17/07/2020
कुछ साल पहले तक दिल्ली में जिस्मफरोशी का सबसे बड़ा रैकेट चलाने वाली सोनू पंजाबन उर्फ गीता अरोड़ा को पहली बार किसी केस में दोषी पाया गया है. एक बारह साल की बच्ची के अपरहण ,रेप और उसे जबरन जिस्मफरोशी के धंधे में धकेलने के मामले में उसे कोर्ट दोषी माना है. दरअसल साल 2009 में दिल्ली के हर्ष विहार इलाके से से एक बारह साल की बच्ची का अपरहण हुआ और फिर 5 साल बाद 2014 में वो बच्ची नजफगढ़ थाने पहुंची और उसने पूरी आपबीती बताई. बच्ची ने बताया कि साल 2006 में जब वो 6वीं क्लास में पढ़ रही थी तब उसकी दोस्ती संदीप बेदवाल नाम के शख्स से हो गई.
2009 में संदीप उससे शादी करने के बहाने लक्ष्मी नगर ले गया और वहां उसके साथ रेप किया, फिर उस बच्ची को अलग अलग लोगों को 10 बार बेचा गया. बीच में बच्ची सोनू पंजाबन के पास भी रही जिसने उसे जिस्मफ़रोशी के धंधे में जबरन धकेल दिया. इस दौरान बच्ची को नशे के इंजेक्शन दिए गए और न जाने कितने लोगों ने उसके साथ रेप किया. बच्ची को दिल्ली के अलावा हरियाण और पंजाब भी भेजा गया. आखिर में एक सतपाल नाम के शख्स ने बच्ची से जबरन शादी कर ली लेकिन बच्ची किसी तरह उसके चंगुल से छूटकर नजफगढ़ थाने पहुंच गयी. बाद में इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच के डीसीपी भीष्म सिंह की टीम ने की और सोनू पंजाबन और संदीप को गिरफ्तार किया गया. अब कोर्ट ने दोनों को रेप और अन्य संगीन धाराओं में दोषी करार दिया है.
सोनू पंजाबन का कुछ साल पहले तक दिल्ली में जिस्मफरोशी की दुनिया में सबसे बड़ा नाम था. उसके रैकेट में दर्जनों दलाल और लड़कियां थी ,उस पर हत्या से लेकर जिस्मफरोशी के दर्जनों केस दर्ज हैं.
ज्ञात हो, देश भर में जिस्मफरोशी का रैकेट चलाने वाली सोनू पंजाबन उर्फ गीता अरोड़ा मूल रूप से हरियाणा के रोहतक जिले की रहने वाली है। अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले वो एक साधारण कॉलेज जाने वाली लड़की थी। लेकिन आज से आठ साल पहले गीता का नाम एक हत्या के मामले से जो जुड़ा तो आज तक अपराध से दूर नहीं जा पायी।गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन का जन्म 1981 में दिल्ली की गीता कॉलोनी में हुआ। उसके पिता ओम प्रकाश अरोड़ा पाकिस्तान से थे, जो बंटवारे के बाद हरियाणा के रोहतक में आकर बसे थे। ओम प्रकाश अरोड़ा रोजगार की तलाश में रोहतक से दिल्ली आए थे। वे ऑटोरिक्शा चलाकर अपना गुजारा करते थे।बताया जाता है कि, सोनू पंजाबन ने हत्या में अपना जुड़ने के बाद रोहतक के नामी गैंगस्टर विजय सिंह से प्रेम विवाह किया था। उस वक्त विजय सिंह का नाम जोरो पर था। विजय सिंह उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी श्री प्रकाश शुक्ला गैंग का सदस्य था। जिसे सन 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टीम एसटीएफ ने मार गिराया था। कुछ दिनों के बाद ही विजय सिंह को भी एसटीएफ ने गढ़ मुक्तेश्वर में एक एन्काउंटर में ढेर कर दिया।