30/08/2026
आज ऐसे उत्तराखण्डी क्रान्तिवीर की पुण्य तिथि है, जिससे एक जमाने में नेता, विधायक और अफसर तक थर्राते थे, अफसोस है कि यह क्रांतिवीर हमारे साथ ज्यादा दिन नहीं रह पाया। विधायक रहते हुये उन्होंने एक विशिष्ट छवि बनाई आज भी वह ईमानदार और जागरुक विधायक के रुप में जाने जाते हैं, एक दिन तो उन्होंने सदन में कहा कि विधायक निधि में कमीशन चलता है और विधायक भी कमीशन लेते हैं, अगर मेरे विचार से कोई सहमत नहीं है तो इसकी विजिलेंस जांच करा ली जाय, किसी की चूं करने की हिम्मत नहीं हुई।
गैरसैंण राजधानी उनकी ही सोच थी, आन्दोलन के शुरुआती दिनों में जब एक बार वह, काशी सिंह ऐरी और डी०डी० पन्त जी कार में थे तो पन्त जी ने कहा कि हम राज्य मांग तो रहे हैं, लेकिन उसके राजधानी कहां होगी तो विपिन दा ने कहा कि गैरसैंण ही राजधानी होगी और उन्होंने उसका ब्लू प्रिंट जारी कर दिया, ऐसे उत्तराखण्ड की प्रस्तावित राजधानी गैरसैंण हो गई।
उन्होंने एक सामान्य नागरिक के रुप में अपने गृह क्षेत्र में महाविद्यालय, पालीटेक्निक, महिला डिग्री कालेज, पेयजल योजना और अनेकों कार्य किये, वस्तुतः वह एक पत्रकार थे, इमरजेंसी के दौरान द्रोणांचल प्रहरी नामक अखबार वह निकालते थे, इमरजेंसी के दौरान वह भी जेल गये और उ०प्र० में उन्हें सर्वाधिक 26 महीने की जेल हुई।
आज हम सभी इस क्रान्तिवीर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।