Triloki thaye jodiyun sindhiyun jiyu

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मैं बीज नर तु ज़मीन नारी से जन्मा तू माता पिता से सारा संसार ।
गर्व से कहो जय माता पिता की जिन्हों ने हमे सत तप पथ परिचय ।
एकता प्रेम प्यार में विश्व कलियाण है।
जय माता पिता की ।।।।।।।।।

*समय के साथ जो स्वयं मे बदलाव करते हैऔर चलना सीख जाते है उसे संस्कार संसार कहता है। और जो समय के साथ नही बदलते उसे संसार...
28/04/2026

*समय के साथ जो स्वयं मे बदलाव करते हैऔर चलना सीख जाते है उसे संस्कार संसार कहता है। और जो समय के साथ नही बदलते उसे संसार असंस्कार कहता है। और समय उसे नाच नचाता है।और ऋषि कहते है समय बहुत बड़ा बलवान होता है पर इन्सान रुपये पैसे को बड़ा बलवान समझता है। और धन सम्पति और चीज़े जोड़ने में स्वयं के ऐश्वर्य सुख से प्रेम प्यार में रहता हैं। पर कीमती समय होता है पर ऐश्वर्य सुख नही जो नाशवान हैं जो सत्य नही सबसे बड़ा कीमती वक्त समय की कद्र करे जैसे न्युज पेपर की कीमत सुबह दस रुपये तो शाम को वही पेपर रदी दस रूपये किलो वक्त की कीमत है। स्वयं समझोगे तो दुःख नही पाओगे और कभी भी दुःख का सामना आप को नही करना पड़ेगा यह पूर्णतह सच्च है। समय की कद्र, मान सम्मान, इज्जत समय की होती है पर व्यक्ति नही पाना खोना स्वयं के हाथ बस समय का इन्तजार करो और स्वयं के मन को मजबूत और काबू मे रखोगे तो समय आप के साथ चलेगा और पाना खोना स्वयं के हाथ, समय स्वयं की गति पर किसी का इन्तजार नही करता चाहे राजा हो या रंक या महात्मा महापुरुष किसी के लिए समय इन्तजार नही करता स्वयं के शुभचिंतक स्वयं बनो तो वक्त भी आप के साथ चलेगा।*

*जीवन का सच्चा आनंद सच्चे रिश्तों में है, न कि दौलत शोहरत में, सच्चा आनंद पाने में स्त्री पुरुष विवाह करते हैं। पर दो जड...
19/03/2026

*जीवन का सच्चा आनंद सच्चे रिश्तों में है, न कि दौलत शोहरत में, सच्चा आनंद पाने में स्त्री पुरुष विवाह करते हैं। पर दो जड़ो में संसार की रचना है और एक दूसरे के सुख के बांधक स्वयं ही बनते हैं। और एक दुसरे से आनंद पाने की चाह रखने वाले एक दूसरे को दुःखी कर रहे हैं। और रिश्ते रिश्तों से परेशान दुःखी द्वार द्वार के मोहताज आनंद पाने में भटक रहा संसार । ऋषि कहते हैं दुनियां में सबसे बड़ा आनंद आत्मविश्वास और स्वयं के परिश्रम में है । और सबसे बड़ा कीमती गहना परिश्रम और सबसे अच्छा साथी आत्मविश्वास है। जो इन्सान स्वयं पर भरोसा करते नहीं उन में आत्मविश्वास की कमी के कारण स्वयं परिश्रम भी करते नहीं तो मंजिल कैसे पा सकते हैं। पूर्व जन्म के ज्ञान पर एक दूसरे के सुख के बांधक जब पूर्व ज्ञान को भूलायेगे तब जीवन का आंनद पायेंगे जो स्वयं पर भरोसा करते हैं वह स्वयं के आत्मविश्वास पर यकीन करते हैं । और सबसे बड़ा गहना परिश्रम और सबसे बड़ा साथी आत्म विश्वास स्वयं पर भरोसा करते हैं और मंजिल पाते हैं ।*

*एक सुखी जीवन के लिए बड़ा घर होना जरूरी नही बल्की सुखी जीवन के लिए सच्चा और अच्छा परिवार होना जरुरी है। पर नासमझ इन्सान ...
12/02/2026

*एक सुखी जीवन के लिए बड़ा घर होना जरूरी नही बल्की सुखी जीवन के लिए सच्चा और अच्छा परिवार होना जरुरी है। पर नासमझ इन्सान धन की दौड़ में दौड़ दौड़कर सब कुछ हासिल करना चाहता है। और नाकामयाबी और बेचैनी हासिल करता है। जो बिना दौड़ के हासिल कर सकता है वह है परमात्मा । और सत्य कर्म वाणी व्यवहार से हासिल कर सकता है। जीवन जीने के सलिखे से सब कुछ हासिल कर सकते हो और जीवन जीने का सलिखा यही है । छल कपट से जीने वाले का व्यक्तियो का जीवन कुछ समय तक अच्छा बाद में जी का जंजाल बन जाता है। समय रहते ही पाने की जिज्ञासा जगाये रखे और सुन्दरता और बल अधिक समय तक नही रहता कुछ समय के बाद ढल जाता है और समय रहते हासिल करे और प्रेम प्यार आदर स्वयं के स्वभाव में जोड़कर खुशियो को हासिल कर सकते हो और वही इन्सान की कुंजी हैं और रिश्ते जीवन की पुंजी है। उसे संभालकर रखे यही समझदारी है। सत्य कर्म वाणी और व्यवहार से बनते है। शरीर की सुन्दरता और बल ज्यादा दिन तक नही रहता पर सत्य कर्म जीवन भर रहता हैं। इन्सान का शरीर और सुन्दरता एक दिन ढल जाता है। और सुखी जीवन के लिए बड़ा अच्छा और सच्चा परिवार होना बहुत जरुरी है। और परिवार के सदस्यो का दिल जीत तो जिन्दगी का मकसद सिद्ध है बाकी सब जीतकर क्या हासिल करोंगे? सिकंदर भी खाली हाथ गया। दुनियाँ में,सबसे कीमती चीज है समय और समय रहते हासिल करने की कोशिश करे। बड़े हैरत की बात है कि समय रहते ही युही न गंवाये समय रहते हासिल करे। और अपने वो नही जो तस्वीरो में साथ खड़े होते है। अपने तो वह होते है जो दुःख सुख तकलीफ़ों में साथ खड़े रहते हैं। और स्वयं के परिश्रम में विश्वास रखे जो बीना परिश्रम के आसानी से मिल जाता है वह हमेशा साथ नही रहेता पर जो परिश्रम से मिलता है वह ही जीवन भर साथ और पास रहता है। और सदाये ही अगरबत्ती के समान महकते रहे तो ज्यादा बोझ उठाना नही पड़ेगा और दीपक के समान दिल को जलाते रहेगे तो हर समय अधिक बोझ भी उठाना पड़ेगा और हर समय टेंशन में जीयोगे जैसे जलता हुआ दीपक जलता ही रहता हैं। और थोड़ी-सी फूक मारों तो बुझ जाता है। जीना है तो दीपक बनकर नही अगरबत्ती के समान बनकर जीयो कोई भी कितना भी फूक मार और तुम महकते ही रहो थोड़ी सी फूक मारे तो तुम बुझ जाओ जीना है तो अगरबत्ती के समान बनों और सदाये महकते रहो दीये के समान नही जो कोई भी थोड़ी सी फूक मारे और तुम बुझ जाओ। और एक बात सदाये याद रखे तुम इस दुनियाँ में खाने पीने सोने और सुख सुविधाये भोगने के लिए नही जन्मे हो कुछ न कुछ करने के लिए जन्मे हो जब तुम जन्मे थे कुछ सुख सुविधाये तुम्हें बनी बनायी हुई मिली थी जैसे कि रोढ सर्के और व्यवस्थित पैड पौधे लगे हुई थे। तो तुम्हारा भी फर्ज बनता है कि इस देश दुनिया के लिए तुम्हे भी कुछ न कुछ करना चाहिए।*

*हर एक इन्सान का अपना अपना एक वजूद होता है जैसे सूरज के सामने दीपक का कोई वजूद नहीं होता पर अँधेरे में दीपक की बहुत बड़ा...
23/01/2026

*हर एक इन्सान का अपना अपना एक वजूद होता है जैसे सूरज के सामने दीपक का कोई वजूद नहीं होता पर अँधेरे में दीपक की बहुत बड़ा वजूद होता है । इन्सान ही इन्सान की दवा है कोई दुख देता है तो कोई सुख सुकून बन जाता है तो दुःख असकुन बन जाता है । दुःख और सुख दोनों ही एक साथ चलते हैं । जब एक थक जाता है । तो दूसरा अभिन्य करता और स्वयं के स्थान पर बिराजमान हो जाता है l और जीवन में खुशियां और आंसु दोनों ही भरे रहते है बस स्वयं को चुनना होता इसलिए ऋषि कहते हैं। स्वयं को मजबूत बनाये और खुद पर भरोसा और परिवार के सदस्यों पर विश्वास रखे किसी और को दोषी न बनायें l*

*कुछ लोग नमाने झूकाने में विश्वास रखते हैं और कुछ समझने और समझाने में विश्वास रखते हैं । छोटा सा एक शब्द जो पढ़ने में एक...
22/01/2026

*कुछ लोग नमाने झूकाने में विश्वास रखते हैं और कुछ समझने और समझाने में विश्वास रखते हैं । छोटा सा एक शब्द जो पढ़ने में एक सेकंड लगता है वो है विश्वास पर समझने के लिए पूरी जिन्दगी भी कम पड़ जाती है। विश्वास के बिगर संसार चलता नहीं और जिस को जिस पर विश्वास होता है उसी पर विश्वास करता है । और वहीं ज्ञान पाने को इन्सान जाता है। और जबतक इन्सान को ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती तब तक इन्सान ज्ञान पाने को जाता नहीं जब इन्सान ज्ञान पाने की चाह करता है तब द्वार द्वार भटकता है। और समझने का प्रयास भी करता है । ज्ञान के तीन स्थल एक ऋषियों के लिखे ग्रंथ । दो मैं आत्मा अष्टांग जो स्वयं के भीतर ज्ञान कराते है। तीन मनगढ़ंत द्रौर्णाचारी का ज्ञान जो इन्सान को कठोर संगदिल बनाता है ।और इन्सान स्वयं का धर्म समझते हैं और अनेक धर्मों की दुकानें संसार में है । और जिसको जिस का ज्ञान समझ में आता है वह वहीं जाता है। बाकी राह चलते भी मुफ्त में ज्ञान कराने वाले भी संसार में हैं उनको कोई समझता नहीं । ऋषि कहते हैं भैंस के सामने बांसुरी बजाना और ऋषि भैंस के सामने बांसुरी बजाते हैं और कहते लिखते ऋषि होते हैं और जो ऋषियों के लिखे ज्ञान को समझने का प्रयास करते हैं तो स्वयं की जिन्दगी के सत्य को बिना मेहनत के जान पाते हैं और स्वयं की जिन्दगी बनाने के रहस्य को जान लेते हैं । ऋषि का अर्थ जो मैं आत्म ज्ञान निस्वार्थ संसार को कराते हैं बाकी सब ज्ञान की फीस लेते हैं एक व्यापारी के समान है। ऋषि कहते हैं। सब का जन्म दाता सागर और सागर के पास दो शक्तियां हैं । एक सम अर्थात सर्द । एक तम अर्थात गर्म जो समय-समय पर स्वयं में परिवर्तन भी करता सागर और सब सागर में समाईं और जिस को भी नष्ट होना है वह सागर में ही नष्ट होता है । जिसने सब को जन्म दिया है सबको नष्ट भी वही करता है। वह अजय अमर सागर सबकी पूर्ति भी करता सागर है चाहें सूर्य हो या चंद्र या पृथ्वी या आकाश वायु का जन्म दाता भी सागर । सागर नहीं तो कुछ भी नहीं । सागर के दम पर टीका संसार और हम सबको सागर ही चला रहा है। और ऋषियों ने जाना और प्रथम पूजा भी सागर की की थी और प्राकृति में जो हमें दिखाई देता है वह भगवान है और भगवान की पूजा अर्थात प्राकृति की पूजा जो हर जीवों की पूर्ति करती प्राकृति और संसार चला रही प्राकृति और प्राकृति के पास पांच शक्तियां हैं। जल पृथ्वी आकाश सु

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