Adv. Shivam Mishra

Adv. Shivam Mishra ✓ 𝐏𝐫𝐨𝐯𝐢𝐝𝐢𝐧𝐠 𝐜𝐥𝐞𝐚𝐫 𝐚𝐧𝐝 𝐫𝐞𝐥𝐢𝐚𝐛𝐥𝐞 𝐥𝐞𝐠𝐚𝐥 𝐤𝐧𝐨𝐰𝐥𝐞𝐝𝐠𝐞
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⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला — 40 साल बाद न्याय!हाईकोर्ट ने 1986 के हत्या मामले में दो आरोपियों को बरी करते हुए कह...
24/08/2026

⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला — 40 साल बाद न्याय!

हाईकोर्ट ने 1986 के हत्या मामले में दो आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि सिर्फ FIR में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने एकतरफा जांच, आरोपियों के शरीर पर चोटों की अनदेखी, FIR में 7 घंटे की देरी और ठोस सबूतों के अभाव जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना।

📌 Case: Ramu & Others v. State of U.P.
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के लिए आरोपी की भूमिका और अपराध में संलिप्तता विश्वसनीय एवं ठोस साक्ष्यों से साबित होना आवश्यक है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसलासुप्रीम कोर्ट ने फांसी के जरिए मृत्युदंड देने की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की मांग वाली या...
21/08/2026

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के जरिए मृत्युदंड देने की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने फिलहाल फांसी की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी।

हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार को विशेषज्ञों की समिति के जरिए मृत्युदंड लागू करने के वैकल्पिक तरीकों की समीक्षा करने की छूट दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में नए ठोस वैज्ञानिक या चिकित्सकीय साक्ष्य सामने आने पर इस मुद्दे की दोबारा संवैधानिक समीक्षा का रास्ता खुला रहेगा।

⚖️ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेशMP हाईकोर्ट ने Sandeep Kumar v. State of MP मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत (A...
16/08/2026

⚖️ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

MP हाईकोर्ट ने Sandeep Kumar v. State of MP मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) प्रदान करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह नहीं लगता कि आरोपी की मंशा किसी की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने या सांप्रदायिक अशांति फैलाने की थी। अदालत ने यह भी कहा कि शब्दों का चयन अनुचित हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर आपराधिक मंशा नहीं मानी जा सकती। यह आदेश जमानत से संबंधित है, न कि मामले के अंतिम निर्णय से।

📖 नोट: यह पोस्ट केवल कानूनी जानकारी एवं शिक्षा के उद्देश्य से है। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश2013 के रेप केस में दोषी ठहराए गए नारायण साई को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिल...
16/08/2026

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

2013 के रेप केस में दोषी ठहराए गए नारायण साई को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली। कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनकी उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाने की मांग खारिज की गई थी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि नारायण साई की दोषसिद्धि और सज़ा के खिलाफ लंबित आपराधिक अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला किया जाए। फिलहाल उम्रकैद की सज़ा पर कोई रोक नहीं लगी है।

📌 Case: Narayan @ Narayan Sai @ Mota Bhagwan v. State of Gujarat & Anr. | Diary No. 29992/2026

📖 यह पोस्ट न्यायालय के आदेश और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित कानूनी जागरूकता एवं शिक्षा के उद्देश्य से साझा की गई है।

⚖️ Supreme Court Important JudgmentThe Supreme Court has clarified that full payment of the sale consideration at the ti...
16/08/2026

⚖️ Supreme Court Important Judgment

The Supreme Court has clarified that full payment of the sale consideration at the time of registration is not mandatory to make a Sale Deed valid. If the Sale Deed is duly registered and part of the consideration has been paid, the deed cannot be cancelled or declared invalid merely because the remaining amount was not paid.

The Court held that the seller’s proper legal remedy is to recover the outstanding sale consideration, rather than seek cancellation of the registered Sale Deed solely on the ground of non-payment.

📌 Case: Raziya Begum & Ors. v. Nafisa Begum Abdul Hamid & Ors.

📖 This post is for legal awareness and educational purposes only and should not be treated as legal advice.

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसलासुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी के खिलाफ व्यभिचार का प्रथम दृष्टया मामला उपलब्ध प्...
16/08/2026

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी के खिलाफ व्यभिचार का प्रथम दृष्टया मामला उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्यों से स्थापित हो जाता है, तो CrPC की धारा 125(4) के तहत उसे अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पहलू पर विचार केवल अंतिम ट्रायल के समय ही जरूरी नहीं है; पर्याप्त प्रारंभिक साक्ष्य होने पर अंतरिम चरण में भी फैसला लिया जा सकता है।

📌 Case: Kalyani Devi @ Chetana & Anr. v. Rajesh Kumar @ Rajesh & Ors.

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसलासुप्रीम कोर्ट ने Order 41 Rule 27 CPC के तहत अपील के दौरान Additional Evidence (अतिर...
16/08/2026

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने Order 41 Rule 27 CPC के तहत अपील के दौरान Additional Evidence (अतिरिक्त साक्ष्य) पेश करने को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त साक्ष्य की अर्जी पर अपीलीय फैसला सुनाने से पहले स्वतंत्र रूप से और उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय करना जरूरी है।

अदालत को यह देखना होगा कि अतिरिक्त साक्ष्य वास्तव में आवश्यक है या नहीं, उसे पहले पेश न किए जाने का उचित कारण क्या था और क्या न्याय के हित में उसे रिकॉर्ड पर लेना जरूरी है। अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की अनुमति स्वतः नहीं मिलती।

📌 Case: Chowdappa v. Hanumantharayappa & Others

⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसलापति की मृत्यु के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को, लागू कानून और मामले की परि...
16/08/2026

⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

पति की मृत्यु के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को, लागू कानून और मामले की परिस्थितियों के अनुसार, मृत पति का भी गोद लिया हुआ बेटा माना जा सकता है और उसे पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिल सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Ram Kripal v. J.D.C. & Others मामले में Subhash Misir v. Thagai Misir और सुप्रीम कोर्ट के Sawan Ram v. Smt. Kalawanti & Others के सिद्धांतों पर भरोसा करते हुए रामजी के उत्तराधिकार संबंधी अधिकार को बरकरार रखा और दोनों रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।

📖 यह पोस्ट केवल कानूनी जागरूकता एवं शिक्षा के उद्देश्य से है। गोद लेने और उत्तराधिकार के अधिकार मामले के तथ्यों, वैध दस्तावेजों और लागू कानून पर निर्भर करते हैं।

⚖️ रजिस्ट्री में नाम की स्पेलिंग गलत हो गई है? घबराने की जरूरत नहीं!Sale Deed, Gift Deed या किसी अन्य Registered Documen...
10/08/2026

⚖️ रजिस्ट्री में नाम की स्पेलिंग गलत हो गई है? घबराने की जरूरत नहीं!

Sale Deed, Gift Deed या किसी अन्य Registered Document में केवल spelling/typing की गलती होने पर, यदि व्यक्ति की पहचान स्पष्ट रूप से वही है, तो परिस्थितियों के अनुसार Correction/Rectification Deed (सुधार विलेख) के जरिए रिकॉर्ड ठीक कराया जा सकता है। लेकिन यदि गलती से व्यक्ति की पहचान, स्वामित्व या किसी कानूनी अधिकार पर असर पड़ रहा है, तो मामला गंभीर हो सकता है और विशेषज्ञ कानूनी सलाह लेना उचित है।

📌 कानूनी आधार: Specific Relief Act, 1963 की धारा 26 और Registration Act, 1908 की धारा 68(2) से संबंधित प्रावधानों को मामले के तथ्यों के अनुसार देखा जा सकता है।

📖 यह पोस्ट केवल कानूनी जागरूकता एवं शिक्षा के उद्देश्य से है।

⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसलाइलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की मृत्यु मात्र से नियमितीकरण (Regu...
09/08/2026

⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की मृत्यु मात्र से नियमितीकरण (Regularization) का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। यदि कर्मचारी नियमितीकरण का हकदार था और प्रक्रिया में उसका मामला आगे बढ़ चुका था, तो परिस्थितियों के अनुसार उसका यह वैधानिक लाभ कानूनी वारिसों को मिल सकता है।

अदालत ने माना कि केवल कर्मचारी की मृत्यु के आधार पर उसके परिवार को उस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता, जिस पर कर्मचारी अपने सेवा अधिकारों के तहत दावा कर रहा था।

📖 यह पोस्ट केवल कानूनी जागरूकता एवं शिक्षा के उद्देश्य से साझा की गई है। अंतिम अधिकार मामले के तथ्यों, सेवा नियमों और लागू कानून पर निर्भर करेगा।

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