21/06/2026
एक दरी पर सिमटी व्यवस्था और जनसरोकारों की जीत
भारतीय लोकतंत्र की यह शाश्वत और सबसे खूबसूरत विशेषता है कि जब-जब शासन-प्रशासन आम जनमानस की बुनियादी और न्यायसंगत आवश्यकताओं के प्रति उदासीन होने लगता है, तब-तब समाज के भीतर से ही कोई जननायक उठ खड़ा होता है। विगत चार दिनों से बग्वालीपोखर की पावन धरा एक ऐसे ही मूक लेकिन बेहद शक्तिशाली सत्याग्रह की साक्षी बन रही है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं ज़िला पंचायत सदस्य भूपाल सिंह भंडारी 'पप्पू भाई' व्यवस्था की जड़ता को तोड़ने और सोए हुए विभागों को जगाने के लिए आमरण अनशन पर डटे हुए हैं।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वरूप है। बिना किसी राजनैतिक तड़क-भड़क, लाव-लश्कर या उग्र शोर-शराबे के, उन्होंने महज एक दरी बिछाई और जनहित के मुद्दों को लेकर मौन क्रांति का बिगुल फूंक दिया। पप्पू भाई का यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि इस सुदूर आंचलिक क्षेत्र में जीवन की अनिवार्य कड़ियों को जोड़ने के लिए है।
बग्वालीपोखर में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और आपातकालीन '108 एम्बुलेंस सेवा' की स्थायी बहाली जैसी बुनियादी मांगें सीधे तौर पर इंसानी जिंदगी को बचाने और संवारने से जुड़ी हैं।
इस दृढ़ संकल्पित सत्याग्रह का सकारात्मक असर भी अब धरातल पर दिखने लगा है। उनके इस 'पवित्र प्रयास' और जनभावनाओं के तीव्र दबाव के आगे अंततः प्रशासन को झुकना पड़ा है। इसी का सुखद परिणाम है कि क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित आधार केंद्र की मांग को त्वरित स्वीकृति मिल चुकी है। यह केंद्र फिलहाल राजकीय इंटर कॉलेज, बग्वालीपोखर के प्रांगण में संचालित होने जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इस केंद्र के खुलने से अब वृद्धों, युवाओं और आम जनता को अपनी तकनीकी कागजी कार्रवाइयों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए मीलों दूर भटकने के मानसिक व आर्थिक कष्ट से मुक्ति मिलेगी। यह इस शांतिपूर्ण आंदोलन की एक बड़ी और तात्कालिक विजय है।
पप्पू भाई के इस अनशन की तपिश और नैतिक बल इतना प्रभावी रहा है कि इसने वैचारिक मतभेदों की सीमाओं को पूरी तरह से ढहा दिया। दलगत राजनीति, जाति और वर्ग से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग, चाहे वे व्यापारी हों, युवा हों, मातृशक्ति हो या विभिन्न राजनीतिक दल, सभी ने एकजुट होकर इस संघर्ष को अपना पूर्ण और खुला समर्थन दिया है। यह एकजुटता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब बात जनहित और क्षेत्र के विकास की आती है, तो लोक-कल्याण की भावना सर्वोपरि हो जाती है।
राजकीय इंटर कॉलेज में आधार केंद्र का शुरू होना इस संघर्ष की पहली ठोस सफलता है, और प्रशासनिक गलियारों में मची सुगबुगाहट संकेत दे रही है कि एम्बुलेंस सेवाओं से जुड़ी मांग भी कल तक मान ली जाएगी। जब उद्वेलित अंतःकरण जनसेवा के पवित्र संकल्प से भर जाता है, तो अन्याय और उपेक्षा के खिलाफ एक साधारण सी दरी भी सबसे मजबूत सिंहासन बन जाती है। अपने प्राणों की बाजी लगाकर बग्वालीपोखर के हकों की लड़ाई लड़ रहे भूपाल सिंह भंडारी 'पप्पू भाई' का यह जीवंत और अनुकरणीय संघर्ष कोटिशः नमन के योग्य है। इस ऐतिहासिक प्रयास के लिए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं; यह आंदोलन आने वाले समय में क्षेत्र के सजग विकास की एक नई और स्वर्णिम इबारत लिखेगा।
Deepak Mehta जी की वॉल से