार हिस्सों में करती हैं क्योंकि एक धनिया का बीज ही है जो दो हिस्सों में होने के बाद भी फूट सकता है

इसलिए चीटियां इस को चार हिस्सों में काटकर रखती हैं फिर अपने बिलों के अंदर जमा करके रखती हैं

सोचने की बात इन सब को यह किसने सिखाया ??

ईश्वर की माया आपार है जिसको कोई नही समझ सकता..

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