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इलेक्ट्रिक वाहन रखने वालों पर एक नयी आफत : नयी विपत और एक नयी मुसीबत का पत्थर टूट पड़ा है भैया l क्या कहें, क्या करें कहा...
26/05/2026

इलेक्ट्रिक वाहन रखने वालों पर एक नयी आफत : नयी विपत और एक नयी मुसीबत का पत्थर टूट पड़ा है भैया l
क्या कहें, क्या करें कहाँ जाएँ कुछ समझ नहीं आ रहा है l किसी के पास कोई समाधान हो तो प्लीज़ बताइए l
''मेन बात ये है कि गुड्डू मुस्लिम- ठांय ठांय ठांय''
तो बात ये है कि आज भोरे भोरे, मने सुबह 10 बजे जब हम अपने दफ्तर को जाने हेतु घर से निकल ही रहे थे और अपनी इलेक्ट्रिक दोपहिया पर सवार होने से पहले उसकी सफाई पोछाई कर रहे थे l
अपने स्कूटर के विभिन्न अंगों की पोछ्ताछ करते हुए जैसे ही हम उसकी पिछली टायर के पास पहुंचे, हमारे देखते ही उसकी हवा निकल गयी l
फिर हमने अपने कोमल हाथों से टायर को थोडा सहलाया फिर दबाकर देखा और पूरी तरह कन्फर्म हो गए कि सच में इसकी हवा जो है वो हवा हो गयी है l अब हम करें तो करें क्या, बोले तो बोले क्या ? दफ्तर तो जाना ही पड़ेगा l
हमने सोच लिया कि- पेट्रोल पंप वालों के यहाँ "फ्री-एयर" की सुविधा उपलब्ध होती ही है सो आज उसी का लाभ उठाते हैं l आज हम उसी मुफ्त वायु योजना का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया की टायरों में करवाते हैं l
तो पहुँच गए हम अपने निवास स्थान के सबसे नजदीकी सिनेमाघर में, माफ़ कीजियेगा, पेट्रोल पंप में l और ठीक वहीँ पहुचे जहाँ 'फ्री एयर" बड़े बड़े बोल्ड अक्षरों में लिखा हुआ था l
एक अंकल जो सबकी गाड़ियों में हवा भर रहे थे हमको देखकर उन्होंने अपनी हवा टाइट कर ली और गुटखा खाते अपने लाल पीले रंगीले दांतों को लहराते हुए कड़क आवाज़ में बोले : हियां परी इ गाडी में हवा नै मिलेगा ?
हम बोले: काहे चच्चा ? हवा नै भरियेगा काहे कि उ फ्री भरना पड़ता है अगर हमरा गाड़ी पंचर रहता तो उ भी नै बनाते का ?
चच्चा बोले- नै l हियां परी खाली पेट्रोल-डीजल वाला गाड़ी में सर्विस मिलेगा, बिजली-पानी से चले वाला गाड़ी में कोई सेवा नहीं मिलेगा l
हम बोले—ऐसा कौन सिखा रहा है ? चादरमोद ( गाली दिए धीरे से )
चच्चा - ऊपर से ऐसा आर्डर है l
फिर हमारा तो मुह पूरा अच्छी तरह ठिसुआ गया l एकदम ठेसू बकरिया बन गए हम l अब का करें ?
गए दूसरा पेट्रोल पंप l वहां फ्री एयर का स्टाल ही बंद था l फिर गए तीसरा पेट्रोल पंप l वहां फ्री एयर वाला स्टाल खुला तो था मगर आदमी जैसा कोई मानव नहीं दिखा l
फिर अंत में मै अपने हालातों से हार गया और लाचार और मजबूर होकर मुझे वहां जाना ही पड़ा जहाँ पैसे लेकर लोग अन्य लोगों की गाड़ियों में हवा भराई का काम करते हैं l
मैंने अपनी इलेक्ट्रिक दोपहिया की दोनों टायरों में हवा भरवाया और पूरे 10 रुपयों का भुगतान किया और दुखी मन अपने दफ्तर की ओर चल पड़ा l
मोदीजी आपके राज में ये ठीक नहीं हो रहा है l इलेक्ट्रिक गाड़ी रखने वालों की कोई रेस्पेक्ट ही नहीं है , कोई सम्मान नहीं है l पेट्रोल पंप जैसी जगह पर हमें अपमानित किया जा रहा है ये हम बर्दाश्त नहीं करेंगे l
आपसे आग्रह है कि ऐसी कठिन परिस्थिति में जब पूरा विश्व इंधन आयल की कमी से जूझ रहा है, बढती कीमते आसमान छू रही हैं ऐसे समय में इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित किया जाना चाहिए l उनके लिए सुबह सुबह प्रधानमन्त्री मुफ्त चाय योजना की शुरुआत होनी चाहिए l इससे हमारा समाज प्रेरित होगा और इंधन आयल पर निर्भरता कम होगी l
धन्यवाद !!!
भारत माता की जय

रांची के DC मंजुनाथ भंजत्री देश के सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी में शामिल :फेम इंडिया और एशिया पोस्ट ने देश भर के 800 जिलों मे...
23/05/2026

रांची के DC मंजुनाथ भंजत्री देश के सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी में शामिल :
फेम इंडिया और एशिया पोस्ट ने देश भर के 800 जिलों में सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026 का उनके कामकाज के आधार पर राष्ट्रीय सर्वे किया है। जिसमें अनेक स्तरों पर आंकलन के बाद 100 सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों की सूची तैयार की गई।
इस सूची में मंजुनाथ भंजत्री सहित झारखंड के पांच और जिलाधिकारी भी शामिल हुए हैं जो गर्व का विषय है।
इनके जनता दरबार में उमड़ी भीड़ बताती है कि मंजुनाथ जी के प्रति जनता में कितना विश्वास है।
रांची जिला सहित पूरे झारखंड के लिए यह गर्व का विषय है। इस उपलब्धि के लिए माननीय जिलाधिकारी श्री मंजुनाथ भंजत्री जी बधाई के पात्र है l
आपको मिले इस सम्मान ने रांची जिला को हिंदुस्तान के पटल पर गौरवान्वित किया है।
बहुत बहुत बधाई सर , जोहार 🙏 See less

23/05/2026

उत्तरी चीन के शानक्सी प्रांत में एक कोयला
खदान में गैस विस्फोट में कम से कम 82 लोग मारे गए हैं, जो देश में 17 वर्षों में हुई सबसे भीषण खनन दुर्घटना है।

क्या आपके बच्चे की पढ़ाई और प्रोग्रेस आपकी चिंता का विषय बनी हुई हैं? हम आपकी मदद के लिए तैयार हैं!एक माता-पिता होने के ...
08/05/2026

क्या आपके बच्चे की पढ़ाई और प्रोग्रेस आपकी चिंता का विषय बनी हुई हैं? हम आपकी मदद के लिए तैयार हैं!
एक माता-पिता होने के नाते, हम समझते हैं कि जब बच्चा कठिन विषयों से जूझता है या पढ़ाई में अपनी रुचि खोने लगता है, तो यह कितना तनावपूर्ण होता है। अक्सर सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसा सही मेंटर (शिक्षक) ढूंढना होता है जो आपके बच्चे के सीखने की गति को समझ सके।

Acharya's Home Tuition में, हम राँची के सबसे योग्य और धैर्यवान ट्यूटर्स को सीधे आपके घर भेजकर इस समस्या का समाधान करते हैं। 🏠✨
हम कैसे बदलाव लाते हैं:
✅ पर्सनलाइज्ड लर्निंग: हम आपके बच्चे की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार ट्यूटर्स चुनते हैं—अब हर बच्चे के लिए एक ही घिसी-पिटी तकनीक नहीं।
✅ सभी कक्षाएं और विषय: कक्षा 1 से 12 तक (CBSE, ICSE, और स्टेट बोर्ड) के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन।
✅ विषय विशेषज्ञ: चाहे वह कठिन मैथ्स हो, जटिल फिजिक्स हो, या एकाउंट्स; हमारे पास हर विषय के एक्सपर्ट्स हैं।
✅ सुरक्षा और सुविधा: अब कोचिंग सेंटर्स तक दौड़ने की जरूरत नहीं; आपका बच्चा अपने घर की सुरक्षा में पढ़ाई करेगा।
✅ नियमित प्रगति रिपोर्ट: साप्ताहिक टेस्ट और परफॉरमेंस रिपोर्ट के माध्यम से बच्चे की प्रोग्रेस पर नज़र रखें।
अपने बच्चे को परीक्षाओं में बेहतर स्कोर करने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दें! 🎓📈
📍 अब पूरे राँची शहर में हमारी सेवाएँ उपलब्ध हैं।

क्या आपके बच्चे की पढ़ाई और प्रोग्रेस आपकी चिंता का विषय बनी हुई हैं? हम आपकी मदद के लिए तैयार हैं!एक माता-पिता होने के ...
08/05/2026

क्या आपके बच्चे की पढ़ाई और प्रोग्रेस आपकी चिंता का विषय बनी हुई हैं? हम आपकी मदद के लिए तैयार हैं!

एक माता-पिता होने के नाते, हम समझते हैं कि जब बच्चा कठिन विषयों से जूझता है या पढ़ाई में अपनी रुचि खोने लगता है, तो यह कितना तनावपूर्ण होता है। अक्सर सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसा सही मेंटर (शिक्षक) ढूंढना होता है जो आपके बच्चे के सीखने की गति को समझ सके।

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ट्रेन में सोने के नियम जान लें
03/05/2026

ट्रेन में सोने के नियम जान लें

पढ़िए पूरी कहानी आत्मा न हिल जाए तो कहना ये छोटी सी चहकती चिड़िया जिसका नाम दिलरोज कौर है ये ढाई साल की छोटी मासूम बच्ची...
26/04/2026

पढ़िए पूरी कहानी आत्मा न हिल जाए तो कहना

ये छोटी सी चहकती चिड़िया जिसका नाम दिलरोज कौर है ये ढाई साल की छोटी मासूम बच्ची थी। अपने मां-बाप और दादा-दादी की आंखों की प्यारी। लुधियाना के शिमलापुरी की गलियों में उसकी खिलखिलाहट गूंजती थी, लेकिन 28 नवंबर 2021 की उस मनहूस दोपहर को एक ऐसा साया मंडराया जिसने इस मासूमियत को हमेशा के लिए मिट्टी में दफन कर दिया ।

उस दिन दोपहर के करीब 2:15 बजे थे। दिलरोज अपनी दादी हरविंदर कौर के साथ घर के बाहर खेल रही थी । दादी बस दो मिनट के लिए पानी पीने अंदर गईं और जब वापस आईं, तो दिलरोज गायब थी। सीसीटीवी फुटेज में जो दिखा, उसने सबका दिल दहला दिया। पड़ोस में रहने वाली नीलम, जिसे दिलरोज 'बुआ' कहकर बुलाती थी, उसे अपनी एक्टिवा पर बिठाकर ले जा रही थी ।

हैरानी की बात यह थी कि मासूम दिलरोज स्कूटी पर आगे खड़ी होकर बहुत खुश दिख रही थी। उसे लग रहा था कि 'बुआ' उसे सैर कराने या कुछ खिलाने ले जा रही है । उसे क्या पता था कि जिस पर वह इतना भरोसा कर रही है, वही उसकी मौत की इबारत लिख चुकी है।

नीलम उस बच्ची को करीब 13 किलोमीटर दूर जालंधर जीटी रोड पर एक सुनसान प्लॉट पर ले गई । वहां उसने पहले से ही एक गड्ढा खोद रखा था, जो बताता है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी ।

क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए, नीलम ने मासूम दिलरोज के मुंह और नाक में जबरन रेत भर दी ताकि वह चिल्ला न सके और फिर उसे उस गड्ढे में उल्टा करके जिंदा दफना दिया । मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, रेत बच्ची के फेफड़ों तक पहुंच गई थी, जिससे दम घुटने (Asphyxiation) के कारण कुछ ही सेकंड में उसकी मौत हो गई।

पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही में जो सच सामने आया, वह समाज की कड़वी हकीकत बयां करता है। नीलम एक तलाकशुदा महिला थी और उसके अपने दो बच्चे थे । वह दिलरोज के परिवार की खुशहाली और उनके बच्चों को मिलने वाली सुख-सुविधाओं से जलती थी ।

दिलरोज के पिता हरप्रीत सिंह पंजाब पुलिस में थे । परिवार ने नीलम के व्यवहार को देखते हुए अपनी बहू को उससे बात करने से मना किया था । इसी सामाजिक तिरस्कार और हीन भावना ने नीलम के अंदर ऐसी नफरत भर दी कि उसने मासूम बच्ची से बदला लेने की ठान ली

अप्रैल 2024 में लुधियाना की सत्र अदालत ने इस मामले को "दुर्लभतम से दुर्लभ" (Rarest of Rare) करार दिया । जज मुनीश सिंघल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एक मासूम बच्ची को जिंदा दफन करना न केवल क्रूर है, बल्कि यह मानवता के खिलाफ अपराध है ।

अदालत ने नीलम को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई। फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में मौजूद दिलरोज के माता-पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े, जिन्हें ढाई साल के लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला था l

हालांकि सत्र अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है, लेकिन भारतीय कानून के अनुसार इसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से पुष्टि मिलना अनिवार्य है । समाज आज भी उस दिन का इंतजार कर रहा है जब दिलरोज की रूह को पूरी तरह शांति मिलेगी। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हमारे आसपास छिपी ईर्ष्या और नफरत कितनी खतरनाक हो सकती है।

आम आदमी पार्टी (आप) नेता राघव चड्डा और संदीप पाठक ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह और आप के पांच अन्य राज्य सभा सदस्य बीजे...
25/04/2026

आम आदमी पार्टी (आप) नेता राघव चड्डा और संदीप पाठक ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह और आप के पांच अन्य राज्य सभा सदस्य बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते संदीप पाठक ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने जा रहे हैं. वहीं, राघव चड्ढा ने कहा कि ‘आप’ के लगभग दो-तिहाई राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और वे एक गुट के रूप में बीजेपी में शामिल होंगे.

राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी की बागी नेता स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह समेत कई राज्यसभा सदस्यों ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी है. संवाददाता सम्मेलन में चड्डा और पाठक के साथ राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल भी मौजूद थे. राघव चड्डा, पाठक और मित्तल ने दावा किया कि आप के दस में से सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी है.

कोडरमा स्टेशन पर दर्दनाक हादसा: बच्चों के लिए सामान लेने उतरी मां की ट्रेन से गिरकर मौतझारखंड के कोडरमा स्टेशन से एक बेह...
25/04/2026

कोडरमा स्टेशन पर दर्दनाक हादसा: बच्चों के लिए सामान लेने उतरी मां की ट्रेन से गिरकर मौत

झारखंड के कोडरमा स्टेशन से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है, जहां एक मां की ममता और जल्दबाजी ने उसकी जान ले ली। अपने दो मासूम जुड़वा बच्चों के साथ सफर कर रही एक महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई ट्रेनों के पहिए जहां-तहां थम गए।
स्थानः कोडरमा रेलवे स्टेशन समयः शुक्रवार शाम शुक्रवार की शाम कोडरमा स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या चार पर उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब सियालदह-जलियांवाला बाग एक्सप्रेस (12379) की चपेट में आने से 24 वर्षीय महिला मुस्कान मसी की मौत हो गई।

घटना का विवरणः मृतका की पहचानः मुस्कान मसी (24 वर्ष), पति- तपन मसी।

पताः रामपाल थाना- हीरापुर, जिला- वर्धमान (पश्चिम बंगाल)।

मुस्कान अपनी भांजी और महज दो-तीन माह के दो जुड़वा बच्चों के साथ आसनसोल से दिल्ली जा रही थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रेन के कोडरमा स्टेशन पर रुकने के दौरान मुस्कान कोच संख्या B-3 से कुछ सामान लेने के लिए नीचे उतरी थी। इसी बीच ट्रेन ने गति पकड़ ली। चलती ट्रेन में चढ़ने की हड़बड़ी में मुस्कान का पैर फिसल गया और वह दो बोगियों के बीच के गैप में जा गिरी। ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। फिलहालः महिला के दोनों जुड़वा बच्चों और उसकी भांजी को आरपीएफ पोस्ट में सुरक्षित रखा गया है।

परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है। आरपीएफ के अधिकारी बच्चों की देखभाल कर रहे हैं और उनके परिजनों के आने का इंतज़ार है।इस हृदयविदारक हादसे के कारण रेल परिचालन पर भी काफी असर पड़ाः

सियालदह-जलियांवाला बाग एक्सप्रेस लगभग आधे घंटे तक स्टेशन पर ही खड़ी रही।

इसके पीछे आ रही कई महत्वपूर्ण ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर फंसी रहीं, जिनमें शामिल हैं:

रांची-पटना जनशताब्दी एक्सप्रेस

गया-आसनसोल ईएमयू

झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस

यह घटना उन सभी यात्रियों के लिए एक चेतावनी है जो चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का जोखिम उठाते हैं। एक पल की जल्दबाजी ने न सिर्फ एक महिला की जान ली, बल्कि दो मासूमों के सिर से मां का साया भी छीन लिया।

21/04/2026

रांची के DC मंजुनाथ भजंत्री का कड़ा एक्शन: निजी स्कूलों की 'गुंडागर्दी' खत्म, न किताबें बदलेंगी न यूनिफॉर्म के नाम पर होगी लूट!

उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्कूल परिसर में किताब-यूनिफॉर्म की बिक्री पर रोक, फीस वृद्धि के सख्त नियम, और PTA गठन की अनिवार्यता जैसे 11 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर 2.5 लाख रुपये तक के जुर्माना भी देना पड़ सकता है.
1. 10% तक फीस बढ़ाने का अधिकार स्कूल समिति को, उससे अधिक के लिए जिला समिति की मंजूरी जरूरी है. एक बार फीस बढ़ने के बाद कम से कम 2 साल तक यहीं फीस लागू रहेगी.

2. अगली कक्षा में प्रमोशन के नाम पर कोई भी पुनर्नामांकन शुल्क नहीं लिया जाएगा. केवल आवेदन शु्ल्क लिया जाएगा.

3. किसी भी छात्र को फीस या किसी कारणों के लिए वार्षिक परीक्षा में बैठने से रोका नहीं जाएगा.

4. CBSE स्कूलों में सिर्फ NCERT किताबें लागू होंगी. किताबें हर साल नहीं बदलेंगी, कम से कम 5 साल तक वही रहेंगी और स्कूल में बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी.

5. स्कूल यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव नहीं होगा. 5 साल में एक बार शिक्षक और अभिभावक के सहमती से ही बदलाव संभव हो सकेगा. स्कूल वाले यूनिफॉर्म को किसी एक दुकान से खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे. अभिभावक कहीं से भी इसे खरीद और सिलवा सकते है.

6. किसी भी नाम से लिया गया अतिरिक्त पैसा, मासिक फीस का हिस्सा माना जाएगा और उसी नियम से नियंत्रित होगा. इसकी वृद्धि भी फीस निर्धारण के नियमों के अनुसार ही होगी.

7. परिवहन शुल्क की वृद्धि भी सामान्य शुल्क वृद्धि के नियमों के अधीन होगी. सभी स्कूल बसों में परिवहन नियमों एवं सुरक्षा मानकों का सख्त अनुपालन अनिवार्य होगा.

8. अबुआ साथी पोर्टल पर आई शिकायतों का समय पर जवाब देना होगा, नहीं तो देनी होगी 50000 से 250000 तक की जुर्माना.

9. सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं में कमजोर एवं वंचित वर्ग के लिए 25% सीटें आरक्षित हैं. उन बच्चों का एडमिशन प्रक्रिया लॉटरी सिस्टम से पूरी की जाएगी. चयनित छात्रों की सूची विद्यालय के लॉगिन पर उपलब्ध कराई जाएगी.

उपायुक्त श्री मंजुनाथ भजंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी.

DC रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री का ये फैसला पूरा झारखंड के लिए एक नजीर है। क्या ऐसा ही कदम झारखंड के दूसरे जिलो में नहीं उठाया जा सकता ? जिस से प्राइवेट स्कूल की मनमानी पे रोक लगाई जा सके और अभिभावको को थोड़ा राहत मिल सके!
DC Ranchi

केरलम की 36 वर्षीय ट्रेकर जी.एस. शरण्या ने कर्नाटक के कोडागु जिले के घने जंगलों में चार दिन अकेले बिताए। बिना मोबाइल नेट...
07/04/2026

केरलम की 36 वर्षीय ट्रेकर जी.एस. शरण्या ने कर्नाटक के कोडागु जिले के घने जंगलों में चार दिन अकेले बिताए। बिना मोबाइल नेटवर्क और सिर्फ आधे लीटर पानी की बोतल के साथ उन्होंने इस कठिन अनुभव को बिना किसी डर के सहन किया। रविवार को उन्हें स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बचा लिया गया।

शरण्या कोझिकोड की आईटी प्रोफेशनल हैं। 2 अप्रैल को वे अपने ट्रेकिंग ग्रुप के साथ कोडागु की सबसे ऊंची चोटी ताडियांडामोल पर गई थीं। उतरते समय वे ग्रुप से अलग हो गईं और रास्ता भटक गईं। इसके बाद चार दिनों तक उन्हें घने जंगलों में अकेले रहना पड़ा।

बचाए जाने के बाद शरण्या ने बताया कि नीचे उतरते समय वे किसी तरह रास्ता भटक गईं और अपने ग्रुप को दोबारा नहीं ढूंढ पाईं। उनके फोन की बैटरी खत्म हो गई और नेटवर्क भी नहीं था, जिससे बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया।

उन्होंने आगे बताया कि वे पत्थरों वाली एक छोटी नदी के पास पहुंचीं और वहीं रात बिताई। उनके पैर में दर्द था, इसलिए पहले दिन उन्होंने ज्यादा पैदल चलने से परहेज किया। दूसरे दिन वे एक खुली जगह पर रुकीं, जहां से आसपास का इलाका साफ दिखाई दे रहा था। उन्हें उम्मीद थी कि अगर ड्रोन से तलाशी होगी तो उन्हें देख लिया जाएगा।

तीसरे दिन उन्होंने ऊंची जगह पर चढ़ने की योजना बनाई थी, लेकिन बारिश की वजह से उनका प्लान बिगड़ गया। रविवार को दोपहर तक वे अपने कपड़े सूखने का इंतजार करती रहीं। बीच-बीच में वे लगातार चिल्लाती रहीं ताकि कोई उनकी आवाज सुन ले। खोज टीम के हिस्से रहे स्थानीय आदिवासी लोगों ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें ढूंढ निकाला।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के निर्देश पर थर्मल ड्रोन और अतिरिक्त कर्मचारियों की मदद से अभियान को तेज कर दिया गया था। 72 घंटे से ज्यादा समय बाद रविवार दोपहर को उन्हें जंगल के एक सुनसान इलाके से बचाया गया, जहां आमतौर पर कोई नहीं जाता। बचाए जाने के समय शरण्या होश में थीं और उनकी हालत स्थिर थी। उन्हें तुरंत जंगल से बाहर निकाला गया और मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया।

कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने शरण्य को बहादुर और साहसी बताया और कहा कि नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने के कारण उसे ट्रैक करना काफी मुश्किल हो गया था।

शरण्य कोडागु में एक होमस्टे में रुकी हुई थी और वह एक समूह के साथ ट्रेकिंग पर गई थी। जहां समूह के बाकी सदस्य उसी दिन सुरक्षित लौट आए थे, वहीं शरण्य के न लौटने पर अलर्ट जारी कर दिया गया, जिसके बाद चौबीसों घंटे चलने वाला यह खोज अभियान शुरू हुआ।

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